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रिपोर्टर की डायरी

UP : लिंचिंग पीड़ित दलित परिवार से आखिरकार फतेहपुर आकर मिले BJP के मंत्री

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रायबरेली जाकर मृतक की पत्नी को कैबिनेट मंत्रियों ने सहायता राशि दी
पीड़ित परिवार से मिलने यूपी सरकार के दो कैबिनेट मंत्री
  • प्रदेश सरकार के दो कैबिनेट मंत्री असीम अरुण और राकेश सचान पीड़ित परिवार के घर पहुंचे।
  • यूपी सरकार की ओर से 13.5 लाख की मदद दी जो पत्नी व पिता में आधी-आधी बांटी।
  • एक अक्तूबर को हुई मॉब लिंचिंग के बाद से पहली बार सरकार का कोई प्रतिनिधि पहुंचा।

फतेहपुर | संदीप केसरवानी

यूपी के रायबरेली में फतेहपुर के दलित युवक की पीट-पीटकर की गई निर्मम हत्या के 11वें दिन पीड़ित परिवार से मिलने योगी सरकार के दो कैबिनेट मंत्री पहुंचे और उन्होंने मदद राशि भी दी। दोनों मंत्रियों ने रायबरेली जाकर मृतक की पत्नी को भी मदद राशि दी।

बता दें कि हरिओम वाल्मीकि की पत्नी व बेटी उनसे अलग रायबरेली में रहती थी और वे पत्नी से मिलने ही वहां गए, रास्ते में ड्रोन चोर समझकर भीड़ ने उन्हें घेर लिया था।

पीड़ित परिवार से मिलने यूपी सरकार के दो कैबिनेट मंत्री

पीड़ित परिवार से मिलने यूपी सरकार के दो कैबिनेट मंत्री

सरकार के प्रतिनिधि मंत्रियों के शनिवार को घर पहुंचने से पीड़ित पिता मांगे राम का विश्वास बढ़ा है कि अब उन्हें अपने बेटे की हत्या में जल्द न्याय मिलेगा। इससे पहले बीजेपी के जलशक्ति मंत्री वाल्मीकि जयंती पर फतेहपुर आए पर परिवार से नहीं मिले थे, जिससे परिवार निराश था और बीजेपी की आलोचना हुई थी।

मृतक हरिओम वाल्मीकि

मृतक हरिओम वाल्मीकि

गौरतलब है कि इस मामले को कांग्रेस पुरजोर तरीके से उठा रही है, इसका एक कारण यह भी है कि जब भीड़ दलित युवक को पीट रही थी, तब उन्होंने ‘राहुल गांधी’ कहा…इसके बाद लोगों ने उन्हें जानलेवा तरह से पीटना शुरू कर दिया और खुद को ‘बाबा जी’ वाला बताया।

दो कैबिनेट मंत्रियों ने मदद दी, नौकरी का भरोसा भी

प्रदेश सरकार के दो कैबिनेट मंत्री असीम अरुण और राकेश सचान (पूर्व फतेहपुर सांसद) ने शनिवार (11 oct) की दोपहर पीड़ित परिवार के घर पहुंचकर मुलाकात की। उन्होंने 13.5 लाख की तत्काल राहत राशि पीड़ित परिवार को दी। साथ ही, पीड़ित परिवार को पेंशन का आश्वाशन दिया। मंत्री ने कहा कि चूंकि मृतक हरिओम वाल्मीकि की पत्नी और पिता जी अलग-अलग रहते हैं इसलिए राशि दोनों में बराबर बांटी है। ओमप्रकाश वाल्मीकि की बहन व भाई को लेकर मंत्री ने कहा कि “हम लोग आउटसोर्सिंग के ज़रिए मज़बूत नौकरी देंगे ताकि परिवार अपने पैरों पे खड़ा रहे।”

 

कैबिनेट मंत्री

कैबिनेट मंत्री असीम अरुण

12 गिरफ्तारियां, एक का हाफ ‘एनकाउंटर’

उत्तर प्रदेश के समाज कल्याण मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) असीम अरुण ने मृतक की हत्या पर हुईं पुलिस कार्रवाई को लेकर कहा कि-

