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चुनावी डायरी

पड़ताल : हर बड़ी-छोटी पार्टी पर टिकट बेचने के आरोप क्यों लग रहे हैं?

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  • RJD, कांग्रेस, BJP, JDU, LJP(R) और जनसुराज तक पर लगे 20 लाख से 6 करोड़ तक में वोट बेचने के आरोप

पटना | हमारे संवाददाता

आज बिहार विधानसभा के लिए दूसरे चरण के नॉमिनेशन की आखिरी तारीख है और अब तक कई ऐसी घटनाएं सामने आ चुकी हैं, जिसमें वोट कटने से नाराज नेताओं ने अपनी ही पार्टियों पर करोड़ों रूपये में वोट बेचने का आरोप लगाया है। NDA से लेकर महागठबंधन तक सभी प्रमुख पार्टियां और छोटे दल भी टिकट बेचने के आरोपों से घिरे हैं।

असंतुष्ट विधायकों और नेताओं की ओर से ऊंचे दामों का सवाल उठाया जा रहा है, जबकि टिकट न मिलने पर भावुक होकर रोना या गुस्से में प्रेस कॉन्फ्रेंस करना आम हो गया है।  सवाल यह है कि इन नेताओं की साख के अलावा क्या दांव पर लगा है, जो उनका रिएक्शन इतना तीखा हो रहा है? विश्लेषकों का मानना है कि इसके पीछे राजनीतिक महत्वाकांक्षा, आर्थिक निवेश और सत्ता की लालसा प्रमुख कारण हैं।

 

कांग्रेस : एयरपोर्ट पर हंगामा, नाराज नेताओं ने प्रेस कॉन्फ्रेंस की 

चुनाव की घोषणा से पहले ही कांग्रेस में बवाल शुरू हो गया। बिहार कांग्रेस के एक विधायक ने पार्टी के शीर्ष नेताओं पर टिकट के बदले पैसे ऐंठने का आरोप लगाया, जिससे पटना एयरपोर्ट पर हंगामा हुआ।

बिहार कांग्रेस के बागी नेताओं ने टिकट वितरण को अनुचित बताते हुए राहुल गांधी के विजन से विश्वासघात का आरोप लगाया। बिहार कांग्रेस को इसके बाद रिवाइज लिस्ट जारी करनी पड़ी, लेकिन आंतरिक कलह नहीं थमी।

दोनों लिस्ट आने के बाद टिकट कटने से नाराज नेताओं ने इस्तीफा दिया और प्रदेेश अध्यक्ष पर मोटा रुपया लेकर टिकट देने का आरोप लगाया। इस मामले में पार्टी ने आरोपों से इनकार किया।

 

RJD : कुर्ता फाड़कर रोने लगे, 2.7 करोड़ में टिकट बेचने का आरोप   

आरजेडी में ड्रामा और भी नाटकीय है। एक नेता ने पटना में लालू प्रसाद यादव के घर के बाहर कुर्ता फाड़कर रोते हुए 2.7 करोड़ रुपये में टिकट बेचने का आरोप तेजस्वी यादव के करीबी और राजद सांसद संजय यादव लगाया।

इससे पहले लालू और राबड़ी के आवास पर राजद कार्यकर्ताओं ने दो सिटिंग विधायकों से टिकट न देने की मांग करते हुए प्रदर्शन किया था।

 

LJP(R) : टिकट न मिलने पर रो पड़े, संन्यास लेने की धमकी दी

एनडीए में भी सब कुछ ठीक नहीं। एलजेपी(आर) के नेता अभय सिंह टिकट न मिलने पर कैमरे के सामने रो पड़े, पार्टी पर फेवरेटिज्म और करप्शन का आरोप लगाते हुए राजनीति से संन्यास की धमकी दी।

 

BJP : 6 करोड़ में टिकट बेचने का आरोप, पार्टी दफ्तर के बाहर प्रदर्शन

बुधवार (15 अक्टूबर, 2025) को बीजेपी दफ्तर में भी खूब हंगामा हुआ। दरअसल औराई से पूर्व मंत्री रामसूरत राय का टिकट कटने से उनके समर्थक और कार्यकर्ता नाराज थे। रामसूरत राय इस सीट से विधायक हैं।

