Connect with us

दुनिया गोल

ईंधन संकट के बीच भारत ने बांग्लादेश को 5000 मीट्रिक टन डीजल भेजा

Published

on

नई दिल्ली | ईरान पर अमेरिका-इजरायल के हमलों के बीच ईंधन का संकट पैदा हो गया है। इससे परेशान पड़ोसी देश बांग्लादेश को भारत ने मदद पहुंचाई है।

भारत से बांग्लादेश को 5000 मीट्रिक टन डीज़ल की आपूर्ति की है।

गौरतलब है कि शेख हसीना की सरकार गिरने के बाद से भारत और बांग्लादेश के रिश्तों में काफी तल्खी आ गई है।  इसके बीच भारत ने बांग्लादेश को मदद का हाथ बढ़ाया है।

बांग्लादेश ने ऊर्जा संकट में मदद के लिए भारत से 50,000 मीट्रिक टन डीज़ल और देने की मांग की है। हालांकि अभी भारत की ओर से इस पर कोई जवाब नहीं दिया गया है।

बांग्लादेश ने चीन से भी ईंधन संकट से निपटने के लिए मदद मांगी है। विशेषज्ञ मानते हैं कि भारत-बांग्लादेश के तल्ख हुए रिश्तों को संभालने के इस अवसर को भारत हाथ से जाने नहीं देगा।

गौरतलब है कि बांग्लादेश में हाल में बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी की सरकार बनी है।

प्रधानमंत्री तारिक रहमान का पीएम मोदी सरकार ने उसका गर्मजोशी के साथ स्वागत किया था।

Continue Reading
Click to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

दुनिया गोल

होर्मुज़ स्ट्रेट : सुरक्षा के लिए जहाज भेजने की ट्रंप की अपील जापान-ऑस्ट्रेलिया ने ठुकराई

Published

on

स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज को ईरान ने बंद कर रखा है जिससे तेल के दाम बढ़ रहे हैं और ट्रंप के ऊपर दवाब पड़ रहा है।

नई दिल्ली|  वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतें आसमान छू रही हैं और दुनिया के 20% तेल के यातायात का अहम  रास्ता होर्मुज स्ट्रेट, जंग के 17 दिन बाद भी नहीं खुला है।

इस संकरे समुद्री रास्ते में जहाजों को सुरक्षा देने के लिए राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चीन, फ़्रांस, जापान, दक्षिण कोरिया, ऑस्ट्रेलिया और ब्रिटेन से युद्धपोत भेजने की अपील की है।

पर अब तक किसी भी देश ने मदद का हाथ नहीं बढ़ाया है। बल्कि अमेरिका के दो करीबी सहयोगी जापान और ऑस्ट्रेलिया ने सीधे शब्दों में मना कर दिया है।

वैश्विक तेल संकट के बीच ट्रंप प्रशासन का भारतीय कंपनी के साथ यह सौदा अहम है।

अलजजीरा के मुताबिक, जापान की प्रधानमंत्री सनाए ताकाइची ने संसद में कहा कि नौसैनिक जहाजों को भेजने के संबंध में कोई निर्णय नहीं लिया है।”
वहीं, ऑस्ट्रेलिया के परिवहन मंत्री कैथरीन किंग ने कहा है कि वह स्ट्रेट की सुरक्षा के लिए जहाज नहीं भेजेंगे।
दूसरी ओर, चीन ने अपने बयान में जारी संघर्ष पर चिंता जतायी है लेकिन स्ट्रेट में जहाज भेजने का कोई जिक्र नहीं किया। जबकि ट्रंप धमकी दे चुके हैं कि मदद न करने पर वे चीनी राष्ट्रपति के साथ प्रस्तावित शिखर सम्मेलन को टाल सकते हैं। 
उधर, दक्षिण कोरिया में राष्ट्रपति कार्यालय ने कहा है कि वे अमेरिका की इस अपील की समीक्षा कर रहे हैं।
और ब्रिटेन के ऊर्जा मंत्री एड मिलिबैंड ने बिना डिटेल दिए कहा है कि हम होर्मुज स्ट्रेट की सुरक्षा के लिए कई तरह से योगदान दे सकते हैं और इन विकल्पों पर विचार विमर्श चल रहा है। 

