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रिपोर्टर की डायरी

रोहतास (बिहार): हाथों से चलने को मजबूर विकलांग पर रिपोर्टर की नजर पड़ी तो अफसर बोले- ‘ट्राई साइकिल दिलाएंगे’

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हाथों के बल चलने को मजबूर हैं सासाराम के राकेश।
हाथों के बल चलने को मजबूर हैं सासाराम के राकेश।
  • बोलते पन्ने के संवाददाता ने यह मुद्दा उठाया तो दिव्यांगजन सशक्तिकरण कार्यालय जागा।

सासाराम | अविनाश श्रीवास्तव

शारीरिक चुनौतियों के चलते सामाजिक हाशिये पर जीवन गुजारने वाले लोगों की जिम्मेदारी यूं तो सरकार को उठानी चाहिए, मगर सच्चाई तो यह है कि सरकारी तंत्र से योजना का लाभ ले पाना गरीब विकलांग के लिए जिंदगी बसर करने जितना ही मुश्किल है। ठीक ऐसा ही सासाराम के रमेश कुमार के साथ हुआ, जो विकलांगता व गरीबी के चलते होश संभालने के बाद से सड़कों पर भीख मांगकर अपना गुजारा चला रहे हैं।

वे दोनों पैरों से विकलांग हैं और हाथों में चप्पल पहनकर चलते हैं। परिवार का साया सिर से उठ चुका है, विकलांगता के चलते परिवार भी नहीं बसा और पूरी तरह लोगों के रहमोकरम पर जिंदगी जी रहे हैं। इस रिपोर्टर की नजर में जब विकलांग रमेश कुमार का संघर्ष आया तो उन्होंने जानना चाहा कि कौन सी सरकारी योजना का लाभ उन्हें मिल रहा है?

बात करने पर पता लगा कि रमेश को सरकारी दिव्यांग योजना के तहत पेंशन मिल रही है। यानी माना जा सकता है कि वे समाज कल्याण विभाग के कागजों में एक विकलांग के तौर पर दर्ज हैं। मगर आज तक उन्हें एक ट्राई साइकिल मुहैया नहीं हो सकी जो उनके जीवन को गति दे पाती और हाथों के बल चलने का उनका संघर्ष कम हो जाता। इस मामले में रिपोर्टर ने जब उनसे पूछा तो उनका सिर्फ यही कहना था कि “पेंशन मिलती है पर साइकिल कभी नहीं मिली।” साथ ही वे यह भी शिकायत करते हैं कि “पब्लिक की भी कमी है।” यानी समाज से विकलांग व्यक्ति को जो सहयोग मिलना चाहिए वो नहीं मिलता।

इस मामले में जिला दिव्यांगजन सशक्तिकरण कार्यालय के सहायक निदेशक आफताब करीम से जब पूछा गया कि एक गरीब हाथों के बल चलकर भिक्षा मांगता है, उसे अब तक ट्राईसाइकिल क्यों नहीं मिली? इस पर अफसर ने कहा कि-

“उनके संज्ञान में यह मामला आया है, हम उन्हें ट्रैक कर रहे हैं, उन्हें पेंशन मिलती है, हम उनसे आवेदन करवाकर जल्द से जल्द ट्राई साइकिल व अन्य सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाएंगे।”

बिहार सरकार देती है मात्र 400₹ की विकलांग पेंशन

बिहार सरकार की पेंशन योजना (Bihar Disability Pension Scheme) के तहत 40% या उससे ज्यादा विकलांगता वाले व्यक्ति को हर महीने मात्र 400 रुपये की पेंशन मिलती है। अब समझा जा सकता है कि बिना किसी पारिवारिक सहारे के जी रहे राकेश कुमार जैसे विकलांग व्यक्ति आखिर क्यों भीख मांगने को विवश हो जाते हैं।

केंद्र देता है मात्र 300₹ – बात केंद्र सरकार की पेंशन योजना की करें तो हर महीने 300 रुपये ही मिलते हैं। इस योडना का नाम Indira Gandhi National Disability Pension Scheme है और बिहार में जिन विकलांगों को इसका लाभ मिलता है, उन्हें राज्य सरकार की पेंशन योजना का लाभ नहीं दिया जाता।

दिव्यांग – नाम बदला पर सरकारी रुख नहीं

केंद्र में नरेंद्र मोदी की सरकार आने के बाद विकलांग व्यक्तियों का नाम बदलकर दिव्यांगजन कर दिया गया। पीएम मोदी का कहना था कि इससे आम लोगों का विकलांग के प्रति सम्मान व जिम्मेदारी का भाव बढ़ेगा। पर बात सरकारी जिम्मेदारी की करें तो विकलांगता कल्याण से जुड़े विभाग का बिहार व पूरे देश में भले नाम बदल दिया गया हो लेकिन स्थिति जस की तस है।