उनके समर्थक और स्थानीय नेता पटना स्थित पार्टी कार्यालय पहुंचे गए और हंगामा करने लगे। पार्टी दफ्तर के अंदर धरना-प्रदर्शन करने लगे। नारेबाजी करते हुए कहा कि इस बार की प्रत्याशी रमा निषाद को हराएंगे। आरोप लगाया कि छह करोड़ में नित्यानंद राय पार्टी का टिकट बेचा है।

हालांकि अपने तीन दिवसीय दौरे पर अमित शाह ने रामसूरत से मुलाकात कर उनकी नाराजगी को दूर करने की कोशिश की है। हालांकि बिहार बीजेपी अध्यक्ष दिलीप जायसवाल ने टिकट बंटवारे को लेकर महा-गठबंधन पर ‘पैसे का खेल’ करने का आरोप लगाया।

 

JDU : विधायक ने सीएम आवास के सामने धरना दिया, निदर्लीय लड़ेंगे

जेडीयू सांसद अजय मंडल ने टिकट वितरण में धांधली का आरोप लगाकर इस्तीफे की पेशकश की। वहीं, जदयू विधायक गोपाल मंडल ने टिकट नहीं मिलने पर मुख्यमंत्री आवास के बाहर घंटों धरना प्रदर्शन किया।

नाराज विधायक ने टिकट नहीं मिलने पर गोपालपुर से निर्दलीय चुनाव लड़ने को लेकर नामांकन पर्चा भी भर दिया है, जहां वे भाषण देते समय नीतीश कुमार के नारे लगाते हुए भावुक हो गए।

 

जनसुराज : प्रशांत किशोर पर टिकट के बदले मोटी रकम लेने का आरोप

जन सुराज पार्टी में भी संस्थापक सदस्य ने प्रशांत किशोर पर टिकट के बदले मोटी रकम लेने का आरोप लगा, जिससे पार्टी की छवि धूमिल हुई। भोजपुर जिले की संदेश विधानसभा मेें पार्टी कार्यकर्ता संजीव सिंह उर्फ मियां सिंह ने दावा किया कि पार्टी की ओर से व्हाट्सएप कॉल पर उनसे 20 लाख रुपये देने पर टिकट देने की बात कही गई।

दूसरी ओर, जमुई में सिकंदरा सीट पर जनसुराज की ओर से लोजपा (आर) के नेता सुभाष पासवान को पार्टी से तोड़कर टिकट देने से जनसुराज कार्यकर्ता खफा हुए। उन्होंने कहा कि पार्टी ने अपने मूल्यों के समझौता किया।

 


ये रिएक्शन क्यों इतने आक्रामक?

  • राजनीतिक विशेषज्ञों के अनुसार, टिकट न सिर्फ साख का सवाल है, बल्कि राजनीतिक करियर का आधार है। एक विधायक बनने से सत्ता, प्रभाव और आर्थिक लाभ जुड़े हैं। कई नेता चुनाव में करोड़ों रुपये लगाते हैं जो प्रचार, रैलियों और ‘मैनेजमेंट’ पर खर्च होता है। टिकट न मिलने से यह निवेश डूब जाता है। इसके अलावा, परिवार की उम्मीदें, स्थानीय समर्थकों का दबाव और भविष्य की महत्वाकांक्षा दांव पर लगी होती है।

 

  • उदाहरण के तौर पर, बिहार जैसे राज्य में राजनीति अक्सर पारिवारिक विरासत पर टिकी होती है, जहां टिकट न मिलना पूरे कुनबे की हार जैसा लगता है। मनोवैज्ञानिक रूप से, यह अस्वीकृति का दर्द है जो सार्वजनिक रूप से फूटता है।

 

  • विश्लेषण करें तो ये विवाद चुनावी रणनीति का हिस्सा भी हैं। असंतुष्ट नेता प्रेस कॉन्फ्रेंस या सोशल मीडिया पर रोकर सहानुभूति बटोरते हैं, जो बाद में सौदेबाजी का आधार बन सकती है। हालांकि, इससे दलों की एकता कमजोर होती है।

 

सच्चा प्रतिनिधित्व दरकिनार ?

टिकट बेचे जाने के ये आरोप सभी दलों पर लग रहे हैं, ऐसे में सवाल उठता है कि अगर वाकई ये टिकट उन्हें दिए जा रहे हैं जो इसे खरीदने की कुव्वत रखता है तो फिर जनता के प्रतिनिधित्व की कितनी गुंजाइश बची? ऐसे में जनता अगर जाति-धर्म से ऊपर उठकर भी चयन करे तो उसके पास भ्रष्ट और धनवान नेताओं में से कम भ्रष्ट को अपना प्रतिनिधि बनाने का ही विकल्प बचता है। इस कलह से चुनावी मैदान और रोचक हो गया है, लेकिन सत्ता की लड़ाई में नैतिकता कहां है?

