दुनिया गोल
आखिर 43 दिनों के बाद खत्म हुआ अमेरिका में शटडाउन, जानिए इतना लंबा क्यों खिंचा
- संघीय सरकार को अगले साल जनवरी तक का बजट मिल जाने के बाद शटडाउन खत्म हुआ है।
नई दिल्ली |
अमेरिका में पिछले 43 दिनों से चल रहा फेडरल शटडाउन अब खत्म हो गया है। अमेरिकी संसद के निचले सदन में स्पेंडिंग बिल के पास हो जाने के कुछ घंटों बाद बुधवार की रात राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने साइन करके इसे कानून बना दिया। इस तरह अमेरिकी इतिहास का सबसे लंबा शटडाउन समाप्त हुआ है।
इस विधेयक को निचले सदन में 222 मत मिले और विरोध में 209 मत पड़े।
बता दें कि दो दिन पहले अमेरिकी संसद के उच्च सदन में 6 विपक्षी डेमोक्रेट सांसदों व दो स्वतंत्र सांसदों ने कम अवधि के विधेयक के समर्थन में वोट डाला था। जिसके बाद शटडाउन खत्म होने का रास्ता बन गया था।
अमेरिका के इतिहास में यह 15वां शटडाउन था जो अब तक के सभी शटडाउन में सबसे लंबा चला। इससे पहले ट्रंप के पिछले कार्यकाल (2018-19 में भी शटडाउन हुआ था जो 35 दिनों तक चला। हालांकि उसे पूर्ण सरकारी शटडाउन नहीं कहा जाता है।
आम लोगों के दैनिक जीवन पर असर
शटडाउन के कारण सरकारी कामकाज पूरी तरह बंद हो गये थे जिससे जनता परेशान थी। साथ ही 60 लाख निम्न–आय वाले अमेरिकियों की भोजन सहायता रुक गई।
केंद्रीय कर्मचारियों की सैलरी रूकी
इस शटडाउन में लगभग 9,00,000 संघीय कर्मचारियों को अवकाश पर भेज दिया गया था। साथ ही, 20 लाख को कर्मियों को बिना वेतन के काम करने के लिए मजबूर होना पड़ा।
20 हजार हवाई यात्राओं पर असर
ट्रंप के मुताबिक, पूरे शटडाउन में 20 हजार यात्री उड़ानों पर असर पड़ा जिससे आम लोगों को आवाजाही में भारी परेशानी आई।
सिर्फ इमरजेंसी सेवाएं जारी थीं
केवल स्वास्थ्य सेवा, स्वास्थ्य सहायता और परिवहन सुरक्षा प्रशासन जैसी आवश्यक सेवाएं ही उपलब्ध थी। बताया जा रहा है कि अब आने वाले दिनों में सरकारी सेवाओं को फिर से शुरू किए जाने की आशा है।
व्हाइट हाउस का बयान
व्हाइट हाउस ने भी सोशल मीडिया साइट एक्स पर अपनी पोस्ट में कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप आज बिल पर साइन कर दिया। ट्रंप के हस्ताक्षर के बाद अमेरिका में शटडाउन समाप्त हो गया।
जानिए .. आखिर इतना लंबा क्यों चला शटडाउन
1. ट्रंप ने दीवार बनाने को बजट मांगा, जिससे बिल लटका
अमेरिकी कांग्रेस (संसद) में डेमोक्रेट्स और रिपब्लिकन के बीच बजट पर सहमति न बन पाने का प्रमुख कारण सीमा पर दीवार बनाने का प्रस्ताव था।
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मेक्सिको बॉर्डर वॉल के लिए $5.7 बिलियन की मांग की, जिसे डेमोक्रेट्स ने खारिज कर दिया।
दोनों पक्षों ने समझौते से इनकार कर दिया जिससे फंडिंग बिल पास नहीं हो सका और शटडाउन लागू हुआ। इसे ट्रंप ने डेमोक्रेट्स शटडाउन कहा।
2. मध्यावधि चुनाव की रणनीति ने बजट लटकाया
अगले साल अमेरिका में मध्यावधि चुनाव होने हैं, जिसके चलते दोनों दल अपने राजनीतिक एजेंडे पर सख्त रहकर अपने वोटर को खुश करना चाहते हैं।
ट्रंप ने अप्रवासी विरोधी नीति के चलते सीमा पर दीवार का वादा दोहराया है।
डेमोक्रेट्स ने ओबामा केयर सब्सिडी के विस्तार की मांग की है जो दिसंबर में खत्म हो जाएगी।
जनवरी तक फंडिंग मिली, एक और लॉकडाउन का खतरा
दुनिया गोल
ट्रंप ने गज़ा शांति योजना का Phase-2 किया जारी, जानिए अंतरिम सरकार कैसे शांति लाएगी?
