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गोपालगंज (बिहार): जब सिलेब्रेटी मदद को आए आगे तो डीएम ने भिजवाई दिव्यांग छात्रा को ट्राई-साइकिल
गोपालगंज | आलोक कुमार
गोपालगंज की गरीब विकलांग छात्रा के दो किलोमीटर तक पैदल चलकर स्कूल जाने के संघर्ष को दिखलाते एक वीडियो के वायरल हो जाने के बाद उसकी जिंदगी बदल गई है। 15 साल की सोनी कुमारी की मदद के लिए अलीपुर विधानसभा की विधायक मैथिली ठाकुर सामने आईं। और उनकी पहल पर गोपालगंज जिला प्रशासन ने 12 मार्च को छात्रा को ट्राई साइकिल उपलब्ध करवाई है। इतना ही नहीं, विधायक व लोकगायिका मैथिली ठाकुर के अलावा, परोपकार के लिए प्रसिद्ध अभिनेता सोनू सूद और कवि व नेता कुमार विश्वास ने भी ट्वीट के जरिए इस छात्रा को मदद का आश्वासन दिया।
इस घटना के बाद सवाल इस बात पर उठता है कि आखिर ये कैसी व्यवस्था है जिसमें बड़े नेता या सिलेब्रिटी के रेफरेंस पर अफसर ऐक्शन लेते हैं? जबकि विकलांग बच्चों व वयस्कों को उनकी जरूरत की सामग्री व सहायता राशि उपलब्ध करवाना जिला दिव्यांग सशक्तिकरण विभाग की जिम्मेदारी है। आपको बता दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दिव्यांग शब्द प्रचलित किया था, उनकी मंशा थी कि इससे विशेष चुनौती वाले लोगों के प्रति आम लोगों व सरकारी अफसरों का नजरिया बदलेगा, पर नाम बदलने भर से जमीन पर ऐसा बदलाव नहीं दिख रहा है।
बहरहाल, गोपालगंज जिलाधिकारी पवन कुमार सिन्हा के निर्देश पर 12 मार्च को छात्रा सोनी कुमारी के स्कूल में उन्हें ट्राई साइकिल दी गई। इस दौरान स्कूल के अन्य विद्यार्थी, सोनी को निशुल्क पढ़ा रहे उनके प्रिंसिपल और सोनू की मां इलायची देवी मौजूद रहीं।
मैथिली ठाकुर ने जिलाधिकारी को किया था फोन
बता दें कि 11 मार्च की रात नौ बजे विधायक मैथिली ठाकुर ने ट्वीट करके जानकारी दी थी कि उन्होंने सोनी कुमारी को ट्राई साइकिल दिलाने के लिए गोपालगंज जिलाधिकारी से फोन पर बात की है और 13 मार्च को छात्रा को ट्राईसाइकिल मिल जाएगी।
हालांकि गोपालगंज जिलाधिकारी ने मीडिया को दिए बयान में विधायक मैथिली ठाकुर से हुई फोन बातचीत का जिक्र नहीं किया और कहा कि सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होने के बाद उन्होंने इसका संज्ञान लिया है।
जिलाधिकारी बोले- सोशल मीडिया से जानकारी मिली
जिलाधिकारी ने बताया कि 11 मार्च की शाम सात बजे उन्हें इस वीडियो की जानकारी मिली, उनके निर्देश पर जिला शिक्षा पदाधिकारी और दिव्यांग कोषांग के प्रभारी पदाधिकारी ने छात्रा के परिवार से संपर्क करके उसके कागजों को वेरिफाई किया। इसके बाद उसे ट्राईसाइकिल दी गई।
यानी चौबीस घंटे से भी कम समय में जिलाधिकारी के निर्देश पर छात्रा को ट्राई साइकिल मिल गई, जबकि उसकी मां कई साल से इसके लिए प्रयास कर रही थी।
डीएम ने विभाग की गलती मानी, बोले- पेंशन जल्द मिलेगी
हालांकि जिलाधिकारी ने बताया है कि इस बच्ची की मां की ओर से इसका आवेदन नहीं किया गया था। जिलाधिकारी का यह भी कहना है कि बच्ची का विकलांगता प्रमाणपत्र बना हुआ है, ऐसे में यह विभाग की जिम्मेदारी थी कि बच्ची को ट्राईसाइकिल दिलाई जाती और उसे पेंशन भी दिलाई जाती। जिलाधिकारी ने कहा है कि दो-तीन दिनों के भीतर दिव्यांग छात्रा को पेंशन के लिए आवेदन कराया जाएगा।
पांचवीं पास फिर भी पहली कक्षा में पढ़ने को मजबूर
