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Mobile Recharge : 28 दिनों के प्लान पर सांसद राघव चड्डा ने उठाया सवाल, डेटा लिमिट पर ये मांग उठाई

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राघव चड्डा

नई दिल्ली | राज्यसभा सांसद और आम आदमी पार्टी के नेता राघव चड्डा ने मोबाइल डेटा और रिचार्ज प्लान को लेकर जरूरी सवाल उठाया है।

उन्होंने 28 दिनों के रिचार्ज प्लान को लेकर टेलीकॉम कंपनियों पर सवाल उठाए और इसे ‘लूट’ करार दिया। AAP सांसद ने मोबाइल रिचार्ज की वैधता 30-31 दिन करने की मांग भी की।

उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार टेलीकॉम ऑपरेटर्स पर दबाव डाल सकती है कि वे अपने 30-दिन वाले रिचार्ज प्लान को प्रमोट करें।

साथ ही, राघव चड्डा ने रिचार्ज प्लान में हर दिन बच जाने वाले मोबाइल डेटा को अगले दिन के मोबाइल डेटा में जोड़ (कैरी-फॉरवर्ड) दिए जाने की मांग उठाई है।

‘डेटा लिमिट का बचा डेटा अगले दिन में जुड़े’

चड्डा ने राज्यसभा में शून्य काल के दौरान कहा कि ग्राहक जिस डेटा के रुपये दे चुके हैं, उसे पूरा इस्तेमाल कर सकें।

टेलीकॉम कंपनियां 1.5 जीबी, 2जीबी या 3 जीबी प्रतिदिन जैसी लिमिट वाले प्लान देती हैं, जो हर 24 घंटे में रीसेट हो जाते हैं।

ऐसे में दिन के अंत में बचा डेटा एक्सपायर हो जाता है।

चड्डा ने सुझाव दिया कि दिन के अंत में बचा डेटा अगले दिन की डेली डेटा लिमिट में जोड़ा जाए।

कोई ग्राहक कई साइकिल तक डेटा का कम इस्तेमाल करता है तो उसे अगले रिचार्ज में पिछले बचे हुए डेटा की वैल्यू एडजस्ट करने का विकल्प मिलना चाहिए।

अमेरिका व यूरोप में मिल रही यह सुविधा

उन्होंने उदाहरण दिया कि कई देशों में यह मॉडल सफल रहा है।

अमेरिका, ब्रिटेन व ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों में AT&T और स्काई मोबाइल जैसी कंपनियां ‘डेटा रोल ओवर’ की सुविधा देती हैं, जहां बचा हुआ डेटा अगले महीने या ‘डेटा बैंक’ में जमा हो जाता है।

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गंगा नदी में वोटिंग करते हुए इफ्तारी करने पर 14 मुस्लिम युवकों की गिरफ्तारी, विपक्ष ने UP पुलिस पर सवाल उठाए

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पुलिस ने वोटिंग के दौरान इफ्तारी करने वाले 14 मुस्लिम युवकों को गिरफ्तार कर लिया, गंगा नदी में वोटिंग करके बनाई थी रील (इनसेट)।

नई दिल्ली |  गंगा में नाव पर रोजा इफ्तार करने पर यूपी पुलिस ने 14 मुस्लिम युवकों को गिरफ्तारी किया है। ये सभी 14 दिन की न्यायिक हिरासत में हैं और अब यूपी पुलिस ने इस युवकों पर जबरन वसूली (Extortion) की धारा भी लगा दी है। वाराणसी में हुई इस घटना को लेकर पुलिस की कार्रवाई को लेकर विपक्षी नेताओं ने कड़ी आलोचना की है।

सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने पूछा है कि क्या गंगा पर रोजा इफ्तार नहीं कर सकते? उन्होंने दावा किया कि गंगा में एक फाइव स्टार जहाज चला था,  जिसमें शराब बटी थी। उन्होंने पूछा है कि उस जहाज के मालिक के ऊपर कार्रवाई क्यों नहीं की गई थी?

