रिपोर्टर की डायरी
गायक उदित नारायण पर पहली पत्नी का बड़ा आरोप: ‘बिना इजाजत गर्भाशय निकलवा दिया, अब सच सामने आया!’
- गायक उदित नारायण की पहली पत्नी रंजना नारायण ने लगाया बड़ा आरोप।
- बिहार के सुपौल की रहने वाली रंजना नारायण की 1984 में हुई थी शादी।
- 1996 में दिल्ली बुलाकर बिना बताए गर्भाशय निकलवाने का आरोप।
सुपौल | मोहम्मद अख्तरुल
बॉलीवुड के दिग्गज गायक उदित नारायण के ऊपर उनकी पहली पत्नी रंजना नारायण ने गंभीर आरोप लगाकर केस दर्ज कराने की मांग की है। उनका आरोप लगाया है कि पति उदित नारायण ने बिना उन्हें बताए या सहमति लिए उनके शरीर से बच्चेदानी निकलवा दी थी। इस बात की जानकारी उन्हें कुछ महीने पहले कराए इलाज के दौरान पता लगी। इस धोखे के खिलाफ रंजना नारायण बिहार के सुपौल जिले के महिला थाने में पहुंचीं और शिकायत दर्ज करायी है।
11 फरवरी को दिए आवेदन में रंजना नारायण ने अपने पति उदित नारायण के अलावा उनकी दूसरी पत्नी, पिता व देवर पर कई गंभीर आरोप लगाए हैं। जिसमें मुख्य आरोप शादी के बाद धोखा देने, चिकित्सकीय प्रक्रिया के नाम पर कई साल तक मानसिक और सामाजिक प्रताड़ना देना है।
शिकायतकर्ता रंजना नारायण झा, सुपौल जिले के वीरपुर ब्लॉक की रहने वाली हैं। उन्होंने बताया कि उनकी शादी 7 दिसंबर 1984 को हिंदू रीति-रिवाज से गायक उदित नारायण से हुई थी। शादी के एक साल बाद 1985 में उनके पति प्लेबैक सिंगिंग में करियर बनाने के लिए मुंबई चले गए, जहां उन्होंने दीपा नाम की महिला से शादी कर ली। इस बात की जानकारी रंजना नारायण को खबरों के जरिए पता लगी थी।
उनका आरोप है कि जब उन्होंने इस बारे में पति उदित नारायण से सवाल किया तो उन्हें लगातार गुमराह किया गया। उनका आरोप है कि साल 1996 में इलाज के नाम पर उन्हें दिल्ली ले जाया गया, जहां बिना उनकी जानकारी और सहमति के उनका गर्भाशय निकलवा दिया गया। इस मामले में उन्होंने पति उदित नारायण झा, उनके भाई संजय कुमार झा व ललित नारायण झा पर साजिश करने का आरोप लगाया है। उनका दावा है कि इस ऑपरेशन की सच्चाई उन्हें पिछले साल कराए इलाज के दौरान पता लगी।
शिकायतकर्ता रंजना नारायण का यह भी कहना है कि 2006 में वे पति से मिलने मुंबई गईं तो पति उदित नारायण और दूसरी पत्नी दीपा नारायण ने उन्हें घर के अंदर नहीं आने दिया।
महिला थानाध्यक्ष अंजू तिवारी ने बताया कि आवेदन प्राप्त कर लिया गया है और मामले की जांच शुरू कर दी गई है। बता दें कि फिलहाल इस पूरे हाईप्रोफाइल विवाद पर उदित नारायण या उनके परिवार की ओर से कोई आधिकारिक बयान या प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
प्रदेश रिपोर्ट
जहानाबाद : हॉस्टल में पढ़ रहे 5 साल के बच्चे से कुकर्म के बाद हुई थी हत्या
- PMCH की पोस्टमार्टम रिपोर्ट में बच्चे से साथ कुकर्म की पुष्टि।
- 15 दिन पहले ही बच्चे का हुआ था गुरुकुल हॉस्टल में एडमिशन।
जहानाबाद | शिवा केशरी
बिहार के जहानाबाद के एक हॉस्टल में रहकर पढ़ रहे पांच साल के बच्चे की हत्या से पहले उसके साथ कुकर्म (अप्राकृतिक यौनाचार) हुआ था। इस बात की पुष्टि गुरुवार को पटना के पीएमसीएच से आई पोस्टमार्टम रिपोर्ट से हुई है।
शहर से सटे कनौदी बाईपास के पास के गुरुकुल छात्रावास में मासूम का दाखिला सिर्फ 15 दिन पहले हुआ था। यहां वह अपने 7 साल के भाई संग रहकर पढ़ रहा था।
जहानाबाद एसपी अपराजित लोहान ने शुक्रवार को पोस्टमार्टम रिपोर्ट की जानकारी दी है। उन्होंने बताया कि इस मामले में पुलिस ने छात्रावास में रहने वाले कैंटीन के एक गार्ड सुदामा प्रसाद को गिरफ्तार करके जेल भेज दिया है।
