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रिपोर्टर की डायरी

पटना में चौकीदार-दफादारों पर पुलिसिया ऐक्शन, विधानसभा में उठा मुद्दा

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  • दफादार-चौकीदार पंचायत संघ ने पटना में किया प्रदर्शन।
  • पटना पुलिस ने लाठी चार्ज किया, एक का सिर फूटा।
  • पुलिस लाठीचार्ज का मुद्दा विधानसभा में भी उठाया गया।
पटना | प्रीति
ग्रामीण सुरक्षा की मुख्य कड़ी चौकीदार व दफादारों को राजधानी पटना में अपनी मांगों के लिए प्रदर्शन करना भारी पड़ गया। करीब एक हजार दफादार और चौकीदारों पर पटना पुलिस ने लाठियां भांजी, जिसमें एक बुजुर्ग चौकीदार का सिर फूट गया व कई प्रदर्शनकारी चोटिल हो गए हैं। पुलिस की इस कार्रवाई की आलोचना सोशल मीडिया से लेकर विधानसभा तक में हो रही है। विधानसभा में 24 फरवरी को विपक्षी दलों ने नारेबाजी करते हुए कहा कि बिहार में लाठी गोली की सरकार नहीं चलेगी। बता दें कि चौकीदारों के सुपरवाइजर को दफादार कहा जाता है।
विधानसभा में पुलिस के वर्वर रवैये का मुद्दा राजद विधायक सर्वजीत ने उठाया। उन्होंने सदन की कार्यवाही शुरू होते ही कहा कि
“बिहार के संपूर्ण चौकीदार-दफादार अपनी मांग के लिए सड़क पर आंदोलन कर रहे थे, उनको इतनी बर्बरता से पुलिस ने मारा है तो क्या लोकतंत्र में अपनी मांगों को मांगने का अधिकार नहीं है? साथ ही उन्होंने कहा कि ‘अगर माननीय न्यायलय ने कानून में संशोधन करने को कहा तो बिहार सरकार क्यों नहीं करना चाहती है?”
दूसरी ओर, बिहार कांग्रेस के प्रवक्ता निखिल कुमार ने ट्वीट करके कहा है कि “पीएम मोदी और भाजपा की सरकारों को विरोध की आवाज बर्दाश्त नहीं है।”
दरअसल, बिहार का दफादार व चौकीदार संघ बीते कई महीनों से अपने मानदेय को बढ़ाने, सेवा शर्तों में बदलाव करने की मांग कर रहा है। प्रदर्शनकारी मुख्य रूप से वंशानुगत नौकरियों की बहाली चाहते हैं, इस नियम के खिलाफ पिछले साल सुप्रीम कोर्ट ने फैसला देते हुए सरकार को झटका दिया था। बता दें कि बिहार में दफादार व चौकीदारों के रिटायर होने पर उनके परिवार के सदस्य को आश्रित के तौर पर नौकरी मिल जाती है।
सर्वोच्च अदालत ने कहा कि यह नियम गलत है और सरकार को इस नियम को बदलना चाहिए। पर वोट पॉलिटिक्स के चलते सरकार इस आदेश पर चुप्पी साधे हुए है, दूसरी ओर दफादार-चौकीदार पंचायत संघ ऐसी नियुक्तियों की बहाली चाहता है। इसके अलावा इस संघ की मांग है कि उनके मानदेय को बढ़ाया जाए और नियमित भुगतान हो। साथ ही, उन्हें पेंशन, ग्रेच्युटी और अन्य लाभ मिलें। ड्यूटी के दौरान सुरक्षा और उपकरण जैसे हथियार व ट्रेनिंग भी दी जाए।
इन मांगों को लेकर बीते 23 फरवरी की सुबह पटना में बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारी जुटे।  दोपहर बाद प्रदर्शन उग्र हो गया। प्रदर्शनकारी पटना के जेपी गोलंबर पर लगाई गई पुलिस बैरिकेडिंग तोड़कर डाकबंगला चौराहा की ओर बढ़ने लगे। यहां पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच धक्का-मुक्की हुई। इसके बाद पुलिस ने प्रदर्शनकारियों पर लाठीचार्ज कर सबको खदेड़ दिया।
लाठीचार्ज के दौरान अफरा-तफरी मच गई। इससे आरा से आए चौकीदार प्रभु के सिर में चोट लग गई। उनको इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि वे शांतिपूर्ण ढंग से अपना प्रदर्शन कर रहे थे, फिर आखिर क्यों पुलिस ने लाठियां भांजीं ?

