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अब खुद दर्ज करें अपनी जनगणना, जानें पोर्टल पर स्व-गणना का स्टेप-बाय-स्टेप तरीका

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एआई निर्मित प्रतीकात्मक तस्वीर (क्रेडिट - जेमिनी)
एआई निर्मित प्रतीकात्मक तस्वीर (क्रेडिट - जेमिनी)

नई दिल्ली | भारत में 15 साल के अंतराल पर नई जनगणना शुरू हो चुकी है। इस बार जनगणना पूरी डिजिटल तरीके से होगी। आप खुद जनगणना पोर्टल पर जाकर स्मार्ट फोन की मदद से अपनी जनगणना स्वयं दर्ज कर सकते हैं। उत्तर प्रदेश में यह प्रक्रिया मई में शुरू होगी जबकि बिहार में 17 अप्रैल से इसकी शुरुआत हो चुकी है। इसके तरीके को चरण वार ढंग से समझिए।

इस तरह खुलेगा स्व जनगणना का फॉर्म

इस तरह खुलेगा स्व जनगणना का फॉर्म (क्रेडिट – se.census.gov.in)

इस तरह करें स्व-गणना

  • आधिकारिक पोर्टल पर लॉगिन: सबसे पहले जनगणना 2027 के आधिकारिक पोर्टल पर जाएं। यहां आपको ‘Self-Enumeration’ का विकल्प दिखेगा।

  • भाषा बदलाव :  पोर्टल पर 16 भारतीय भाषाओं में स्वगणना का फॉर्म उपलब्ध है, इसलिए अगर आप भाषा बदलना चाहते हैं तो पोर्टल पर यह विकल्प उपलब्ध होगा।
  • मोबाइल वेरिफिकेशन: अब अपना मोबाइल नंबर दर्ज करें। आपके नंबर पर एक OTP आएगा, जिसे दर्ज करने के बाद आप पोर्टल में प्रवेश करेंगे।

  • परिवार का विवरण : प्रथम चरण में आपको अपने घर का पता, मुखिया का नाम और मकान से जुड़ी मूलभूत जानकारी भरनी होगी।

  • प्रश्नावली को भरें: पोर्टल पर 33 प्रश्नों की एक सूची खुलेगी, जिसमें शिक्षा, पेयजल के साधन, बिजली, शौचालय और संपत्ति जैसे सवाल होंगे। ध्यान रहे, डेटा पूरी तरह गोपनीय रहता है।

  • सबमिट और डिक्लेरेशन: सभी जानकारी भरने के बाद एक ‘डिक्लेरेशन’ फॉर्म पर टिक करें और सबमिट बटन दबाएं।

  • रेफरेंस नंबर (ID): फॉर्म सबमिट होते ही आपके मोबाइल पर एक विशिष्ट ‘रेफरेंस नंबर’ आएगा। इसे संभाल कर रखें। जब गणनाकर्मी आपके घर आएगा, तो उसे बस यह नंबर दिखा दें, वह दोबारा आपसे सवाल नहीं पूछेगा।

क्या स्व-गणना अनिवार्य है?

जनगणना के पहले चरण में स्वगणना करायी जा रही है जो एक वैकल्पिक व्यवस्था है। यह गणना में लगने वाले आम नागरिक व सरकार के समय को बचाएगी।

साथ ही इस तरीके से आपके डेटा की सटीकता (Accuracy) भी सुनिश्चित होगी क्योंकि आप स्वयं इसको भरेंगे। डिजिटल जनगणना का यह डेटा भविष्य में ‘परिसीमन’ और सरकारी योजनाओं के बेहतर क्रियान्वयन में आधार बनेगा।

स्वगणना में देनी होंगी ये जानकारियां

स्व जनगणना के पोर्टल पर ये प्रमुख जानकारियां मांगी गई हैं।

  • आवास की स्थिति: मकान नंबर, भवन सामग्री (दीवार/छत), और मकान का उपयोग।

  • स्वामित्व: घर अपना है या किराए का, और परिवार के पास कोई अन्य आवास है या नहीं।

  • दंपति : एक घर में कितने विवाहित दंपति रहते हैं, इसकी संख्या बतानी होगी।
  • कितने कमरे : कमरों की कुल संख्या और घर में हर विवाहित दंपत्तियों के लिए उपलब्ध अलग कमरे।

  • पेयजल: पानी का मुख्य स्रोत (नल, कुआं, हैंडपंप, आदि) और उसकी घर से दूरी।

  • रोशनी का इंतजाम: बिजली का कनेक्शन है? प्रकाश का मुख्य स्रोत (मिट्टी तेल, सौर ऊर्जा आदि)।

  • रसोई गैस : खाना रसोई गैस, या पाइप लाइन वाली गैस से बनता है या लकड़ी या उपलों से। रसोई घर है या नहीं?

  • स्वच्छता: शौचालय की सुविधा, शौचालय का प्रकार (सेप्टिक, पिट आदि), स्नानघर और जल निकासी (Drainage) की व्यवस्था।

  • संचार साधन: रेडियो/ट्रांजिस्टर, टेलीविजन, इंटरनेट में से किसकी सुविधा है।

  • डिजिटल उपकरण: कंप्यूटर/लैपटॉप, टेलीफोन/मोबाइल/स्मार्टफोन में से कौन सा उपलब्ध है।

  • वाहन:  साइकिल, स्कूटर/मोटरबाइक/मोपेड, कार/जीप/वैन आदि में से कौन सा वाहन है।

  • खान-पान: परिवार मुख्य रूप से कौन से अनाज पर निर्भर है, जैसे गेहूं, चावल, मक्का आदि।

  • संपर्क: केवल जनगणना कार्यों के लिए उपयोग किए जाने वाले मोबाइल नंबर को भरना है।

दूसरे चरण में घर-घर जाकर गणना होगी

जनगणना के दूसरे चरण में जनगणना कर्मी घर-घर जाकर गणना करेेंगे। इसमें वे आपके द्वारा पोर्टल पर अपलोड की गई जानकारी को भी वेरिफाई करेंगे। साथ ही, अगर स्वगणना के दौरान आपसे कोई त्रुटि हो गई है तो उसे भी सुधार दिया जाएगा।

जनगणना का निजी डेटा रहता है गोपनीय   

गौरतलब है कि जनगणना अधिनियम, 1948 के तहत आम लोगों का निजी डेटा पूरी तरह गोपनीय रखा जाता है। इसका इस्तेमाल किसी अदालती कार्यवाही या सरकारी सत्यापन आदि के लिए नहीं किया जा सकता।

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