दुनिया गोल
कोलंबिया : सैन्य विमान में आग लगने से 66 सैनिकों की मौत, अमेरिका में निर्मित था विमान
- सी-130 हरक्यूलिस विमान में 114 जवान और 11 क्रू मेंबर शामिल थे।
नई दिल्ली| दक्षिणी कोलंबिया के अमेज़न क्षेत्र से एक अत्यंत दुखद खबर सामने आई है। सोमवार को कोलंबियाई वायु सेना का एक सी-130 हरक्यूलिस (C-130 Hercules) परिवहन विमान उड़ान भरने के कुछ ही देर बाद दुर्घटनाग्रस्त हो गया। इस भीषण हादसे में कम से कम 66 सैनिकों की मौत हो गई है, जबकि दर्जनों लोग गंभीर रूप से घायल हैं।
यह हादसा कोलंबियाई वायु सेना के इतिहास की सबसे घातक दुर्घटनाओं में से एक माना जा रहा है। फिलहाल दुर्घटना के सटीक कारणों की जांच के आदेश दे दिए गए हैं।

अमेरिका निर्मित सी-130 हरक्यूलिस विमान में हादसा हुआ।
उड़ान भरते ही हुआ हादसा
वायु सेना के कमांडर कार्लोस फर्नांडो सिल्वा रुएडा के अनुसार, अमेरिकी निर्मित इस विमान में कुल 125 लोग सवार थे, जिनमें सेना के 114 जवान और 11 क्रू मेंबर शामिल थे। यह दुर्घटना पुटुमायो प्रांत के प्यूर्तो लेगुइज़ामो (Puerto Leguízamo) शहर के पास हुई। विमान का इस्तेमाल सैनिकों को एक स्थान से दूसरे स्थान पर ले जाने के लिए किया जा रहा था।
विमान में रखे गोला-बारूद फट गए
कोलंबिया के रक्षा मंत्री पेद्रो सांचेज़ ने घटना की पुष्टि करते हुए बताया कि लॉकहीड मार्टिन द्वारा निर्मित यह विमान पेरू की सीमा के पास दुर्घटना का शिकार हुआ। उन्होंने जानकारी दी कि क्रैश के बाद विमान में भीषण आग लग गई, जिसके कारण उसमें रखा गोला-बारूद फट गया, जिससे जान-माल का नुकसान बढ़ गया।
राहत और बचाव कार्य जारी
दुर्घटनास्थल पर मलबे में जीवित बचे लोगों की तलाश की जा रही है। स्थानीय समाचार माध्यमों की फुटेज में दिख रहा है कि इलाके के निवासी घायलों को अपनी मोटरसाइकिलों पर लादकर अस्पतालों तक पहुंचा रहे हैं। सेना ने अपने आधिकारिक ‘एक्स’ (X) हैंडल पर बताया कि घायलों को विशेष उपचार के लिए एयरलिफ्ट किया जा रहा है।
राष्ट्रपति ने सैन्य सामानों में भ्रष्टाचार पर नाराजगी जतायी
कोलंबिया के राष्ट्रपति गुस्तावो पेट्रो ने इस घटना पर गहरा शोक व्यक्त किया है। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा, “यह भयानक दुर्घटना नहीं होनी चाहिए थी।”
राष्ट्रपति ने सशस्त्र बलों के विमानों के आधुनिकीकरण में हो रही देरी के लिए “नौकरशाही संबंधी समस्याओं” को जिम्मेदार ठहराया।
उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि वे अब सैन्य उपकरणों के अपग्रेडेशन में और देरी बर्दाश्त नहीं करेंगे क्योंकि युवाओं की जान दांव पर लगी है।
दुनिया गोल
ट्रंप ने ईरान हमले के लिए अपने रक्षा सचिव पर ही फोड़ा ठीकरा
नई दिल्ली | ईरान युद्ध के चौथे सप्ताह में प्रवेश कर जाने के बाद भी अमेरिका यह तर्क नहीं दे सका है कि आखिर उसने अचानक ईरान पर हमला क्यों किया था। इस बीच राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के ताज़ा बयान ने इस अनिश्चितता को और बढ़ा दिया है।
ट्रंप ने संकेत दिया है कि उनके रक्षा सचिव पीट हेगसेथ ने ईरान पर हमले को लेकर उन्हें सबसे पहले प्रेरित किया। ट्रंप ने कहा कि पीट ने उनसे कहा था कि ‘चलो इसे करके देखते हैं।’
साथ ही कहा है कि उपराष्ट्रपति जेडी वेंस इस कदम को लेकर कम उत्साहित थे।
इस दावे पर हेगसेथ और वेंस दोनों के ही ओर से अभी कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है।
ट्रंप प्रशासन के भीतर से युद्ध को लेकर बदलते स्पष्टीकरणों की कड़ी में यह राष्ट्रपति ट्रंप की नवीनतम टिप्पणी है।
