चुनावी डायरी
सासाराम मतगणना केंद्र में ट्रक घुसने से विवाद, विपक्ष ने EVM बदलने का आरोप लगाया; DM बोलीं- सिर्फ कवर थे, शहर छावनी में तब्दील
कथित तौर पर EVM से भरा हुआ ट्रक सासाराम (रोहतास जिला) के मतगणना केंद्र बिना किसी पूर्व सूचना और पारदर्शिता के जिला प्रशासन द्वारा क्यों घुसाया गया?
— Rashtriya Janata Dal (@RJDforIndia) November 12, 2025
ट्रक चालकों को सामने लाए बिना क्यों भगा दिया गया?
2 बजे से यहां CCTV कैमरा का फीड क्यों बंद रहा?
पूरा फुटेज जारी किया जाए!
ट्रक में… pic.twitter.com/QzeA3MxlHF
- बुधवार-गुरुवार की रात तीन बजे बवाल बढ़ने के बाद पूरा जिला छावनी में तब्दील हो गया है।
सासाराम | अविनाश श्रीवास्तव
बिहार विधानसभा चुनाव के नतीजे आने से ठीक पहले रोहतास जिले में एक बड़ा बवाल हो गया। जिले में ईवीएम रखने के लिए बनाए गए स्ट्रॉन्ग रूम परिसर में 12 नवंबर की शाम आठ बजे एक ट्रक घुस गया। जिसे देख वहां मौजूद प्रत्याशियों और समर्थकों ने हंगामा शुरू कर दिया और आरोप लगाया कि ईवीएम बदलने की कोशिश हो रही है, साथ ही दावा किया गया कि ट्रक ईवीएम मशीनों से भरा हुआ है।
धीरे-धीरे ईवीएम बदले जाने की अफवाह इतनी ज्यादा फैल गई कि रात ढाई बजे डीएम को मौके पर पहुंचकर प्रत्याशियों के सामने सफाई देनी पड़ी। उन्होंने बताया कि ट्रक में ईवीएम के कवर रखे हुए हैं जो वोटिंग से ठीक पहले इन मशीनों की कमीशनिंग के वक्त खाली हुए थे।
इस मामले में RJD ने रात ही में ट्वीट करके चुनाव आयोग से जवाब मांगा है। राजद ने यह भी आरोप लगाया कि “रात दो बजे के बाद से काउंटिंग सेंटर के CCTV बंद कर दिए गए हैं।”
हंगामे के बाद स्थिति को काबू में रखने के लिए पूरी शहर में पुलिस व CAPF के जवान तैनात करके इसे छावनी में बदल दिया गया।
अचानक स्ट्रांग रूम में घुसा ट्रक, हंगामा शुरू
घटना सासाराम के कृषि बाजार समिति परिसर की है, जहां सात विधानसभा क्षेत्रों के ईवीएम रखे गए हैं। बुधवार शाम 8 बजे एक ट्रक स्ट्रांग रूम के गेट के अंदर पहुंच गया, जिसमें टीन के खाली बक्से लदे थे।

स्ट्रॉन्ग रूम परिसर में एक ट्रक प्रवेश कर गया, मौके पर मौजूद प्रत्याशी व समर्थकों का कहना है कि इसमें ईवीएम थीं।
इसे देखकर वहां मौजूद महागठबंधन और निर्दलीय उम्मीदवारों के समर्थकों ने हंगामा शुरू कर दिया। “वोट चोर–गद्दी छोड़” जैसे नारे लगे, और लोग गेट पर जमा हो गए। सूचना मिलते ही डीएम उदिता सिंह और एसपी रोशन कुमार फोर्स के साथ मौके पर पहुंचे।
डीएम-एसपी ने की जांच, कहा- ‘बक्से खाली थे’
देर रात तक हंगामा और बढ़ जाने पर अधिकारियों ने ट्रक की जांच की तो पाया कि सभी बक्से खाली थे। डीएम उदिता सिंह ने कहा,
“सीसीटीवी फुटेज की जांच कराई जा रही है। अगर किसी प्रकार की गड़बड़ी पाई जाती है तो विधि सम्मत कार्रवाई की जाएगी। इन बक्सों में ही EVM बंद होकर आई थीं जो कमीशनिंग के वक्त निकाली गई थीं, ये खाली बक्से हैं। हम चुनाव आयोग को अपनी रिपोर्ट भेज देंगे।”
