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ग्रीनलैंड हड़पने को बेसब्र ट्रंप ने 8 यूरोपीय देशों पर लगाया टैरिफ, इस बार मिल रहा कड़ा जवाब, EU की तैयारी जानिए

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ग्रीनलैंड में ट्रंप की धमकियों के खिलाफ हजारों लोगों ने सड़कों पर उतरकर प्रदर्शन किया।
ग्रीनलैंड में ट्रंप की धमकियों के खिलाफ हजारों लोगों ने सड़कों पर उतरकर प्रदर्शन किया।
  • डेनमार्क के स्वायत्त क्षेत्र ग्रीनलैंड को अमेरिका में मिलाना चाहते हैं राष्ट्रपति ट्रंप।
नई दिल्ली|
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ग्रीनलैंड को अमेरिका में मिलाने से जु़ड़ी अपनी रणनीति को और आक्रामक बनाते हुए आठ यूरोपीय देशों पर ताजा टैरिफ लगाने की घोषणा की है। ट्रंप ने उन देशों पर एक फरवरी से 10% टैरिफ की घोषणा की है जिन्होंने हाल में ग्रीनलैंड के समर्थन में वहां कुछ सैनिक भेजकर संभावित अमेरिकी आक्रमण से निपटने की रणनीति बनाई थी। इन देशों में डेनमार्क, ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी, नॉर्वे, स्वीडन, नीदरलैंड्स व फिनलैंड शामिल हैं। इस घोषणा के बाद यूरोपीय संघ ने रविवार(18 जनवरी) को एक इमरजेंसी मीटिंग बुलाई और आगे ग्रीनलैंड में एक संयुक्त सैन्य अभ्यास करने की घोषणा करके ट्रंप को चुनौती दे दी है।

ट्रंप की धमकी- जून तक समझौता नहीं तो टैरिफ बढ़ेगा

ट्रंप ने ट्रूथ सोशल पर 17 जनवरी को पोस्ट में लिखा है कि ग्रीनलैंड, अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए जरूरी है। जो देश इसके खिलाफ हैं, वे अमेरिकी बाजार में एक फरवरी से 10% ज्यादा टैरिफ देंगे। इसमें कोई छूट नहीं मिलेगी। अगर ग्रीनलैंड पर जून तक कोई समझौता नहीं होता है तो इन देशों पर टैरिफ बढ़ाकर 25% तक कर दिया जाएगा। टैरिफ मुख्य रूप से इन देशों के अमेरिकी निर्यात (मशीनरी, फार्मा, फिशरी उत्पाद) पर लगेगा।
ट्रंप ने एक लंबा पोस्ट लिखकर आठ देशों पर आरोप लगाए और टैरिफ की घोषणा की।

ट्रंप ने एक लंबा पोस्ट लिखकर आठ देशों पर आरोप लगाए और टैरिफ की घोषणा की।

8 देशों पर लगा टैरिफ –

ये देश आर्कटिक काउंसिल के सदस्य हैं और ग्रीनलैंड की स्वायत्तता का समर्थन करते हैं।

  • डेनमार्क (ग्रीनलैंड का मालिक देश)
  • नॉर्वे
  • आइसलैंड
  • कनाडा
  • स्वीडन
  • फिनलैंड
  • जर्मनी
  • नीदरलैंड्स

EU ने बुलाई इमरजेंसी मीटिंग

यूरोपीय संघ ने इस टैरिफ को अनुचित बताते हुए एक इमरजेंसी मीटिंग बुलाई है। इस बैठक में यूरोपीय संघ के राजदूत भाग लेंगे।  

ग्रीनलैंड में 8 देशों का सैन्य अभ्यास, संयुक्त बयान जारी 

ग्रीनलैंड के समर्थन वाले यूरोप के आठ देशों ने एक संयुक्त सैन्य अभ्यास किया है, डेनमार्क के विदेश मंत्रालय ने एक साझा बयान जारी कर इसकी जानकारी दी है। इस अभ्यास में डेनमार्क, फ़िनलैंड, फ़्रांस, जर्मनी, नीदरलैंड्स, नॉर्वे, स्वीडन और ब्रिटेन शामिल हुए।

