दुनिया गोल
27वां संविधान संशोधन : पाकिस्तान में अब ‘फील्ड मार्शल’ की सरकार, सुप्रीम कोर्ट सबसे कमजोर हुआ
- पाकिस्तान का 27वां संविधान संशोधन संसद से पास हो चुका है।
- इसके विरोध में अब तक सुप्रीम कोर्ट के कुछ जजों ने इस्तीफा दिया।
- आजीवन फील्ड मार्शल रहेंगे आसिर मुनीर, सेना सर्वोच्च शक्ति बनी।
नई दिल्ली |
पाकिस्तान में सरकार के ऊपर सेना का दखल और संविधान में बार-बार बदलाव होना कोई नहीं बात नहीं है, पर इस बार हुए 27वें संवैधानिक संशोधन को लोकतंत्र का ‘जनाज़ा’ निकालने जैसा बताया जा रहा है।
पाकिस्तान में 27वां संविधान संशोधन (27th Constitutional Amendment) पास होकर राष्ट्रपति के हस्ताक्षर के बाद लागू हो चुका है।
इससे सबसे बड़ा बदलाव सुप्रीम कोर्ट से संवैधानिक मामलों की सुनवाई की शक्ति छीनने के रूप में हुआ है। यानी अब वह सिर्फ सिविल और क्रिमिनल मामलों की सुनवाई कर सकेगी।
दूसरी ओर, सैन्य प्रमुख आसिर मुनीर को जीवनभर के लिए फील्ड मार्शल बना दिया गया है। साथ ही, तीनों सेनाओं का प्रमुख CDF (chief of defence force) भी बनाया गया है।
इतना ही नहीं, उन्हें राष्ट्रपति की तरह जीवन भर आपराधिक कार्रवाई से सुरक्षा दी गई है। इस तरह वे पाकिस्तान में सबसे ताकतवर व्यक्ति बन गए हैं।
बता दें कि पाकिस्तान में आखिरी बार साल 1999 में सेना ने तख्ता-पलट करके चुनी हुई सरकार हटा दी थी। पर इस बार हुए बदलाव ने संवैधानिक तरीके से फील्ड मार्शल को पाकिस्तान की सत्ता का केंद्र बना दिया है।
तीन लाइन में समझें बदलाव
- Supreme Court को constitutional मामलों से हटाकर नई Federal Constitutional Court को सर्वोच्च बनाया गया है।
- नए बदलाव के हिसाब से सुप्रीम कोर्ट और सभी हाईकोर्ट के पास स्वतंत्र संविधानिक बेंच होगी, जिसके जज सरकार नियुक्त करेगी।
- Field Marshal Asim Munir को सेना के साथ-साथ “National Strategic Command” की कमान और लाइफटाइम इम्युनिटी मिल गई है।
विरोध में जजों का इस्तीफा
कई जजों ने इस कदम को “judicial capture” बताया। नए संशोधन के विरोध में सुप्रीम कोर्ट के दो जज व लाहौर हाईकोर्ट के एक जज ने इस्तीफा दे दिया है। साथ ही, इस्लामाबाद हाईकोर्ट के दो जजों ने इस्तीफा देने के संकेत दिए हैं।
क्या है 27वां संविधान संशोधन?
1. Supreme Court का रोल घटा — नई Federal Constitutional Court सबसे ऊपर
अल जज़ीरा की रिपोर्ट के अनुसार, FCC को पाकिस्तान का नया सर्वोच्च संवैधानिक मंच बनाया गया है।
FCC के जज प्रधानमंत्री व राष्ट्रपति सीधे चुनेंगे
FCC को 68 वर्ष तक काम करने की अनुमति
पुरानी Supreme Court की सभी Constitutional power समाप्त
The Guardian ने इसे “Supreme Court की स्वतंत्रता को ख़त्म करने वाला कदम” बताया है।
- अब—
* Supreme Court सिर्फ सिविल और क्रिमिनल अपीलों में अंतिम अदालत होगी
* सभी संवैधानिक मामले FCC में जाएंगे
2. जजों की ट्रांसफर–पोस्टिंग अब सरकार के हाथ
पाकिस्तान के अखबार डॉन (Dawn) के अनुसार – अब पाकिस्तान के राष्ट्रपति, Judicial Commission की सिफारिश पर जजों को बिना उनकी अनुमति के ट्रांसफर कर सकते हैं।
अगर जज इसे मानने से इंकार करे तो— उसे रिटायर माना जाएगा।
यह प्रावधान पाकिस्तान में पहली बार आया है।
3. आर्मी चीफ Asim Munir को अभूतपूर्व शक्तियां
फील्ड मार्शल आसिर मुनीर को तीनों सेनाओं के प्रमुख के तौर पर नया संवैधानिक पद CDF “Chief of Defence Forces” दिया गया है।
उन्हें लाइफटाइम इम्युनिटी—यानी किसी भी प्रकार की आपराधिक कार्रवाई आजीवन नहीं
सेना, नौसेना और वायुसेना पर एकीकृत अधिकार
Strategic Forces Command की सीधी कमान
विेशेषज्ञ की राय –
Georgetown University के प्रोफ़ेसर Aqil Shah लिखते हैं:
“यह पाकिस्तान में स्थायी सैन्य शासन की ओर सबसे बड़ा कदम है।”
इसे क्यों कहा जा रहा — ‘न्यायिक कब्जा’(Judicial Capture)?