“अभी तक कुल 21 लोग चिंन्हित हुए जिनमें 12 गिरफ्तार हुए हैं। एक अपराधी ने पुलिस के ऊपर गोली चलाई तो वापस उसको भी गोली का जवाब गोली से दिया गया।​ आने वाले समय में सभी गिरफ्तारियां भी होंगी और न्यायालय से सबको कठोर सज़ा भी दिलाई जाएगी। परिवार को लगभग साढ़े 13.5 लाख रुपये की तत्काल राहत हमने दी है।”

 

 

मंत्री का दावा – “बाहरी लोग ड्रोन अफवाह उड़ा रहे”

चूंकि मृतक की मौत के मामले में कहा जा रहा है कि रायबरेली में अपनी पत्नी से मिलने जाते हुए उसे लोगों ने घेर लिया और ड्रोन चोर समझकर पीटने लगे और बाद में हत्या कर दी। इस संदर्भ को लेकर मंत्री बोले- ड्रोन की अफवाह विरोधी फैला रहे हैं, जिससे ओमप्रकाश की लोगों ने हत्या कर दी थी। इस पर संवाददाता ने उनसे पूछा- ये विरोधी लोग कौन हैं?

इस सवाल पर कैबिनेट मंत्री असीम अरुण ने कहा

“यह पश्चिम यूपी से एक सिलसिला आप देख रहे हैं, एक-डेढ़ महीने से शुरू हुआ कि ड्रोन आ गया, ड्रोन आ गया, चोर आ गए। न चोर है, न ड्रोन है। यह कौन फैला रहा है, यह आप भी जानते हैं, मैं भी जानता हूँ। ​यह वह लोग हैं जिनकी जो दुकान थी, अपराध के ज़रिए चलती थी, उसको बंद किया गया।”

 

बोलते पन्ने.. एक कोशिश है क्लिष्ट सूचनाओं से जनहित की जानकारियां निकालकर हिन्दी के दर्शकों की आवाज बनने का। सरकारी कागजों के गुलाबी मौसम से लेकर जमीन की काली हकीकत की बात भी होगी ग्राउंड रिपोर्टिंग के जरिए। साथ ही, बोलते पन्ने जरिए बनेगा .. आपकी उन भावनाओं को आवाज देने का, जो अक्सर डायरी के पन्नों में दबी रह जाती हैं।

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बिहार : बिना हथकड़ी हिस्ट्रीशीटर को लग्जरी गाड़ी से कोर्ट ले गई मधेपुरा पुलिस, रील भी बनी

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मधेपुरा | रजनीश सिंह

बिहार के एक हिस्ट्रीशीटर को बिना हथकड़ी लगाए एक लग्जरी गाड़ी में कोर्ट ले जाने की रील बनाई गई और फिर उसे सोशल मीडिया पर वायरल कराकर हिस्ट्रीशीटर का प्रचार किया गया। इस रील के वायरल होने के बाद मधेपुरा पुलिस के ऊपर हिस्ट्रीशीटर को वीआईपी ट्रीटमेंट देने का गंभीर आरोप लगा। सोशल मीडिया पर पुलिस की आलोचना होने के बाद एसपी ने जांच के आदेश दिए और अब कड़ा ऐक्शन हुआ है।

हिस्ट्रीशीटर अंकज कुमार उर्फ लल्लू यादव का वीडियो वायरल होने के बाद एक एसआई और दो चौकीदारों को सस्पेंड किया गया है। सस्पेंड होने वाले एसआई राम उदय कुमार और दो चौकीदार अनिल कुमार व मोहम्मद रसूल हैं। तीनों से 24 घंटे में स्पष्टीकरण देने को कहा गया है कि उन्होंने कुख्यात अपराधी को वीआईपी ट्रीटमेंट आखिर क्यों दिया?

