मेरी सुनो
लड़कियों की अधूरी पढ़ाई: रामगढ़ चौक में सपनों का हाई-स्कूल अभी भी कोसों दूर
- बिहार से लखीसराय के एक गांव में लोग एक हाईस्कूल बनवाने के लिए कई वर्षों से संघर्ष कर रहे
- हाईस्कूल न होने के चलते लड़कियां आठवीं के बाद पढ़ाई छोड़ने को विवश, चुनावी साल में आस जगी
लखीसराय जिले से मात्र दस किलोमीटर दूर बसे रामगढ़ चौक में एक सन्नाटा पसरा है—सन्नाटा उन सपनों का, जो आठवीं के बाद लड़कियों के लिए अचानक थम जाते हैं। इस छोटे से गांव में माझी और भूमिहार समाज की बेटियां पढ़ाई छोड़ने को मजबूर हैं, क्योंकि आगे की राह में न तो स्कूल है और न ही सुरक्षा का भरोसा। पिछले 15 सालों से ग्रामीण एक हाईस्कूल की आस लगाए बैठे हैं, जमीन दान करने को तैयार हैं, लेकिन बदलाव की किरण अभी भी दूर है। हाल ही में डीएम मिथिलेश कुमार मिश्रा का दौरा और विधानसभा चुनाव 2025 की नजदीकी ने ग्रामीणों में नई उम्मीद जगा दी है, पर क्या यह उम्मीद पूरी होगी?
मेरी सुनो
रोहतास (बिहार) : मेयर आवास के पास रहते हैं फिर भी कीचड़ में जी रहे..कृष्णानगर के लोगों ने मेन रोड जाम कर उठाई आवाज
- रोहतास के जिला मुख्यालय सासाराम के कृष्णानगर में लोग परेशान।
- कच्चे रोड पर नाली का पानी भर रहा, लोग पैदल चलने पर गिर रहे।
- नगर निगम सिर्फ कच्ची मिट्टी का भराव कर रहा, रोड जाम करके प्रदर्शन।
रोहतास | अविनाश श्रीवास्तव
शहर की नई बस्तियों में रहने वाले लोग किस कदर आधारभूत सुविधाओं (basic amenities) से महरूम हैं, उसका एक उदाहरण बिहार के रोहतास जिले में देखने को मिला। यहां नगर निगम के अंदर आने वाले कृष्णा नगर (Krishna Nagar Colony) इलाके के लोग मिट्टी के रास्ते पर पानी भरने से इतने परेशान हो गए कि उन्होंने मेन सड़क को जाम (Road blockade) करके प्रदर्शन (Protest) किया। तब जाकर नगर निगम के अफसर मौके पर पहुंचे और आश्वासन दिया कि जल्द ही उनकी समस्या हल करेंगे। हालांकि ऐसा कब तक हो पाएगा, इसकी कोई समय सीमा नहीं बतायी गयी है। ये करीब 50 फीट लंबा कच्चा रोड है, जिससे 40 घरों के लोग प्रभावित हैं।
ये पूरा मामला शहर के पूर्वी छोर में बसी नई कालोनी कृष्णा नगर का है। यहां से मेयर का आवास (Mayor House) महज कुछ दूरी पर है लेकिन शहर के मुखिया को इस कालोनी का हाल शायद ही पता हो। अपने हाल को जिम्मेदार अफसरों तक पहुंचाने के लिए 21 दिसंबर को यहां के बाशिंदों ने पुरानी जीटी रोड पर बैरियर लगाकर रास्ता रोक दिया जिससे लंबा जाम लग गया और पुलिस हरकत में आई। इस दौरान लोग नारे लगाते हुए अपनी समस्या बता रहे थे कि कई साल से उन्हें ऐसे ही गंदे पानी और कीचड़ के बीच रहना पड़ रहा है।

कृष्णानगर कालोनी में लोग इस कच्चे रोड से परेशान हैं जिसमें नगर निगम कच्ची मिट्टी की भराई कर रहा है, लोग इसका विरोध करने को सड़क पर उतरे।
अब नगर निगम (Nagar Nigam Sasaram) ने यहां पक्का इंतजाम करने के बजाय कचड़ा भरी मिट्टी डलवानी शुरू कर दी है जिससे और समस्या बढ़ गई है। कच्ची सड़क पर पानी भरा होने से गाड़ियां और ई-रिक्शे पलट जाते हैं। एक घंटे तक दोनोें ओर से जाम लगने के बाद भी जब प्रदर्शनकारी लोग नहीं हटे तो नगर निगम के प्रतिनिधियों को वहां पहुंचकर आश्वासन देना पड़ा।
