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बिहार : JDU में आखिर क्यों विधायक सीधे CM आवास पर धरना देने बैठ गए?

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धरने पर बैठे सांसद
  • नीतीश के सामने JDU में दोहरा विद्रोह: अजय मंडल की चिट्ठी, गोपाल मंडल का पटना धरना

 

पटना| हमारे संवाददाता

बिहार विधानसभा चुनाव 2025 अब धीरे-धीरे दिलचस्प होता जा रहा है। जनता दल (यू) में अंदरखाने की राजनीति अब खुलकर सामने आया गई है। दरअसल, भागलपुर की सियासत इन दिनों दो मंडलों के बीच फंसी है। एक ओर भागलपुर के सांसद अजय मंडल, तो दूसरी ओर गोपालपुर के चर्चित विधायक नरेंद्र कुमार नीरज उर्फ गोपाल मंडल।

दोनों की नाराजगी का कारण टिकट बंटवारा है। फर्क सिर्फ इतना कि सांसद ने नाराजगी चिट्ठी के जरिये जताई, तो विधायक सीधे मुख्यमंत्री आवास पर धरने पर बैठ गए।

सांसद अजय मंडल ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को लिखे पत्र में अपना दर्द उकेर दिया। बोले, बीते दो दशक से पार्टी को परिवार की तरह सींचा है, लेकिन अब संगठन में ऐसे फैसले हो रहे हैं जो पार्टी के लिए शुभ संकेत नहीं हैं।

उन्होंने यह भी लिखा कि जब उन्हें मुख्यमंत्री से मिलने तक नहीं दिया जा रहा, तो आत्मसम्मान बनाए रखना ही शेष रह गया है। सांसद ने साफ लहजे में कहा कि अगर पार्टी ऐसे ही रास्ते पर चली, तो संगठन की जड़ें कमजोर होंगी। इसलिए उन्होंने सांसद पद से त्यागपत्र देने की अनुमति मांगी है।

उधर, गोपालपुर विधायक गोपाल मंडल का तेवर किसी बागी कार्यकर्ता जैसा दिखा। सोमवार की सुबह वे अचानक पटना पहुंचे और सीएम हाउस के बाहर धरने पर बैठ गए। कहा, सुबह आठ बजे से इंतजार कर रहा हूं। मुख्यमंत्री से मिलना है, टिकट चाहिए। जब तक टिकट नहीं मिलेगा, यहीं बैठा रहूंगा।

उन्होंने आरोप लगाया कि पार्टी के कुछ वरिष्ठ नेता उनकी सीट पर शैलेश कुमार उर्फ बुलो मंडल को टिकट देने की साजिश कर रहे हैं। बोले, मैं नीतीश कुमार को अपना नेता मानता हूं। न्याय मिलेगा, इसलिए टिकट लिए बिना नहीं जाऊंगा। हालांकि कुछ घंटों बाद गोपाल मंडल को पटना पुलिस ने गाड़ी से उठाकर सीएम आवास से समझा-बुझाकर हटा दिया।

जदयू खेमे में इस दोहरी नाराजगी से हलचल मच गई है। सूत्र बताते हैं कि पार्टी नेतृत्व कुछ सीटों पर नए चेहरों को मौका देने की तैयारी में है, जिससे पुराने और प्रभावशाली नेताओं में बेचैनी बढ़ गई है। गोपालपुर सीट तो अब सीधा सियासी अखाड़ा बन गई है। एक तरफ सांसद अजय मंडल की सिफारिश, दूसरी ओर विधायक गोपाल मंडल का मैदान में डेरा।

पार्टी के रणनीतिकारों के लिए यह स्थिति कम सिरदर्द नहीं। एक ओर समर्पित सांसद का त्यागपत्र का इशारा, दूसरी ओर विधायक का धरना और चुनौती। नीतीश कुमार के सामने अब संगठन के भीतर मान–सम्मान बनाम टिकट समीकरण की परीक्षा है। फिलहाल इतना तय है कि गोपालपुर की टिकट की यह जंग, भागलपुर की गलियों से लेकर पटना के सत्ता गलियारे तक चर्चा का सबसे गर्म मुद्दा बन चुकी है।

बोलते पन्ने.. एक कोशिश है क्लिष्ट सूचनाओं से जनहित की जानकारियां निकालकर हिन्दी के दर्शकों की आवाज बनने का। सरकारी कागजों के गुलाबी मौसम से लेकर जमीन की काली हकीकत की बात भी होगी ग्राउंड रिपोर्टिंग के जरिए। साथ ही, बोलते पन्ने जरिए बनेगा .. आपकी उन भावनाओं को आवाज देने का, जो अक्सर डायरी के पन्नों में दबी रह जाती हैं।

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