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गोपालगंज : फाइलेरिया रोकने की दवा खाने के बाद स्कूली बच्चे बीमार

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  • गोपालगंज के हरखुआ माध्यमिक विद्यालय में 15 बच्चे बीमार पड़े।
  • 58 बच्चों को फाइलेरिया रोधी दवा खिलाई, फिर तबीयत बिगड़ी।
  • सभी बच्चों को सदर अस्पताल ले जाकर भर्ती कराया, सभी सुरक्षित।

गोपालगंज | आलोक कुमार 

बिहार के गोपालगंज में फाइलेरिया रोधी दवा खिलाए जाने के बाद स्कूली बच्चों की तबीयत अचानक बिगड़ने से हड़कंप मच गया। स्कूल में अभिभावकों ने पहुंचकर हंगामा किया, हालांकि टीचरों ने उन्हें समझाने की कोशिश की। इस बीच हेडमास्टर ने एंबुलेंस बुलाकर 15 बीमार बच्चों को सदर अस्पताल में एडमिट कराया है। बता दें कि हाथी पांव या फाइलेरिया की रोकथाम के लिए दो साल से बड़े बच्चों को यह दवा खिलाई जाती है, जो एकदम सुरक्षित है।

गोपालगंज में बच्चों की तबीयत खराब होने की घटना शहर के हरखुआ गांव के एक माध्यमिक विद्यालय में घटी। हेडमास्टर कृष्ण मुरारी पांडे ने बताया कि स्कूल में 27 फरवरी को 58 बच्चे मौजूद थे। सभी बच्चों ने मिड डे मील खाया। फिर दोपहर करीब 3:00 बजे आशा वर्करो  ने स्कूल आकर सभी 58 बच्चों को फाइलेरिया और एल्बेंडाजोल की गोलियां दीं।

प्रिंसिपल ने बताया कि दवा खाते ही कुछ बच्चों को अचानक नींद आने लगी और वे सोने लगे, जबकि कुछ को उल्टी हुई।

इस बारे में सिविल सर्जन वीरेंद्र प्रसाद ने बताया कि फाइलेरिया से बचाव की दवा खाने के बाद कुछ बच्चों में गैस बनने की शिकायत हो सकती है, जिससे उल्टी या पेट दर्द महसूस होता है। साथ ही उन्होंने कहा कि कई बार डर के कारण भी बच्चों को ऐसी समस्या होती है, इसमें किसी तरह की चिंता की बात नहीं है।

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शराब तस्करी में जेल गए आरोपी की मौत, परिवार बोला- हत्या हुई, जेल प्रशासन ने हार्टअटैक बताया

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परिजनों को बंदी की तबीयत खराब बताई गई, जब वे अस्पताल पहुंचे तो शव देखकर हंगामा किया। (तस्वीर - बक्सर संवाददाता)
परिजनों को बंदी की तबीयत खराब बताई गई, जब वे अस्पताल पहुंचे तो शव देखकर हंगामा किया। (तस्वीर - बक्सर संवाददाता)
  • बक्सर सेंट्रल जेल में बंदी की मौत होने से उठे सवाल।
  • शराब तस्करी के आरोप में जेल में 14 दिन से था बंदी।
  • जेल में अचानक हुई मौत को परिजनों ने बताया हत्या।

बक्सर | अमीषा कुमारी

बिहार में शराब तस्करी के आरोप में हिरासत में लिए गए एक व्यक्ति की मौत बक्सर सेंट्रल जेल में हो गई है। बीती 12 फरवरी को उसे न्यायिक हिरासत में भेजा गया था। परिजनों का आरोप है कि जेल में उसके साथ मारपीट हुई, उसके शरीर पर लाल निशान हैं। परिजनों ने न्याय की मांग करते हुए सदर अस्पताल में हंगामा किया, तब मौके पर पुलिस पहुंची।अब मेडिकल बोर्ड की निगरानी में मृतक के शव का पोस्टमार्टम कराया जा रहा है। इस मामले में जेल प्रशासन ने उत्पीड़न के आरोपों से इनकार किया है।

दरअसल 40 साल के राजेंद्र सिंह को बक्सर पुलिस पकड़कर ले गई थी और 12 फरवरी को उसे जेल भेजा गया था। राजेंद्र नगर थाना क्षेत्र के विराट नगर के रहने वाले थे।  मृतक के बड़े भाई राजू कुमार ने आरोप लगाया कि गिरफ्तार करने के दौरान ही पुलिस ने राजेंद्र के साथ मारपीट की थी, जबकि वह बीमार चल रहा था। राजू का आरोप है कि “जेल भेजने के बाद भी भाई को पीटा गया। शरीर पर मौजूद लाल निशान साफ बता रहे हैं कि उसकी हत्या हुई है।

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