साझा बयान में कहा गया- , “नेटो सदस्य के रूप में हम एक साझा ट्रांसअटलांटिक हित को देखते हुए आर्कटिक क्षेत्र की सुरक्षा को मज़बूत करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। हम डेनमार्क और ग्रीनलैंड के लोगों के साथ पूरी एकजुटता से खड़े हैं, पिछले हफ़्ते शुरू हुई प्रक्रिया को आगे बढ़ाते हुए हम संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता के उन सिद्धांतों के आधार पर बातचीत के लिए तैयार हैं, जिनका हम मज़बूती से समर्थन करते हैं।”

आठ देशों की ओर से संयुक्त बयान जारी किया गया है।

आठ देशों की ओर से संयुक्त बयान जारी किया गया है।

क्या बोले EU ट्रेड कमिश्नर

दूसरी ओर, जर्मन ब्रॉडकास्टर DW ने ट्रंप की टैरिफ घोषणा को लेकर EU ट्रेड कमिश्नर ने प्रतिक्रिया मांगी तो उन्होंने कहा कि “यूरोपीय संघ के नेताओं के बीच इस बारे में परामर्श चल रहा है, हमारे लिए क्षेत्रीय अखंडता और संप्रभुता व अंतरराष्ट्रीय कानून बहुत महत्वपूर्ण हैं।”

US-EU व्यापार समझौता लटकेगा

यूरोपीय संघ के सांसदों के हवाले से यूरोपीय मीडिया ने लिखा है कि हालिया टैरिफ घोषणा के बाद अमेरिका व यूरोपीय संघ के बीच हुआ व्यापार समझौता संसद में पास नहीं हो सकेगा। पिछले साल दोनों के बीच व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर हुए थे और अब यूरोपीय संघ की संसद में इस पर वोटिंग होनी है।

ग्रीनलैंड में ट्रंप के खिलाफ प्रदर्शन

डोनाल्ड ट्रंप की लगातार धमकियों के खिलाफ ग्रीनलैंड और डेनमार्क के लोगों ने बड़ी संख्या में सड़कों पर उतरकर अमेरिका के खिलाफ प्रदर्शन किया।


 

ट्रंप की धमकी पर यूरोपीय नेताओं की कड़ी प्रतिक्रिया

ग्रीनलैंड विवाद पर ट्रंप की टैरिफ चेतावनी के कुछ घंटे बाद ही यूरोपीय नेताओं ने एकजुट होकर जवाब दिया है। 

ब्रिटेन : सहयोगियों पर ही टैरिफ गलत 

प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने कहा-  “ग्रीनलैंड का भविष्य ग्रीनलैंडवासी और डेनमार्क तय करेंगे। नाटो सहयोगियों की सामूहिक सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए अपने सहयोगियों पर ही टैरिफ लगाना पूरी तरह गलत है। हम इस मुद्दे पर सीधे अमेरिकी प्रशासन से बात करेंगे।”

डेनमार्क : ट्रंप का बयान चौंकाने वाला

डेनमार्क के विदेश मंत्री लार्स लोके रासमुसेन ने कहा है कि “ट्रंप का यह बयान आश्चर्यजनक है, क्योंकि इस हफ्ते हमारी बैठक बहुत रचनात्मक थी।” गौरतलब है कि डेनमार्क और ग्रीनलैंड के विदेशमंत्री हाल में अमेरिका में विदेशमंत्री मार्को रुबियो से मिले थे।

फ्रांस : टैरिफ की धमकी का असर नहीं होगा

राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि “कोई धमकी या दबाव हमें प्रभावित नहीं करेगा। टैरिफ की धमकी अस्वीकार्य है।”

स्वीडन : यूरोपीय नेता धमकी में नहीं आएंगे 

प्रधानमंत्री उल्फ क्रिस्टर्सन ने कहा –“यूरोपीय नेता खुद को ब्लैकमेल नहीं होने देंगे। ट्रंप की धमकी पूरे यूरोपीय संघ के लिए एक मुद्दा है।”