सीएनएन (CNN) के अनुसार: “यह संशोधन न्यायपालिका को पूर्ण रूप से कार्यपालिका के अधीन कर देता है।”
इस्लामाबाद हाई कोर्ट के जजों ने पहले भी अपने पत्रों में लिखा था कि उन्हें राजनीतिक और सुरक्षा एजेंसियों से दबाव झेलना पड़ता है।
अब कई जजों ने—
FCC की शपथ में हिस्सा नहीं लिया
इस्तीफे की प्रक्रिया शुरू कर दी है
कोर्टरूम खाली कराए जा रहे हैं ताकि FCC वहीं बैठ सके
संसद पर भी सवाल—
डॉन अख़बार ने साफ लिखा, “यह amendment एक ऐसी संसद ने पास किया है जिसे जनता प्रतिनिधि ही नहीं मानती।”
विपक्ष (PTI और TTAP) ने वोटिंग का बहिष्कार किया।
सिर्फ चार सांसदों ने इसका विरोध किया—बाकी कुछ घंटों में वोटिंग खत्म कर दी गई।
आलोचकों की मुख्य आपत्तियां
1. पूरे संविधान की मूल संरचना (Basic Structure) को तोड़ा गया
2. Judiciary अब स्वतंत्र नहीं रहेगी
3. Army chief को ऐसी शक्तियां पहले कभी नहीं दी गईं
4. Bill को जनता, जजों या सिविल सोसाइटी से चर्चा के बिना पास किया गया
5. यह पाकिस्तान को संवैधानिक लोकतंत्र से सैन्य नियंत्रित ढांचे में बदल देता है
Human Rights Commission of Pakistan ने कहा:
“यह संशोधन लोकतंत्र की जड़ों को हिलाता है।”
आगे क्या होगा? (Impact Analysis)
1. सेना की शक्तियां ऐतिहासिक रूप से सबसे बड़ी हो जाएंगी—कानूनी संरक्षण और पांच-सितारा पद (फील्ड मार्शल)
2. Supreme Court अब symbolic होगी—FCC असली authority बनेगी
3. सरकार को जजों पर सीधा नियंत्रण मिलेगा—ट्रांसफर का डर न्यायिक स्वतंत्रता खत्म कर देगा
4. पाकिस्तान में लोकतंत्र और नागरिक अधिकार गहरे संकट में पहुंचेंगे—इसे अंतरराष्ट्रीय मीडिया ‘सत्तावादी मोड़’ (Authoritarian Turn) कह रहा है
Edited by Mahak Arora (Content writter)
दुनिया गोल
ट्रंप ने गज़ा शांति योजना का Phase-2 किया जारी, जानिए अंतरिम सरकार कैसे शांति लाएगी?
