दुनिया गोल
15 साल की उम्र में पीएचडी पूरी करने वाले ‘छोटे आइंस्टाइन’ के बारे में जानिए
- यूरोपीय देश बेल्जियम के 15 साल के छात्र हैं लॉरेंट सिमन्स।
- एंटवर्प विश्वविद्यालय से क्वांटम फिजिक्स में पीएचडी पूरी की।
नई दिल्ली |
प्रतिभा उम्र की मोहताज नहीं होती.. इसे बेल्जियम के एक किशोर ने साबित कर दिया जिसने सिर्फ 15 साल की उम्र में PhD की डिग्री हासिल की है। लॉरेंट सिमन्स (Laurent Simons) नाम के इस किशोर ने क्वांटम भौतिकी (Quantum Physics) में PhD पूरी कर इतिहास रच दिया है, इन्हें स्थानीय लोग ‘छोटे आइंस्टाइन’ (Little Einstein) के नाम से पुकार रहे हैं। वह आधुनिक इतिहास के सबसे कम उम्र के PhD holders में से एक हैं। अब उनका लक्ष्य AI में दूसरी PhD करके Human Life Expectancy बढ़ाना और Super humans बनाना है।
गौरतलब है कि सबसे कम उम्र में Doctorate हासिल करने का रिकॉर्ड एक जर्मन न्यायविद् के नाम है। साल 1814 में जोहान हेनरिक फ्रेडरिक कार्ल विट्टे (Johann Heinrich Friedrich Karl Witte) ने मात्र 13 साल की उम्र में PhD की उपाधि हासिल की थी।
दुनिया गोल
18 साल बाद India-EU मुक्त व्यापार वार्ता पूरी, अगले साल लागू होगा समझौता
- भारत-यूरोपीय संघ के बीच व्यापार समझौते पर इस साल के अंत तक हो सकते हैं हस्ताक्षर
FTA को बताया – मदर ऑफ ऑल डील्स
2007 में शुरू हुई थी FTA वार्ता
भारत-EU ट्रेड – एक नजर में
- 17% भारतीय सामान यूरोप संघ के देशों में बेचा जाता है।
- 9% यूरोपीय संघ के देशों का सामान भारतीय बाजार में आता है।
- 136 बिलियन डॉलर का है भारत-यूरोपीय संघ का द्विपक्षीय व्यापार।
ट्रेड डील का महत्व
- डील से टैरिफ कम होगा, जिससे भारतीय निर्यात (टेक्सटाइल, फार्मा, आईटी, ऑटो पार्ट्स) बढ़ेगा।
- EU के लिए भारत में निवेश और बाजार पहुंच आसान होगी।
- दोनों पक्षों ने कहा कि यह डील वैश्विक व्यापार में स्थिरता लाएगी।
- भारत में लग्जरी कारों की कीमत कम होगी, यूरोपीय वाइन के दाम घटेंगे।
दुनिया गोल
शेख हसीना का नई दिल्ली में पहला सार्वजनिक भाषण, बांग्लादेश ने चेताया- ‘द्विपक्षीय संबंध बिगड़ेंगे’
- 23 जनवरी को प्रेस क्लब में बांग्लादेश पीएम शेख हसीना ने एक ऑडियो भाषण दिया था।
नई दिल्ली|
हिन्दू अल्पसंख्यकों की बांग्लादेश में लगातार हो रही हत्या और भारत में टी-20 विश्वकप खेलने से बांग्लादेश के मना करने के बाद दोनों देशों के बीच संबंध सबसे निचले स्तर पर हैं। इस बीच नई दिल्ली में निर्वासित जीवन बिता रहीं बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने पहला सार्वजनिक भाषण दिया, जिस पर बांग्लादेश ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। हालांकि अभी तक इस पर भारतीय विदेश मंत्रालय की ओर से कोई जवाब नहीं दिया गया है।
दरअसल 23 जनवरी को दिल्ली के ‘फॉरेन कॉरेस्पोंडेंट्स क्लब ऑफ साउथ एशिया’ में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान शेख हसीना का एक ऑडियो भाषण चलाया गया। यह भाषण 12 फरवरी को बांग्लादेश में होने वाले आम चुनावों से पहले दिया, जिसमें उन्होंने अंतरिम सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। गौरतलब है कि 78 साल की हसीना अगस्त 2024 में छात्रों के नेतृत्व वाले विद्रोह के बाद अपना 15 साल का शासन खत्म होने पर भारत भाग गई थीं।
बांग्लादेश बोला- यह हमारे देश का अपमान
बांग्लादेश ने कहा कि हसीना को भाषण देने की इजाजत देना एक खतरनाक मिसाल कायम करेगा जो द्विपक्षीय संबंधों को गंभीर रूप से नुकसान पहुंचा सकता है। मंत्रालय ने कहा,
“भारतीय राजधानी में इस कार्यक्रम को होने देना और नरसंहार करने वाली हसीना को खुलेआम नफरत भरा भाषण देने देना… बांग्लादेश के लोगों और सरकार का साफ अपमान है।”
हसीना के प्रत्यर्पण का भी मुद्दा उठाया