 

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पंडुई महल : जहानाबाद की 200 साल पुरानी विरासत अब जर्जर, संरक्षण की मांग उठी

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पंडुई महल
पंडुई महल
  • जहानाबाद का पंडुई गांव 19वीं सदी की जमींदारी का गवाह।
  • यहां की जमींदारी में आते थे 110 गांव, हाथी-घोड़ों का हुजूम था।
  • जर्जर हो चुके इस जगह के ऐतिहासिक भवनों को सहेजने की मांग।

(नोट – इस खबर को वीडियो पर देखने के लिए लिंक पर जाएं।)

जहानाबाद | शिवा केसरी
19वीं सदी में बिहार के जहानाबाद जिले के पंडुई में जमींदारी का दौर था, जहां की विरासत संरक्षण के अभाव में अब जर्जर भवनों में तब्दील हो चुकी है। जहानाबाद शहर से कुछ किलोमीटर की दूरी पर बसा पंडुई महल इसी विरासत का मूक गवाह है।
एक जमाने में यहां रियासतें चलती थीं। आवाम के मसलों को सुलझाने के लिए मजिस्ट्रेट इस जगह पर बैठकर अदालत चलाते थे। फिर यहां जब अंग्रेजी शासनकाल आया तो इस जगह पर अंग्रेजी सैनिकों की टुकड़ियां आना-जाना करती थीं। यही वजह रही कि पंडुई जमींदारों का गढ़ माना गया और इसे आज भी लोग पंडुई स्टेट या ‘पंडुई राज’ के नाम से जानते हैं।
पंडुई रियासत मुख्य रूप से भूमिहार ब्राह्मण (भूमिहार) जमींदारों की थी, जो बिहार में मुगल और ब्रिटिश काल में प्रभावशाली रहे।  पंडुई के जमींदारों ने 110 गांवों पर शासन किया, जहां कृषि, कर वसूली और स्थानीय न्याय व्यवस्था उनके हाथ में थी।
यह ब्रिटिश काल में सैनिक गतिविधियों का केंद्र बना। जमींदारी उन्मूलन (1950) के बाद रियासतें समाप्त हो गईं और महल जर्जर हो गया। गौरतलब है कि 18वीं व 19वीं सदी में जहानाबाद, तत्कालीन गयाराज जिले का हिस्सा था। यहां जमींदारी प्रथा ‘परमानेंट सेटलमेंट’ (1793) के तहत ब्रिटिशों द्वारा स्थापित की गई थी।
मुगल काल में भू-राजस्व प्रणाली से शुरू हुई जमींदारी ब्रिटिशों ने मजबूत की, जहां जमींदारों को राजस्व वसूलने का अधिकार मिला और बदले में वे ब्रिटिशों को निष्ठा दिखाते थे। 
पंडुई में जमींदार वामदेव प्रसाद ने यहां महल बनवाया था जो 200 साल पुरानी धरोहर है, जो मुगल-ब्रिटिश वास्तुकला का मिश्रण दिखाती है। इसकी सुरक्षा के लिए जमींदार ने 6 एकड़ पर चहारदीवारी तक बनवाई। यहां नक्काशीदार दीवारें, बड़े हॉल और बरामदे हैं।
इतिहासकारों के अनुसार, ऐसे महल बिहार की सामंती व्यवस्था के प्रतीक हैं, जहां हाथी-घोड़ों की सेना और दरबार लगते थे। इस महल में कभी दरबारियों और घोड़े-हाथियों का हुजूम रहता था। पहले के राजा-महाराजा के महलों जैसी इस भवन की नक्काशी आज भी लोगों को अपनी खूबसूरती की ओर आकर्षित करती है।  इस इमारत को आज भी देखने लोग पहुंचते हैं।
यह भवन यूं तो ऐतिहासिक धरोहर है पर इसे अब तक ऐसा दर्जा नहीं दिया गया। रंग-रोगन के अभाव में महल की रौनक फीकी हुई है। फिर भी यह इमारत बुलंद है। पंडुई महल के अंदर 4 हॉल और कई कमरे हैं। महल के चारों तरफ बस्ती बनी हुई है। यहां प्रवेश करने के लिए चारों ओर से दरवाजा बना है।
इतना ही नहीं महल के अंदर बैठने के लिए चारों तरफ बरामदा भी बना हुआ है। जमींदार वामदेव प्रसाद ने महल की सुरक्षा के खातिर 6 एकड़ जमीन पर चहारदीवारी का निर्माण करवाया था। हालांकि, वो टूट चुकी थी, लेकिन नई पीढ़ी के लोगों ने फिर से इसका निर्माण करवाया है।  इतना ही नहीं इस महल के पश्चिमी छोर पर एक बड़ा सा तालाब है, जो पंडुई महल को खूबसूरत बनाने का काम करता है। परिवार के लोग आज भी इस महल के अंदर रहते हैं।
पंडुई जहानाबाद का छोटा-सा गांव है। यह शहर से चंद किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। यहां पहुंचना भी काफी आसान है। भले ही यहां के जमींदार अपनी जमीन बेचकर बाहर चले गए हों, लेकिन यहां की बिल्डिंग आज भी उस जमींदारी का गवाह बनकर सामने है। स्थानीय लोग व जिले के गणमान्य लोगों की मांग है कि पंडुई महल को सरकार संरक्षित करे। 
इस जगह पर आज भले ही सन्नाटा पसरा हुआ है, लेकिन एक वक्त ऐसा था जब यहां की जमींदारी में 110 गांव आया करते थे। यह इमारत अंग्रेजी सैनिकों की तोपों का भी गवाह है। लोगों की मांग है कि सरकार 19वीं सदी की गिनी-चुनी धरोहरों की तरह इसे भी संरक्षित करे ताकि इस जगह की रौनक लौट सके। साथ ही यहां के टूरिज्म का भी विकास हो सके।
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जनहित में जारी