- गजा में नया प्रशासन NCAG बनेगा, हमास पर सख्ती बढ़ेगी।
गज़ा में हथियारबंद लोग पूरी तरह हटाए जाएंगे
अस्थायी प्रशासनिक समिति बनेगी, 15 सदस्य होंगे
‘बोर्ड ऑफ पीस’ को लेकर घोषणा जल्द
योजना का पहला चरण अमेरिका की नजर में सफल
- ट्रंप प्रशासन ने दावा किया कि फेज वन में ऐतिहासिक मानवीय सहायता (Humanitarian Aid) पहुंचाई गई।
- अमेरिका का दावा है कि गज़ा में सीजफायर कायम रहा।
- सभी जीवित बंधकों को वापस लाया गया, साथ ही 28 मृत बंधकों में से 27 के शव वापस लाए जा चुके हैं।
- अमेरिका ने मिस्र, तुर्की और कतर को मध्यस्थता के लिए धन्यवाद दिया।
गज़ा के असल हालात : संघर्ष विराम के बाद 442 मौतें
फिलिस्तीन के स्वास्थ्य मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, बीते 11 अक्तूबर को गज़ा में संघर्ष विराम लागू हुआ, तब से यहां 442 लोग मारे जा चुके हैं और 1236 लोग घायल हो चुके हैं। गज़ा में अब तक हुईं कुल मौतों की संख्या 71,412 है और 171,314 लोग घायल हैं। मरने वाले लोगों में 70% महिलाएं और बच्चे हैं।
दुनिया गोल
वेनेजुएला पर कब्जे के बाद ट्रंप अब लगातार पड़ोसी देशों पर दावा क्यों कर रहे हैं?
नई दिल्ली|
6 देशों पर ट्रंप की नजर
- ग्रीनलैंड: “यह अमेरिका के लिए रणनीतिक जरूरी है। हम इसे खरीद लेंगे या ले लेंगे।”
- पनामा कैनाल: “यह अमेरिका ने बनाया था, अब पनामा ने बहुत ज्यादा टैरिफ लगा दिया। हम इसे वापस ले सकते हैं।”
- कनाडा: “कनाडा 51वाँ राज्य बन सकता है। हम दोनों मिलकर मजबूत होंगे।”
- क्यूबा: “क्यूबा पर फिर से दबाव बढ़ाना होगा।”
- कोलंबिया: “कोलंबिया से ड्रग्स आ रहे हैं, हमें हस्तक्षेप करना पड़ सकता है।”
- मैक्सिको: यहां पर भी ट्रंप ने ड्रग्स को संभावित हमले का आधार बनाया है।
ट्रंप ने पुरानी विदेश नीति की नई व्याख्या की
नए देशों पर दावे के पीछे के कारणों को समझिए
ऊर्जा सुरक्षा: वेनेजुएला के तेल संसाधनों पर कब्जा करने के बाद ट्रंप अमेरिका को ऊर्जा आत्मनिर्भर बनाना चाहते हैं। पनामा कैनाल पर कब्जा करने के पीछे उनकी नीयत अमेरिका के लिए तेल ट्रांसपोर्ट को सस्ता और सुरक्षित बनाने की है। चीन के बढ़ते प्रभाव को रोकना: चीन ने ग्रीनलैंड, पनामा और लैटिन अमेरिका में काफी बड़ी तादाद में निवेश किया है। ट्रंप इसे अमेरिकी हितों के खिलाफ मानते हैं और कहते हैं कि रूस और चीन उनके पड़ोसी नहीं हो सकते इसलिए उन्हें अपनी सुरक्षा के लिए ये देश चाहिए।
चुनावी राजनीति: ट्रंप अपने वोटर बेस के सामने एक मजबूत अमेरिका का संदेश देना चाहते हैं, इस साल मध्यावधि (मिड-टर्म) चुनाव से पहले उनके ये कदम उन्हें अपने वोटर के बीच लोकप्रिय बनाए रखने में मददगार हो सकते हैं।
रूस और चीन के साथ तनाव: ईरान और वेनेजुएला पर दबाव बढ़ाने के साथ ट्रंप, रूस-चीन के प्रभाव को कम करना चाहते हैं।
दुनिया गोल
ट्रंप ने ईरान से व्यापार करने वाले देशों पर लगाया 25% एक्स्ट्रा टैरिफ, चीन पर सबसे ज्यादा असर, भारत पर कितना फर्क पड़ेगा ?