बांग्लादेश विदेश मंत्रालय ने भारत सरकार पर आरोप लगाया कि वह लगातार अनुरोध किए जाने के बाद भी हसीना का प्रत्यर्पण नहीं कर रहा है। बयान में कहा- “बांग्लादेश को इस बात का बहुत दुख है कि भारत ने द्विपक्षीय प्रत्यर्पण समझौते के तहत शेख हसीना को सौंपने की अपनी जिम्मेदारियों पर अभी तक कोई कार्रवाई नहीं की है। बांग्लादेश सरकार के बार-बार अनुरोध के बावजूद, उसे इसके बजाय अपनी जमीन से ऐसे भड़काऊ बयान देने की इजाजत दी गई है। यह साफ तौर पर बांग्लादेश के लोकतांत्रिक बदलाव और शांति और सुरक्षा को खतरे में डालता है।”
दुनिया गोल
अमेरिका में ट्रंप की ICE के खिलाफ फिर सड़कों पर उतरे लोग, जानिए क्या है पूरा मामला
- मिनियापोलिस शहर में संघीय एजेंटों ने एक महीने में दूसरे अमेरिकी नागरिक को गोली मारकर उसकी हत्या कर दी।
ICE ने आवासीय इलाके में गोलियां चलाईं, मौके पर मौत
गृह सुरक्षा मंत्रालय ने ICE का बचाव किया
“एक बॉर्डर पैट्रोल एजेंट ने आत्मरक्षा में गोली चलाई क्योंकि एक व्यक्ति हैंडगन लेकर करीब आया और उसे निहत्था करने की कोशिशों का हिंसक तरीके से विरोध किया।”
नर्स संगठन ने घटना को जघन्य हत्या कहा
एलेक्स प्रेटी पेशे से आईसीयू नर्स थे, उनकी मौत के बाद नर्सों से जुड़ी सबसे बड़ी संस्था नेशनल नर्सेज़ यूनाइटेड ने बयान जारी करके इसे जघन्य हत्या बताया है। संगठन ने कहा है कि
“एलेक्स अपने समुदाय को बचाने की कोशिश कर रहा था, तभी उसकी हत्या कर दी गई। अब वक्त आ चुका है कि ICE को खत्म कर दिया जाए।”
देशभर में विरोध प्रदर्शन शुरू
रॉयटर्स के मुताबिक, घटना की जानकारी सोशल मीडिया के माध्यम से फैलते ही सैकड़ों प्रदर्शनकारी उस इलाके में पहुंच गए। प्रदर्शनकारियों ने हथियारबंद व नकाबपोश एजेंटों की आक्रामकता का सामना किया। केंद्रीय एजेंटों ने प्रदर्शनकारियों पर आंसू गैस और फ्लैश बैंग ग्रेनेड का इस्तेमाल किया। इस घटना के विरोध में न्यूयॉर्क, वाशिंगटन डीसी और सैन फ्रांसिस्को सहित अन्य शहरों में भी प्रदर्शन शुरू हो गए हैं।
गर्वनर बोले- जांच हम कराएंगे, संघीय सरकार पर भरोसा नहीं
मिनेसोटा के गवर्नर टिम वॉल्ज ने एक बार फिर से केंद्र सरकार से कहा है कि ICE को हटाया जाए। साथ ही उन्होंने कहा कि घटना का वीडियो बताता है कि यह कितना घिनौना कृत्य है। उन्होंने कहा कि हम संघीय सरकार पर इस जांच का नेतृत्व करने के लिए भरोसा नहीं कर सकते। इस घटना की जांच राज्य संभालेगा।
हालांकि DW के मुताबिक, मिनेसोटा ब्यूरो ऑफ क्रिमिनल एप्रीहेंशन के प्रमुख ड्रू इवांस ने पत्रकारों को बताया कि संघीय एजेंटों ने शनिवार को उनकी टीम को जांच शुरू करने से रोक दिया।
रेनी गुड की हत्या मामले की जांच भी लटकी
जनवरी के पहले सप्ताह में हुई रेनी गुड नाम की महिला की हत्या के मामले में भी जांच को लेकर राज्य सरकार सवाल उठा रही है। फेडरल एजेंट्स ने चलती गाड़ी न रोकने को लेकर रेनी के ऊपर गोलियां चला दी थी, जिसमें उसकी मौत हो गई थी। इसके बाद प्रदर्शन हुए तो दवाब में आकर संघीय सरकार ने जांच कराने के आदेश दे दिए मगर इस जांच में राज्य सरकार को शामिल नहीं किया। इसके बाद लगातार सवाल उठाए जा रहे हैं कि क्या इस मामलेे में ट्रंप प्रशासन उस ICE को दोषी ठहरा पाएगा जिसका बचाव वह लगातार करता आ रहा है?
क्या है ICE, इनकी शक्तियां ?
आईसीई का पूरा नाम ‘आव्रजन और सीमा शुल्क प्रवर्तन एजेंसी’ है। इस एजेंसी में काम करने वाले एजेंट्स, अमेरिका के संघीय कानून प्रवर्तन अधिकारी (Federal Law Enforcement Officers) हैं। ये होमलैंड सिक्योरिटी विभाग के तहत आते हैं। इनका काम देश में अवैध रूप से रहने वाले विदेशियों की पहचान करने, उन्हें हिरासत में लेने और निर्वासित (deport) करना है। ट्रंप के दूसरे शासनकाल में इनकी शक्तियों और भूमिका में इजाफा हुआ है क्योंकि संघीय सरकार के लिए अवैध प्रवासन एक राजनीतिक मुद्दा है, जिसके बल पर वह दोबारा सत्ता में आई। इनके पास शक के आधार पर किसी को हिरासत में लेने का अधिकार है।
शक के आधार पर आम अमेरिकी भी प्रताड़ित
प्रोपब्लिका नामक सामाजिक संगठन के मुताबिक, पिछले साल अक्तूबर तक 170 ऐसे मामले सामने आए जब ICE एजेंटों ने आम अमेरिकी नागरिकों को अवैध प्रवासी होने के शक में हिरासत में लेकर प्रताड़ित किया।
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