- गजा में नया प्रशासन NCAG बनेगा, हमास पर सख्ती बढ़ेगी।
गज़ा में हथियारबंद लोग पूरी तरह हटाए जाएंगे
अस्थायी प्रशासनिक समिति बनेगी, 15 सदस्य होंगे
‘बोर्ड ऑफ पीस’ को लेकर घोषणा जल्द
योजना का पहला चरण अमेरिका की नजर में सफल
- ट्रंप प्रशासन ने दावा किया कि फेज वन में ऐतिहासिक मानवीय सहायता (Humanitarian Aid) पहुंचाई गई।
- अमेरिका का दावा है कि गज़ा में सीजफायर कायम रहा।
- सभी जीवित बंधकों को वापस लाया गया, साथ ही 28 मृत बंधकों में से 27 के शव वापस लाए जा चुके हैं।
- अमेरिका ने मिस्र, तुर्की और कतर को मध्यस्थता के लिए धन्यवाद दिया।
गज़ा के असल हालात : संघर्ष विराम के बाद 442 मौतें
फिलिस्तीन के स्वास्थ्य मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, बीते 11 अक्तूबर को गज़ा में संघर्ष विराम लागू हुआ, तब से यहां 442 लोग मारे जा चुके हैं और 1236 लोग घायल हो चुके हैं। गज़ा में अब तक हुईं कुल मौतों की संख्या 71,412 है और 171,314 लोग घायल हैं। मरने वाले लोगों में 70% महिलाएं और बच्चे हैं।
दुनिया गोल
वेनेजुएला पर कब्जे के बाद ट्रंप अब लगातार पड़ोसी देशों पर दावा क्यों कर रहे हैं?
नई दिल्ली|
6 देशों पर ट्रंप की नजर
- ग्रीनलैंड: “यह अमेरिका के लिए रणनीतिक जरूरी है। हम इसे खरीद लेंगे या ले लेंगे।”
- पनामा कैनाल: “यह अमेरिका ने बनाया था, अब पनामा ने बहुत ज्यादा टैरिफ लगा दिया। हम इसे वापस ले सकते हैं।”
- कनाडा: “कनाडा 51वाँ राज्य बन सकता है। हम दोनों मिलकर मजबूत होंगे।”
- क्यूबा: “क्यूबा पर फिर से दबाव बढ़ाना होगा।”
- कोलंबिया: “कोलंबिया से ड्रग्स आ रहे हैं, हमें हस्तक्षेप करना पड़ सकता है।”
- मैक्सिको: यहां पर भी ट्रंप ने ड्रग्स को संभावित हमले का आधार बनाया है।
ट्रंप ने पुरानी विदेश नीति की नई व्याख्या की
नए देशों पर दावे के पीछे के कारणों को समझिए
ऊर्जा सुरक्षा: वेनेजुएला के तेल संसाधनों पर कब्जा करने के बाद ट्रंप अमेरिका को ऊर्जा आत्मनिर्भर बनाना चाहते हैं। पनामा कैनाल पर कब्जा करने के पीछे उनकी नीयत अमेरिका के लिए तेल ट्रांसपोर्ट को सस्ता और सुरक्षित बनाने की है। चीन के बढ़ते प्रभाव को रोकना: चीन ने ग्रीनलैंड, पनामा और लैटिन अमेरिका में काफी बड़ी तादाद में निवेश किया है। ट्रंप इसे अमेरिकी हितों के खिलाफ मानते हैं और कहते हैं कि रूस और चीन उनके पड़ोसी नहीं हो सकते इसलिए उन्हें अपनी सुरक्षा के लिए ये देश चाहिए।
चुनावी राजनीति: ट्रंप अपने वोटर बेस के सामने एक मजबूत अमेरिका का संदेश देना चाहते हैं, इस साल मध्यावधि (मिड-टर्म) चुनाव से पहले उनके ये कदम उन्हें अपने वोटर के बीच लोकप्रिय बनाए रखने में मददगार हो सकते हैं।
रूस और चीन के साथ तनाव: ईरान और वेनेजुएला पर दबाव बढ़ाने के साथ ट्रंप, रूस-चीन के प्रभाव को कम करना चाहते हैं।
दुनिया गोल
ट्रंप ने ईरान से व्यापार करने वाले देशों पर लगाया 25% एक्स्ट्रा टैरिफ, चीन पर सबसे ज्यादा असर, भारत पर कितना फर्क पड़ेगा ?