इस पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चेतावनी देते हुए कहा है कि इन देशों के मदद करने या न करने, दोनों ही स्थितियों में वह इसे ‘याद रखेंगे’।

Continue Reading

दुनिया गोल

म्यांमार में तख्तापलट के 5 साल बाद सेना ने बुलाया संसद सत्र

Published

on

म्यांमार में सैन्य शासक ने तख्तापलट के बाद पहली बार संसद का सत्र बुलाया है।
नई दिल्ली | पड़ोसी देश म्यांमार में तख्तापलट के पांच साल बाद सेना ने आज (15 मार्च) संसद की बैठक बुलाई है। इसके साथ ही म्यांमार में सैन्य शासन का नया राजनीतिक दौर शुरू होने जा रहा है। 
इससे पहले दिसंबर और जनवरी में चरणबद्ध आम चुनाव कराए गए थे, लेकिन इन चुनावों में प्रमुख विपक्षी दल शामिल नहीं हुए। नई संसद में सेना व उसके सहयोगी दलों का 90% सीटों पर कब्जा है।

म्यांमार की संसद

यह संसद सत्र म्यांमार की सैन्य सरकार के वास्तविक शासक जनरल मिन आंग ह्लाइंग की अध्यक्षता में होगा, जिसमें नई सरकार गठन की औपचारिक प्रक्रिया शुरू होगी।
संभावना है कि इसमें सैन्य शासक मिन आंग ह्लाइंग को देश का राष्ट्रपति या सर्वोच्च शासक बनाया जा सकता है।
बता दें कि म्यांमार में 2020 में हुए आम चुनाव को सेना ने रद्द करके फरवरी-2021 में तख्तापलट कर दिया था, जिसके बाद से यहां सैन्य शासन है और बड़े स्तर पर गृह युद्ध भी जारी है। 

2021 में हुए तख्तापलट के बाद म्यांमार में बड़े स्तर पर लोकतंत्र को बहाल करने की मांग को लेकर प्रदर्शन हुए।

तब के बाद से पहली बार इतने बड़े स्तर संसद सत्र आयोजित हो रहा है।

इस संसद सत्र के दौरान नए संविधान संशोधन और चुनाव आयोग की नियुक्ति पर चर्चा होनी है।

म्यांमार में जारी सिविल डिसओबिडियंस मूवमेंट (CDM) और पीपुल्स डिफेंस फोर्स (PDF) ने इस संसद को फर्जी और सेना का नाटक करार दिया है।

 

Continue Reading

दुनिया गोल

ईरान पर हमले के बाद पहली बार पीएम मोदी और ईरान राष्ट्रपति की फोन कॉल – जानिए क्या हुई बात

Published

on

https://www.flickr.com/photos/meaindia/53847805909

नई दिल्ली | ईरान पर अमेरिका व इजरायल के हमले शुरू होने के बाद पहली बार भारतीय पीएम नरेंद्र मोदी ने ईरानी राष्ट्रपति से फोन पर बात की है। इसकी जानकारी खुद पीएम मोदी ने 12 मार्च की रात को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर दी।

पीएम मोदी ने कहा है कि उन्होंने पश्चिम एशिया की ‘गंभीर स्थिति’ को लेकर ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियान से बात की है। भारतीयों की सुरक्षा, सामान और ऊर्जा की बिना रुकावट आवाजाही को भारत की सबसे बड़ी प्राथमिकता बताया है।

ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन

गौरतलब है कि यह फोन वार्ता ऐसे समय में हुई है जब वैश्विक तेल की आवाजाही बाधित होने के चलते भारत को आवश्यक वस्तु अधिनियम लागू करके गैस की काला-बाजारी रोकने के कदम उठाने पड़े हैं, ताकि आम जनता के लिए ज़रूरी सामानों की निर्बाध आपूर्ति बनी रहे।

पीएम मोदी ने 13 मार्च को ट्वीट किया-

“क्षेत्र (पश्चिम एशिया) की गंभीर स्थिति पर मैंने ईरान के राष्ट्रपति डॉ. मसूद पेज़ेशकियान से बातचीत की है। तनाव बढ़ने, आम नागरिकों के मारे जाने और सिविल इन्फ्रास्ट्रक्चर को हुए नुकसान पर गहरी चिंता व्यक्त की है। भारतीय लोगों की सुरक्षा, सामान और ऊर्जा की बिना रुकावट आवाजाही भारत की सबसे बड़ी प्राथमिकता है। शांति और स्थिरता के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को हमने फिर दोहराया है। साथ ही बातचीत और कूटनीति के जरिए समस्या का हल निकालने की अपील है।”

पीएम मोदी ने ट्वीट करके फोन वार्ता की जानकारी दी।

भारत ने ईरानी बच्चियों की हमले पर पहली बार बयान दिया

ईरान के मीनाब शहर के प्राथमिक कन्या स्कूल में हुए हमले में 165 बच्चियों की मौत पर भारत ने 12 मार्च को प्रतिक्रिया दी है। भारतीय विदेश मंत्रालय (एमईए) ने गुरुवार को अपनी साप्ताहिक प्रेस ब्रीफिंग में इस घटना को लेकर पूछे गए एक सवाल पर एक संक्षिप्त बयान देकर दुख जताया।

प्रेस ब्रिफिंग के दौरान विदेश मंत्रालय प्रवक्ता रणधीर जायसवाल (screen grab – Youtube/Ministry of External Affairs, India)

यह प्रतिक्रिया हमले के लगभग दो सप्ताह बाद आई है, जबकि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इस हमले के लिए अमेरिका को जिम्मेदार माना जा रहा है और उसकी खासी आलोचना हो रही है।

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने सवाल के जवाब में कहा-

“स्कूली बच्चियों के बारे में आपके सवाल के संबंध में बता दें कि हमने इस चल रहे संघर्ष पर कई बयान जारी किए हैं। हमने सभी नागरिकों की सुरक्षा को प्राथमिकता देने की आवश्यकता पर जोर दिया है और कीमती जानों के नुकसान पर अफसोस जताया है व उस संबंध में दुख व्यक्त किया है।”

यह बयान भी दर्शाता है कि भारतीय विदेश मंत्रालय ने अमेरिका या इजरायल का नाम लिए बिना सधी प्रतिक्रिया दी है।

जयशंकर ने तीन बार लगाया ईरानी विदेश मंत्री को फोन

भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर (फोटो – flickr)

भारत में पैदा हुए ऊर्जा संकट के बीच भारतीय विदेश मंत्री ने अपने समकक्ष से हाल में तीन बार बात की है। साप्ताहिक प्रेस वार्ता में विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने यह जानकारी मीडिया को दी। उन्होंने बताया-

“विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर और ईरान के विदेश मंत्री के बीच हाल के दिनों में तीन बार बातचीत हुई है। पिछली बातचीत में शिपिंग की सेफ्टी और इंडिया की एनर्जी सिक्योरिटी से जुड़े मुद्दों पर बात हुई थी।”

रणधीर जायसवाल ने आगे कहा, “जहां तक ​​युद्ध के असर की बात है, तो यह सबके सामने है कि आस-पास क्या हो रहा है। हम में से कई लोगों की ज़िंदगी पर इसका असर पड़ा है, सिर्फ हमारी ही नहीं, बल्कि दुनिया भर के लोगों और देशों पर इसका असर पड़ा है ।”

Continue Reading
Advertisement

Categories

Trending