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रिपोर्टर की डायरी

बेगूसराय पुलिस पर उठे सवाल : शराब तस्करी के शक में पीछा किया, युवक की मौत हो गई; परिवार बोला- हत्या हुई

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  • बेगूसराय में शराब तस्करी के शक में एक युवक की मौत।
  • पुलिस युवक का पीछा कर रही थी, गिरने से मौत का दावा।
  • परिवार ने कहा- गिरने से नहीं गला दबाने से हत्या हुई है।

(नोट – इस खबर को वीडियो में देखने के लिए इस लिंक पर जाएं।)

बेगूसराय | धनंजय कुमार झा

बिहार में शराबबंदी के नाम पर होने वाली पुलिस चेकिंग के दौरान एक युवक की संदिग्ध हालात में मौत का मामला सामने आया है, जिसने बेगूसराय जिले की पुलिस पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। परिवार का कहना है कि उनके बेटे के शरीर पर एक भी चोट का निशान नहीं मिला है, जबकि पुलिस ने उनसे कहा कि मौत पुलिस से बचने के लिए भागने के दौरान गिरने के बाद हुई है। परिजन इसे एक तरह का एनकाउंटर बता रहे हैं और उनका कहना है कि उनके बेटे के चेहरे, नाक और मुंह में बालू लगी हुई थी, जिससे अंदेशा होता है कि उसे जमीन पर दबोचकर उसका गला घोंटा गया है।

24 फरवरी की रात में हुई इस घटना के बाद रात ही में मेडिकल बोर्ड बनाकर शव का पोस्टमार्टम कराया गया है और इसकी वीडियोग्राफी भी हुई है। घटनास्थल पर FSL टीम ने भी जांच की है।

इस मामले में बेगूसराय बखरी डीएसपी कुंदन कुमार का कहना है कि उनकी गश्ती टीम ने इस युवक की बाइक का पीछा संदेह के आधार पर किया। जिसके बाद बाइक छोड़कर युवक भागा और किसी कारणवश अचेत होकर गिर गया, अस्पताल ले जाने पर उसे मृत घोषित कर दिया गया। थाना पुलिस का कहना है कि मरने वाले युवक के पास से दो कार्टन शराब बरामद हुई है जो वह बाइक पर ले जा रहा था। बाइक पर सवार एक अन्य आरोपी अभी फरार है, जिसे वह जल्द पकड़ लेगी। परिवार ने इन आरोपों को झूठ बताया है।

मरने वाले व्यक्ति 30 साल का ललित कुमार है, जिनके पिता का नाम कपिल देव महतो है। यह बखरी थाना क्षेत्र के इमादपुर गांव का निवासी था। मृतक ललित के साथ हुई घटना गढ़पुरा थाना क्षेत्र के कुम्हारसों दुर्गा स्थान के पास हुई थी।

पोस्टमार्टम हाउस पर मौजूद युवक के परिजन ने मीडिया से कहा कि शाम आठ बजे तक ललित उनके साथ ही था, फिर खाना खाने की बात कहकर चला गया। रात 11 बजे उन्हें फोन पर घटना की सूचना मिली। उनका कहना है कि पहले पुलिस ने कहा कि हार्टअटैक आने से मौत हो गई। फिर कहा कि गिरने से मौत हुई। युवक का कहना है कि वह न तो इतना कमजोर दिल का था कि उसे ऐसे ही हार्टअटैक आ जाएगा और न ही उसके शरीर पर कोई चोट का निशान मिला है।

घटना के समय मौके पर मौजूद प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि वे लोग रात करीब नौ बजे मंदिर पर बैठे थे। तभी एक युवक को भागते देखा गया, पुलिस उसका पीछा कर रही थी। युवक ने इधर-उधर भागते हुए दुर्गा मंदिर के पीछे से चारदीवारी फांदने की कोशिश की, इस दौरान वहां लगे लोहे के बोर्ड से वह टकराकर गिर गया। तभी पीछा करती पुलिस पहुंची और बेहोशी की हालत में उसे उठाकर ले गई।

एसपी मनीष का कहना है कि मौत के सही कारणों का पता पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही पता लग सकेगा। मरने वाला व्यक्ति एक महीना पहले एक मामले में जमानत पर छूटा था और पुलिस का कहना है कि वह पुलिस तस्कर है। सवाल यह है कि सिर्फ संदेह के आधार पर किसी का पीछा करने के नाम पर होने वाली इस मौत का आखिर जिम्मेदार कौन है, क्या किसी आरोपी के साथ अपराधी जैसा व्यवहार किया जा सकता है? जबकि भारत का कानून इसकी इजाजत नहीं देता।

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