इस मामले में नगर आयुक्त विकास कुमार का कहना है कि इस इलाके के विकास के लिए नए प्रोजेक्ट पर काम चल रहा है, जल्द ही यहां की समस्या हल हो जाएगी।
मेरी सुनो
गंगा में कटान से चौथी बार विस्थापन का संकट झेल रहे मुंगेर के किसान परिवार
- मुंगेर के सदर ब्लॉक के कुतलूपुर व जाफरनगर गांव में कटान तेज।
- 100 एकड़ से ज्यादा फसलें व सैकड़ों बीघा जमीन नदी में समाई।
- 15 से अधिक घरों पर मंडरा रहा खतरा, लोग फिर से पलायन कर रहे।
मुंगेर | प्रशांत कुमार
बिहार में चुनाव संपन्न हो गए और एक नई सरकार बनने जा रही है, इन सबके बीच आम लोगों के जीवन को देखें तो वे हर दिन उन्हीं समस्याओं से जूझ रहे हैं जो वर्षों से बनी हुई हैं।
बिहार के मुंगेर में गंगा नदी कटान पर है जिससे सदर ब्लॉक के जाफरनगर में कई किसान परिवार चौथी बार विस्थापित होने की कगार पर हैं। यहां अब तक 100 बीघा से ज्यादा जमीन नदी में समा चुकी है।
दूसरी ओर, इसी ब्लॉक के कुतलूपुर पंचायत के वार्ड संख्या 6 में भी हालात बिगड़ गए हैं। यहां 15 नवंबर की सुबह अचानक गंगा का बहाव तेज होने से भीषण कटाव शुरू हो गया है।
पूरा टोला संकट में, लोग घर छोड़ने को मजबूर
कटाव की रफ्तार इतनी तेज है कि लोग मान रहे हैं कि रात होते-होते करीब 15 मकान इसमें समा जाएंगे, अभी इस इलाके में 6 से ज्यादा घर गंगा में समा चुके हैं। लोग अपना जरूरी सामान इकट्ठा करके इलाका छोड़ने को मजबूर हो गए हैं।
ग्रामीणों ने बताया कि गंगा का पानी घटने के बाद दियारा इलाके में लगभग 100 एकड़ खेत में चना, गेहूं और रबी फसलें बोई थीं लेकिन नदी के अचानक तेज बहने से फसलें बह गई हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि उन्होंने पहले भी कई बार प्रशासन से कटाव को थामने से जुड़े काम करवाने की मांग की थी। उनका कहना है कि कटाव की तुरंत रोकथाम नहीं हुई तो कुतलूपुर पंचायत का यह पूरा टोला गंगा में समा सकता है।
मुखिया बोले- हमारी जमीनें नदी में समा गईं
जाफरनगर पंचायत के मुखिया अरुण यादव का कहना है, “हम कई महीनों से कटाव रोकने के लिए प्रशासन से लगातार गुहार लगा रहे हैं।
लेकिन जाफरनगर में अभी तक कोई ठोस कटावरोधी काम शुरू नहीं हुआ। दर्जनों किसानों की जमीन नदी में समा गई है।”
यहां के ग्रामीण विकास कुमार, महेश यादव, आनंद कुमार आदि ने प्रशासन से तुरंत कार्रवाई की मांग की है।
क्या बोले जिलाधिकारी
जिलाधिकारी निखिल धनराज निप्पीणीकर ने कहा कि कुतलूपुर में तुरंत निरीक्षण के आदेश दिए गए हैं और जाफरनगर के लिए कटाव रोकने की योजना तैयार कर ली गई है और बहुत जल्द काम किया जाएगा।
मेरी सुनो
नौकरी के लिए बिहार नहीं छोड़ा, यूट्यूब से सीखकर बतख पालन शुरू किया.. अब अच्छी कमाई कर रहे!
- सहरसा जिले के सितनाबाद गांव के मो. बिलाल ने यूट्यूब से सीखा बतख पालन
- बाहर इंजीनियरिंग की नौकरी करने की जगह अपने गांव में नया रोजगार शुरू किया।
- 1200 बतखों का है फार्म, हर दिन 400 अंडे को स्थानीय बाजार में बेच रहे।
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