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दुनिया गोल

ट्रंप का शांति बोर्ड क्या संयुक्त राष्ट्र की जगह ले सकता है? पड़ोसी पाक समेत 18 देश हुए शामिल

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ट्रंप के बनाए बोर्ड ऑफ पीस के आधिकारिक समारोह में शामिल सदस्य। (साभार - X/@AmnestyMENA)
ट्रंप के बनाए बोर्ड ऑफ पीस के आधिकारिक समारोह में शामिल सदस्य। (साभार - X/@AmnestyMENA)

नई दिल्ली |

गज़ा में शांति स्थापित करने और पुर्ननिर्माण के मकसद से बनाए गए शांति बोर्ड (Board of Peace) में शामिल होने के लिए भारत समेत दुनिया के करीब 60 देशों को न्यौता मिला है। इस बोर्ड में कई देशों को शामिल कराने के ट्रंप के मकसद ने दुनिया को चौंका दिया। अंतरराष्ट्रीय मीडिया ने इसको लेकर ट्रंप से सवाल किया कि क्या ये संयुक्त राष्ट्र की जगह ले सकता है, तो उन्होंने इस संभावना से इनकार नहीं किया है। अब तक इस शांति बोर्ड में पाकिस्तान, सऊदी अरब, यूएई समेत नौ देशों ने शामिल होने की घोषणा कर दी है, जबकि इसकी सदस्यता फीस 1 अरब डॉलर (860 करोड़ रुपये) है।

1- शांति बोर्ड में पाक समेत 18 देश शामिल

अब तक नौ देशों ने इस बोर्ड में शामिल होने का ऐलान कर दिया है जिसमें पड़ोसी पाकिस्तान भी शामिल है।

मध्य-एशिया के 7 देश शामिल

  1. इजरायल
  2. सऊदी अरब
  3. यूएई
  4. बहरीन
  5. जॉर्डन
  6. कतर
  7. मिस्त्र

नाटो सदस्य भी शामिल

  1. टर्की
  2. हंगरी
  3. अर्मेनिया (नाटो सहयोगी)
  4. अजरबैजान ( नाटो सहयोगी)

4 एशियाई देश शामिल

  1. पाकिस्तान
  2. इंडोनेशिया
  3. उज़्बेकिस्तान
  4. कजाकिस्तान
  5. वियतनाम

एक अफ्रीकी देश शामिल

  1. मोरक्को

एक दक्षिण अमेरिकी देश भी शामिल

  1. पैरग्वे

2- इन देशों ने न्यौता ठुकराया

कई बड़े देशों ने अभी तक सदस्यता से इनकार किया है, इनमें प्रमुख हैं- 

  • फ्रांस
  • जर्मनी
  • ब्रिटेन
  • जापान
  • दक्षिण कोरिया
  • कनाडा

ट्रंप ने कनाडा से न्यौता वापस लिया  : ट्रंप ने कनाडा के पीएम के भाषण के भाषण से नाराज होकर 22 jan को सोशल मीडिया पर लिखा है कि वे कनाडा से इस बोर्ड में शामिल होने का न्यौता वापस ले रहे हैं। दरअसल विश्व आर्थिक मंच से कनाडाई पीएम ने अमेरिका का नाम लिए बिना उसके आक्रमक रुख की कड़े शब्दों में आलोचना की थी।

फ्रांस को धमकी- ‘शामिल नहीं तो 200% टैरिफ लगा दूंगा’ : फ्रांस ने शांति बोर्ड में शामिल होने से इनकार किया है। इसको लेकर जब ट्रंप से सवाल किया गया तो उन्होंने सीधे कहा- “अगर फ्रांस शामिल नहीं हुआ तो हम फ्रांस से आयात होने वाले सामान पर 200% टैरिफ लगा देंगे।”


3- चीन ने UN के अस्तित्व पर चिंता जतायी, रखी ये शर्त

चीन ने स्पष्ट किया कि वह तभी शामिल होगा जब बोर्ड संयुक्त राष्ट्र (UN) के अस्तित्व को खत्म न करे। चीनी विदेश मंत्रालय ने कहा, “हम किसी भी ऐसे प्रयास का समर्थन नहीं करेंगे जो UN की जगह ले या उसकी भूमिका कमजोर करे।