बिहार : गाेपालगंज में बेटे ने 100 रुपये के लिए मां का गला रेता

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गोपालगंज जिले के बैकुंठपुर थाना क्षेत्र उसरी बिनटोली में घटना की जानकारी देते मृतका के पति गणेश रावत। (गाेपालगंज संवाददाता )
गोपालगंज जिले के बैकुंठपुर थाना क्षेत्र उसरी बिनटोली में घटना की जानकारी देते मृतका के पति गणेश रावत। (गाेपालगंज संवाददाता )
  • नशे में आया था आरोपी, रुपये न देने पर कर दी हत्या  
  • वारदात के बाद गुस्साए लोगों ने जमकर पीटा, गिरफ्तार
  • नशे का आदी है आरोपी और दो पत्नियां उसे छोड़ चुकीं

 

गोपालगंज | आलोक कुमार 

बिहार में शराबबंदी लागू करते हुए सरकार का मानना था कि इससे महिला हिंसा में कमी आएगी पर राज्य में हर रोज होने वाली घटनाएं बताती हैं कि न तो शराब बंदी ठीक से लागू है और न ही शराबबंदी अकेले घरेलू हिंसा रोकने में मददगार है।

दरअसल गोपालगंज जिले में नशे में घर पहुंचे एक जवान बेटे ने केवल 100 रुपये के लिए अपनी मां की गला रेतकर हत्या कर दी है। अपनी मां को मार डालने वाला आरोपी पकड़ लिया गया है, वह पहले भी हिंसा करता रहा है। गांव वालो का कहना है कि उसके इस व्यवहार के चलते ही उसकी दो शादियां हुईं पर एक भी रिश्ता नहीं चल पाया। अब बीते 22 फरवरी को भी इस व्यक्ति ने अपनी मां को मार डाला।

गांव वालो ने पीटकर पुलिस को सौंपा

आरोपी रामभरोस रावत। (गाेपालगंज संवाददाता )

आरोपी रामभरोसे रावत को जमकर हुई पिटाई के बाद अस्पताल में भर्ती किया गया। (गाेपालगंज संवाददाता )

यह वारदात गाेपालगंज जिले की है, वहां के बैकुंठपुर थाना क्षेत्र उसरी बिनटोली में रविवार शाम (22 Feb) को यह घटना हुई। हमले के बाद गुस्साए लोगों ने आरोपी को जमकर पीटा और पुलिस के हवाले किया। पुलिस ने आरोपी रामभरोसे रावत को हिरासत में लेकर जांच शुरू कर दी है। मृतका की पहचान सुमित्रा देवी (55) के रूप में हुई है।

वारदात के समय अकेली थी मां

मृतका के पति गणेश रावत ने बताया, उनका बेटा शराब पीकर घर आया था, उस समय घर पर उनकी पत्नी अकेली थी। जबकि वे घर के बाहर काम कर रहे थे। पिता का कहना है कि बेटा बार-बार सौ रूपये मांग रहा था जो उनकी पत्नी के पास नहीं थे। इस पर गुस्साए बेटे ने वहीं पर रखे धारदार हथियार से मां का गला रेत दिया। मौके पर पत्नी चीखीं तो आसपास के लोग जुटे। उनके बेटे ने मां को मारकर भागने की कोशिश की तब सबने पकड़कर उसको खूब पीटा और पुलिस को बुलाकर उन्हें सौंप दिया।