 

 

बोलते पन्ने.. एक कोशिश है क्लिष्ट सूचनाओं से जनहित की जानकारियां निकालकर हिन्दी के दर्शकों की आवाज बनने का। सरकारी कागजों के गुलाबी मौसम से लेकर जमीन की काली हकीकत की बात भी होगी ग्राउंड रिपोर्टिंग के जरिए। साथ ही, बोलते पन्ने जरिए बनेगा .. आपकी उन भावनाओं को आवाज देने का, जो अक्सर डायरी के पन्नों में दबी रह जाती हैं।

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RJD में नए युग की शुरुआत: तेजस्वी यादव बनाए गए पार्टी के कार्यकारी अध्यक्ष

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राजद का कार्यकारी अध्यक्ष बनाए जाने के दौरान तेजस्वी यादव और राष्ट्रीय अध्यक्ष लालू यादव। (साभार - X/@RJDforIndia)
राजद का कार्यकारी अध्यक्ष बनाए जाने के दौरान तेजस्वी यादव और राष्ट्रीय अध्यक्ष लालू यादव। (साभार - X/@RJDforIndia)
  • लालू यादव पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष बने रहेंगे, आज जारी कार्यकारिणी बैठक में ऐलान हुआ।
पटना |
राष्ट्रीय जनता दल (RJD) में बड़ा बदलाव हुआ है। पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव ने अपने बेटे तेजस्वी यादव को कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष (National Working President) बना दिया। रविवार को पटना के मौर्य होटल में जारी पार्टी की कार्यकारिणी बैठक में यह घोषणा हुई, जिसका अनुमान पहले से लगाया जा रहा था। राजद की ओर से ट्वीट करके इसकी जानकारी दी गई है, जिसमें पार्टी ने इसे नए युग का शुभारंभ बताया है।

लालू यादव के निर्देश पर आया प्रस्ताव

राजद की नई कार्यकारिणी की पहली राष्ट्रीय बैठक के दौरान रविवार को पार्टी के बिहार अध्यक्ष मंगनी लाल मंडल ने इसका ऐलान किया। तेजस्वी यादव को पार्टी का कार्यकारी अध्यक्ष बनाए जाने से जुड़ा प्रस्ताव लालू यादव के निर्देश पर राजद नेता भोला यादव ने रखा। इस प्रस्ताव का राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्यों ने हाथ उठाकर समर्थन किया और इस तरह आधिकारिक तौर पर लालू यादव के बेटे तेजस्वी यादव पार्टी में मुख्य भूमिका में आ गए हैं।

अब पार्टी में क्या होगी तेजस्वी की भूमिका

 तेजस्वी यादव अब पार्टी के दैनिक कार्यों, संगठन विस्तार और चुनावी रणनीति की कमान संभालेंगे। हालांकि बिहार में राजद के कामकाज को काफी हद तक तेजस्वी यादव ही देख रहे थे पर अब उनकी भूमिका पार्टी में राष्ट्रीय स्तर पर फैसले लेने की होगी। इस घोषणा के मौके पर पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी, मीसा भारती समेत पार्टी के सभी बड़े नेता मौजूद रहे। 
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प्रतिक्रियाएं – किसने क्या कहा ?

राजद बोली- एक नए दौर की शुरूआत

 “एक नए युग का शुभारंभ! श्री @yadavtejashwi जी बनाए गए राष्ट्रीय जनता दल के कार्यकारी अध्यक्ष!”

रोहिणी आचार्य बोलीं- कटपुतली बना शहजादा

“सियासत के शिखर – पुरुष की गौरवशाली पारी का एक तरह से पटाक्षेप , ठकुरसुहाती करने वालों और ” गिरोह – ए – घुसपैठ ” को उनके हाथों की “कठपुतली बने शहजादा” की ताजपोशी मुबारक ..”

डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी ने दी बधाई

“श्री तेजस्वी यादव जी को राष्ट्रीय जनता दल का राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष नियुक्त होने पर हार्दिक बधाई!”
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RJD की राष्ट्रीय बैठक से ठीक पहले ‘एक्टिव’ हुए तेजस्वी यादव; कार्यकारी अध्यक्ष बनाए जाने के संकेत, बहन रोहिणी आचार्य ने फिर खोला मोर्चा

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लालू यादव के परिवार में तेजस्वी को पार्टी की सत्ता दिए जाने का बेटी रोहिणी आचार्य खुलकर विरोध कर रही हैं। (तस्वीर- सांकेतिक)
लालू यादव के परिवार में तेजस्वी को पार्टी की सत्ता दिए जाने का बेटी रोहिणी आचार्य खुलकर विरोध कर रही हैं। (तस्वीर- सांकेतिक)
  • राजद की नई कार्यकारिणी की पहली बैठक आज पटना के मौर्य होटल में हो रही।

नई दिल्ली|

बिहार विधानसभा चुनाव में करारी हार के बाद से लंबी चुप्पी साधे राजद नेता तेजस्वी यादव अपने पुराने तेवर में लौटे और राज्य में हो रही अपराध की घटनाओं पर सीधे पीएम मोदी से सवाल किया है। राजद कार्यालय में कर्पूरी ठाकुर की जयंती के मौके पर उन्होंने कहा कि बिहार में देश के गृह मंत्री और प्रधानमंत्री लगातार दौरा कर रहे थे पर नीट छात्रा के साथ हुए अपराध पर उनके एक ट्वीट तक नहीं हुआ। तेजस्वी यादव ने यह भी घोषणा की कि बजट सेशन के बाद वे हर जिले का दौरा करके जनता व पार्टी कार्यकर्ताओं से मिलेंगे।

गौरतलब है कि यह घोषणा ऐसे समय में हुई है जब मुख्यमंत्री नीतीश कुमार समृद्धि यात्रा के जरिए राज्य में एक्टिव हैं, और तेजस्वी की चुप्पी के चलते राजद पर सक्रियता से जुड़े सवाल उठने लगे हैं। साथ ही, तेजस्वी ने अपने तीखे तेवर राजद की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक के ठीक एक दिन पहले दिया। माना जा रहा है कि इस बैठक में तेजस्वी यादव को पार्टी का कार्यकारी अध्यक्ष बनाया जा सकता है। हालांकि इस सुगबुगाहट के बीच उनकी बड़ी बहन रोहिणी आचार्य ने फिर से ट्वीट करके अपनी नाराजगी जता दी है।

नई कार्यकारिणी 6 माह पहले बनी, अब हो रही पहली बैठक

तेजस्वी यादव लगातार कहते आ रहे हैं कि बिहार के चुनाव में लोक हार गया और तंत्र की जीत हो गई, यही बात उन्होंने 24 जनवरी को भी दोहराई। मगर बात अगर पार्टी के अंदर के लोकतंत्र की करें तो हाल इतना खराब है कि पार्टी की नई कार्यकारिणी छह महीने पहले गठित (5 जुलाई, 2025) हो चुकी है मगर उसकी पहली बैठक अब होने जा रही है। इसको लेकर राजद प्रवक्ता चितरंजन गगन का तर्क है कि कार्यकारिणी बनने के बाद विधानसभा चुनाव होने के चलते पार्टी की कोई बड़ी बैठक नहीं हो पाई थी इसलिए नए साल में 25 जनवरी को पार्टी की कार्यकारिणी की पहली बैठक होगी।

एजेंडा – चुनावी हार की समीक्षा होगी

पार्टी का कहना है कि राष्ट्रीय बैठक में सभी प्रमुख राजनीतिक मुद्दों पर चर्चा होगी, साथ ही बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान पार्टी की करारी हार के कारणों और आगे की रणनीति पर भी मंथन होगा।

  • राजद की राष्ट्रीय कार्यकारिणी के 85 सदस्य शामिल होंगे।
  • सभी राज्यों के राजद के प्रदेश अध्यक्ष मौजूद रहेंगे
  • सभी विधायक, सांसद, राज्यसभा सांसद एवं विधान पार्षद शामिल होंगे।
  • राजद के विशेष आमंत्रित सदस्य व 200 बड़े नेता शामिल होंगे।