- ईरान में महंगाई के विरोध में शुरू हुआ प्रदर्शन पूरे देश में फैला।
- 16 दिन से जारी प्रदर्शन में 648 मौतें, 5 दिन से इंटरनेट बंद।
- ट्रंप ने ईरान पर हमला करने की धमकी दी, फिर टैरिफ लगाया।
“तत्काल प्रभाव से ईरान से बिजनेस करने वाले किसी भी देश को अमेरिका के साथ सभी ट्रेड पर 25% टैरिफ देना होगा।”डोनाल्ड ट्रंप ने ट्रूथ सोशल पर ईरानी व्यापार पर अतिरिक्त टैरिफ लगाने की घोषणा की।
चीन पर सबसे ज्यादा असर: 90% ईरानी तेल का खरीददार
इस आदेश का सबसे बड़ा असर चीन पर होने जा रहा है क्योंकि वह ईरान के कुल तेल निर्यात का 90% से ज्यादा हिस्सा खरीदता है। इससे पहले ट्रंप वेनेजुएला पर नियंत्रण करके चीन को झटका दे चुके हैं क्योंकि चीन वेनेजुएला के तेल का बड़ा खरीददार था। 2025 में चीन ने ईरान से औसतन 1.3-1.5 मिलियन बैरल तेल प्रति दिन आयात किया, जो ब्रेंट क्रूड से $7-10 प्रति बैरल सस्ता है।
अमेरिका-चीन के बीच तनाव बढ़ेगा – पिछले साल अमेरिका-चीन के बीच टैरिफ युद्ध देखने को मिला था जब ट्रंप ने चीन पर सौ फीसदी से ज्यादा टैरिफ की घोषणा की थी, इसकी प्रतिक्रिया में चीन ने भी अमेरिका के ऊपर टैरिफ लगा दिया। इसके बाद दोनों देशों के बीच बातचीत हुई और अभी चीन के ऊपर अमेरिका का करीब 34% टैरिफ है।
अमेरिकी दवाब में भारत पहले से कम ईरानी तेल खरीद रहा
चाबहार पोर्ट को लेकर दवाब बढ़ेगा – नए टैरिफ से ईरान स्थित चाबहार पोर्ट को लेकर भारत पर दवाब बढ़ सकता है, भारत ने इस प्रोजेक्ट पर $500 मिलियन का निवेश किया है। अमेरिका ने पिछले साल चाबहार पोर्ट के जरिए व्यापार किए जाने पर प्रतिबंध लगा दिया था, हालांकि बाद में प्रतिबंध हटाने की अवधि छह महीने के लिए बढ़ा दी गई। अब देखना होगा कि अमेरिका आगे चाबहार पोर्ट को लेकर क्या रुख रखता है। विशेषज्ञों का अनुमान है कि भारत को वैकल्पिक स्रोत सऊदी, UAE से तेल लेना पड़ेगा।
इन देशों पर भी असर : UAE, तुर्की, EU
- ईरानी तेल के बड़े खरीददार में चीन के बाद UAE और तुर्की आते हैं, जो करीब 3-6% तेल खरीदते हैं।
- यूरोपीय संघ (EU) से जुड़े जर्मनी, इटली, नीदरलैंड्स जैसे देश ईरान से कृषि से जुड़े सामान, खाद्य पदार्थों, इंडस्ट्रियल उत्पादों का व्यापार करती हैं, हालांकि पहले से ईरान में जारी प्रतिबंधों के चलते इसकी संख्या घटती रही है, फिर भी नए टैरिफ के चलते इन देशों के अमेरिकी उत्पाद महंगे हो जाएंगे।

ईरान में विरोध प्रदर्शनों के दौरान बहुत बड़ी संख्या में लोग जुड़ रहे हैं जिनकी तस्वीरें इंटरनेट बैन के बावजूद ईरान से बाहर पहुंच रही हैं। (तस्वीर- साभार X)
ईरान में 16 दिनों से जारी प्रदर्शनों में अब तक 648 मौतें
ट्रंप ने कहा था- प्रदर्शनकारियों पर गोलियां चलीं तो हमला करेंगे

ईरान (प्रतीकात्मक फोटो)
पहले से खस्ता ईरानी अर्थव्यवस्था पर गहरा असर

अयातुल्ला अली ख़ामेनेई, ईरानी सर्वोच्च नेता
चरम पर पहुंचे प्रदर्शन के बीच वार्ता को राजी सरकार
12 जनवरी को अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने सोशल मीडिया पर लिखा कि ईरानी अधिकारियों ने उनके सामने बातचीत की पेशकश रखी है। दूसरी ओर, ईरानी मीडिया की ओर से कहा गया है कि ईरानी सरकार प्रदर्शनकारियों के प्रतिनिधियों के साथ वार्ता करना चाहती है, सरकार ने बातचीत की पेशकश की है।
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