अफवाहों से मचा हड़कंप, प्रत्याशी रातभर डटे रहे
ट्रक के प्रवेश के बाद इलाके में यह अफवाह फैल गई कि “ईवीएम बदली जा रही है”। इसके बाद कई प्रत्याशी और उनके समर्थक रातभर मतगणना केंद्र के बाहर डटे रहे।
राजद, कांग्रेस और निर्दलीय उम्मीदवारों ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की।
कांग्रेस प्रत्याशी संतोष मिश्रा ने चुनाव पर्यवेक्षक को लिखित शिकायत सौंपी, जबकि निर्दलीय उम्मीदवार ज्योति सिंह ने आरोप लगाया कि “विरोध करने पर पुलिस ने लाठीचार्ज किया और एफआईआर की धमकी दी।”
इस पर एसपी रोशन कुमार ने लाठीचार्ज के आरोप को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि “स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है।”
RJD ने उठाए सवाल, चुनाव आयोग से स्पष्टीकरण मांगा
घटना के बाद आरजेडी ने एक्स (पूर्व ट्विटर) पर एक वीडियो साझा कर प्रशासन पर गंभीर सवाल उठाए। पार्टी ने पूछा – “बिना सूचना स्ट्रांग रूम परिसर में ट्रक कैसे घुसा?
ट्रक चालक को सामने क्यों नहीं लाया गया? और रात 2 बजे के बाद CCTV फुटेज क्यों बंद हो गया?” आरजेडी ने चुनाव आयोग से फुटेज सार्वजनिक करने और जांच की मांग की, साथ ही चेतावनी दी कि यदि पारदर्शिता नहीं बरती गई तो “हजारों लोग स्ट्रांग रूम तक पहुंच जाएंगे।”
प्रशासन की सफाई- “मतगणना के बाद ईवीएम रखने के बक्से थे”
जांच के बाद अधिकारियों ने बताया कि ट्रक में रखे बक्से मतगणना के बाद ईवीएम रखने के लिए थे, जो पहले पहुंचने थे लेकिन तकनीकी देरी की वजह से देर रात पहुंचे।
एसडीएम आशुतोष रंजन ने कहा कि ट्रक की एंट्री की जानकारी दी गई थी और सुरक्षा में कोई चूक नहीं हुई है। उन्होंने यह भी कहा कि “काउंटिंग सेंटर पूरी तरह सील है और हर गतिविधि CCTV निगरानी में है।”
काउंसलिंग सेंटर में बढ़ी निगरानी
घटना के बाद प्रशासन ने मतगणना स्थल पर सुरक्षा बढ़ा दी है। सीसीटीवी कैमरों की मॉनिटरिंग लगातार की जा रही है और अतिरिक्त फोर्स तैनात की गई है। डीएम ने सभी प्रत्याशियों से अपील की कि, “अफवाहों पर ध्यान न दें, मतगणना प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी और सुरक्षित है।”
प्रेस कॉन्फ्रेंस बुलाकर डीएम ने फिर कहा- ट्रक में खाली बक्से थे
अगले दिन 13 नवंबर को डीएम उदिता सिंह ने प्रेस कॉन्फ्रेंस करके आरोपों पर अपना पक्ष रखा। डीएम ने बताया कि प्रत्याशियों की आशंकाओं को दूर करने के लिए हमने ट्रक मेें रखे हर बॉक्स को खोलकर दिखाया था, वे सभी बॉक्स खाली पाए गए।
ईवीएम बदलने का आरोप गलत है। साथ ही, उन्होंने कहा कि तीन लेयर की सुरक्षा व्यवस्था लगाई गई है और सभी सीसीटीवी कैमरे एक्टिव हैं। इन्हें व्यूइंग सेंटर पर जाकर प्रत्याशी या उनके ऑथोराइज एजेंट जांच सकते हैं।
Edited by Mahak Arora (content writer)
चुनावी डायरी
बिहार : दही-चूड़ा के बहाने फिर बेटे तेज प्रताप से फिर जुड़ रही लालू परिवार के रिश्तों की डोर
नई दिल्ली|
