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चुनावी डायरी

बिहार : प्रचार के दौरान गाड़ी चढ़ाकर नेता की हत्या, बाहुबली अनंत सिंह के राइट हैंड थे, उनके समर्थकों पर ही आरोप

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  • पटना के मोकामा टाल क्षेत्र में पैठ रखने वाले राजद नेता दुलारचंद की हत्या
  • बाहुबली अनंत सिंह के राइट हैंड माने जाते थे, अभी जनसुराज का समर्थन कर रहे थे।
  • जनसुराज के काफिले में मौजूद थे दुलार चंद, अनंत सिंह के समर्थकों पर गोली मारने का आरोप
घोसवरी (पटना) | कन्हैया मिश्रा 
बिहार के मोकामा विधानसभा क्षेत्र में चुनाव प्रचार के दौरान गोली मारकर और गाड़ी चढ़ाकर एक नेता की हत्या करने का मामला सामने आया है। मरने वाले नेता का नाम दुलारचंद यादव (70) है जो लालू यादव के करीबी रह चुके हैं और बाहुबली अनंत सिंह के राइट हैंड कहे जाते थे। हाल के दिनों में उन्होंने राजद से दूरी बना ली थी और वे जनसुराज के प्रत्याशी के लिए कैंपेनिंग कर रहे थे।
(नोट – इस खबर को वीडियो में देखने के लिए इस लिंक पर जाएं।)
प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि घटना के समय भी दुलार चंद यादव, जनसुराज के प्रत्याशी पीयूष प्रियदर्शी के काफिले में मौजूद थे और सामने से अनंत सिंह का काफिला आ रहा था। अनंत सिंह के काफिले ने जनसुराज प्रत्याशी के काफिले को रोकने की कोशिश की, जिसका विरोध करने पर दुलारचंद यादव की हत्या कर दी गई। घटना के बाद से इलाके में तनाव है और पुलिस व अर्धसैनिक बलों ने इलाके को छावनी में तब्दील कर दिया है।
SP विक्रम सिहाग का कहना है कि दोनों ओर से झड़प हुई और दुलार चंद यादव के पैर पर गोली लगी है। ऐसी जानकारी मिली है कि दुलारचंद के ऊपर गाड़ी चढ़ा दी गई जिससे मौके पर उनकी मौत हो गई, हालांकि इन आरोपों की अभी पुष्टि नहीं हुई है।
इस हत्या का आरोप मोकामा के बाहुबली नेता व जदयू प्रत्याशी अनंत सिंह के समर्थकों पर लगा है, हालांकि उन्होंने आरोपों से इनकार किया है। अनंत सिंह का कहना है कि ये हत्या पूर्व विधायक सूरजभान ने करवायी है। दरअसल बाहुबली सूरजभान की पत्नी वीणा देवी भी मोकामा सीट से राजद के लिए चुनाव मैदान में हैं।
अनंत सिंह के लिए यादव वोट जुटाते थे दुलारचंद
गौैरतलब है कि दुलारचंद यादव को मोकामा के बाहुबली नेता अनंत सिंह का लंबे समय तक ‘राइट हैंड’ माना जाता था, पर राजद से अलग होने के बाद दोनों के बीच दूरी आ गई।
मोकामा के ग्रामीण इलाके ‘टाल क्षेत्र’ में यादव व धानुक समाज के लोगों के बीच दुलार चंद यादव की खास पैठ थी, यहां तक कहा जाता है कि उनके कहने पर ही यहां के 1 लाख वोटर में से अधिकांश का समर्थन अनंत सिंह को मिलता आ रहा था, जो उन्हें इस सीट से चार बार जिताने में मददगार बना।
इस बार अनंत सिंह ने राजद का दामन छोड़कर जदयू से टिकट लिया है और दूसरी ओर उनके पुराने साथी दुलारचंद ने सार्वजनिक रूप से जनसुराज का समर्थन शुरू कर दिया, जिसके बाद दोनों के बीच दूरियां बतायी जा रही थीं।
घटनास्थल पर दुलारचंद यादव के शरीर पर खून के निशान देते जा सकते हैं।