नीदरलैंड्स : एकजुट होकर जवाब देंगे

 विदेश मंत्री डेविड वैन वील ने कहा – “हमने नए टैरिफ की जानकारी ली है और एकजुट जवाब पर विचार कर रहे हैं।” 

फिनलैंड : सहयोगियों के बीच वार्ता हो, दवाब नहीं

राष्ट्रपति अलेक्जेंडर स्टब ने कहा- “सहयोगियों के बीच मुद्दे बातचीत से हल किए जाते हैं, दबाव से नहीं।”

नॉर्वे : सहयोगियों के बीच धमकी की जगह नहीं 

प्रधानमंत्री जोनास गार स्टोरे ने कहा- “सहयोगियों के बीच धमकियों के लिए कोई जगह नहीं है।”

बोलते पन्ने.. एक कोशिश है क्लिष्ट सूचनाओं से जनहित की जानकारियां निकालकर हिन्दी के दर्शकों की आवाज बनने का। सरकारी कागजों के गुलाबी मौसम से लेकर जमीन की काली हकीकत की बात भी होगी ग्राउंड रिपोर्टिंग के जरिए। साथ ही, बोलते पन्ने जरिए बनेगा .. आपकी उन भावनाओं को आवाज देने का, जो अक्सर डायरी के पन्नों में दबी रह जाती हैं।

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ईरान के नतांज परमाणु केंद्र पर भीषण हमला, जवाबी ऐक्शन में इजरायल के ईंधन विमान गिराए

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नतांज परमाणु केंद्र (तस्वीर - X)
नई दिल्ली | ईरान के सबसे महत्वपूर्ण परमाणु संवर्धन केंद्र – नतांज (Natanz) पर एक बार फिर भीषण हमला किया है। ईरान ने दावा किया है कि अमेरिका-इज़रायल ने संयुक्त रूप से ये हमला किया है।
इसके जवाब में ईरान ने इज़रायल पर मिसाइल हमला करके उसके ईंधन विमानों को निशाना बनाया है। साथ ही, सऊदी अरब, यूएई में भी जोरदार ड्रोन हमले किए हैं। यूएई में हमलों के बाद दो सैनिक व छह विदेशी नागरिकों की मौत हो गई है। इस पूरे घटनाक्रम ने 22वें दिन युद्ध को और भीषण बना दिया है। 
 

बंकर ध्वस्त करने वाले बम से परमाणु केंद्र पर हमला

इससे पहले, ईरानी परमाणु ऊर्जा संगठन (AEOI) ने बयान जारी कर कहा कि नतांज में स्थित शहीद अहमदी रोशन संवर्धन सुविधा पर शनिवार सुबह हमला किया गया। तेहरान से 220 किमी दक्षिण-पूर्व में स्थित यह सुविधा ईरान के यूरेनियम संवर्धन कार्यक्रम का केंद्र है। ईरान ने कहा कि इस हमले में आधुनिक ‘बंकर बस्टर’ बमों का इस्तेमाल हुआ, जो भूमिगत संरचनाओं को निशाना बनाने के लिए डिजाइन किए जाते हैं।

12 दिनों के युद्ध में भी बना था निशाना 

एक सप्ताह पहले भी नतांज पर हमला हुआ था। साथ ही, पिछले साल जून में इजरायल-ईरान के 12 दिनों के युद्ध में भी इस परमाणु केंद्र को निशाना बनाया गया था।  बाद में अमेरिका ने भी हमला किया। 

रेडियोधर्मी रिसाव का खतरा टला

राहत की बात यह है कि ईरानी तकनीकी टीम और अंतरराष्ट्रीय पर्यवेक्षकों ने पुष्टि की है कि हमले के बाद क्षेत्र में कोई रेडियोधर्मी रिसाव (radioactive leakage) नहीं हुआ है। आसपास की नागरिक आबादी सुरक्षित बताई जा रही है।

IAEA की चेतावनी

अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) के महानिदेशक राफेल ग्रॉसी ने तत्काल बयान जारी कर कहा कि “परमाणु सुविधाओं को युद्ध का हिस्सा नहीं बनाया जाना चाहिए। ऐसे हमले किसी बड़ी परमाणु आपदा का कारण बन सकते हैं, जिसका असर पूरे क्षेत्र और वैश्विक स्तर पर हो सकता है।”