उधर, कांग्रेस सांसद इमरान प्रतापगढ़ी ने तंज किया है कि यूपी पुलिस कानून के दुरुपयोग का कीर्तिमान बनाना चाहती है।

दूसरी ओर, भाजपा के राज्यसभा सांसद दिनेश शर्मा ने कहा कि गंगा की पवित्रता से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

वाराणसी पुलिस ने इन मुस्लिम युवकों के ऊपर कड़ी धाराएं बढ़ा दी हैं, जिसके बाद ईद के दिन इस घटना ने चर्चा पकड़ ली। सोशल मीडिया पर लोग इसमें प्रतिक्रिया दे रहे हैं।

वाराणसी के ACP विजय प्रताप ने कहा है कि BNS की धारा 308 इसलिए जोड़ी गई है क्योंकि वोट चालक ने अपने बयान में दावा किया है कि आरोपियों ने धमकी देकर मोटर वोट का कंट्रोल अपने पास कर लिया था।

इस मामले पर अंग्रेजी के प्रतिष्ठित अखबार ‘द इंडियन एक्सप्रेस’ ने 21 मार्च के संपादकीय में यूपी पुलिस की कड़ी आलोचना की है।

अखबार ने लिखा है कि गंगा नदी पर किसी एक धर्म का अधिकार नहीं है, किसी समुदाय के साथ नदी को लेकर भेदभाव नहीं किया जाना चाहिए।

बता दें कि यह घटना 15 मार्च की है। गंगा नदी में वोट पर बैठे एक ही परिवार के 14 युवकों ने इफ्तार किया और इसका वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर डाला था। भारतीय जनता युवा मोर्चा के जिला अध्यक्ष ने इस मामले को लेकर थाने में शिकायत दी और 17 मार्च को इन युवकों को गिरफ्तार कर लिया गया था।

इंडियन एक्सप्रेस ने इन युवकों को बेल न देने के अदालत के आदेश की भी आलोचना की है।

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बिहार : गाेपालगंज में बेटे ने 100 रुपये के लिए मां का गला रेता

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गोपालगंज जिले के बैकुंठपुर थाना क्षेत्र उसरी बिनटोली में घटना की जानकारी देते मृतका के पति गणेश रावत। (गाेपालगंज संवाददाता )
गोपालगंज जिले के बैकुंठपुर थाना क्षेत्र उसरी बिनटोली में घटना की जानकारी देते मृतका के पति गणेश रावत। (गाेपालगंज संवाददाता )
  • नशे में आया था आरोपी, रुपये न देने पर कर दी हत्या  
  • वारदात के बाद गुस्साए लोगों ने जमकर पीटा, गिरफ्तार
  • नशे का आदी है आरोपी और दो पत्नियां उसे छोड़ चुकीं

 

गोपालगंज | आलोक कुमार 

बिहार में शराबबंदी लागू करते हुए सरकार का मानना था कि इससे महिला हिंसा में कमी आएगी पर राज्य में हर रोज होने वाली घटनाएं बताती हैं कि न तो शराब बंदी ठीक से लागू है और न ही शराबबंदी अकेले घरेलू हिंसा रोकने में मददगार है।

दरअसल गोपालगंज जिले में नशे में घर पहुंचे एक जवान बेटे ने केवल 100 रुपये के लिए अपनी मां की गला रेतकर हत्या कर दी है। अपनी मां को मार डालने वाला आरोपी पकड़ लिया गया है, वह पहले भी हिंसा करता रहा है। गांव वालो का कहना है कि उसके इस व्यवहार के चलते ही उसकी दो शादियां हुईं पर एक भी रिश्ता नहीं चल पाया। अब बीते 22 फरवरी को भी इस व्यक्ति ने अपनी मां को मार डाला।

गांव वालो ने पीटकर पुलिस को सौंपा

आरोपी रामभरोस रावत। (गाेपालगंज संवाददाता )

आरोपी रामभरोसे रावत को जमकर हुई पिटाई के बाद अस्पताल में भर्ती किया गया। (गाेपालगंज संवाददाता )