साल 2028 तक राजद के अध्यक्ष रहेंगे लालू यादव

बीते साल 5 जुलाई में राजद के राष्ट्रीय परिषद का खुला अधिवेशन हुआ था, तब मांग उठी थी कि तेजस्वी यादव को पार्टी का कार्यकारी अध्यक्ष बना दिया जाए क्योंकि लालू यादव की तबीयत खराब रहने लगी है। हालांकि इन मांगों को दरकिनार करके लालू यादव ने अगले तीन साल (2025-28) के लिए पार्टी के अध्यक्ष पद को अपने पास ही रखा और कार्यकारी अध्यक्ष किसी को नहीं बनाया। हालांकि तब उन्होंने तेजस्वी यादव के काम की तारीफ करके यह संकेत दे दिए थे कि बिहार विधानसभा चुनाव में टिकट बांटने की जिम्मेदारी उनके पास रहेगी।

तेजस्वी को पार्टी का कार्यकारी अध्यक्ष बनाने के संकेत

नई कार्यकारिणी की पहली बैठक से ठीक पहले तेजस्वी यादव को पार्टी का कार्यकारी अध्यक्ष बनाने के संकेत मिलने लगे हैं। तेजस्वी भी दोबारा एक्टिव हो गए हैं। हालांकि इस मामले में आरजेडी प्रवक्ता चितरंजन गगन ने कहा है कि तेजस्वी यादव को कार्यकारी अध्यक्ष बनाए जाने को लेकर अभी कोई राजनीतिक प्रस्ताव नहीं आया है। रविवार को होने वाली बैठक में कोई इस तरह का प्रस्ताव आएगा तो उसपर विचार किया जा सकता है।

‘परिवार-पार्टी के बीच समन्वय के लिए लालू जरूरी’ – विशेषज्ञ

राजनीतिक विशेषज्ञ मानते हैं कि जिस तरह लालू यादव के परिवार में बिखराव है, ऐसे में पार्टी का पूरा नियंत्रण वे तेजस्वी यादव को नहीं देना चाहते। लालू यादव के बड़े बेटे तेजप्रताप पहले ही पार्टी से निष्कासित हैं और नई राजनीतिक पार्टी बनाकर चुनाव भी लड़ चुके हैं। दूसरी ओर, लालू यादव की बेटी रोहिणी आचार्य लगातार तेजस्वी यादव के खिलाफ बयान देती आ रही हैं। ऐसे में लालू यादव का पार्टी की धुरी बने रहना समय की जरूरत है।

इतिहास – लालू को कभी रास नहीं आया कार्यकारी अध्यक्ष

पार्टी के इतिहास की बात करें तो राजद के अस्तित्व में आने के ठीक बाद एक मौका आया जब लालू यादव को कार्यकारी अध्यक्ष बनाना पड़ा। 1997 में बिहार में लालू यादव के नेतृत्व में जनता दल की सरकार थी। तब चारा घोटाले में लालू का नाम आने के बाद सरकार और संगठन की कमान छोड़ने का दबाव उनपर बना। तब लालू ने जनता दल से अलग होकर ‘राष्ट्रीय जनता दल’ (RJD) बनाया और पत्नी राबड़ी देवी को मुख्यमंत्री बना दिया। साथ ही, अपने करीबी रंजन यादव को पार्टी का कार्यकारी अध्यक्ष बनाया। पर कुछ ही दिन के बाद रंजन यादव पर राबड़ी देवी को सत्ता से हटाने की रणनीति बनाने के आरोप लगे, इसकी भनक लगते ही लालू ने उनके अधिकार वापस ले लिए।

‘लालूवाद को नष्ट-करने वालो के हाथ में पार्टी की असली कमान’

रविवार को होने जा रही पार्टी की नई कार्यकारिणी की पहली बैठक से ठीक पहले लालू यादव की दूसरे नंबर की बेटी रोहिणी आचार्य ने ट्वीट करके तेजस्वी यादव और उनके सहयोगियों के ऊपर वार किया है। रविवार सुबह आए उनके लंबे ट्वीट में कहा गया है कि पार्टी को ‘तहस-नहस’ करने वालो के हाथ में इसकी असली कमान है और ये लोग पार्टी को नष्ट करने के ‘टास्क’ में काफी हद तक सफल हो चुके हैं। गौरतलब है कि नवंबर में रोहिणी आचार्य ने आरोप लगाया था कि उसके साथ दुर्व्यवहार किया गया और उन्हें उनके भाई व उनके दो दोस्तों ने मिलकर घर से निकाल दिया था।