बोलते पन्ने.. एक कोशिश है क्लिष्ट सूचनाओं से जनहित की जानकारियां निकालकर हिन्दी के दर्शकों की आवाज बनने का। सरकारी कागजों के गुलाबी मौसम से लेकर जमीन की काली हकीकत की बात भी होगी ग्राउंड रिपोर्टिंग के जरिए। साथ ही, बोलते पन्ने जरिए बनेगा .. आपकी उन भावनाओं को आवाज देने का, जो अक्सर डायरी के पन्नों में दबी रह जाती हैं।

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खगड़िया में पकड़ौआ विवाह: युवक ने कहा- ‘जबरन शादी कराई’, महिला बोली- ‘हम पहले से प्रेमी थे’

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युवक का कहना है कि वह इस शादी को किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं करेगा।
युवक का कहना है कि वह इस शादी को किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं करेगा।
  • बिहार में आज भी जबरन कराये जा रहे पकड़ौआ विवाह। 
  • खगड़िया जिले में एक किसान को गाय खरीदने के बहाने पकड़ा।
  • जबरन शादी कराए जाने का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल।
खगड़िया | आशीष कुमार
बिहार में आज भी पकड़ौआ विवाह कराए जा रहे हैं जो यहां के धीमी बदल रहे समाज और गरीबी की स्तर की ओर इशारा करते हैं। बिहार के खगड़िया जिले में एक युवक के परिवार ने पुलिस थाने में रिपोर्ट करायी है कि उनके बेटे को जबरन पकड़कर उसकी शादी करा दी गई।
उनके बेटे को गाय खरीदने के बहाने बुलाया गया था जहां लड़की के परिवार वालो ने मिलकर पकड़ौआ विवाह करा दिया। जबकि शादी के बाद पत्नी बनी जबरन विवाह की आरोपी महिला का कहना है कि उसके पति ने अपनी सहमति से उससे शादी की है। इस शादी का एक वीडियो भी सामने आया है जिसमें साफ देखा जा सकता है कि युवक से जबरन शादी की रस्में कराई जा रही हैं। फिलहाल पुलिस उस युवक को महिला के घर से बचाकर ले आई है और मामले की जांच की जा रही है। 
खगड़िया जिले में यह घटना परबता थाना क्षेत्र के डुमरिया खुर्द गांव की है। यहां के रहने वाले मन्नयम कुमार को गाय खरीदने के बहाने सिराजपुर गांव ले जाया गया। आरोप है कि वहां तीन-चार युवक मिलकर हथियार के बल पर उसे उठाकर घर ले गए। उन्होंने मन्नयम कुमार को मारापीटा और कुंदन कुमारी नाम की युवती से शादी करा दी। इस शादी का वीडियो अब सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। इस मामले में युवती कुंदन कुमारी का कहना है कि कोई पकड़ौआ विवाह नहीं हुआ, उनके पति मन्नयम कुमार पहले से उनके घर पर आते-जाते थे और फोन पर भी लगातार बात होती रहती थी।
आपको बता दें कि पकड़ौआ विवाह न केवल अपराध है, बल्कि मानवाधिकारों का उल्लंघन भी है। अगर कोई ऐसी स्थिति में है, तो तुरंत 1098 (चाइल्डलाइन) या 112 (पुलिस हेल्पलाइन) पर कॉल करें। 
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मुंगेर (बिहार): पुलिस ने थाने में कराई प्रेमी जोड़े की शादी, परिवार ने लिखा दी थी अपहरण की रपट

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मुंगेर के हवेली खड़गपुर पुलिस थाना परिसर में स्थित मंदिर में हुई शादी।
मुंगेर के हवेली खड़गपुर पुलिस थाना परिसर में स्थित मंदिर में हुई शादी।
  • मुंगेर पुलिस ने बालिग प्रेमी जोड़े की शादी थाने में करायी।
  • पुलिस और ग्रामीण बने बाराती, इलाके में चर्चा बनी शादी।
  • प्रेमी जोड़े ने साबित किया वो बालिग, पुलिस ने शादी करायी।

मुंगेर (हवेली खड़गपुर) | प्रशांत कुमार सिंह

अक्सर पुलिस को प्रेमी जोड़े के ऊपर जोर-दबाव बनाते देखा जाता है, पर बिहार के मुंगेर जिले की पुलिस ने मिसाल कायम की है जिससे युवाओं का पुलिस पर भरोसा बढ़ेगा। एक प्रेमी जोड़े की पुलिस थाने में पुलिस अधिकारियों की मौजूदगी में शादी कराई गई।

