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रिपोर्टर की डायरी

सहरसा (बिहार) : पोस्टमार्टम हाउस में बोन कटर तक नहीं, गोली लगे शव को करना पड़ता है रेफर

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सहरसा का पोस्टमार्टम हाउस।
  • शव की सिलाई के लिए धागा तक उपलब्ध नहीं, कोई आधुनिक सुविधा नहीं।
सहरसा | मुकेश कुमार सिंह
सहरसा मेेें बीते 13 मार्च को एक युवक को दस गोलियां मारकर हत्या कर दी गई। युवक के शव का पोस्टमार्टम करते समय सुविधाओं की कमी के चलते डॉक्टर सिर्फ दो गोलियां ही निकाल पाए।
पोस्टमार्टम हाउस में एक्सरे की सुविधा न होने से बाकी गोलियां लोकेट नहीं हुईं और शव को पोस्टमार्टम के लिए भागलपुर रेफर किया गया। मगर नियम आड़े आ गया क्योंकि एक शव को दो बार पोस्टमार्टम अदालत की अनुमति के बिना नहीं किया जा सकता।
लंबी सरकारी प्रक्रिया के बाद तीन दिन बाद दोबारा पोस्टमार्टम हुआ। इस पूरी प्रक्रिया ने मृतक के परिजनों को मानकिस रूप से बहुत परेशान कर दिया।
इस घटना ने सहरसा पोस्टमार्टम हाउस की खस्ताहाल के चलते आम लोगों के जीवन पर पड़ने वाले असर को दिखा दिया। यह पोस्टमार्टम हाउस मॉडल सदर अस्पताल परिसर में होने के बावजूद खस्ता हालत में है।

सहरसा का पोस्टमार्टम हाउस जर्जर हालत में है।

इस पोस्टमार्टम हाउस में हर दिन दो से तीन शवों का पोस्टमार्टम होता है लेकिन बोन कटर जैसी जरूरी सुविधा तक नहीं है।
मॉडल अस्पताल में तैनात डॉक्टर जमाल ने बताया कि “पोस्टमार्टम रूम में बोन कटर न होने से छेनी-हथौड़ा से ब्रेन खोलना पड़ता है।” 
डॉक्टर ने बताया कि शव की सिलाई के लिए धागा तक उपलब्ध नहीं है, चौकीदार को बाजार से धागा खरीदकर लाना पड़ता है।

मॉडल सदर अस्पताल परिसर में स्थित है पोस्टमार्टम हाउस

गोली लगे शव को करना पड़ता है रेफर

साथ ही, एक बड़ी समस्या गोली लगे शव का पोस्टमार्टम करने में आती है। डॉ. जमाल ने बताया कि एक्स-रे की सुविधा न होने से गोली को ढूंढना मुश्किल होता है, इसलिए कई बार शव को भागलपुर के लिए रेफर करना पड़ता है। हम बता चुके हैं कि हाल ही में हुई घटना में ऐसा ही करना पड़ा था। 

डीप फ्रीजर न होने से समस्या

पोस्टमार्टम हाउस में डीप फ्रीजर की व्यवस्था नहीं है। ऐसे में अज्ञात या लावारिस शवों को ऐसे ही खुले में रखना पड़ता है।
प्रभारी उपाधीक्षक डॉ शिव शंकर मेहता ने बताया कि “लावारिस शव की सूचना पुलिस को दी जाती है और पोस्टमार्टम के बाद पुलिस को शव सौंप दिया जाता है।”
इसके अलावा, पोस्टमार्टम रूम की हालत काफी खराब है, यहां काफी गंदगी रहती है जिससे पोस्टमार्टम करने वाले डॉक्टरों को काफी समस्या आती है। बिजली के नंगे तारों के चलते भी दुर्घटना का डर बना रहता है।
  साथ ही, मृतक के परिजनों को भी गंदगी व बदबू के बीच इंतजार करना पड़ता है।  
प्रभारी उपाधीक्षक ने बताया,
“एक्सरे मशीन और डीप फ्रीजर के लिए विभाग को लगातार पत्राचार किया जा रहा है, लेकिन अभी तक उपलब्ध नहीं करवाया गया है। फिर से पत्र लिखा जाएगा।”
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