रिपोर्टर की डायरी
मुंगेर : नामी सर्जन ने बेटे का गलत ऑपरेशन किया.. कर्ज में डूबे पिता की मौत, कैंसर पीड़ित मां ने 6 साल लड़ी लड़ाई, आखिर मिला इंसाफ
- 11 साल के बच्चे के पेट में अपेंडिस्क का गलत ऑपरेशन करने का मामला।
- 2019 से उपभोक्ता फोरम में केस लड़ रही पीड़ित की मां को न्याय मिला।
- मुंगेर के सर्जन डॉ. सुधीर कुमार को पीड़ित को देने होंगे 16.51 लाख रुपये।
मुंगेर | प्रशांत कुमार
बिहार के मुंगेर में एक बच्चे का गलत ऑपरेशन होने के बाद पूरा परिवार बर्बाद हो गया। अपेंडिसाइटिस (अपेंडिस्क) का लेप्रोस्कोपिक ऑपरेशन करने के नाम पर एक नामी सर्जन डॉ. सुधीर कुमार ने बच्चे का पेट गले से नाभि तक चीर डाला, उसकी जान बचाने के लिए परिवार को भारी कर्ज लेकर कोलकाता में ऑपरेशन कराना पड़ा। कर्ज के बोझ के चलते पिता की असमय मौत हो गई।
इतना होने पर भी कैंसर पीड़ित मां ने अपने बेटे के साथ हुए अन्याय के खिलाफ लड़ाई नहीं रोकी और अब जाकर उन्हें न्याय मिला है। छह साल चले केस में जिला उपभोक्ता विभाग ने जिले के नामी सर्जन को आदेश दिया है कि वे पीड़ित को 16.51 लाख रुपये दें। साथ ही, कहा है कि अगर दोषी डॉक्टर ने आदेश की तारीख से 60 दिनों के अंदर भुगतान नहीं किया तो पूरी राशि पर नौ प्रतिशत ब्याज के साथ भुगतान करना होगा।
बेटे के पेट में दर्द उठा था, 5 दिन में हालत बिगाड़ दी
समर शेखर नाम के 11 साल के बच्चे के पेट में एक अगस्त 2019 को अचानक काफी तेज दर्द उठा। समर की मां के मुताबिक, उन्हें नीलम सिनेमा के पास स्थित एक प्रसिद्ध सर्जन डॉ. सुधीर कुमार के यहां ले गए। जहां सर्जन ने कुछ जांच कर मरीज को अपेंडिसाइटिस होने की बात कही और तुरंत लेप्रोस्कोपिक विधि से सर्जरी का सुझाव दिया। अगले दिन दो अगस्त 2009 को लेप्रोस्कोपिक विधि से सर्जरी किया गया जो असफल रहा।
बता दें कि अपेंडिसाइटिस एक चिकित्सा स्थिति है जो पेट के निचले दाहिने हिस्से में स्थित अपेंडिक्स नामक एक छोटे से अंग की सूजन से होती है।
परिवार की अनुमति बिना पेट चीड़ डाला
परिवार का आरोप है कि डॉ. सुधीर कुमार ने अभिभावक की बिना सहमति से पूरे पेट में चीड़ा लगा दिया। इसके बाद भी मरीज को पांच दिनों में पीड़ा कम नहीं हुई तो डाक्टर ने मरीज को घर ले जाने का सलाह दी। स्वजन के काफी दबाव देने के बाद डाक्टर ने अस्पताल का खर्च लेकर मरीज को छह अगस्त 2019 को रेफर किया।
हायर सेंटर में इलाज से इनकार, कहा- बच्चा मौत के करीब
जहां से उसे भागलपुर के एक निजी अस्पताल ले जाया गया, पर वहां यह कहकर उसका इलाज करने से इंकार कर दिया गया कि बच्चे का आपरेशन इस प्रकार किया गया है कि उसे मृत्यु के करीब पहुंचा दिया गया है।
10 दिन वेंटिलेटर पर रखने के बाद जान बची
इसके बाद एमएमआरआई कोलकाता में बच्चे का आपरेशन कर उसकी जांच बचाई गई। यहां दस दिनों तक उसे वेंटिलेटर पर रखा गया था। इस प्रकार बच्चे के इलाज में आठ लाख से अधिक की रशि खर्च हो गई।
डॉक्टर का जवाब- अपेंडिक्स परफोरेशन के कारण खोला पेट
आयोग को दिए अपने लिखित जवाब में डॉक्टर ने कहा कि अपेंडिक्स परफोरेशन होने के आभास होने पर मरीज का पेट खोला गया। इसके अलावा आंतों पर फ्रिवीनस फ्लेक जमा हुआ था, व अपेंडिक्स के आसपास पस जैसा फ्लूड जमा था। ऐसा पाने के बाद जहां तक संभव था अपेंडिक्स काटकर निकाल दिया गया। वहीं, चिकित्सक ने यह स्वीकार किया कि कोलकाता में जो इलाज हुआ उसमें आंत में जो छेद था उसे बंद कर दिया और अपेंडिक्स के स्टम्प का फिर से आपरेशन कर शेष बचे अपेंडिक्स को बाहर कर दिया गया।
आयोग बोला- डॉक्टर ऑपरेशन नहीं, प्रयोग कर रहे थे
डॉक्टर को देने होंगे कुल 16.51 लाख रुपये
- इलाज का खर्च 8.50 लाख + 6% ब्याज (2019 से)
- मानसिक-शारीरिक कष्ट: 2 लाख
- वाद व्यय: 50 हजार
- बच्चे का शरीर पोस्टमार्टम की तरह चीरने का मुआवजा: 5 लाख
- 60 दिन में भुगतान न हुआ तो पूरी राशि पर 9% सालाना ब्याज
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मुंगेर में सीसीटीवी कैमरे ने सामाजिक सौहार्द बिगड़ने के बचा लिया !