‘हमले के लिए कहने वाले पीट पहले व्यक्ति थे’
सोमवार को टेनेसी राज्य में एक राउंड टेबल बैठक के दौरान ट्रंप ने संकेत दिया कि रक्षा सचिव पीट हेगसेथ उन पहले लोगों में शामिल थे जिन्होंने ईरान पर सैन्य कार्रवाई के पक्ष में तर्क दिया था।
राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा, –
“पीट (हेगसेथ), मुझे लगता है कि आप सबसे पहले यह कहने वाले व्यक्ति थे कि चलिए यह (ईरान पर हमला) करते हैं क्योंकि उन्हें परमाणु हथियार नहीं रखने दिया जा सकता।”
बता दें कि ईरान युद्ध में रक्षा सचिव पीट हेगसेथ, ट्रंप प्रशासन का प्रमुख चेहरा बनकर उभरे हैं। वे अमेरिकी कार्रवाइयों की जानकारी देते हैं। साथ ही युद्ध की आलोचनाओं का भी खंडन कर चुके हैं।
ट्रंप बोले- ‘अपने वरिष्ठ अफसरों से सलाह ली’
ट्रंप ने यह बताया कि हमले से पहले उन्होंने अपने कई वरिष्ठ लोगों से फोन पर बात की। उन्होंने कहा,
“मैंने पीट (हेगसेथ) को फोन किया। मैंने जनरल केन (संयुक्त चीफ ऑफ स्टाफ) को फोन किया। मैंने अपने कई महान लोगों को फोन किया। मैंने कहा कि मिडिल ईस्ट में हमारे सामने एक समस्या है। या तो हम रुक सकते हैं या फिर मिडिल ईस्ट की एक छोटी सी यात्रा (हमला) कर सकते हैं और एक बड़ी समस्या (ईरान) को खत्म कर सकते हैं।”
गौरतलब है कि मीडिया रिपोर्ट्स बताती हैं कि ट्रंप प्रशासन में ईरान युद्ध को लेकर मतभेद बढ़ रहे हैं। ट्रंप प्रशासन में नेशनल काउंटर टेररिज्म सेंटर के प्रमुख जो केंट पहले ही युद्ध से अहमति जताते हुए इस्तीफा दे चुके हैं।
आज के अखबार
मीडिया रिपोर्ट : अमेरिका-ईरान के बीच समझौता कराने में मध्यस्थता की कोशिश कर रहा पाकिस्तान
- पाक की ओर से इस्लामाबाद को मध्यस्थता की जगह के तौर पर प्रस्तावित किया गया है।
नई दिल्ली | अमेरिका व ईरान के बीच समझौता कराने के लिए पाकिस्तान मध्यस्थ की भूमिका निभा सकता है। ब्रिटेन के दैनिक समाचार पत्र ‘फाइनेंशियल टाइम्स’ ने सोमवार को अपनी रिपोर्ट में यह दावा किया है।
साथ ही, पाकिस्तान के प्रमुख अंग्रेजी दैनिक ‘डॉन’ ने भी सोमवार को एक अधिकारी के हवाले से पुष्टि की है कि पाकिस्तान, तुर्की और मिस्र के साथ मिलकर अमेरिका और ईरान के बीच खाई को पाटने के लिए “सक्रिय बैक-चैनल डिप्लोमेसी” (परोक्ष कूटनीति) में लगा हुआ है।
साथ ही कहा गया है कि इस तिकड़ी (पाकिस्तान, तुर्की और मिस्र) के प्रयासों से ही 23 मार्च को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के परमाणु ठिकाने पर हमला करने की अपनी रणनीति को पांच दिनों के लिए टाल दिया।
ट्रंप और असीम मुनीर के बीच वार्ता
दोनों रिपोर्ट में बताया गया है कि इसी सिलसिले में पाकिस्तान के थल सेना अध्यक्ष फील्ड मार्शल असीम मुनीर ने रविवार (22 मार्च) को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से फोन पर बातचीत की थी।
रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान ने वार्ता के लिए एक संभावित स्थल के रूप में इस्लामाबाद को प्रस्तावित किया है। यह भी माना जा रहा है कि इस वार्ता के लिए ट्रंप प्रशासन और ईरान के वरिष्ठ अधिकारी पाकिस्तान आ सकते हैं।
पाक पीएम ने ईरानी राष्ट्रपति को फोन मिलाया
दूसरी ओर, पाक के प्रधानमंत्री मुहम्मद शहबाज शरीफ ने सोमवार (23 मार्च) को ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन के साथ बातचीत की है। इन सभी घटनाक्रमों को युद्ध में पाक की मध्यस्थता के प्रस्ताव से जोड़कर देखा जा रहा है।
अब तक क्या रहा पाक का स्टैंड?