आरोपी से पूछताछ जारी, धारधार हथियार बरामद

घटना की जानकारी देते सदर एसडीपीओ 2 राजेश कुमार।  (गाेपालगंज संवाददाता )

घटना की जानकारी देते सदर एसडीपीओ 2 राजेश कुमार।  (गाेपालगंज संवाददाता )

इस मामले में सदर एसडीपीओ-2 राजेश कुमार ने बताया कि आरोपी रामभरोसे रावत को गिरफ्तार करके महिला के शव को पोस्टमार्टम के लिए मॉडल अस्पताल भेज दिया है। आरोपी घायल है इसलिए उसे भी अस्पताल में भर्ती कराया गया है, उससे पूछताछ की जा रही है, आगे जेल भेजा जाएगा।

 

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बच्चों की बात

कैसा विकास : आंगनबाड़ी से लौट रही ढाई साल की बच्ची की गड्‍डे में गिरने से मौत

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इस नाले के खुले चैंबर में गिरने से मासूम की मौत हो गई।
इस नाले के खुले चैंबर में गिरने से मासूम की मौत हो गई।
  • पटना के नौबतपुर में नाले के चेंबर में गिरने से ढाई वर्षीय बच्ची की मौत।
  • आगनबाड़ी केंद्र से पढ़कर अकेले घर जा रही थी छोटी बच्ची।

(note – इस खबर को वीडियो पर देखने के लिए इस लिंक पर जाएं।)

पटना | हमारे संवाददाता

बिहार की राजधानी पटना में खुले नाले में ढाई साल की मासूम के डूबने से मौत हो गई है। यह बच्ची आंगनबाड़ी केंद्र से पढ़कर अकेले ही अपने घर जा रही थी। रास्ते में पड़ने वाले खुले गड्‍डे में वह डूब गई। नाले के ऊपर तैरते बच्ची के बस्ते से उसकी पहचान की जा सकी। यह घटना निर्माण विभाग (PWD) की लापरवाही और आंगनबाड़ी से बच्चों को सुरक्षित घर पहुंचाने की व्यवस्था की कमी को उजागर करती है। पीड़ित परिवार ने सरकार से मुआवजे की मांग की है।

यह घटना 19 फरवरी को पटना के नौबतपुर ब्लॉक में हुई। यहां के सरासत गांव के राकेश कुमार की बेटी रिया कुमारी आंगनबाड़ी केंद्र में पढ़ने जाती थी। पिता राकेश कुमार ने बताया कि घटना के दिन बच्ची घर पर नहीं लौटी तो उसे ढूंढा गया। आंगनबाड़ी वर्कर ने कहा कि रोज की तरह बच्ची पढ़कर घर को चली गई थी। बताया जाता है कि आंगनबाड़ी सेंटर से बच्ची का घर मात्र सौ मीटर की दूरी पर है।

बच्ची की खोजबीन में लगे परिवार व गांव वालो को वह कहीं नहीं मिली, इसी दौरान गांव के खुले नाले के एक चेंबर में तैरता बस्ता एक व्यक्ति को नजर आया। उस बस्ते को नाले से निकालने के बाद गांव वालो ने मिलकर नाले का पानी बाहर निकाला, तब उन्हें बच्ची का शव नाले के अंदर डूबा मिला। इस दृश्य ने वहां मौजूद लोगों को हिलाकर रख दिया।

बच्ची की इस तरह हुई मौत ने उसके मां-पिता को अंदर से तोड़ दिया है। वे विलखते हुए कह रहे थे कि नाले में ढक्कन न लगा होेने से उनकी बेटी की मौत हुई है, ये सरकार की गलती है। परिवार की मांग है कि सरकार उन अफसरों पर ऐक्शन ले जिनकी लापरवाही से उनकी बेटी की जान गई है। साथ ही पिता ने सरकार से मुआवजे की मांग की है।

इस घटना को लेकर नौबतपुर के अंचलाधिकारी सुमित कुमार ने बताया कि एक बच्ची की गुमशुदगी का शिकायत मिली,  बाद में पता चला की बच्ची की नाले में गिरकर मौत हुई है। बच्ची के शव को पोस्टमार्टम के लिए पटना एम्स भेज दिया गया है, इस मामले में परिवार को मुआवजा दिया जाएगा जिसका प्रोसेस शुरू किया जाएगा।

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