घटनास्थल पर दुलारचंद यादव के शरीर पर खून के निशान देते जा सकते हैं।

शाम चार बजे काफिले पर हमला, मौके पर मौत
यह घटना गुरुवार की शाम चार बजे घोसवारी थाना क्षेत्र के बदलू चक गांव के पास हुई। दरअसल एनडीए प्रत्याशी अनंत सिंह अपने काफिले के साथ तारतार पंचायत में चुनाव प्रचार करने गये थे। जनसुराज के प्रत्याशी पीयूष प्रियदर्शी और दुलारचंद यादव, पंडारक के खुशहालचक गांव में जनसंपर्क अभियान चलाने गये थे। शाम करीब चार बजे दोनों प्रत्याशियों का काफिला लौटते समय आमने-सामने आ गया।
प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि अनंत सिंह समर्थकों ने थार गाड़ी को सड़क पर आड़े-तिरछे खड़ा कर दिया और पीयूष प्रियदर्शी का काफिला रोक दिया। इसके बाद पीयूष के साथ मारपीट की गई और गाड़ी को क्षतिग्रस्त कर दिया गया। प्रतिक्रिया में जनसुराज समर्थकों ने भी पथराव किया।
इस दौरान दुलारचंद ने उतरकर प्रत्याशी पीयूष की मदद करने की कोशिश की, इस दौरान हमलावरों ने पहले उनके पैर में गोली मारी। उसके बाद 15-20 लोगों ने गाड़ी चढ़ा दी, जिससे दुलारचंद की मौके पर ही मौत हो गई।
दुलारचंद के पोेते ने कहा- अनंत सिंह बार-बार धमकी दे रहे थे

मृतक दुलारचंद के चचेरे पोते रविरंजन कुमार ने बताया, ‘अनंत सिंह की ओर से हमें बार-बार जान से मारने की धमकी मिल रही थी। आज अनंत सिंह आए थे। हमारा गोतिया प्रमुख उनके साथ बैठा था। दोनों ने मिलकर क्या योजना बनाई, नहीं पता।

दोनों यहां से निकले। गाड़ी में प्रमुख गोतिया के साथ अनंत सिंह का भतीजा भी था, लेकिन उसका चेहरा ठीक से नहीं देख पाए। थोड़ी देर बाद 15-20 लोग आए और दादा को गोली मार दी। इसके बाद गाड़ी भी चढ़ाई। हम डर से उधर जा नहीं रहे थे।

अनंत सिंह ने पूर्व विधायक सूरजभान पर आरोप लगाया
अनंत सिंह ने हमले का खंडन करते हुए उल्टा पूर्व विधायक सूरजभान सिंह पर आरोप लगाया। उन्होंने कहा, “ये सारा खेल सूरजभान का है। दुलारचंद को उसने अपने यहां रखा था। वो उसी के साथ रहता था।”
“दोनों पक्षों के बीच झड़प के बाद एक की मौत हुई है। हालांकि जनसुराज के प्रत्याशी की ओर से आरोप लगाया गया है कि उनके समर्थक पर गाड़ी चढ़ाई गई। इस आरोप की जांच की जा रही है। मौके पर एफएसएल की टीम ने पहुंचकर साक्ष्य जुटाए हैं। ” – एसपी विक्रम सिहाग 
चार दिन पहले गीत गाने का वीडियो वायरल हुआ था
दुलारचंद को मोकामा टाल क्षेत्र में कुख्यात अपराधी माना जाता था, इनके ऊपर लैंड ग्रैबिंग, वसूली, फायरिंग और मारपीट के कई केस दर्ज थे। चार दिन पहले दुलारचंद का एक वीडियो वायरल हुआ जिसमें वह लालू मुखिया के समर्थन में गीत गा रहे थे। 
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तेजस्वी बोले- मोदी जी 30 साल पुरानी बातें करते हैं, इस घटना पर क्या कहेंगे ?

तेजस्वी यादव ने इस घटना को लेकर कहा कि प्रधानमंत्री जी आप भी आंख खोलकर थोड़ा देख लीजिए कि बिहार का क्या हाल हो गया है, चुनावी आचार संहिता में लोग खुलेआम बंदूक लेकर हत्या कर दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि बिहार में ये किस तरह का काम हो रहा है, यह बताता है कि बिहार में कौन राज कर रहा है। प्रधानमंत्री जी, आप 30 साल पुरानी बातें करते हैं, इस घटना पर क्या कहेंगे?