- ईरान में महंगाई के विरोध में शुरू हुआ प्रदर्शन पूरे देश में फैला।
- 16 दिन से जारी प्रदर्शन में 648 मौतें, 5 दिन से इंटरनेट बंद।
- ट्रंप ने ईरान पर हमला करने की धमकी दी, फिर टैरिफ लगाया।
“तत्काल प्रभाव से ईरान से बिजनेस करने वाले किसी भी देश को अमेरिका के साथ सभी ट्रेड पर 25% टैरिफ देना होगा।”डोनाल्ड ट्रंप ने ट्रूथ सोशल पर ईरानी व्यापार पर अतिरिक्त टैरिफ लगाने की घोषणा की।
चीन पर सबसे ज्यादा असर: 90% ईरानी तेल का खरीददार
इस आदेश का सबसे बड़ा असर चीन पर होने जा रहा है क्योंकि वह ईरान के कुल तेल निर्यात का 90% से ज्यादा हिस्सा खरीदता है। इससे पहले ट्रंप वेनेजुएला पर नियंत्रण करके चीन को झटका दे चुके हैं क्योंकि चीन वेनेजुएला के तेल का बड़ा खरीददार था। 2025 में चीन ने ईरान से औसतन 1.3-1.5 मिलियन बैरल तेल प्रति दिन आयात किया, जो ब्रेंट क्रूड से $7-10 प्रति बैरल सस्ता है।
अमेरिका-चीन के बीच तनाव बढ़ेगा – पिछले साल अमेरिका-चीन के बीच टैरिफ युद्ध देखने को मिला था जब ट्रंप ने चीन पर सौ फीसदी से ज्यादा टैरिफ की घोषणा की थी, इसकी प्रतिक्रिया में चीन ने भी अमेरिका के ऊपर टैरिफ लगा दिया। इसके बाद दोनों देशों के बीच बातचीत हुई और अभी चीन के ऊपर अमेरिका का करीब 34% टैरिफ है।
अमेरिकी दवाब में भारत पहले से कम ईरानी तेल खरीद रहा
चाबहार पोर्ट को लेकर दवाब बढ़ेगा – नए टैरिफ से ईरान स्थित चाबहार पोर्ट को लेकर भारत पर दवाब बढ़ सकता है, भारत ने इस प्रोजेक्ट पर $500 मिलियन का निवेश किया है। अमेरिका ने पिछले साल चाबहार पोर्ट के जरिए व्यापार किए जाने पर प्रतिबंध लगा दिया था, हालांकि बाद में प्रतिबंध हटाने की अवधि छह महीने के लिए बढ़ा दी गई। अब देखना होगा कि अमेरिका आगे चाबहार पोर्ट को लेकर क्या रुख रखता है। विशेषज्ञों का अनुमान है कि भारत को वैकल्पिक स्रोत सऊदी, UAE से तेल लेना पड़ेगा।
इन देशों पर भी असर : UAE, तुर्की, EU
- ईरानी तेल के बड़े खरीददार में चीन के बाद UAE और तुर्की आते हैं, जो करीब 3-6% तेल खरीदते हैं।
- यूरोपीय संघ (EU) से जुड़े जर्मनी, इटली, नीदरलैंड्स जैसे देश ईरान से कृषि से जुड़े सामान, खाद्य पदार्थों, इंडस्ट्रियल उत्पादों का व्यापार करती हैं, हालांकि पहले से ईरान में जारी प्रतिबंधों के चलते इसकी संख्या घटती रही है, फिर भी नए टैरिफ के चलते इन देशों के अमेरिकी उत्पाद महंगे हो जाएंगे।

ईरान में विरोध प्रदर्शनों के दौरान बहुत बड़ी संख्या में लोग जुड़ रहे हैं जिनकी तस्वीरें इंटरनेट बैन के बावजूद ईरान से बाहर पहुंच रही हैं। (तस्वीर- साभार X)
ईरान में 16 दिनों से जारी प्रदर्शनों में अब तक 648 मौतें
ट्रंप ने कहा था- प्रदर्शनकारियों पर गोलियां चलीं तो हमला करेंगे

ईरान (प्रतीकात्मक फोटो)
पहले से खस्ता ईरानी अर्थव्यवस्था पर गहरा असर

अयातुल्ला अली ख़ामेनेई, ईरानी सर्वोच्च नेता
चरम पर पहुंचे प्रदर्शन के बीच वार्ता को राजी सरकार
12 जनवरी को अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने सोशल मीडिया पर लिखा कि ईरानी अधिकारियों ने उनके सामने बातचीत की पेशकश रखी है। दूसरी ओर, ईरानी मीडिया की ओर से कहा गया है कि ईरानी सरकार प्रदर्शनकारियों के प्रतिनिधियों के साथ वार्ता करना चाहती है, सरकार ने बातचीत की पेशकश की है।
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