इसके पहले स्कूल व हॉस्टल के संचालक तरुण कुमार उर्फ गांधी को गिरफ्तार कर जेल भेजा जा चुका है।
बता दें कि चार दिन पूर्व सोमवार को निजी स्कूल के हॉस्टल में रहकर पढ़ने वाले पांच वर्षीय एक मासूम बच्चा खून से लथपथ मिला था।
उसके गर्दन, पेट, आंख के ऊपर और उसके गुप्तांग पर धारदार हथियार से काटे जाने के कई जख्म पाए गए थे । घटना को लेकर काफी हंगामा मचा था। मृत लड़के के पिता के बयान पर उसकी हत्या किए जाने की प्राथमिकी थाने में दर्ज हुई थी।
जहानाबाद सदर अस्पताल में पोस्टमार्टम के लिए मृत बच्चे के शव को लाया गया था। लेकिन अस्पताल प्रबंधन ने मामले की गंभीरता को देखते हुए बेहतर जांच रिपोर्ट के लिए शव को पोस्टमार्टम के लिए पीएमसीएच भेजा था। एफएसएल की टीम ने भी घटनास्थल से कई सैंपल इकट्ठा किए थे।
पीएमसीएच में तीन डॉक्टरों की मेडिकल टीम गठित कर मंगलवार की सुबह बच्चे का पोस्टमॉर्टम कराया गया। गुरुवार को यहां उसकी रिपोर्ट आई जिसमें उसके साथ दुष्कर्म किए जाने की भी पुष्टि हुई। सोडोमी की पुष्टि होने के बाद परिजनों काफी गुस्से में हैं और उन्होंने सख्त से सख्त सज़ा की मांग की है।
प्रदेश रिपोर्ट
अररिया में सरेआम युवक की गला काटकर हत्या; भीड़ ने आरोपी को पीट-पीटकर मार डाला
- बिहार के अररिया में सड़क पर गला काटकर युवक ने हत्या की।
- फिर आरोपी युवक को भीड़ ने घेरकर पीट-पीटकर मार डाला।
- गुस्साई भीड़ ने आगजनी भी की, मौके पर भारी पुलिस फोर्स तैनात।
अररिया | हमारे संवाददाता
बिहार के अररिया जिले में गुरुवार सुबह एक व्यक्ति की सरेआम गला काटकर हत्या कर दी गई, जिसमें युवक का सिर व धड़ अलग-अलग हो गया। इस दृश्य को देखकर प्रत्यक्षदर्शियों ने आरोपी को पकड़ लिया और पीट-पीटकर उसे मार डाला।
इस वीभत्स घटना के बाद गुस्साए लोगों ने फारबिसगंज के सुभाष चौक पर आगजनी भी की। मौके पर भारी संख्या में पुलिस फोर्स तैनात है।

मृतक अली हुसैन एक पिकअप चालक थे, जिनकी गला काटकर हत्या कर दी गई।
प्राप्त जानकारी के मुताबिक, ठेले पर सत्तू बेचने वाले युवक ने चाकू से एक पिकअप चालक पर हमला किया। फिर उसका गला भी रेत दिया।
यह घटना फारबिसगंज मुख्यालय के मार्केट गेट नंबर-2 के पास की बताई जा रही है। प्रत्यक्षदर्शियों का दावा है कि झगड़ा ठेले की जगह पर पिकअप लगाने को लेकर हुआ।

ठेले के पास हाथ में चाकू लिए खड़े इस युवक को हत्यारोपी बताया गया, जिसे भीड़ ने मार डाला।
घटना के समय प्रत्यक्षदर्शियों ने जो वीडियो शूट किए हैं, उसमें आरोपी युवक के हाथ में चाकू देखा जा सकता है। खास बात यह भी है कि आरोपी ने मौके से भागने की कोशिश नहीं की।
निर्मम हत्या को देखकर आसपास के लोगों ने आरोपी को घेरकर पीटा, उसे गंभीर हालत में अस्पताल ले जाया गया जहां पुलिस ने उसे मृत घोषित कर दिया।

मृतक के सिर के पास खड़ा हत्यारोपी युवक।
मृतक पिकअप चालक की पहचान जोगबनी के अमोना निवासी अली हुसैन के रूप में हुई है। भीड़ की हिंसा में मारे गए हत्यारोपी युवक की पहचान रवि चौहान के रूप में हुई है। जो मटियारी के चौहान टोला का रहने वाला था।
सरेआम मर्डर में मारे गए अली हुसैन व भीड़ की हिंसा में मारे गए रवि चौहान के मामलों की पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि कहीं इनके बीच पहले से कई झगड़ा तो नहीं था। साथ ही यह भी पता लगाया जा रहा है कि भीड़ में किसने आरोपी युवक पर जानलेवा हमला किया। फिलहाल इस घटना की चर्चा पूरे बिहार में है।
प्रदेश रिपोर्ट
आर्थिक अपराध इकाई की जांच के घेरे में लखीसराय के पूर्व DM मिथिलेश मिश्र, जानिए क्या है पूरा मामला?