4- रूस की शर्त, प्रतिबंध हटाओ तो शामिल होंगे

ट्रंप ने चार दिन पहले मीडिया से कहा था कि रूसी राष्ट्रपति को न्यौता भेजा गया और वे इसमें शामिल होने जा रहे हैं। इस बयान का तुरंत रुस ने खंडन करते हुए कहा कि उनका विदेश मंत्रालय इस निमंत्रण पर विचार कर रहा है। दूसरी ओर, न्यूयॉर्क टाइम्स ने रिपोर्ट किया है कि रूस ने शांति बोर्ड में दान करने की शर्त रखी है कि उसकी प्रतिबंधित संपत्ति से बैन हटाया जाए।


5- UN के जैसा है शांति बोर्ड का लोगो

गौरतलब है कि शांति बोर्ड के लोगो, संयुक्त राष्ट्र के लोगो से मिलता-जुलता है जो शांति बोर्ड की साइनिंग सेरेमनी में जारी किया गया है। 

ट्रंप के शांति बोर्ड का लोगो जारी हुआ। (credit- X/Whitehouse)

ट्रंप के शांति बोर्ड का लोगो जारी हुआ। (credit- X/Whitehouse)

UN काम नहीं कर रहा तो हमें आगे बढ़ना होगा- ट्रंप

ट्रंप ने अंतरराष्ट्रीय मीडिया से बातचीत में कहा कि बोर्ड UN का विकल्प नहीं है, लेकिन “अगर UN काम नहीं कर रहा तो हमें आगे बढ़ना होगा।” 
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6- भारत की चुप्पी, यूएन का अस्थायी सदस्य नहीं है 

भारत ने अभी तक सदस्यता पर कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया है। हालांकि भारत ने ट्रंप के गज़ा शांति समझौते का समर्थन किया था। गौरतलब है कि भारत को अब तक यूएन की स्थायी सदस्यता नहीं मिली है, ऐसे में यह भी संभावना जतायी जा रही है कि वह इस बोर्ड में शामिल होने के विकल्प पर विचार कर सकता है। साथ ही, अमेरिका के भारत पर कड़े रुख के चलते भारत यह भी नहीं चाहेगा कि उस पर कोई अतिरिक्त टैरिफ लगा दिया जाए। 

बोलते पन्ने.. एक कोशिश है क्लिष्ट सूचनाओं से जनहित की जानकारियां निकालकर हिन्दी के दर्शकों की आवाज बनने का। सरकारी कागजों के गुलाबी मौसम से लेकर जमीन की काली हकीकत की बात भी होगी ग्राउंड रिपोर्टिंग के जरिए। साथ ही, बोलते पन्ने जरिए बनेगा .. आपकी उन भावनाओं को आवाज देने का, जो अक्सर डायरी के पन्नों में दबी रह जाती हैं।

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ईरान के नतांज परमाणु केंद्र पर भीषण हमला, जवाबी ऐक्शन में इजरायल के ईंधन विमान गिराए

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नतांज परमाणु केंद्र (तस्वीर - X)
नई दिल्ली | ईरान के सबसे महत्वपूर्ण परमाणु संवर्धन केंद्र – नतांज (Natanz) पर एक बार फिर भीषण हमला किया है। ईरान ने दावा किया है कि अमेरिका-इज़रायल ने संयुक्त रूप से ये हमला किया है।
इसके जवाब में ईरान ने इज़रायल पर मिसाइल हमला करके उसके ईंधन विमानों को निशाना बनाया है। साथ ही, सऊदी अरब, यूएई में भी जोरदार ड्रोन हमले किए हैं। यूएई में हमलों के बाद दो सैनिक व छह विदेशी नागरिकों की मौत हो गई है। इस पूरे घटनाक्रम ने 22वें दिन युद्ध को और भीषण बना दिया है। 
 

बंकर ध्वस्त करने वाले बम से परमाणु केंद्र पर हमला

इससे पहले, ईरानी परमाणु ऊर्जा संगठन (AEOI) ने बयान जारी कर कहा कि नतांज में स्थित शहीद अहमदी रोशन संवर्धन सुविधा पर शनिवार सुबह हमला किया गया। तेहरान से 220 किमी दक्षिण-पूर्व में स्थित यह सुविधा ईरान के यूरेनियम संवर्धन कार्यक्रम का केंद्र है। ईरान ने कहा कि इस हमले में आधुनिक ‘बंकर बस्टर’ बमों का इस्तेमाल हुआ, जो भूमिगत संरचनाओं को निशाना बनाने के लिए डिजाइन किए जाते हैं।

12 दिनों के युद्ध में भी बना था निशाना 

एक सप्ताह पहले भी नतांज पर हमला हुआ था। साथ ही, पिछले साल जून में इजरायल-ईरान के 12 दिनों के युद्ध में भी इस परमाणु केंद्र को निशाना बनाया गया था।  बाद में अमेरिका ने भी हमला किया। 