यह मामला मुंगेर के हवेली खड़गपुर पुलिस थाने का है, जहां स्थित शिव मंदिर में प्रेमी जोड़े ने सात फेरे लिए। प्रेम विवाह करने वाली युवती का नाम पायल है जो तेघड़ा गांव की रहने वाली है जबकि युवक बृजेश भागलपुर जिले का रहने वाला है। बीती 23 जनवरी को दोनों एक साथ लापता हो गए थे। पायल के पिता अजय शाह का आरोप था कि बृजेश उनकी बेटी का अपहरण करके ले गया है और उन्होंने 28 फरवरी को इस मामले की FIR भी दर्ज करवा दी। उनका आरोप था कि उनकी बेटी नाबालिग है। इसके बाद खड़गपुर पुलिस लड़की का पता लगाने के लिए लगातार दबिश दे रही थी।

पायल और बृजेश चार साल से एक-दूसरे के प्रेम में थे।

पायल और बृजेश चार साल से एक-दूसरे के प्रेम में थे।

इसी बीच 2 फरवरी को प्रेमी युगल पुलिस थाने पहुंचा और पुलिस को बताया कि वे बालिग हैं और शादी करना चाहते हैं। पायल ने बताया कि वह अपनी मर्जी से बृजेश के साथ चली गई थी। इस मामले में पुलिस थाना प्रभारी ने दोनों परिवारों व कुछ जनप्रतिनिधियों को बुलाकर बात करवाई। फिर आपसी बातचीत और रजामंदी के बाद थाना परिसर के ही मंदिर में दोनों की शादी कराई गई, जिसे देखने के लिए आसपास के लोग भी जुट गए। इस मौके पर पंचायत समिति सदस्य भी मौजूद रहे।

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बिहार में भोजपुरी रीलों का खतरनाक ट्रेंड: एक हफ्ते में दो महिलाओं की हत्या, परिवार वालो ने रील बनाने के चलते मार डाला

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बेगूसराय में रील बनाने वाली महिला को पति ने गोली मार दी
बेगूसराय में रील बनाने वाली महिला को पति ने गोली मार दी
  • दरभंगा में रील बनाने वाली पूनम का शव उनके घर पर पड़ा। बेगूसराय में रील क्रिएटर के उसके पति ने मार डाला।

(नोट – इस खबर को वीडियो पर देखने के लिए इस लिंक पर क्लिक करें।)

बेगूसराय | धनंजय झा

बिहार में भोजपुरी गानों पर रील बनाकर सोशल मीडिया पर वायरल होने का चलन तेजी से बढ़ा है, लेकिन अब यह ट्रेंड महिलाओं की जान लेने लगा है। पिछले एक सप्ताह में राज्य में रील बनाने वाली दो महिलाओं की हत्या हो चुकी है। दोनों मामलों में परिवार और ससुराल वालों पर हत्या का आरोप है। यह घटनाएं भोजपुरी रीलों से जुड़े झगड़े और सामाजिक विरोध को उजागर कर रही हैं।

दरभंगा – 

26 जनवरी को दरभंगा जिले में पूनम नाम की महिला की हत्या हुई। उसका शव ससुराल (सिंघवाड़ा) में मिला। पूनम भोजपुरी गानों पर रील बनाती थी। पुलिस ने हत्या का केस दर्ज किया है। आरोपियों में पूनम के पति संतोष सहनी, देवर अशोक सहनी, सास सुकुमारी देवी, ननद फुलो देवी और आशा देवी शामिल हैं। परिवार का कहना है कि रील बनाने को लेकर झगड़ा हुआ था।

बेगूसराय – 

बेगूसराय में एक महिला की हत्या उसके पति ने गोली मारकर की। आरोपी पति ने पहले पुलिस को बताया कि दुश्मनी के कारण किसी ने पत्नी को गोली मारी। लेकिन सख्त पूछताछ में उसने कबूल लिया कि उसने खुद हत्या की। उसका आरोप है कि पत्नी रील बनाती थी और इंस्टाग्राम पर गुजरात के एक युवक से उसका अफेयर था। बार-बार मना करने पर भी वह मिलने जाती थी, इसलिए उसने हत्या कर दी। पति को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया है।

बढ़ता खतरा और सवाल

भोजपुरी गानों पर डांस करके रील बनाने का चलन तेजी से बढ़ रहा है। इससे परिवार और समाज में झगड़े, विरोध और अब हत्याएं होने लगी हैं। इन मामलों को महिलाओं की व्यक्तिगत स्वतंत्रता के साथ-साथ उनके शरीर को कमोडिटी की तरह पेश करने के बढ़ते ट्रेंड के रूप में भी देखा जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि राज्य सरकार को ऐसे कंटेंट पर रोक लगानी चाहिए और सोशल मीडिया पर जागरूकता फैलानी चाहिए।

जेंडर एंगल –

यह घटनाएं बिहार में महिलाओं की सुरक्षा और सोशल मीडिया के दुरुपयोग पर गंभीर सवाल खड़े कर रही हैं। अब देखना यह है कि सरकार और पुलिस इस पर क्या कदम उठाती है।

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