रिपोर्टर की डायरी
मुंगेर में उत्पाद पुलिस की करतूत: शराब नहीं मिली तो दो लड़कों का अपहरण करके फिरौती मांगी
- मुंगेर में दो दोस्त इंटर की परीक्षा देने के बाद लापता हो गए थे।
- उत्पाद पुलिस के तीन सिपाहियों ने दोनों का अपहरण कर लिया।
- परिवार से ₹50 हजार की फिरौती मांगी, ₹16 हजार लेकर छोड़ा।
“जांच में साफ हुआ है कि शराब नहीं मिलने पर अपहरण कर फिरौती ली गई। दोषियों पर सख्त कार्रवाई होगी।” – अभिषेक आनंद, सदर एसडीपीओ
प्रदेश रिपोर्ट
बिहार : शहर ही नहीं, गांवों में भी बदल रहे हैं प्रेम के मायने; बक्सर में दो महिलाओं ने साथ जीने का किया फैसला
- 18 साल और 32 साल की दो वयस्क महिलाओं ने साथ रहने की घोषणा की।
बक्सर | उमेश कुमार
भारत में समलैंगिक प्रेम संबंधों के बारे में अक्सर कहा जाता है कि ये शहरी माहौल से पैदा हुए प्रेम संबंध हैं। पर सच्चाई यह है कि जिस तरह विषम-लैंगिक प्रेम संबंधों के लिए शहर या गांव की सीमा का कोई खास मतलब नहीं, ठीक उसी तरह समलैंगिक प्रेम के मामले भी किसी एक क्षेत्र सीमा से बंधे नहीं हैं।
इसी कड़ी में बिहार के बक्सर के एक गांव की दो वयस्क महिलाओं के सहमति से साथ रहने की घोषणा करने का मामला सामने आया है। दोनों सोशल मीडिया के जरिए एक-दूसरे के संपर्क में आईं और आपस में प्रेम हो गया। दोनों महिलाओं ने बक्सर के प्रसिद्ध रामेश्वर नाथ मंदिर में माला बदलकर रस्म पूरी की, जिसमें कुछ स्थानीय लोग भी मौजूद थे।
दोनों महिलाओं ने स्थानीय मीडिया के सामने खुलकर अपने प्रेम व चुनौतियों के बारे में बताया। इनमें एक महिला की उम्र 18 वर्ष है जो खुद को पति की भूमिका में महसूस करती हैं। जबकि दूसरी महिला 32 साल की हैं जो खुद को इस समलैंगिक रिश्ते में पत्नी देखती हैं।
18 वर्षीय महिला का कहना है कि उनके पिता ने उन्हें सख्त चेतावनी दी है कि वे अब घर न आएं। उधर, 32 वर्षीय महिला का कहना है कि उनके पति नौकरी के लिए बाहर रहते हैं। उन्हें जब से इस रिश्ते का पता लगा, वे उन्हें जान से मार डालने की धमकी दे रहे हैं। इस समलैंगिक जोड़े ने मीडिया के सामने पुलिस सुरक्षा की मांग उठाई है। हालांकि यह स्पष्ट नहीं हो सका है कि उन्होंने स्थानीय पुलिस थाने को इस बारे में जानकारी दी है या नहीं।
32 वर्षीय महिला ने अपने पूर्व रिश्ते के बारे में बताया कि उनकी 2010 में शादी हुई थी और उनके दो बच्चे हैं। उनके मुताबिक, दोनों बच्चे पहले से ही एक करीबी रिश्तेदारी में रहते हैं। उन्होंने कहा कि वे अब अपने समलैंगिक रिश्ते में आगे बढ़ना चाहती हैं।
समलैंगिक जोड़े ने बताया कि बक्सर के मंदिर में आने से पहले वे यूपी के मिर्जापुर गई थीं। वहां के अष्टभुजी मंदिर में जाकर उन्होंने अपने रिश्ते का धार्मिक विधि-विधान किया था। दोनों महिलाओं का कहना है कि वे आगे एक साथ ही रहेंगी, जो भी चुनौतियां आएंगी, उसका डटकर सामना करेंगी।
चुनावी डायरी
बिहार कांग्रेस में 11 साल बाद बड़ा बदलाव, लेकिन ‘सोशल इंजीनियरिंग’ पर क्यों नहीं बन रही सहमति?