रेडियोधर्मी रिसाव का खतरा टला

राहत की बात यह है कि ईरानी तकनीकी टीम और अंतरराष्ट्रीय पर्यवेक्षकों ने पुष्टि की है कि हमले के बाद क्षेत्र में कोई रेडियोधर्मी रिसाव (radioactive leakage) नहीं हुआ है। आसपास की नागरिक आबादी सुरक्षित बताई जा रही है।

IAEA की चेतावनी

अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) के महानिदेशक राफेल ग्रॉसी ने तत्काल बयान जारी कर कहा कि “परमाणु सुविधाओं को युद्ध का हिस्सा नहीं बनाया जाना चाहिए। ऐसे हमले किसी बड़ी परमाणु आपदा का कारण बन सकते हैं, जिसका असर पूरे क्षेत्र और वैश्विक स्तर पर हो सकता है।”

ईरान ने इजराइल के सैन्य हवाई अड्‍डे को निशाना बनाया

ईरान ने दावा किया है कि उसने ड्रोन हमलों के जरिए इजरायल की सैन्य उड़ानों को प्रभावित किया है। तेहरान के अनुसार, तेल अवीव के पास बेन गुरियन एयरपोर्ट पर ईंधन टैंक और रिफ्यूलिंग विमानों को निशाना बनाया गया।

ईरानी सेना और रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने कहा कि उनके हमलों के कारण इजरायल को कुछ सैन्य कर्मियों को हटाना पड़ा। ईरान ने साफ कहा है कि जब तक खतरा खत्म नहीं होगा, हमले जारी रहेंगे।

बता दें कि बेन गुरियन एयरपोर्ट, इजरायल के लिए बेहद अहम है, जहां सेना की विशेष यूनिट्स और लड़ाकू विमानों की मरम्मत सुविधाएं मौजूद हैं।

यूएई में दो सैनिक और 6 नागरिक मरे

संयुक्त अरब अमीरात ने शनिवार को ईरान की ओर से छोड़ी गई 3 बैलिस्टिक मिसाइलों और 8 ड्रोन को हवा में ही मार गिराने का दावा किया है। रक्षा मंत्रालय के अनुसार अब तक सैकड़ों मिसाइल और ड्रोन हमलों को रोका जा चुका है।

इन हमलों में 2 सैनिकों की मौत हुई है। साथ ही, पाकिस्तान, नेपाल, बांग्लादेश और फिलिस्तीन के कुल 6 नागरिकों की भी जान गई है। करीब 160 लोग घायल बताए गए हैं।

सऊदी अरब पर 20 ड्रोन हमले

ईरान ने सऊदी अरब पर ड्रोन बरसाए हैं। सऊदी ने कहा है कि ईरान की ओर से उसके तेल क्षेत्र पर कुछ घंटों में 20 ड्रोन का हमला हुआ जो उसने मार गिराए हैं। 
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ईरान का सबसे लंबा मिसाइल हमला: 3500 किमी दूर हिंद महासागर में US बेस डिएगो गार्सिया को बनाया निशाना

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अमेरिकी सैन्य अड्‍डे डिएगो गार्सिया में खड़े एयरक्राफ्ट
नई दिल्ली | ईरान ने अमेरिका-इजरायल के हमलों के जवाब में अब तक का सबसे बड़ा मिसाइल हमला करके दुनिया को चौंका दिया है। 
ईरान ने 3500 किलोमीटर दूर हिंद महासागर में अमेरिका के सबसे बड़े सैन्य हवाई अड्‍डे डिएगो गार्सिया (US Base Diego Garcia) पर बैलिस्टिक मिसाइल दागी है।
By <a rel="nofollow" class="external text" href="https://www.flickr.com/photos/68686051@N00">Steve Swayne</a> from Maleny, Australia - <a rel="nofollow" class="external text" href="https://www.flickr.com/photos/maleny_steve/2844420985/">Diego Garcia Satellite Photo</a>, <a href="https://creativecommons.org/licenses/by-sa/2.0" title="Creative Commons Attribution-Share Alike 2.0">CC BY-SA 2.0</a>, <a href="https://commons.wikimedia.org/w/index.php?curid=14374053">Link</a>

अंतरिक्ष से लिया गया डिएगो गार्सिया का दृश्य (साभार विकीमीडिया)