लालू यादव और उनके परिवार की बड़े बेटे तेज प्रताप के साथ टूट गए रिश्तों की डोर दोबारा जुड़ती नजर आई है। मकर संक्रांति के मौके पर तेज प्रताप ने चूड़ा भोज का आयोजन करके परिवार को निमंत्रण भेजा, जिसमें लालू यादव ने शामिल होकर पारिवारिक जुड़ाव का संकेत दिया है।
हालांकि तेजस्वी यादव न्यौते के बाद भी कार्यक्रम में नहीं पहुंचे। इस बारे में पूछे जाने पर तेज प्रताप ने कोई नाराजगी नहीं दिेखाई, बल्कि यह कहकर बात टाल दी कि ‘तेजस्वी छोटे भाई हैं, देरी से सोकर उठते हैं।’ इस पूरे घटनाक्रम से साफ संकेत मिला है कि बिहार विधानसभा चुनाव में राजद की करारी हार के बाद आखिर यह बर्फ पिघल रही है।
गौरतलब है कि लालू यादव ने बड़े बेटे की गैर जिम्मेदाराना गतिविधियों का हवाला देते हुए उन्हें पार्टी और परिवार से अलग कर दिया था।
तेज प्रताप बोले- पिता का आशीर्वाद मिला
दही-चूड़ा कार्यक्रम के दौरान आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद और बड़े बेटे तेज प्रताप यादव एक ही सोफे पर बैठे नजर आए। लालू प्रसाद के भोज में आने के बाद तेज प्रताप यादव ने मीडिया से बात करते हुए कहा, “मुझे पिता का आशीर्वाद मिला है।” साथ ही बोले कि “बिहार के गवर्नर भी आएं थे, उन्होंने भी आशीर्वाद दिया है. बड़े-बुजुर्गों से आशीर्वाद लेते हुए कुछ नया काम करना है।”
एक दिन पहले घर जाकर न्यौता दिया था
13 जनवरी को तेज प्रताप ने अपने एक्स हैंडिल से भाई तेजस्वी यादव और मां राबड़ी देवी को दही-चूड़ा के आयोजन का निमंत्रण देते हुए तस्वीरें साझा की थीं, जिसने लोगों को चौंका दिया। तेजप्रताप अपने भाई तेजस्वी के घर पहुंचे थे, वहां अपनी भतीजी के साथ भी उन्होंने एक फोटो खिंचवाया।
डिप्टी सीएम विजय सिन्हा भी शामिल हुए
तेज प्रताप के इस कार्यक्रम में बिहार के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद शामिल हुए। साथ ही, विपक्षी दल भाजपा के प्रमुख नेता व डिप्टी सीएम विजय कुमार सिन्हा ने भी शिरकत की। गौरतलब है कि एक दिन पहले डिप्टी सीएम सिन्हा के आवास पर दही-चूड़ा का आयोजन था, जिसमें तेजप्रताप शामिल हुए थे।
लालू के साले बोले- परिवार एक है, कोई दूरी नहीं
लालू यादव के अलावा तेज प्रताप यादव के दही-चूड़ा भोज में उनके बड़े मामा प्रभुनाथ यादव भी पहुंचे। उन्होंने कहा, “राज्यपाल और लालू जी ने आशीर्वाद दिए हैं, आज से दिन शुभ होने वाला है, परिवार एक है, कोई दूरी नहीं है।” वह बोले कि हमने अपने भगिना को आशीर्वाद दिया है। साथ ही उन्होंने यह भी बड़ी बात कही कि तेज प्रताप यादव बहुत आगे जाने वाले हैं। दोनों भाई एक साथ हैं। सारे मामा का आशीर्वाद है।
चुनावी डायरी
बिहार : बेटे की हार से बौखलाए RJD सांसद ने गाली दी; जनता ने विकास पर सवाल किया तो बोले- यहां यादवों के वोट नहीं मिले
- जहानाबाद के सांसद सुरेंद्र यादव ने अभद्र भाषा में जनता को डपटा, वीडियो वायरल।
- गया जी जिले की जनता ने सांसद से पूछा था विकास कार्य कराने से जुड़ा सवाल।
- सांसद के बेटे ने विधायकी लड़ी पर हार हुई, सांसद बोले- यादवों के कम वोट मिले।