दूसरी ओर, कांग्रेस सांसद अखिलेश सिंह ने मोकामा में हत्या की घटना पर कहा कि ‘बिहार की जनता से अपील कर रहा हूं कि यही गुंडाराज है, जल्दी विदाई कीजिए इन लोगों की।’

बोलते पन्ने.. एक कोशिश है क्लिष्ट सूचनाओं से जनहित की जानकारियां निकालकर हिन्दी के दर्शकों की आवाज बनने का। सरकारी कागजों के गुलाबी मौसम से लेकर जमीन की काली हकीकत की बात भी होगी ग्राउंड रिपोर्टिंग के जरिए। साथ ही, बोलते पन्ने जरिए बनेगा .. आपकी उन भावनाओं को आवाज देने का, जो अक्सर डायरी के पन्नों में दबी रह जाती हैं।

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बिहार : दही-चूड़ा के बहाने फिर बेटे तेज प्रताप से फिर जुड़ रही लालू परिवार के रिश्तों की डोर

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लालू यादव के बड़े बेटे तेज प्रताप के साथ रिश्ते सुधरने का संकेत।
लालू यादव के बड़े बेटे तेज प्रताप के साथ रिश्ते सुधरने का संकेत।

नई दिल्ली|

लालू यादव और उनके परिवार की बड़े बेटे तेज प्रताप के साथ टूट गए रिश्तों की डोर दोबारा जुड़ती नजर आई है। मकर संक्रांति के मौके पर तेज प्रताप ने चूड़ा भोज का आयोजन करके परिवार को निमंत्रण भेजा, जिसमें लालू यादव ने शामिल होकर पारिवारिक जुड़ाव का संकेत दिया है।

हालांकि तेजस्वी यादव न्यौते के बाद भी कार्यक्रम में नहीं पहुंचे। इस बारे में पूछे जाने पर तेज प्रताप ने कोई नाराजगी नहीं दिेखाई, बल्कि यह कहकर बात टाल दी कि ‘तेजस्वी छोटे भाई हैं, देरी से सोकर उठते हैं।’ इस पूरे घटनाक्रम से साफ संकेत मिला है कि बिहार विधानसभा चुनाव में राजद की करारी हार के बाद आखिर यह बर्फ पिघल रही है।

गौरतलब है कि लालू यादव ने बड़े बेटे की गैर जिम्मेदाराना गतिविधियों का हवाला देते हुए उन्हें पार्टी और परिवार से अलग कर दिया था।

तेज प्रताप बोले- पिता का आशीर्वाद मिला

दही-चूड़ा कार्यक्रम के दौरान आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद और बड़े बेटे तेज प्रताप यादव एक ही सोफे पर बैठे नजर आए। लालू प्रसाद के भोज में आने के बाद तेज प्रताप यादव ने मीडिया से बात करते हुए कहा, “मुझे पिता का आशीर्वाद मिला है।” साथ ही बोले कि “बिहार के गवर्नर भी आएं थे, उन्होंने भी आशीर्वाद दिया है. बड़े-बुजुर्गों से आशीर्वाद लेते हुए कुछ नया काम करना है।”

एक दिन पहले घर जाकर न्यौता दिया था

मां राबड़ी देवी को निमंत्रण देते उनके बेटे तेज प्रताप जो पार्टी और परिवार से अलग हो चुके हैं।

मां राबड़ी देवी को निमंत्रण देते उनके बेटे तेज प्रताप जो पार्टी और परिवार से अलग हो चुके हैं।

13 जनवरी को तेज प्रताप ने अपने एक्स हैंडिल से भाई तेजस्वी यादव और मां राबड़ी देवी को दही-चूड़ा के आयोजन का निमंत्रण देते हुए तस्वीरें साझा की थीं, जिसने लोगों को चौंका दिया। तेजप्रताप अपने भाई तेजस्वी के घर पहुंचे थे, वहां अपनी भतीजी के साथ भी उन्होंने एक फोटो खिंचवाया।

डिप्टी सीएम विजय सिन्हा भी शामिल हुए

तेज प्रताप के इस कार्यक्रम में बिहार के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद शामिल हुए। साथ ही, विपक्षी दल भाजपा के प्रमुख नेता व डिप्टी सीएम विजय कुमार सिन्हा ने भी शिरकत की। गौरतलब है कि एक दिन पहले डिप्टी सीएम सिन्हा के आवास पर दही-चूड़ा का आयोजन था, जिसमें तेजप्रताप शामिल हुए थे।

लालू के साले बोले- परिवार एक है, कोई दूरी नहीं

लालू यादव के अलावा तेज प्रताप यादव के दही-चूड़ा भोज में उनके बड़े मामा प्रभुनाथ यादव भी पहुंचे। उन्होंने कहा, “राज्यपाल और लालू जी ने आशीर्वाद दिए हैं, आज से दिन शुभ होने वाला है, परिवार एक है, कोई दूरी नहीं है।” वह बोले कि हमने अपने भगिना को आशीर्वाद दिया है। साथ ही उन्होंने यह भी बड़ी बात कही कि तेज प्रताप यादव बहुत आगे जाने वाले हैं। दोनों भाई एक साथ हैं। सारे मामा का आशीर्वाद है।