यह अमेरिकी बेस ईरान पर हमलों में इस्तेमाल होने वाले विमानों का मुख्य ठिकाना रहा है।
इस हमले के बाद यह युद्ध खाड़ी से निकलकर हिन्द महासागर में फैल सकता है जो भारत के लिए बड़ी चिंता बन सकता है। भारत का 80% ऊर्जा आयात हिंद महासागर से ही होता है। 
अभी तक अंतरराष्ट्रीय खुफिया एजेंसियां मानती थीं कि ईरान की सबसे एडवांस बैलिस्टिक मिसाइलों (जैसे खैबर-शिकन, सज्जील-2) की अधिकतम रेंज 2000 से 2500 किलोमीटर के बीच है।
लेकिन डिएगो गार्सिया पर हमला बताता है कि ईरान ने अपनी मिसाइल क्षमता को कितना विकसित कर लिया है।
 इससे अमेरिका और उसके सहयोगी देशों (खासकर ब्रिटेन) के लिए खतरा बढ़ गया है।
ईरान से डिएगो गार्सिया तक हवाई दूरी लगभग 3400-3500 किमी है। ईरानी मीडिया ने इसे “हाइपरसोनिक” या “नई पीढ़ी की बैलिस्टिक मिसाइल” बताया है, लेकिन कोई स्पष्ट नाम नहीं दिया गया।

अमेरिकी अधिकारियों ने कहा कि मिसाइलों को इंटरसेप्ट कर लिया गया, लेकिन हमले से ईरान की तकनीकी प्रगति का संकेत मिलता है।

डिएगो गार्सिया नामक अमेरिकी बेस, ब्रिटेन सरकार द्वारा संचालित ब्रिटिश हिंद महासागर क्षेत्र में स्थित सैन्य अड्डा है। यहां B-2 स्टील्थ बॉम्बर, P-8 पोसाइडन निगरानी विमान और कई नौसैनिक जहाज तैनात हैं।
ईरान का यह हमला ब्रिटेन के क्षेत्र में हुआ है, अब देखना होगा कि ब्रिटेन इसको लेकर क्या प्रतिक्रिया देता है। बता दें कि ईरानी विदेश मंत्री ने हाल में ब्रिटेन को चेताया था कि अगर वह अपने क्षेत्र से अमेरिकी विमानों को उड़ने देगा तो उसे युद्ध में शामिल माना जाएगा।
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तेल छूट पर ईरान का तीखा जवाब – ‘बैन हटाकर अमेरिका बाजार को भरमा रहा’

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अमेरिका और ईरान के बीच एक बार फिर तनाव चरम पर पहुंच गया है। (प्रतीकात्मक तस्वीर)
नई दिल्ली | ईरान के तेल पर अमेरिकी प्रतिबंध को अस्थायी तौर पर हटाए जाने की घोषणा के बाद ईरान ने इसे बाजार को भरमाने वाला कदम बताया है। 
ईरानी प्रवक्ता ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि “वर्तमान में ईरान के पास कोई अतिरिक्त कच्चा तेल नहीं है जो समुद्र में लदा हो और उसे अंतरराष्ट्रीय बाजारों में बेचा जा सके।”

ईरान के तेल मंत्रालय के प्रवक्ता का ट्वीट

जबकि अमेरिका ने दावा किया था कि समुद्र में मौजूद ईरानी तेल से अस्थायी तौर पर बैन हटाने से 14 करोड़ बैरल तेल बाजारों को मिल सकता है। 
ईरान की ओर से इस पर स्पष्ट जवाब दिया गया है जिसमें उसने अमेरिकी छूट को कोरा आश्वासन करार दिया है।
गौरतलब है कि ईरान लंबे समय से अमेरिका की ओर से लगे प्रतिबंधों को हटाने का प्रयास कर रहा था, लेकिन अब इसके हटाए जाने पर उसने ऐसी कूटनीतिक प्रतिक्रिया दी है, जिसने ट्रंप प्रशासन को फिर सवालों के घेरे में ला दिया है।
 
ईरानी तेल मंत्रालय के प्रवक्ता समान घोदौसी ने एक्स पर लिखा है कि
“वर्तमान में ईरान के पास अंतरराष्ट्रीय बाजार में बेचने के लिए अतिरिक्त कच्चा तेल नहीं है इसलिए अमेरिकी वित्त मंत्री का बयान सिर्फ खरीदारों को आश्वासन देने और बाजार में घबराहट कम करने का तरीका है।”
ईरान के तेल मंत्रालय ने अमेरिका की हालिया छूट (waiver) को “बाजार को मनोवैज्ञानिक रूप से नियंत्रित करने का प्रयास” बताया है।
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