यह वारदात गाेपालगंज जिले की है, वहां के बैकुंठपुर थाना क्षेत्र उसरी बिनटोली में रविवार शाम (22 Feb) को यह घटना हुई। हमले के बाद गुस्साए लोगों ने आरोपी को जमकर पीटा और पुलिस के हवाले किया। पुलिस ने आरोपी रामभरोसे रावत को हिरासत में लेकर जांच शुरू कर दी है। मृतका की पहचान सुमित्रा देवी (55) के रूप में हुई है।

वारदात के समय अकेली थी मां

मृतका के पति गणेश रावत ने बताया, उनका बेटा शराब पीकर घर आया था, उस समय घर पर उनकी पत्नी अकेली थी। जबकि वे घर के बाहर काम कर रहे थे। पिता का कहना है कि बेटा बार-बार सौ रूपये मांग रहा था जो उनकी पत्नी के पास नहीं थे। इस पर गुस्साए बेटे ने वहीं पर रखे धारदार हथियार से मां का गला रेत दिया। मौके पर पत्नी चीखीं तो आसपास के लोग जुटे। उनके बेटे ने मां को मारकर भागने की कोशिश की तब सबने पकड़कर उसको खूब पीटा और पुलिस को बुलाकर उन्हें सौंप दिया।

आरोपी से पूछताछ जारी, धारधार हथियार बरामद

घटना की जानकारी देते सदर एसडीपीओ 2 राजेश कुमार।  (गाेपालगंज संवाददाता )

घटना की जानकारी देते सदर एसडीपीओ 2 राजेश कुमार।  (गाेपालगंज संवाददाता )

इस मामले में सदर एसडीपीओ-2 राजेश कुमार ने बताया कि आरोपी रामभरोसे रावत को गिरफ्तार करके महिला के शव को पोस्टमार्टम के लिए मॉडल अस्पताल भेज दिया है। आरोपी घायल है इसलिए उसे भी अस्पताल में भर्ती कराया गया है, उससे पूछताछ की जा रही है, आगे जेल भेजा जाएगा।

 

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बिहार की सड़कों पर सुरक्षित पैदल चल सकेंगे: सरकार ने दिए बड़े निर्देश, जानिए क्या बदलेगा?

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By Heba Aisha - Own work, CC BY-SA 4.0, Link
बिहार की भीड़भाड़ वाली सड़कों पर फुटपाथ निर्माण का काम शुरू होगा। (प्रतीकात्मक तस्वीर)
  • सड़क सुरक्षा को लेकर बिहार सरकार का बड़ा कदम पर योजना स्पष्ट नहीं।

पटना | हमारे संवाददाता

बिहार सरकार ने पैदल यात्रियों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए बड़ा ऐलान किया है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने शनिवार सुबह अपने एक्स हैंडल पर पोस्ट कर कहा कि राज्य की सड़कों पर बढ़ते वाहनों के बीच पैदल चलने वालों को सम्मान और सुविधा मिलेगी। अपनी घोषणा में मुख्यमंत्री ने कहा है कि राज्य की सड़कों पर फुटपाथ, जेब्रा क्रॉसिंग व ऐसी सुविधायें बढ़ाई जाएंगी जिससे पैदल चलने वालोे की सुरक्षा सुनिश्चित हो। गौरतलब है कि बिहार में सड़कों पर पैदल चलने के लिए या तो फुटपाथ है ही नहीं, या फिर वे जगह-जगह टूटे या अतिक्रमण से घिरे हैं, जिससे राहगीरों को सड़क पर चलने को विवश होना पड़ता है और वे दुर्घटना के शिकार हो जाते हैं। ऐसे में यह घोषणा काफी अहम मानी जा रही है।

सभी बड़ी सड़कों पर ये बदलाव होंगे 

सरकार के ‘सात निश्चय-3’ (2025-2030) के सातवें निश्चय ‘सबका सम्मान-जीवन आसान’ के तहत परिवहन विभाग को 5 बड़े निर्देश दिए गए हैं।

