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जब पैडल की जगह मोटर लगी तो क्या बोले रिक्शे वाले भइया..

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बिहार के चंदन साहू एक दशक से साइकिल रिक्शा चला रहे थे, अपने रिक्शे में बैटरी व मोटर लगवा लेने के बाद उन्हेें ऐसा महसूस होने लगा है कि जैसे वे खुद के लिए ह्यूडई ले आए हैं। तकनीकी के जरिए मेहनतकश लोगों को मिल रही कुछ सहूलियत के बारे में इनका क्या कहना है, अपने रिक्शे में मोटर लगवाने के लिए किस तरह इनके रोज के कस्टमरों ने इन्हें सहयोग दिया …. सुनिए ई-रिक्शा चालक बन गए चंदन की कहानी, उन्हीं की जुबानी।

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गणतंत्र दिवस विशेष : तुम अड़े रहना ..

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उम्र का मौसम | कविता – सुजाता

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सांकेतिक फोटो
उम्र का मौसम | कविता - सुजाता

नए साल के साथ उम्र का मौसम भी बदल गया है। ऐसे में पेश है ये कविता। उम्र के साथ नजर भले कमजोर हो जाए पर रिश्तों को पहचानने का नजरिया तब ही आता है। कुछ ऐसा ही समझती, सिखाती … ये कविता।

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कुंभ.. कैसे बनती हैं साध्वियां

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भारत में आकर साध्वी बनी विदेशी महिला, तस्वीर - शिवांगी

प्रयागराज कुंभ – 2019 में बनाई गई इस डॉक्यूमेंट्री फिल्म के जरिए साध्वियों के सामाजिक जीवन को दर्शाने की कोशिश की गई है। अलग-अलग परिवेश और अलग-अलग परिस्थितियों के चलते साध्वी बनी इन स्त्रियों की कहानी क्या है… धर्म से जुड़ी इस भूमिका में भी क्या वे खुद को ‘सहयोगी’ की भूमिका में पाती हैं… ? इन्हीं सब सवालों को लेकर बनाई गई है ये डॉक्यूमेंंट्री..

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