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मधेपुरा में मॉब लिंचिंग के अपराधियों की सजा क्यों उम्मीद जगा रही?

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मृतक की पत्नी और अपराधी को जेल ले जाती पुलिस (फोटो - बोलते पन्ने)
  • जनवरी, 2022 में एक व्यक्ति को पड़ोसियों ने पीट-पीटकर मार डाला था।

 

मधेपुरा | राजीव रंजन

पूरे देश में बीते एक दशक में मॉब लिंचिंग (Mob lynching) के मामले तेजी से बढ़े हैं, ऐसे मेें यह जानना जरूरी है कि ऐसे मामलों में आखिर क्या न्याय (justice) हो रहा है। मधेपुरा में तीन साल पहले हुई मॉब लिंचिंग की एक घटना में ट्रायल कोर्ट ने सश्रम आजीवन कारावास की सजा सुनाई है।

अदालत का यह फैसला उम्मीद जगाता है कि ऐसे मामलों में पुलिस जांच सही दिशा में हुई, जिसके आधार पर सत्र न्यायालय (trial court) में मृतक के परिवार को न्याय मिला।

एडीजे-9 रघुवीर प्रसाद की अदालत ने सोमवार (13 oct) को जब अपना आदेश सुनाया तो मॉब लिचिंग में मारे गए लालो भगत के बेटे विशाल कुमार के आंसू रुकने का नाम नहीं ले रहे थे।

हालांकि मृतक की पत्नी रंजना देवी ने कहा कि उनके पति के हत्यारों को जिंदा रहने का हक नहीं है, उन्हें फांसी मिलनी चाहिए थी।

अदालत ने तीन दोषियों को सश्रम आजीवन कारावास (rigorous imprisonment) की सजा सुनाई है और तीनों के ऊपर 20-20 हजार रुपये का अर्थदंड लगाया। साथ ही आदेश दिया कि अर्थदंड नहीं देने पर छह महीने का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।

मॉब लिंचिंग में जान गंवाने वाले व्यक्ति मधेपुरा के कुमारखंड थाना क्षेत्र के यदुवापट्टी गांव के लालो भगत थे।

अपराधियों को जेल ले जाती पुलिस।

अपराधियों को जेल ले जाती पुलिस।

कचरा फेंकने से मना करने पर रॉड से पीटकर मार डाला था

अपर लोक अभियोजक जयनारायण पंडित ने बताया कि 22 जनवरी 2022 को यदुवापट्टी निवासी लालो भगत को अपराधियों ने पीट-पीटकर मार डाला था।

लालो भगत ने अपने घर के पास बन रही एक लाइब्रेरी में कब्जा करके दुकान चला रहे लोगों को उनके घर के सामने कचरा न फेंकने को कहा था।

इसको लेकर लंकेश कुमार, हलेश्वर साह, रामचंद्र साह समेत चार-पांच लोगों ने मिलकर उन पर हमला कर दिया।

लोहे की रॉड और लाठी से की गई पिटाई में लालो भगत गंभीर रूप से घायल हो गए। परिजन उन्हें पहले कुमारखंड पीएचसी और बाद में सिलीगुड़ी ले गए, जहां इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई।

मामले की जानकारी देते अपर लोक अभियोजक

मामले की जानकारी देते अपर लोक अभियोजक

सात गवाहों ने दिलाया न्याय 

अदालत में कुल सात गवाहों की गवाही करवाई गई। सभी साक्ष्य और गवाही के आधार पर अदालत ने तीन अभियुक्तों को दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई।

 “अदालत का यह निर्णय समाज में अपराध के खिलाफ एक सख्त संदेश देगा और भविष्य में ऐसे अपराधों पर रोक लगाने में सहायक सिद्ध होगा।” – अपर लोक अभियोजक

 

 

 

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