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हां…हां…भाई सब अच्छे हैं | रिपोर्टर की डायरी

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इस इतवार शालिनी बाजपेयी अपनी डायरी का चौथा किस्सा लेकर हाजिर हैं। ये किस्सा बतलाता है कि किस तरह एक समूह के रूप में किसी धर्म या जाति को लेकर लोग तमाम तरह के पूर्वाग्रहों से घिरे हुए हों, मगर जब वे उसी धर्म-जाति के किसी व्यक्ति को व्यक्तिगत रूप से जानते समझते हैं तो किस तरह वह व्यक्ति उनके लिए एक अच्छा इंसान बन जाता है। असल में तो सभी अच्छे ही इंसान हैं न, जरूरत बस इन पूर्वाग्रहों से बाहर निकलने की है। बता दें कि शालिनी जी ने प्रिंट मीडिया में लंबे वक्त तक काम किया और अभी वे बतौर एक टीवी पत्रकार काम कर रही हैं।

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गणतंत्र दिवस विशेष : तुम अड़े रहना ..

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उम्र का मौसम | कविता – सुजाता

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सांकेतिक फोटो
उम्र का मौसम | कविता - सुजाता

नए साल के साथ उम्र का मौसम भी बदल गया है। ऐसे में पेश है ये कविता। उम्र के साथ नजर भले कमजोर हो जाए पर रिश्तों को पहचानने का नजरिया तब ही आता है। कुछ ऐसा ही समझती, सिखाती … ये कविता।

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कुंभ.. कैसे बनती हैं साध्वियां

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भारत में आकर साध्वी बनी विदेशी महिला, तस्वीर - शिवांगी

प्रयागराज कुंभ – 2019 में बनाई गई इस डॉक्यूमेंट्री फिल्म के जरिए साध्वियों के सामाजिक जीवन को दर्शाने की कोशिश की गई है। अलग-अलग परिवेश और अलग-अलग परिस्थितियों के चलते साध्वी बनी इन स्त्रियों की कहानी क्या है… धर्म से जुड़ी इस भूमिका में भी क्या वे खुद को ‘सहयोगी’ की भूमिका में पाती हैं… ? इन्हीं सब सवालों को लेकर बनाई गई है ये डॉक्यूमेंंट्री..

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