जहानाबाद | शिवा केसरी
NDA सरकार के नेताओं और मंत्रियों की कार्यशैली को आड़ेहाथों लेने वाले राजद प्रमुख तेजस्वी यादव की पार्टी के सांसद ने सरेआम जनता को गाली दी। जहानाबाद लोकसभा सीट से जीते सांसद सुरेंद्र यादव 12 जनवरी को गयाजी जिले में पहुंचे तो विकास कार्यों से जुड़े एक सवाल के जवाब में उन्होंने अपशब्द बोले। साथ ही कहा कि इस इलाके के यादवों के उन्हें सिर्फ 15 हजार वोट ही मिले। गौरतलब है कि मंत्री जी खुद भी यादव समाज से आते हैं।
जहां से 8 बार विधायक बने, उस सीट से बेटा हार गया
दरअसल, हाल में संपन्न हुए विधानसभा चुनाव में सांसद सुरेंद्र यादव के बेटे को बेलागंज विधानसभा की जनता ने हरा दिया जो गयाजी जिले में आता है। जबकि बेलागंज विधानसभा सीट से खुद सुरेंद्र यादव आठ बार विधायक रह चुके हैं। 2024 में जहानाबाद सीट से सांसदी जीत जाने के बाद उनकी इस सीट से राजद ने उनके बेटे विश्वनाथ यादव को टिकट दिया था, पर वे जदयू के प्रत्याशी से हार गए। माना जा रहा है कि सांसद जी का इस इलाके की जनता पर निकला ‘गुस्सा’ दरअसल बेटे की चुनावी हार से जुड़ी बौखलाहट है, जिसका वीडियो वायरल हो गया है।
सांसद ने मर्यादा तोड़ी, बोले- कम वोट में काम क्या कराएंगे?
जहानाबाद के सांसद डॉ. सुरेंद्र प्रसाद यादव, पूर्व मंत्री रहे हैं और राजद के कद्दावर नेता माने जाते हैं। गयाजी जिले के खिजरसराय प्रखंड में वे जनता से ही भिड़ गए और गाली दी। दरअसल यहां के सरैया में एक क्रिकेट टूर्नामेंट में वे बतौर मुख्य अतिथि पहुंचे थे, आयोजन से लौटते हुए स्थानीय लोगों ने उनसे क्षेत्र में विकास से जुड़ा काम कराने पर सवाल पूछ दिया। जिसपर जवाब देने के दौरान सांसद सुरेंद्र यादव ने भाषा की सारी मर्यादाएं तोड़ दीं। वो गाली देते हुए यह कहते नज़र आए कि “यहां से यादव का 15 हजार वोट आरजेडी को मिला है। ऐसे में हम काम क्या करेंगे।” वायरल वीडियो में वे अपशब्द बोलते हुए कुछ लोगों पर आरोप लगा रहे हैं कि उन्होंने वोट किसी और को दिलवाया है।
अपने सांसद के व्यवहार पर RJD चुप, जदयू ने सवाल पूछा
अब तक इस मामले पर सांसद की ओर से न तो कोई सफाई पेश की गई है और न ही RJD की ओर से अपने सांसद के व्यवहार पर कोई बयान जारी हुआ है। सांसद के वीडियो पर प्रतिक्रिया देते हुए जदयू MLC और प्रवक्ता नीरज कुमार ने कहा कि “क्या राजद ने इस तरह के बिगड़ैल सांसद को खुलेआम गाली देने की छूट दे दी है? अगर नहीं, तो लालू यादव अपने सांसद पर कार्रवाई करें।”
पहले भी व्यवहार को लेकर चर्चा में रहे सांसद
बीबीसी के मुताबिक, साल 1998 में तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी और गृह मंत्री लालकृष्ण आडवाणी की मौजूदगी में महिला आरक्षण विधेयक संसद में पेश किया जा रहा था, तब इस बिल का विरोध कर रहे राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) और समाजवादी पार्टी के सांसद हंगामा कर रहे थे। इतने में बिहार के जहानाबाद लोकसभा क्षेत्र के सांसद सुरेंद्र प्रसाद यादव ने लालकृष्ण आडवाणी से बिल की कॉपी छीनकर फाड़ दी। सुरेंद्र प्रसाद यादव इस कारण लंबे समय तक सुर्ख़ियों में रहे।