12 मार्च को सोनी को ट्राई साइकिल मिलने का फोटो-वीडियो भी अब सोशल मीडिया पर उसी तरह साझा किया जा रहा है, जैसे सोनी कुमारी के संघर्ष का वीडियो वायरल हुआ था। जिलाधिकारी ने बताया है कि दिव्यांग छात्रा सोनी कुमारी सरकारी स्कूल से पांचवीं पास हैं। अब वे एक निजी स्कूल में निशुल्क पहली कक्षा में पढ़ रही हैं जबकि उनकी उम्र करीब 15 साल है। डीएम ने यह भी बताया कि सोनी के दिव्यांगता प्रमाणपत्र में उनकी जन्मतिथि 2008 है। यानी इस हिसाब से उनकी उम्र 18 साल है।
छात्रा ड्रॉपआउट हुई पर शिक्षा विभाग को खबर नहीं
दरअसल सोनी की विधवा मां खेतों में मजदूरी करके बेटी को पढ़ा रही हैं। उन्होंने बताया कि पड़ोस के एक गांव के प्रिंसिपल ने बेटी की पढ़ने की ललक देखकर उसका निशुल्क दाखिला कर लिया था, अब वह कक्षा एक में पढ़ रही है। ये परिस्थितियां बताती हैं कि गरीब और जानकारी से महरूम होने की स्थिति में आम लोगों को सरकारी सेवाओं का लाभ कितना मिल पा रहा है।
शिक्षा का अधिकार अधिनियम के तरह सोनी कुमारी को कक्षा आठ तक मुफ्त शिक्षा मिलनी चाहिए थी। कक्षा पांच के बाद वह ड्रॉपआउट क्यों हुई, इस बात की जवाबदेही जिला शिक्षा पदाधिकारी की होनी चाहिए। देखना होगा कि इस मामले में जिलाधिकारी कोई ऐक्शन लेते हैं या नहीं।
अब वायरल हो चुकी सोनी कुमारी की कहानी विस्तार में जानिए —
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गोपालगंज (बिहार) : रोज़ 2 km चलकर स्कूल जाने को मजबूर हैं पैरों से विकलांग छात्रा, वीडियो वायरल हुआ तो मदद को उठे हाथ
गोपालगंज | आलोक कुमार
बिहार में किसी भी मामले का वीडियो वायरल होने के बाद ही ऐक्शन होना अब एक चलन बन गया है। उससे पहले न तो प्रशासन और न ही समाज के जिम्मेदार लोग किसी भी मामले में स्वत: संज्ञान ले रहे हैं।
ऐसा ही एक मामला गोपालगंज में सामने आया, जब दोनों पैरों से विकलांग एक छात्रा के दो किलोमीटर पैदल चलकर स्कूल पहुंचने का वीडियो वायरल होने लगा।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जब यह वीडियो वायरल हुआ, तो अलीपुर विधायक व लोकगायिका मैथिली ठाकुर, ऐक्टर सोनू सूद, कवि कुमार विश्वास समेत कई लोगों ने मदद को लिए हाथ बढ़ाया है।
दूसरी ओर, जिला प्रशासन की ओर से भी विकलांग छात्रा को जल्द मदद पहुंचाने की बात सामने आई है।
गोपालगंज के भोरे प्रखंड के रामनगर गांव में 15 साल की सोनी कुमारी अपनी मां गुलाइची देवी के साथ रहती हैं। उनके पिता नंदकिशोर राम का टीबी की बीमारी के चलते तब देहांत हो गया था जब वे मात्र एक साल की थीं।
घर की स्थिति अच्छी न होने के बाद भी मां गुलाइची देवी अपनी विशेष शारीरिक चुनौतियों वाली बेटी सोनी को पढ़ा रही हैं। पर वे कहती हैं कि उन्हें अब तक सरकार से कोई मदद नहीं मिली। एक ट्राई साइकिल तक नहीं दी गई ताकि बेटी को पैदल स्कूल न जाना पड़े।
सोनी की मां गुलाइची देवी दूसरों के खेतों में मजदूरी करके अपनी दो बेटियों का पेट पालती हैं। मां बताती हैं कि छोटी बेटी सोनी को पढ़ने की बहुत ललक है पर गरीबी और उसके ठीक से न चल पाने के कारण वह पढ़ नहीं पाई। लेकिन दो साल पहले काम के सिलसिले में वे पड़ोसी गांव राजघाट गईं जहां एक प्राइवेट स्कूल के प्रिंसिपल अरुण कुमार मिले। वहां उन्होंने अपनी बेटी की पढ़ाई के लिए उनसे मदद मांगी।
मां बताती हैं कि सोनी की पढ़ाई के प्रति लगन को देखकर प्रिंसिपल अरुण कुमार ने उसे निःशुल्क दाखिला दे दिया। तभी से सोनी रोजाना अपने घर से करीब दो किलोमीटर दूर राजघाट गांव के निजी स्कूल पैदल जाती हैं। अभी वो कक्षा एक में पढ़ती है।
