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प्रेस फ्रीडम इंडेक्स: दुनिया भर में पत्रकारिता पर संकट, भारत का स्थान सालभर में 6 अंक गिरा
नई दिल्ली | दुनिया भर में प्रेस की आज़ादी पिछले 25 वर्षों के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गई है। पेरिस स्थित संस्था ‘रिपोर्टर्स विदाउट बॉर्डर्स’ (RSF) की ताज़ा रिपोर्ट से यह पता लगा है। ताज़ा रिपोर्ट ने चिंता जताते हुए बताया है कि पत्रकारिता को वैश्विक स्तर पर अपराधीकरण की श्रेणी में धकेला जा रहा है।
RSF हर साल 180 देशों में पत्रकारों और मीडिया संस्थानों को मिलने वाली आज़ादी के आधार पर ‘वर्ल्ड प्रेस फ्रीडम इंडेक्स’ जारी करता है। इस सूचकांक में देशों को ‘बेहतर’ से लेकर ‘बेहद गंभीर’ तक पांच श्रेणियों में बांटा जाता है।
एक साल में भारत 6 अंक गिरा
इस रिपोर्ट के मुताबिक- भारत में पत्रकारिता की स्वतंत्रता का सूचकांक 157वां पाया गया है, जबकि बीते साल यह 151वें स्थान पर था।
विकसित देशों में भी स्थिति गंभीर
साल 2002 में इस इंडेक्स की शुरुआत के बाद पहली बार ऐसा हुआ है जब दुनिया के आधे से अधिक देश प्रेस स्वतंत्रता के मामले में ‘कठिन’ या ‘बेहद गंभीर’ श्रेणी में आ गए हैं।
रिपोर्ट के अनुसार, केवल सात नॉर्डिक देशों में से तीन देश- नॉर्वे, नीदरलैंड और एस्टोनिया में स्थिति ‘अच्छी’ है।
वहीं, विकसित देशों में भी गिरावट देखी गई है।
फ्रांस 25वें स्थान पर है, जबकि अमेरिका सात पायदान फिसलकर 64वें स्थान पर पहुंच गया है।
‘ट्रंप ने हमलों को संस्थागत किया’
रिपोर्ट में कहा गया है कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने प्रेस और पत्रकारों पर हमलों को “एक व्यवस्थित नीति” बना लिया है।
मध्य पूर्व व पूर्वी यूरोप पत्रकारों के लिए खतरनाक
रिपोर्ट में पूर्वी यूरोप और मध्य पूर्व को पत्रकारों के लिए दुनिया के दो सबसे खतरनाक क्षेत्र बताया गया है। रूस (172वां) और ईरान (177वां) को सबसे निचले 10 देशों में रखा गया है।
लैटिन अमेरिका में अर्जेंटीना (98वां) और अल साल्वाडोर (143वां) की रैंकिंग में भारी गिरावट आई है। अल साल्वाडोर साल 2014 के बाद से 105 पायदान नीचे गिर चुका है।
गज़ा में पत्रकारों के लिए सबसे घातक दौर
RSF ने अपनी रिपोर्ट में इस बात का खास ज़िक्र किया है कि युद्ध और सूचनाओं पर पाबंदी प्रेस की आज़ादी में गिरावट के बड़े कारण हैं। संस्था ने इज़राइल द्वारा गाज़ा, वेस्ट बैंक और लेबनान में पत्रकारों पर हमलों को इसका उदाहरण बताया है।
रिपोर्ट के मुताबिक, “अक्टूबर 2023 से अब तक इज़राइली सेना द्वारा गाज़ा में 220 से अधिक पत्रकार मारे गए हैं, जिनमें कम से कम 70 पत्रकार ऐसे थे जिनकी हत्या उस वक्त की गई जब वे अपना काम कर रहे थे।”
इस सूचकांक में इज़राइल को 116वें स्थान पर रखा गया है।