ईरान ने इजराइल के सैन्य हवाई अड्‍डे को निशाना बनाया

ईरान ने दावा किया है कि उसने ड्रोन हमलों के जरिए इजरायल की सैन्य उड़ानों को प्रभावित किया है। तेहरान के अनुसार, तेल अवीव के पास बेन गुरियन एयरपोर्ट पर ईंधन टैंक और रिफ्यूलिंग विमानों को निशाना बनाया गया।

ईरानी सेना और रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने कहा कि उनके हमलों के कारण इजरायल को कुछ सैन्य कर्मियों को हटाना पड़ा। ईरान ने साफ कहा है कि जब तक खतरा खत्म नहीं होगा, हमले जारी रहेंगे।

बता दें कि बेन गुरियन एयरपोर्ट, इजरायल के लिए बेहद अहम है, जहां सेना की विशेष यूनिट्स और लड़ाकू विमानों की मरम्मत सुविधाएं मौजूद हैं।

यूएई में दो सैनिक और 6 नागरिक मरे

संयुक्त अरब अमीरात ने शनिवार को ईरान की ओर से छोड़ी गई 3 बैलिस्टिक मिसाइलों और 8 ड्रोन को हवा में ही मार गिराने का दावा किया है। रक्षा मंत्रालय के अनुसार अब तक सैकड़ों मिसाइल और ड्रोन हमलों को रोका जा चुका है।

इन हमलों में 2 सैनिकों की मौत हुई है। साथ ही, पाकिस्तान, नेपाल, बांग्लादेश और फिलिस्तीन के कुल 6 नागरिकों की भी जान गई है। करीब 160 लोग घायल बताए गए हैं।

सऊदी अरब पर 20 ड्रोन हमले

ईरान ने सऊदी अरब पर ड्रोन बरसाए हैं। सऊदी ने कहा है कि ईरान की ओर से उसके तेल क्षेत्र पर कुछ घंटों में 20 ड्रोन का हमला हुआ जो उसने मार गिराए हैं। 
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ईरान का सबसे लंबा मिसाइल हमला: 3500 किमी दूर हिंद महासागर में US बेस डिएगो गार्सिया को बनाया निशाना

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अमेरिकी सैन्य अड्‍डे डिएगो गार्सिया में खड़े एयरक्राफ्ट
नई दिल्ली | ईरान ने अमेरिका-इजरायल के हमलों के जवाब में अब तक का सबसे बड़ा मिसाइल हमला करके दुनिया को चौंका दिया है। 
ईरान ने 3500 किलोमीटर दूर हिंद महासागर में अमेरिका के सबसे बड़े सैन्य हवाई अड्‍डे डिएगो गार्सिया (US Base Diego Garcia) पर बैलिस्टिक मिसाइल दागी है।
By <a rel="nofollow" class="external text" href="https://www.flickr.com/photos/68686051@N00">Steve Swayne</a> from Maleny, Australia - <a rel="nofollow" class="external text" href="https://www.flickr.com/photos/maleny_steve/2844420985/">Diego Garcia Satellite Photo</a>, <a href="https://creativecommons.org/licenses/by-sa/2.0" title="Creative Commons Attribution-Share Alike 2.0">CC BY-SA 2.0</a>, <a href="https://commons.wikimedia.org/w/index.php?curid=14374053">Link</a>

अंतरिक्ष से लिया गया डिएगो गार्सिया का दृश्य (साभार विकीमीडिया)