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जिला परिषद चुनाव : गोपालगंज में 24 साल राजद ने जीता अध्यक्ष पद, विधानसभा चुनाव में सभी सीटें जीतने वाली NDA अपना गढ़ नहीं बचा सकी
- गोपालगंज की सभी छह विधानसभा सीटों पर NDA के विधायक जीते हैं।
- इसके बाद भी जिला परिषद अध्यक्ष पद के चुनाव में भाजपा प्रत्याशी की हार हुई।
गोपालगंज | आलोक कुमार
बिहार के गोपालगंज में जिला परिषद अध्यक्ष (Zila Parishad Chairman) पद पर 24 साल के बाद राजद का कब्जा हुआ है। यह सीट 2001 से लगातार NDA के घटक दलों के समर्थित नेता ही जीतते आ रहे थे।
एक महीने पहले यह सीट तब खाली हुई जब भाजपा नेता व जिला परिषद अध्यक्ष सुभाष सिंह ने विधायकी का चुनाव (Assembly Election) जीतकर इस पद से इस्तीफा दे दिया था। निर्वाचन आयोग के आदेश पर डीएम ने सोमवार को रिक्त पद पर चुनाव करवाया, जिसमें राजद नेता अमित राय (Amit Rai) की जीत हुई है। विधानसभा चुनाव में गोपालगंज की सभी छह विधानसभा सीटों पर NDA की जीत के बाद भी वह जिला परिषद अध्यक्ष पद नहीं बचा सकी, इस जीत से राजद को ऊर्जा मिलेगी।
भाजपा प्रत्याशी को 7 वोटों से हराया
राजद समर्थित प्रत्याशी अमित राय को कुल 19 वोट मिले, जबकि भाजपा प्रत्याशी दीपिका सिंह को 12 वोट मिले। इस तरह अमित राय ने उन्हें सात वोटों के अंतर से हरा दिया। बता दें कि भाजपा प्रत्याशी दीपिका सिेंह के पति विकास सिंह भाजपा के सक्रिय नेता हैं।
तीन बार जिप उपाध्यक्ष रह चुके हैं अमित राय
जिला समाहरणालय (Collectorate) में जिला परिषद अध्यक्ष पद पर हुए चुनाव को राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के नेता अमित राय ने जीत लिया। वे राजद की पूर्व विधायक किरण राय के बेटे हैं और लगातार तीन बार से जिला परिषद उपाध्यक्ष (Zila Parishad Vice Chairman) का पद जीत चुके हैं।
जीत के बाद कहा- पार्टी लाइन से उठकर वोटिंग हुई
नवनिर्वाचित जिला परिषद अध्यक्ष अमित राय ने कहा कि जिला परिषद सदस्यों ने जाति और पार्टी लाइन से ऊपर उठकर मतदान किया है, इसके लिए वे सभी सदस्यों के आभारी हैं।
उन्होंने कहा कि हार-जीत को विरोध के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए क्योंकि सभी जिला परिषद सदस्य एक टीम का हिस्सा हैं। यह जीत सभी सदस्यों की जीत है और वे सभी को बधाई देते हैं।
2001 से NDA का प्रत्याशी बनता रहा जिप अध्यक्ष
जिला परिषद अध्यक्ष पद पर 2001 से एनडीए का कब्जा रहा। 2001 में राजद के गढ़ में वर्तमान कुचायकोट विधायक अमरेंद्र कुमार पांडेय उर्फ पप्पू पांडेय अध्यक्ष बने। 2005 में अमरेंद्र पांडेय कटेया से विधायक बने, तब 2006 में उनकी भाभी उर्मिला पांडेय अध्यक्ष चुनी गई। 2011 में चंदा देवी, 2016 में विधायक अमरेंद्र पांडेय के भतीजे मुकेश पांडेय अध्यक्ष बने।
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