पटना | बिहार में कांग्रेस का आधार तेज़ी से घटा है, हाल में हुए विधानसभा चुनाव में इसने मात्र छह सीटें जीतीं। ऐसे में 11 साल के बाद बिहार के ब्लॉक व जिला स्तर के नेतृत्व में 11 साल के बाद बड़े बदलाव किए जा रहे हैं। पर कांग्रेस के केंद्रीय नेतृत्व ने नए जिलाध्यक्षों की जो सूची जारी की है, इसको लेकर बिहार कांग्रेस में गहरी असहमति है।
बिहार कांग्रेस ने मांग की है कि नए जिलाध्यक्ष का चुनाव करते समय सामाजिक संतुलन को ध्यान रखा जाना चाहिए। बिहार के नेताओं ने ऐसा इसलिए कहा है क्योंकि केंद्रीय कांग्रेस की ओर से बिहार के नए नेतृत्व की जो सूची जारी की गई है उसमें 45 फीसदी नेता ऊंची जाति से हैं। ऐसे में बिहार कांग्रेस के नेताओं की मांग है कि उनकी ओर से जो लिस्ट प्रस्तावित थी, उस पर पुनर्विचार किया जाए।
53 में से 24 जिलाध्यक्ष अगड़ी जाति के
बता दें कि बिहार में 38 प्रशासनिक जिले हैं लेकिन कांग्रेस ने इसे 53 संगठनात्मक जिलों में बांटा है। बीती 30 मार्च को अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के महासचिव केसी वेणु गोपाल ने बिहार के नए जिलाध्यक्षों की एक सूची जारी की थी। इस सूची में 24 जिलाध्यक्ष उच्च जाति से संबंध हैं। 12 जिलाध्यक्ष ओबीसी से हैं जिसमें आठ यादव हैं। पांच जिलाध्यक्ष पिछड़ी जाति से, तीन अति पिछड़ी जाति से संबंधित हैं। इसके अलावा, आठ मुस्लिम व एक सिख धर्म से हैं।
‘नई सूची राहुल गांधी के संदेश के विपरीत’
बिहार कांग्रेस के अध्यक्ष राजेश राम के हवाले से इंडियन एक्सप्रेस ने लिखा है कि सही सामाजिक संतुलन बनाए रखने के लिए हम केंद्रीय नेतृत्व से सूची में संशोधन की मांग कर रहे हैं। साथ ही हम ब्लॉक जिलाध्यक्षों की भी एक अनुमानित लिस्ट बना रहे हैं।
गौरतलब है कि राहुल गांधी ने 2025 में बिहार में संविधान बचाओ यात्रा निकाली थी, इस दौरान स्थानीय नेताओं ने उनसे पार्टी में बड़े बदलावों की मांग की थी जो सोशल जस्टिस को दर्शाते हों।
प्रदेश रिपोर्ट
वैशाली: प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर गिरा हाईटेंशन तार, ऑफिस में लगी आग, बड़ा हादसा बचा
वैशाली | मुन्ना खान
बिहार के वैशाली जिले के गोरौल स्थित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (PHC) में शनिवार को उस वक्त अफरा-तफरी मच गई, जब बिजली का हाईटेंशन तार टूटकर सीधे अस्पताल की छत पर जा गिरा।
इस घटना के बाद एसी के आउटडोर में शॉर्ट सर्किट से अस्पताल के कार्यालय में आग लग गई, जिससे कई महत्वपूर्ण सरकारी कागजात और फाइलें जलकर राख हो गईं।
गनीमत यह रही कि स्वास्थ्य कर्मियों ने हिम्मत दिखाते हुए स्थिति संभाली। राहत की बात यह भी रही कि तार छत पर गिरा, अगर यह तार अस्पताल परिसर या ओपीडी के पास गिरता तो बड़ा हादसा हो सकता था।
अस्पताल के एक कर्मी ने बताया कि स्वास्थ्य केंद्र के ऊपर से गुजरने वाले हाईटेंशन तार पेड़ों की टहनियों के बीच से होकर आए हैं। तेज हवा या मामूली घर्षण से अक्सर स्पार्किंग होती रहती है।
कर्मचारियों ने कई बार इसकी शिकायत की थी कि पेड़ों के बीच से तार गुजरने के कारण हमेशा हादसे का डर बना रहता है, लेकिन बिजली विभाग की लापरवाही आज भारी पड़ गई।
इस अग्निकांड में कार्यालय के कई महत्वपूर्ण रिकॉर्ड जल गए हैं, जिनका आकलन किया जा रहा है। स्थानीय प्रशासन और बिजली विभाग को घटना की सूचना दे दी गई है।
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