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रिपोर्टर की डायरी

लखीसराय(बिहार) : भोजपुर के किडनैप हुए टीचर केस की जांच में दारोगा ने ही सबूत मिटाए, सीबीआई ने पकड़ा

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  • दारोगा अंजली कुमारी को सीबीआई ने लखीसराय से गिरफ्तार किया है।

लखीसराय | गोपाल प्रसाद आर्य

बिहार में अपराध के खिलाफ पुलिस के लापरवाह रवैये और जांच को बदलने की कोशिश जैसे आपराधिक कृत्यों के हाल में कई मामले सामने आए हैं। ऐसा ही एक केस भोजपुर जिले के एक कोचिंग टीचर के ढाई साल पहले लापता हो जाने से जुड़ा है। जिसकी जांच में एक महिला दारोगा की भूमिका को संदिग्ध पाते हुए सीबीआई की टीम ने 29 जनवरी को उन्हें गिरफ्तार कर लिया है। टीचर का आजतक कोई सुराग नहीं लगा है।

गिरफ्तार की गई दारोगा अंजली कुमारी लखीसराय जिले में पोस्टेड है, जहां आकर सीबीआई ने यह गिरफ्तारी की। दारोगा अंजली कुमारी 2019 बैच की है और इनके ऊपर आरोप है कि इन्होंने टीचर के अपहरण मामले के साक्ष्य छुपाने और जांच की दिशा बदलने की कोशिश की। यह पूरा मामला पटना हाईकोर्ट के पास पहुंचने के बाद केस की जांच सीबीआई को सौंपी गई थी।

दरअसल, भोजपुर जिले के चर्चित कोचिंग टीचर कमलेश राय रहस्यमय ढंग से लापता हो गए थे। वे भोजपुर के जिलामुख्यालय आरा में एक निजी कोचिंग संस्थान में पढ़ाते थे और खुद भी कॉम्पटीशन की तैयारी कर रहे थे। कमलेश की मां के मुताबिक, कमलेश राय और अंजली कुमारी दोनों एक ही इलाके में किराए के मकान में रहकर यह तैयारी कर रहे थे। दोनों दरोगा में भर्ती होना चाहते थे। कमलेश एक नंबर से प्रतियोगी परीक्षा में पीछे रह गया, जबकि अंजली का चयन हो गया था।

परिवार का कहना है कि वे एक रिश्तेदार के अंतिम संस्कार में शामिल होने निकले थे, लेकिन इसके बाद उनका कोई पता नहीं चला और मोबाइल फोन भी बंद मिला। इस मामले की जांच को लेकर दारोगा अंजली कुमारी को गिरफ्तार किया गया है। हालांकि सीबीआई अभी तक टीचर को नहीं ढूंढ पाई है। इस मामले में सीबीआई ने मुख्य आरोपी रूपेश कुमार चौबे को गिरफ्तार किया है। उससे हुई पूछताछ और डिजिटल साक्ष्यों की जांच में महिला दारोगा की संदिग्ध भूमिका सामने आने पर दूसरी बड़ी गिरफ्तारी हुई है।

सूत्रों के मुताबिक, एजेंसी को कुछ अहम ऑडियो क्लिप और डिजिटल सबूत मिले हैं, जिनकी फॉरेंसिक जांच जारी है। फिलहाल सीबीआई शिक्षक की बरामदगी के लिए जांच तेज कर चुकी है और आसपास के जिलों में मिले अज्ञात शवों के रिकॉर्ड का मिलान किया जा रहा है। इस गिरफ्तारी से पुलिस महकमे में हड़कंप है और आने वाले दिनों में और बड़े खुलासों की संभावना जताई जा रही है।

बोलते पन्ने.. एक कोशिश है क्लिष्ट सूचनाओं से जनहित की जानकारियां निकालकर हिन्दी के दर्शकों की आवाज बनने का। सरकारी कागजों के गुलाबी मौसम से लेकर जमीन की काली हकीकत की बात भी होगी ग्राउंड रिपोर्टिंग के जरिए। साथ ही, बोलते पन्ने जरिए बनेगा .. आपकी उन भावनाओं को आवाज देने का, जो अक्सर डायरी के पन्नों में दबी रह जाती हैं।

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