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बिहार : बेटे की हार से बौखलाए RJD सांसद ने गाली दी; जनता ने विकास पर सवाल किया तो बोले- यहां यादवों के वोट नहीं मिले

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जहानाबाद से राजद सांसद सुरेंद्र प्रसाद यादव। (फाइल फोटो, साभार Facebook)
जहानाबाद सांसद सुरेंद्र यादव
  • जहानाबाद के सांसद सुरेंद्र यादव ने अभद्र भाषा में जनता को डपटा, वीडियो वायरल।
  • गया जी जिले की जनता ने सांसद से पूछा था विकास कार्य कराने से जुड़ा सवाल।
  • सांसद के बेटे ने विधायकी लड़ी पर हार हुई, सांसद बोले- यादवों के कम वोट मिले।

जहानाबाद | शिवा केसरी

NDA सरकार के नेताओं और मंत्रियों की कार्यशैली को आड़ेहाथों लेने वाले राजद प्रमुख तेजस्वी यादव की पार्टी के सांसद ने सरेआम जनता को गाली दी। जहानाबाद लोकसभा सीट से जीते सांसद सुरेंद्र यादव 12 जनवरी को गयाजी जिले में पहुंचे तो विकास कार्यों से जुड़े एक सवाल के जवाब में उन्होंने अपशब्द बोले। साथ ही कहा कि इस इलाके के यादवों के उन्हें सिर्फ 15 हजार वोट ही मिले। गौरतलब है कि मंत्री जी खुद भी यादव समाज से आते हैं।

जहां से 8 बार विधायक बने, उस सीट से बेटा हार गया

दरअसल, हाल में संपन्न हुए विधानसभा चुनाव में सांसद सुरेंद्र यादव के बेटे को बेलागंज विधानसभा की जनता ने हरा दिया जो गयाजी जिले में आता है। जबकि बेलागंज विधानसभा सीट से खुद सुरेंद्र यादव आठ बार विधायक रह चुके हैं। 2024 में जहानाबाद सीट से सांसदी जीत जाने के बाद उनकी इस सीट से राजद ने उनके बेटे विश्वनाथ यादव को टिकट दिया था, पर वे जदयू के प्रत्याशी से हार गए। माना जा रहा है कि सांसद जी का इस इलाके की जनता पर निकला ‘गुस्सा’ दरअसल बेटे की चुनावी हार से जुड़ी बौखलाहट है, जिसका वीडियो वायरल हो गया है।

सांसद ने मर्यादा तोड़ी, बोले- कम वोट में काम क्या कराएंगे?

जहानाबाद के सांसद डॉ. सुरेंद्र प्रसाद यादव, पूर्व मंत्री रहे हैं और राजद के कद्दावर नेता माने जाते हैं। गयाजी जिले के खिजरसराय प्रखंड में वे जनता से ही भिड़ गए और गाली दी। दरअसल यहां के सरैया में एक क्रिकेट टूर्नामेंट में वे बतौर मुख्य अतिथि पहुंचे थे, आयोजन से लौटते हुए स्थानीय लोगों ने उनसे क्षेत्र में विकास से जुड़ा काम कराने पर सवाल पूछ दिया। जिसपर जवाब देने के दौरान सांसद सुरेंद्र यादव ने भाषा की सारी मर्यादाएं तोड़ दीं। वो गाली देते हुए यह कहते नज़र आए कि “यहां से यादव का 15 हजार वोट आरजेडी को मिला है। ऐसे में हम काम क्या करेंगे।” वायरल वीडियो में वे अपशब्द बोलते हुए कुछ लोगों पर आरोप लगा रहे हैं कि उन्होंने वोट किसी और को दिलवाया है।

अपने सांसद के व्यवहार पर RJD चुप, जदयू ने सवाल पूछा

अब तक इस मामले पर सांसद की ओर से न तो कोई सफाई पेश की गई है और न ही RJD की ओर से अपने सांसद के व्यवहार पर कोई बयान जारी हुआ है। सांसद के वीडियो पर प्रतिक्रिया देते हुए जदयू MLC और प्रवक्ता नीरज कुमार ने कहा कि “क्या राजद ने इस तरह के बिगड़ैल सांसद को खुलेआम गाली देने की छूट दे दी है? अगर नहीं, तो लालू यादव अपने सांसद पर कार्रवाई करें।”