- 7 अप्रैल को जिलाधिकारी मिथिलेश कुमार मिश्र का हुआ था तबादला।
लखीसराय | गोपाल प्रसाद आर्य
बिहार के लखीसराय के जिलाधिकारी मिथिलेश कुमार मिश्र का तबादला किए जाने के अगले दिन आर्थिक अपराध शाखा उनके कार्यालय पर पहुंची और उनके कार्यकाल की फाइलें खंगाली गईं।
प्रशासनिक सूत्रों से पता लगा है कि पटना मुख्यालय में मिली लिखित शिकायतों के बाद ईओयू ने यह बड़ी कार्रवाई शुरू की है। ईओयू की टीम बुधवार की शाम को लखीसराय पहुंची।
EOU की रडार पर 16 महीने का कार्यकाल
मिथिलेश मिश्र का लखीसराय में कार्यकाल लगभग एक साल चार महीने का रहा। वे 2011 बैच के आईएएस अधिकारी हैं। सूत्रों के अनुसार, ईओयू की टीम आज सुबह जिला कार्यालय पहुंचकर जांच आगे बढ़ाएगी। सूत्रों के मुताबिक, आर्थिक अपराध शाखा की जांच के मुख्य बिंदु इस प्रकार हैं-
शस्त्र लाइसेंस की जांच – पिछले एक साल में जारी किए गए शस्त्र लाइसेंसों की फाइलों की गहनता से पड़ताल की जाएगी। इसके लिए डिप्टी कलेक्टर शशि भूषण कुमार से रिकॉर्ड तलब किए जा सकते हैं।
कला-संस्कृति और खेल विभाग- खेल पदाधिकारी मृणाल रंजन के विभाग से जुड़े दस्तावेजों, सांस्कृतिक आयोजनों और खिलाड़ियों को दिए गए फंड की कार्यप्रणाली की जांच होगी।
धान अधिप्राप्ति- धान खरीद से जुड़े अहम दस्तावेजों और विकास कार्यों की फाइलों को भी बारीकी से देखा जाएगा।
यह जांच अभियान अगले दो से तीन दिनों तक चलने की संभावना है। इस दौरान वर्तमान प्रशासनिक व्यवस्था में हड़कंप की स्थिति बनी हुई है।
तबादले के पीछे की कूटनीति और विवाद
मिथिलेश मिश्र के तबादले को लेकर चर्चाओं का बाजार गर्म है। सरकार बनने के महज पांच महीने बाद ही उनका तबादला कर उन्हें पटना सचिवालय की सामान्य शाखा में तैनात कर दिया गया है। इसके पीछे दो प्रमुख कारण माने जा रहे हैं-
डिप्टी सीएम से टकराव: चर्चा है कि लखीसराय के डीएम का स्थानीय मंत्रियों और रसूखदारों के साथ तालमेल सही नहीं था। डिप्टी सीएम विजय कुमार सिन्हा ने भी नवंबर-25 में वोटिंग के दौरान उन पर अनसुनी करने के आरोप लगाए थे।
नीतीश कुमार का दौरा: मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के लखीसराय आगमन के दौरान हुई कुछ तकनीकी चूकों को भी उनके तबादले की एक वजह माना जा रहा है।
जनता में लोकप्रिय, लेकिन विवादों ने घेरा
एक तरफ जहां उन पर जांच की तलवार लटकी है, वहीं लखीसराय की जनता के बीच उनकी छवि एक ‘काम करने वाले अधिकारी’ की रही है। उनके कार्यकाल में बालगुदर गांव का 30 साल पुराना हिंदू-मुस्लिम जल विवाद सुलझाया गया।
उनके कार्यकाल में लाल पहाड़ी के ऐतिहासिक धरोहर को पहचान दिलाई गई। केंद्रीय विद्यालय के पास बाईपास सड़क का निर्माण शुरू हुआ। शहर के सौंदर्यकरण और म्यूजियम को आधुनिक रूप देने में उनकी अहम भूमिका रही।
इसके अलावा उनके कार्यकाल में फिल्म फेस्टिवल, लखीसराय फेस्टिवल, महिला फुटबॉल खेल आदि उल्लेखनीय कार्यक्रम हुए। इसमें लखीसराय फेस्टिवल का नाम ‘लक्खीसराय फेस्टिवल’ किए जाने को लेकर भी विवाद उपजा था।
फिलहाल लखीसराय का प्रभार पड़ोसी जिले के जिलाधिकारी को सौंपे जाने की चर्चा है।
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