यह अमेरिकी बेस ईरान पर हमलों में इस्तेमाल होने वाले विमानों का मुख्य ठिकाना रहा है।
इस हमले के बाद यह युद्ध खाड़ी से निकलकर हिन्द महासागर में फैल सकता है जो भारत के लिए बड़ी चिंता बन सकता है। भारत का 80% ऊर्जा आयात हिंद महासागर से ही होता है। 
अभी तक अंतरराष्ट्रीय खुफिया एजेंसियां मानती थीं कि ईरान की सबसे एडवांस बैलिस्टिक मिसाइलों (जैसे खैबर-शिकन, सज्जील-2) की अधिकतम रेंज 2000 से 2500 किलोमीटर के बीच है।
लेकिन डिएगो गार्सिया पर हमला बताता है कि ईरान ने अपनी मिसाइल क्षमता को कितना विकसित कर लिया है।
 इससे अमेरिका और उसके सहयोगी देशों (खासकर ब्रिटेन) के लिए खतरा बढ़ गया है।
ईरान से डिएगो गार्सिया तक हवाई दूरी लगभग 3400-3500 किमी है। ईरानी मीडिया ने इसे “हाइपरसोनिक” या “नई पीढ़ी की बैलिस्टिक मिसाइल” बताया है, लेकिन कोई स्पष्ट नाम नहीं दिया गया।

अमेरिकी अधिकारियों ने कहा कि मिसाइलों को इंटरसेप्ट कर लिया गया, लेकिन हमले से ईरान की तकनीकी प्रगति का संकेत मिलता है।

डिएगो गार्सिया नामक अमेरिकी बेस, ब्रिटेन सरकार द्वारा संचालित ब्रिटिश हिंद महासागर क्षेत्र में स्थित सैन्य अड्डा है। यहां B-2 स्टील्थ बॉम्बर, P-8 पोसाइडन निगरानी विमान और कई नौसैनिक जहाज तैनात हैं।
ईरान का यह हमला ब्रिटेन के क्षेत्र में हुआ है, अब देखना होगा कि ब्रिटेन इसको लेकर क्या प्रतिक्रिया देता है। बता दें कि ईरानी विदेश मंत्री ने हाल में ब्रिटेन को चेताया था कि अगर वह अपने क्षेत्र से अमेरिकी विमानों को उड़ने देगा तो उसे युद्ध में शामिल माना जाएगा।
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तेल छूट पर ईरान का तीखा जवाब – ‘बैन हटाकर अमेरिका बाजार को भरमा रहा’

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अमेरिका और ईरान के बीच एक बार फिर तनाव चरम पर पहुंच गया है। (प्रतीकात्मक तस्वीर)
नई दिल्ली | ईरान के तेल पर अमेरिकी प्रतिबंध को अस्थायी तौर पर हटाए जाने की घोषणा के बाद ईरान ने इसे बाजार को भरमाने वाला कदम बताया है। 
ईरानी प्रवक्ता ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि “वर्तमान में ईरान के पास कोई अतिरिक्त कच्चा तेल नहीं है जो समुद्र में लदा हो और उसे अंतरराष्ट्रीय बाजारों में बेचा जा सके।”

ईरान के तेल मंत्रालय के प्रवक्ता का ट्वीट

जबकि अमेरिका ने दावा किया था कि समुद्र में मौजूद ईरानी तेल से अस्थायी तौर पर बैन हटाने से 14 करोड़ बैरल तेल बाजारों को मिल सकता है। 
ईरान की ओर से इस पर स्पष्ट जवाब दिया गया है जिसमें उसने अमेरिकी छूट को कोरा आश्वासन करार दिया है।
गौरतलब है कि ईरान लंबे समय से अमेरिका की ओर से लगे प्रतिबंधों को हटाने का प्रयास कर रहा था, लेकिन अब इसके हटाए जाने पर उसने ऐसी कूटनीतिक प्रतिक्रिया दी है, जिसने ट्रंप प्रशासन को फिर सवालों के घेरे में ला दिया है।
 
ईरानी तेल मंत्रालय के प्रवक्ता समान घोदौसी ने एक्स पर लिखा है कि
“वर्तमान में ईरान के पास अंतरराष्ट्रीय बाजार में बेचने के लिए अतिरिक्त कच्चा तेल नहीं है इसलिए अमेरिकी वित्त मंत्री का बयान सिर्फ खरीदारों को आश्वासन देने और बाजार में घबराहट कम करने का तरीका है।”
ईरान के तेल मंत्रालय ने अमेरिका की हालिया छूट (waiver) को “बाजार को मनोवैज्ञानिक रूप से नियंत्रित करने का प्रयास” बताया है।
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