  • भीड़-भाड़ वाले शहरी और ग्रामीण इलाकों में जल्द फुटपाथ बनाए जाएंगे।
  • चिह्नित जगहों पर जेब्रा क्रॉसिंग मार्क की जाएगी।
  • व्यस्त स्थानों पर फुट ओवर ब्रिज (एस्केलेटर सहित) और अंडरपास का निर्माण होगा।
  • वाहन चालकों को पैदल यात्रियों के अधिकारों पर प्रशिक्षण दिया जाएगा।
  • ग्रामीण-शहरी ब्लैक स्पॉट्स (दुर्घटना-प्रवण जगहें) चिह्नित कर फुटपाथ बनाए जाएंगे और CCTV कैमरे लगाए जाएंगे, ताकि दुर्घटनाओं का आकलन हो और कमी लाई जा सके।

बिहार में पैदल यात्रियों की मौतें आम

बिहार में पैदल यात्री की स्थिति सबसे दयनीय और असुरक्षित है। सड़क परिवहन व राज्यमार्ग मंत्रालय (MoRTH) की 2022 रिपोर्ट के अनुसार, बिाहर में हर सौ सड़क दुर्घटनाओं में मौत का प्रतिशत सबसे ज्यादा 82.4 फीसदी है। यानी रोड एक्सीडेंट के दस पीड़ित में से सिर्फ दो लोगों की जान ही बच पाती है।

पैदल यात्रियों की मौतों की बात करें तो राष्ट्रीय स्तर पर 19.5% हैं, लेकिन बिहार जैसे राज्यों में यह अनुपात ज्यादा है। 2019-2023 में भारत में 1.5 लाख पैदल यात्रियों की मौत हुई, जिसमें बिहार का बड़ा हिस्सा है।

बिहार की सड़कों पर फुटपाथ का हाल

कई सड़कों पर फुटपाथ या तो नहीं हैं या घुसपैठ से अवरुद्ध हैं। ब्लैक स्पॉट्स पर CCTV या सुरक्षित क्रॉसिंग की कमी से दुर्घटनाएं बढ़ती हैं। पटना में कुछ जगहों पर फुटपाथ (जैसे बेली रोड, JP गंगा पथ) और अंडरपास (पटना जंक्शन से मल्टी-मॉडल हब) हैं, लेकिन अन्य शहरों में सुविधाएं सीमित या निर्माणाधीन हैं।

नए कदमों से क्या लाभ हो सकता है?

  • सुरक्षित क्रॉसिंग और फुटपाथ से पैदल यात्रियों की दुर्घटनाएं 20-30% तक कम हो सकती हैं (राष्ट्रीय स्तर पर समान उपायों से देखा गया)।
  • ब्लैक स्पॉट्स पर CCTV से मॉनिटरिंग और तेज कार्रवाई संभव होगी।
  • वाहन चालकों का प्रशिक्षण संवेदनशीलता बढ़ाएगा, जिससे ओवर-स्पीडिंग और लेन अनुशासन में सुधार आएगा।
  • कुल मिलाकर, दैनिक जीवन आसान होगा, बुजुर्गों/बच्चों की सुरक्षा बढ़ेगी और राज्य की सड़क सुरक्षा रैंकिंग सुधरेगी।

निर्देश तो सराहनीय पर बजट का पता नहीं  

सरकार ने परिवहन विभाग को इसको लेकर तेजी से काम करने के निर्देश हैं, लेकिन स्पष्ट राशि का उल्लेख नहीं है। हालांकि राज्य बजट में सड़क विकास और सुरक्षा के लिए आवंटन बढ़ रहा है। पिछले वर्षों में राष्ट्रीय राज्यमार्ग व शहरी सड़कों पर हजारों करोड़ रुपये का खर्च हुआ है। माना जा रहा है कि यह  प्रोजेक्ट उसी से फंडेड होंगे। इसको लेकर विभाग जल्द ही कार्य योजना बनाएगा।

बता दें कि ये काम ‘सात निश्चय-3’ योजना के तहत होंगे, जिसे हाल ही में कैबिनेट ने मंजूरी दी है। योजना का फोकस ‘Ease of Living’ पर है, जिसमें सड़क सुरक्षा शामिल है।

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