- बिहार के मुंगेर में एक दुर्गा मंदिर में मिला मांस का टुकड़ा।
- पुलिस ने सीसीटीवी कैमरा के जरिए शांत कराया माहौल।
- एक पक्षी की करामात ने माहौल गरमा दिया था।
मुंगेर | प्रशांत कुमार सिंह
बिहार के मुंगेर जिले में सीसीटीवी कैमरे ने सामाजिक सौहार्द बिगड़ने के बचा लिया। दरअसल एक देवी मंदिर की सीढ़ियों पर मांस का टुकड़ा पड़ा मिला, जिसके बाद स्थानीय लोगों में गुस्सा फैल गया। मंदिर परिसर में मांस मिलने की खबर की संवेदनशीलता को देखते हुए मौके पर तुरंत पुलिस अधिकारी पहुंचे और लोगों को अफवाह न फैलाने को चेताया। मौके से पुलिस ने मांस का टुकड़ा हटाया और फिर सीसीटीवी कैमरा चेक किया।
जिससे पता लगा कि एक पक्षी अपने पंजे में फंसाकर मांस का टुकड़ा ले आया था और उससे वह टुकड़ा मंदिर परिसर में लगे लोहे के ग्रिल के पास गिर गया। पुलिस ने स्थानीय लोगों को इस मामले में संतुष्ट कराने के लिए सीसीटीवी फुटेज दिखाई, इसके बाद जाकर यह मामला सुलझा।
यह पूरी घटना 4 जनवरी को मुंगेर शहर के नंदलाल बसु चौक के पास स्थित शमशेर बाबू दुर्गा मंदिर का है। यहां लोहे के ग्रिल पर मांस का अवशेष मिलने की खबर फैलते ही लोग मंदिर पहुंचकर आक्रोश जताने लगे थे। सूचना पर एसडीपीओ अनिल कुमार और हवेली खड़गपुर के ट्रेनी डीएसपी व थानाध्यक्ष मिथलेश कुमार तिवारी अपनी टीम के साथ पहुंचे।लोगों के बीच कई प्रकार की अफवाह फैलने से आसपास के क्षेत्र से भी लोग जुटने लगे। तब हवेली खड़गपुर पुलिस ने सभी को समझा बुझाकर हटाया।
पुलिस ने पास ही के एक मेडिकल पर लगे सीसीटीवी की फुटेज खंगाली, तब जाकर ये मामला सुलझा।
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खगड़िया में पकड़ौआ विवाह: युवक ने कहा- ‘जबरन शादी कराई’, महिला बोली- ‘हम पहले से प्रेमी थे’
- बिहार में आज भी जबरन कराये जा रहे पकड़ौआ विवाह।
- खगड़िया जिले में एक किसान को गाय खरीदने के बहाने पकड़ा।
- जबरन शादी कराए जाने का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल।
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मुंगेर (बिहार): पुलिस ने थाने में कराई प्रेमी जोड़े की शादी, परिवार ने लिखा दी थी अपहरण की रपट
- मुंगेर पुलिस ने बालिग प्रेमी जोड़े की शादी थाने में करायी।
- पुलिस और ग्रामीण बने बाराती, इलाके में चर्चा बनी शादी।
- प्रेमी जोड़े ने साबित किया वो बालिग, पुलिस ने शादी करायी।
(नोट – इस खबर को वीडियो पर देखने के लिए इस लिंक पर क्लिक करें।)
मुंगेर (हवेली खड़गपुर) | प्रशांत कुमार सिंह
अक्सर पुलिस को प्रेमी जोड़े के ऊपर जोर-दबाव बनाते देखा जाता है, पर बिहार के मुंगेर जिले की पुलिस ने मिसाल कायम की है जिससे युवाओं का पुलिस पर भरोसा बढ़ेगा। एक प्रेमी जोड़े की पुलिस थाने में पुलिस अधिकारियों की मौजूदगी में शादी कराई गई।
यह मामला मुंगेर के हवेली खड़गपुर पुलिस थाने का है, जहां स्थित शिव मंदिर में प्रेमी जोड़े ने सात फेरे लिए। प्रेम विवाह करने वाली युवती का नाम पायल है जो तेघड़ा गांव की रहने वाली है जबकि युवक बृजेश भागलपुर जिले का रहने वाला है। बीती 23 जनवरी को दोनों एक साथ लापता हो गए थे। पायल के पिता अजय शाह का आरोप था कि बृजेश उनकी बेटी का अपहरण करके ले गया है और उन्होंने 28 फरवरी को इस मामले की FIR भी दर्ज करवा दी। उनका आरोप था कि उनकी बेटी नाबालिग है। इसके बाद खड़गपुर पुलिस लड़की का पता लगाने के लिए लगातार दबिश दे रही थी।
इसी बीच 2 फरवरी को प्रेमी युगल पुलिस थाने पहुंचा और पुलिस को बताया कि वे बालिग हैं और शादी करना चाहते हैं। पायल ने बताया कि वह अपनी मर्जी से बृजेश के साथ चली गई थी। इस मामले में पुलिस थाना प्रभारी राजेश कुमार ने दोनों परिवारों व कुछ जनप्रतिनिधियों को बुलाकर बात करवाई। फिर आपसी बातचीत और रजामंदी के बाद थाना परिसर के ही मंदिर में दोनों की शादी कराई गई, जिसे देखने के लिए आसपास के लोग भी जुट गए। इस मौके पर पंचायत समिति सदस्य भी मौजूद रहे।
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