गौरतलब है कि पाकिस्तान ने ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला खामेनेई की मौत पर शोक जताया था।
दूसरी ओर, पाक का सऊदी अरब से साथ द्विपक्षीय सैन्य रक्षा समझौता होने के बाद भी ईरान की ओर से किए गए हमलों की प्रतिक्रिया में सऊदी को सैन्य मदद नहीं भेजी। हालांकि खाड़ी देशों पर हुए हमलों की भी निंदा की।
दूसरी ओर, पाक सैन्य प्रमुख के अमेरिकी राष्ट्रपति के साथ जारी नजदीकी संबंध सार्वजनिक हैं। इसके बावजूद, संयुक्त राष्ट्र में पाकिस्तान के राजदूत ने अमेरिकी हमले की निंदा की थी।
दुनिया गोल
नेतन्याहू का बड़ा दावा- ‘ईरान के परमाणु ठिकानों पर हमले जारी रहेंगे’; ट्रंप ने हमले टालने का किया था दावा
नई दिल्ली | अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के ईरान के परमाणु ठिकानों पर अगले पांच दिनों तक हमले टालने के दावे को इजरायली पीएम ने कुछ घंटे बाद ही खारिज कर दिया है।
इजराइली पीएम बेंजामिन नेतन्याहू ने 23 मार्च की रात 12 बजे एक्स पर एक वीडियो बयान जारी किया, जिसमें उन्होंने कहा है कि ईरान के परमाणु ठिकानों पर हमले जारी रहेंगे।
जबकि ट्रंप ने 23 मार्च को दिन में कहा था कि उन्होंने अपनी सेना को ईरान के परमाणु ठिकानोें पर हमले टालने का आदेश दिया है।

डोनाल्ड ट्रंप
गौरतलब है कि यह युद्ध पिछले 25 दिनों से जारी है, ईरान पर अमेरिका व इजरायल संयुक्त रूप से हमले कर रहे हैं। पर कई मौकों पर देखा गया है कि इजरायली पीएम, अमेरिकी राष्ट्रपति की नहीं सुन रहे।
हाल में इजरायल ने जब ईरान की गैसफील्ड पर हमला किया था, तब भी ट्रंप ने दावा किया कि अमेरिका को इस हमले की जानकारी नहीं थी और इज़रायल आगे ऐसा नहीं करेगा।

ईरान के नतांज परमाणु संवर्धन केंद्र पर हाल में इज़रायल ने हमला किया था, पर गनीमत रही कि रिसाव नहीं हुआ। (तस्वीर – X)
दावा – ईरान के दो परमाणु वैज्ञानिक मारे
पीएम नेतन्याहू ने दावा किया कि “कुछ ही दिन पहले इज़रायल ने ईरान के दो और परमाणु वैज्ञानिकों को मार दिया है।” उन्होंने वीडियो बयान में कहा कि हम किसी भी हालत में अपने ज़रूरी हितों की रक्षा करेंगे।
नेतन्याहू ने वीडियो बयान में कहा–
”हम ईरान और लेबनान दोनों जगह हमला करना जारी रखे हुए हैं। हम (ईरान के) मिसाइल और न्यूक्लियर प्रोग्राम को ख़त्म कर रहे हैं, और हिज़्बुल्लाह पर लगातार बड़े हमले कर रहे हैं।”
समझौते पर क्या बोले नेतन्याहू
बता दें कि ट्रंप ने ट्रूथ सोशल पर ईरान के साथ समझौते के लिए बातचीत का दावा किया था और बताया था कि यह वार्ता एक सप्ताह तक जारी रहेगी। हालांकि ईरान ने किसी भी वार्ता से इनकार किया है।
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