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अमेरिका का युद्ध में आना ईरान को उकसाएगा : NYT

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न्यूयॉर्क टाइम्स
बोलते पन्ने | नई दिल्ली

अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने 21 जून की दोपहर (अमेरिकी समय के मुताबिक़) को ईरान पर हमले की घोषणा की, इसी दिन न्यूयॉर्क टाइम्स ने चेताया था कि अगर यूएस युद्ध में शामिल हुआ तो इसके परिणाम गंभीर और अप्रत्याशित होंगे। अख़बार ने उस संभावना का विश्लेषण किया था जो उसी दिन सच साबित हुई, यानी अमेरिका ने ईरान के परमाणु संवर्धन केंद्र फोर्डो पर हमला कर दिया। आइए समझते हैं कि NYT ने क्या चेतावनी दी थी।

न्यूयॉर्क टाइम्स

न्यूयॉर्क टाइम्स, 21 जून

‘फोर्डो पर हमला ईरान को उकसा देगा’
न्यूयॉर्क टाइम्स ने 21 जून 2025 को एक लेख प्रकाशित किया जिसका शीर्षक – “Unpredictable Consequences if U.S. Enters War” है। इसमें लिखा कि ईरान के परमाणु संवर्धन केंद्र फोर्डो पर अगर अमेरिका हमला करता है या फिर ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की हत्या की जाती है तो ये कदम इस युद्ध को खतरनाक मोड़ दे सकती है। लेख में कहा गया कि फोर्डो पर हमला ईरान के परमाणु कार्यक्रम को पूरी तरह खत्म नहीं कर सकता, बल्कि ईरान को परमाणु हथियार विकास में तेजी लाने या युद्ध का विस्तार करने के लिए उकसा सकता है। साथ ही लिखा है कि यह अस्पष्ट है कि ऐसा करने से ईरान का परमाणु कार्यक्रम रुकेगा।
न्यूयॉर्क टाइम्स, 21 जून

न्यूयॉर्क टाइम्स, 21 जून

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बंद होने का खतरा
अख़बार ने लिखा है कि अगर अमेरिका ऐसे कदम उठाता है कि ईरान के सहयोगी (जैसे यमन के हूती और इराक के शिया मिलिशिया) अमेरिकी ठिकानों पर हमले कर सकते हैं। अख़बार ने एक ईरानी अधिकारी के हवाले से लिखा है कि अमेरिका के हस्तक्षेप पर ईरान स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को बंद कर सकता है, जिससे वैश्विक तेल आपूर्ति बाधित होगी। लेख में जोर दिया गया कि युद्ध में अमेरिका की भागीदारी क्षेत्रीय अस्थिरता को बढ़ाएगी।  विशेषज्ञों ने कूटनीतिक समाधान की वकालत की है।
न्यूयॉर्क टाइम्स

न्यूयॉर्क टाइम्स, 21 जून

मध्य पूर्व में तैनात अमेरिका सैनिकों पर खतरा
अख़बार ने लिखा कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने सोशल मीडिया पर खामेनेई की हत्या की संभावना का जिक्र किया और कहा कि वे ऐसा अभी नहीं करने जा रहे। अख़बार ने लिखा कि अगर ऐसा कुछ हुआ तो ईरान के जवाबी हमलों के चलते मध्य पूर्व में तैनात 40,000 अमेरिकी सैनिक जोखिम में आ सकते हैं। बता दें कि 13 जून 2025 को इजरायल ने ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर आश्चर्यजनक हमला किया। इससे ओमान की मध्यस्थता में चल रही अमेरिका-ईरान वार्ता टूट गई। ये वार्ताएं ईरान के यूरेनियम संवर्धन को सीमित करने और प्रतिबंधों में छूट पर केंद्रित थीं। इजरायल के हमले ने क्षेत्रीय तनाव को बढ़ा दिया।

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