सोनी का सपना पढ़-लिखकर डॉक्टर बनने का है ताकि वे अपने जैसे शारीरिक चुनौती वाले लोगों की मदद कर सके।
बिहार में बीस साल से नीतीश कुमार की सरकार है जिसने बेटियों की पढ़ाई के लिए उल्लेखनीय काम किया है, फिर भी सोनी जैसी कई बेटियां अब भी गरीबी और प्रशासन की अनदेखी के चलते पढ़ाई से महरूम हैं जबकि प्राथमिक शिक्षा बच्चों का अधिकार है। यह सरकार, उसके विकलांगता कल्याण विभाग व प्राथमिक शिक्षा विभाग पर भी गंभीर सवाल खड़े करता है।
अब वीडियो वायरल होने के बाद देखना होगा कि सोनी को कब तक ट्राई साइकिल व अन्य सुविधाएं मिल पाती हैं ताकि वे पढ़कर अपना सपना साकार कर सके।
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फतेहपुर (UP): पिता सिलेंडर लेने बेटी के घर गए, लौटे तो पत्नी, बेटे और भाई का गला कटा मिला, जानिए पूरी घटना
- उत्तर प्रदेश के फतेहपुर में तीन लोग एक कमरे में मृत मिले।
- महिला, उसका बेटा और देवर का ब्लेड से गला कटा मिला।
- घटना के समय पिता सिलेंडर लेने बेटी के घर चले गए थे।
फतेहपुर | संदीप केशरवानी
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बिहार : अफसर बोले- ‘भटका हाथी वापस झारखंड लौटा’; रोहतास में उत्पात जारी ..किसान परेशान
- रोहतास जिले में दो सप्ताह से जारी है भटके हाथी का उत्पात।
- जिले के तिलौथू व अमझोर में गरीबों की झोपड़ी उजाड़ी।
- स्थानीय लोगों का कहना- वन विभाग कह रहा, हाथी चला गया।
सासाराम | अविनाश कुमार श्रीवास्तव
झारखंड की सीमा से लगते बिहार के रोहतास जिले में दो सप्ताह से एक हाथी के उत्पात से ग्रामीण परेशान हैं। झुंड से बिछड़ गए हाथी के हमले से कई झोपड़ियां उजड़ गई हैं, कुछ मवेशियों की हमले में मौत हो गई जबकि कई दर्जन मवेशी घायल हैं।
भयभीत किसानों को जागकर रात गुजारनी पड़ रही है। दूसरी ओर, वन विभाग कह रहा है कि वह हाथी को दोबारा झारखंड की ओर भेजकर अपनी जिम्मेदारी पूरी कर चुका है।
हाथी के उत्पात की हालिया घटनाएं रोहतास जिले के तिलौथू व अमझोर के पास देखी गई हैं। जहां सोन नदी के बीचों-बीच स्थित बालू के ऊंचे टीलों पर बसी कई झाड़ियों को हाथी ने उजाड़ दिया।
किसानों की मांग है कि हाथी को बेहोश करके वन विभाग सुरक्षित स्थान पर ले जाए क्योंकि गेहूं की फसल पक जाने के चलते वे मशाल या पटाखे जलाकर हाथी को नहीं भगा सकते, इससे फसल जल सकती है।
दूसरी ओर, DFO पहले कह चुके हैं कि क्षेत्र की भौगोलिक स्थिति को देखते हुए हाथी को बेहोश करना जोखिम भरा हो सकता है।
उसे हटाने के लिए वन विभाग के सात पश्चिम बंगाल के बांकुड़ा से आई विशेष टीम लगातार अभियान चला रही है।
हाथी इन टीलों पर बसी झोपड़ियों को उजाड़ रहे हैं। पीड़ित किसानों का कहना है कि जंगली इलाके से भटककर हाथी दो दिन पहले यहां पहुंचा है।
एक सप्ताह पहले यही हाथी नौहट्टा के जंगलों में कैमूर पहाड़ी के आसपास उत्पात मचा रहा था। अब यह हाथी आगे बढ़कर तिलौथू की तरफ आ गया है।
किसानों का कहना है कि उन्होंने वन विभाग को सूचना भेजी है पर कोई मदद को नहीं पहुंचा और स्थानीय व्हाट्सऐप ग्रुपों में यह मैसेज भेजा जा रहा है कि “हाथी झारखंड भेज दिया गया है।”
दूसरी ओर, संवाददाता ने इस बारे में पूछने के लिए रोहतास के DFO स्टालिन फिडल कुमार से संपर्क साधना चाहा पर बात नहीं हो सकी।
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