पहले भी व्यवहार को लेकर चर्चा में रहे सांसद

बीबीसी के मुताबिक, साल 1998 में तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी और गृह मंत्री लालकृष्ण आडवाणी की मौजूदगी में महिला आरक्षण विधेयक संसद में पेश किया जा रहा था, तब इस बिल का विरोध कर रहे राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) और समाजवादी पार्टी के सांसद हंगामा कर रहे थे। इतने में बिहार के जहानाबाद लोकसभा क्षेत्र के सांसद सुरेंद्र प्रसाद यादव ने लालकृष्ण आडवाणी से बिल की कॉपी छीनकर फाड़ दी। सुरेंद्र प्रसाद यादव इस कारण लंबे समय तक सुर्ख़ियों में रहे।

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जिला परिषद चुनाव : गोपालगंज में 24 साल राजद ने जीता अध्यक्ष पद, विधानसभा चुनाव में सभी सीटें जीतने वाली NDA अपना गढ़ नहीं बचा सकी

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जिला परिषद अध्यक्ष पद जीतकर अमित राज ने राजद का 24 साल का सूखा खत्म कर दिया।
जिला परिषद अध्यक्ष पद जीतकर अमित राज ने राजद का 24 साल का सूखा खत्म कर दिया।
  • गोपालगंज की सभी छह विधानसभा सीटों पर NDA के विधायक जीते हैं।
  • इसके बाद भी जिला परिषद अध्यक्ष पद के चुनाव में भाजपा प्रत्याशी की हार हुई।

गोपालगंज | आलोक कुमार

बिहार के गोपालगंज में जिला परिषद अध्यक्ष (Zila Parishad Chairman) पद पर 24 साल के बाद राजद का कब्जा हुआ है। यह सीट 2001 से लगातार NDA के घटक दलों के समर्थित नेता ही जीतते आ रहे थे।

एक महीने पहले यह सीट तब खाली हुई जब भाजपा नेता व जिला परिषद अध्यक्ष सुभाष सिंह ने विधायकी का चुनाव (Assembly Election) जीतकर इस पद से इस्तीफा दे दिया था। निर्वाचन आयोग के आदेश पर डीएम ने सोमवार को रिक्त पद पर चुनाव करवाया, जिसमें राजद नेता अमित राय (Amit Rai) की जीत हुई है। विधानसभा चुनाव में गोपालगंज की सभी छह विधानसभा सीटों पर NDA की जीत के बाद भी वह जिला परिषद अध्यक्ष पद नहीं बचा सकी, इस जीत से राजद को ऊर्जा मिलेगी।

भाजपा प्रत्याशी को 7 वोटों से हराया 

राजद समर्थित प्रत्याशी अमित राय को कुल 19 वोट मिले, जबकि भाजपा प्रत्याशी दीपिका सिंह को 12 वोट मिले। इस तरह अमित राय ने उन्हें सात वोटों के अंतर से हरा दिया। बता दें कि भाजपा प्रत्याशी दीपिका सिेंह के पति विकास सिंह भाजपा के सक्रिय नेता हैं।

तीन बार जिप उपाध्यक्ष रह चुके हैं अमित राय 

जिला समाहरणालय (Collectorate) में जिला परिषद अध्यक्ष पद पर हुए चुनाव को राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के नेता अमित राय ने जीत लिया। वे राजद की पूर्व विधायक किरण राय के बेटे हैं और लगातार तीन बार से जिला परिषद उपाध्यक्ष (Zila Parishad Vice Chairman) का पद जीत चुके हैं।

जीत के बाद कहा- पार्टी लाइन से उठकर वोटिंग हुई

नवनिर्वाचित जिला परिषद अध्यक्ष अमित राय ने कहा कि जिला परिषद सदस्यों ने जाति और पार्टी लाइन से ऊपर उठकर मतदान किया है, इसके लिए वे सभी सदस्यों के आभारी हैं।

उन्होंने कहा कि हार-जीत को विरोध के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए क्योंकि सभी जिला परिषद सदस्य एक टीम का हिस्सा हैं। यह जीत सभी सदस्यों की जीत है और वे सभी को बधाई देते हैं।

2001 से NDA का प्रत्याशी बनता रहा जिप अध्यक्ष

जिला परिषद अध्यक्ष पद पर 2001 से एनडीए का कब्जा रहा। 2001 में राजद के गढ़ में वर्तमान कुचायकोट विधायक अमरेंद्र कुमार पांडेय उर्फ पप्पू पांडेय अध्यक्ष बने। 2005 में अमरेंद्र पांडेय कटेया से विधायक बने, तब 2006 में उनकी भाभी उर्मिला पांडेय अध्यक्ष चुनी गई। 2011 में चंदा देवी, 2016 में विधायक अमरेंद्र पांडेय के भतीजे मुकेश पांडेय अध्यक्ष बने।

 

 

 

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