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बिहार : दही-चूड़ा के बहाने फिर बेटे तेज प्रताप से फिर जुड़ रही लालू परिवार के रिश्तों की डोर

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लालू यादव के बड़े बेटे तेज प्रताप के साथ रिश्ते सुधरने का संकेत।
लालू यादव के बड़े बेटे तेज प्रताप के साथ रिश्ते सुधरने का संकेत।

नई दिल्ली|

लालू यादव और उनके परिवार की बड़े बेटे तेज प्रताप के साथ टूट गए रिश्तों की डोर दोबारा जुड़ती नजर आई है। मकर संक्रांति के मौके पर तेज प्रताप ने चूड़ा भोज का आयोजन करके परिवार को निमंत्रण भेजा, जिसमें लालू यादव ने शामिल होकर पारिवारिक जुड़ाव का संकेत दिया है।

हालांकि तेजस्वी यादव न्यौते के बाद भी कार्यक्रम में नहीं पहुंचे। इस बारे में पूछे जाने पर तेज प्रताप ने कोई नाराजगी नहीं दिेखाई, बल्कि यह कहकर बात टाल दी कि ‘तेजस्वी छोटे भाई हैं, देरी से सोकर उठते हैं।’ इस पूरे घटनाक्रम से साफ संकेत मिला है कि बिहार विधानसभा चुनाव में राजद की करारी हार के बाद आखिर यह बर्फ पिघल रही है।

गौरतलब है कि लालू यादव ने बड़े बेटे की गैर जिम्मेदाराना गतिविधियों का हवाला देते हुए उन्हें पार्टी और परिवार से अलग कर दिया था।

तेज प्रताप बोले- पिता का आशीर्वाद मिला

दही-चूड़ा कार्यक्रम के दौरान आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद और बड़े बेटे तेज प्रताप यादव एक ही सोफे पर बैठे नजर आए। लालू प्रसाद के भोज में आने के बाद तेज प्रताप यादव ने मीडिया से बात करते हुए कहा, “मुझे पिता का आशीर्वाद मिला है।” साथ ही बोले कि “बिहार के गवर्नर भी आएं थे, उन्होंने भी आशीर्वाद दिया है. बड़े-बुजुर्गों से आशीर्वाद लेते हुए कुछ नया काम करना है।”

एक दिन पहले घर जाकर न्यौता दिया था

मां राबड़ी देवी को निमंत्रण देते उनके बेटे तेज प्रताप जो पार्टी और परिवार से अलग हो चुके हैं।

मां राबड़ी देवी को निमंत्रण देते उनके बेटे तेज प्रताप जो पार्टी और परिवार से अलग हो चुके हैं।

13 जनवरी को तेज प्रताप ने अपने एक्स हैंडिल से भाई तेजस्वी यादव और मां राबड़ी देवी को दही-चूड़ा के आयोजन का निमंत्रण देते हुए तस्वीरें साझा की थीं, जिसने लोगों को चौंका दिया। तेजप्रताप अपने भाई तेजस्वी के घर पहुंचे थे, वहां अपनी भतीजी के साथ भी उन्होंने एक फोटो खिंचवाया।

डिप्टी सीएम विजय सिन्हा भी शामिल हुए

तेज प्रताप के इस कार्यक्रम में बिहार के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद शामिल हुए। साथ ही, विपक्षी दल भाजपा के प्रमुख नेता व डिप्टी सीएम विजय कुमार सिन्हा ने भी शिरकत की। गौरतलब है कि एक दिन पहले डिप्टी सीएम सिन्हा के आवास पर दही-चूड़ा का आयोजन था, जिसमें तेजप्रताप शामिल हुए थे।

लालू के साले बोले- परिवार एक है, कोई दूरी नहीं

लालू यादव के अलावा तेज प्रताप यादव के दही-चूड़ा भोज में उनके बड़े मामा प्रभुनाथ यादव भी पहुंचे। उन्होंने कहा, “राज्यपाल और लालू जी ने आशीर्वाद दिए हैं, आज से दिन शुभ होने वाला है, परिवार एक है, कोई दूरी नहीं है।” वह बोले कि हमने अपने भगिना को आशीर्वाद दिया है। साथ ही उन्होंने यह भी बड़ी बात कही कि तेज प्रताप यादव बहुत आगे जाने वाले हैं। दोनों भाई एक साथ हैं। सारे मामा का आशीर्वाद है।

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