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अमेरिकी टैरिफ: सुप्रीम कोर्ट का फैसला, ट्रंप का नया कदम और भारत पर असर

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मोदी-ट्रंप मुलाकात
(सांकेतिक तस्वीर)
  • भारत पर फिलहाल 18% अमेरिकी टैरिफ लागू है, ट्रंप टैरिफ का सबसे ज्यादा असर भारत पर रहा है।

नई दिल्ली |

अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के एक दिन पहले आए ऐतिहासिक फैसले ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के वैश्विक टैरिफ को बड़ा झटका दिया है। हालांकि टैरिफ नीति को रद्द करने के फैसले के कुछ घंटे बाद ही राष्ट्रपति ट्रंप ने पूरी दुनिया पर 10% नए टैरिफ लगा दिए हैं। लंबे समय तक भारत पर दुनिया में सबसे ज्यादा अमेरिकी टैरिफ लागू रहा हाल में 50% से घटाकर 18% कर दिया गया। अब अमेरिकी सर्वोच्च अदालत के फैसले और ट्रंप के नए टैरिफ से भारत की स्थिति को लेकर फिर से आशंकाएं पैदा हो गई हैं।

ट्रंप ने अपनी प्रेसवार्ता में स्पष्ट किया कि भारत के साथ व्यापार समझौते (FTA) में कोई बदलाव नहीं आएगा। इन दोनों ही घटनाक्रमों पर भारत की पहली प्रतिक्रिया आई है, शनिवार (21 feb) शाम को एक प्रेस रिलीज के जरिए भारत सरकार ने कहा है कि वह इन घटनाक्रमों का अध्ययन कर रहा है। विशेषज्ञों के मुताबिक, भारत की प्रतिक्रिया उसके पूर्व के रूख के हिसाब से ही सधी हुई और अस्पष्ट है। विशेषज्ञ यह भी मान रहे हैं कि सुप्रीम कोर्ट की ओर से भले टैरिफ को अवैध बता दिया गया हो पर भारतीय निर्यातकों पर कुछ अमेरिकी टैरिफ का बोझ बरकरार रहेगा।

24 फरवरी से नया टैरिफ लागू होगा

सुप्रीम कोर्ट का फैसला 20 फरवरी 2026 को आया, जिसमें 6-3 के बहुमत से ट्रंप के इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पॉवर्स एक्ट (IEEPA) के तहत लगाए गए रेसिप्रोकल टैरिफ्स को अवैध घोषित किया गया। ट्रंप ने फैसले को शर्मनाक बताते हुए तुरंत प्रतिक्रिया दी। उन्होंने ट्रेड एक्ट 1974 की सेक्शन 122 के तहत 10% का वैश्विक टैरिफ लगाया, जो 150 दिनों के लिए लागू हो सकता है। इसके बाद इसे लागू करने के लिए अमेरिकी संसद की अनुमति जरूरी है। यह टैरिफ सभी देशों पर 24 फरवरी 2026 से लागू हो जाएगा। लेकिन कुछ छूट जैसे महत्वपूर्ण मिनरल्स और फूड पर दी गई हैं।

भारत का टैरिफ 18% से 10% रह जाएगा

ट्रंप ने नए टैरिफ की घोषणा करते हुए कहा है कि यह अमेरिकी अर्थव्यवस्था की सुरक्षा के लिए जरूरी है। व्हाइट हाउस के अधिकारी ने स्पष्ट किया कि भारत पर यह अस्थायी टैरिफ लागू होगा, लेकिन ट्रेड डील जारी रहेगी। यानी भारत के ऊपर हाल में लागू 18% टैरिफ की जगह 10% टैरिफ लागू होगा जो अमेरिकी कानून के मुताबिक अधिकतम 3 महीने तक लागू रह सकता है। बता दें कि ट्रंप ने भारत पर 25% पारस्परिक टैरिफ के अलावा 25% दंडनीय टैरिफ लगाया था, जिसको लेकर उन्होंने कहा था कि रूस से तेल खरीद बंद करने पर इसे हटा लिया जाएगा। ये टैरिफ फरवरी के शुरूआती सप्ताह में हटा दिया गया था। इसके बाद मोदी व ट्रंप की फोन पर वार्ता के बाद पारस्परिक टैरिफ भी 25% से घटाकर 18% कर दिया गया था।

भारत पर इसका क्या असर?

  • सुप्रीम कोर्ट के फैसले से रेसिप्रोकल टैरिफ हटने से भारतीय निर्यातकों को राहत मिली है, लेकिन अन्य टैरिफ लागू रहेंगे।
  • सेक्शन 232 के तहत स्टील और एल्युमिनियम पर 50% ड्यूटी जारी है, जिससे दिसंबर 2025 में इन निर्यातों में 66% की गिरावट आई।
  • इसके अलावा, $800 से कम वैल्यू के आइटम्स पर डी मिनिमिस एक्जेम्प्शन सस्पेंड होने से टेक्सटाइल, खिलौने, कॉस्मेटिक और इलेक्ट्रॉनिक एक्सेसरीज प्रभावित होंगे।
  • इससे इलेक्ट्रॉनिक्स और फार्मास्यूटिकल्स जैसे सेक्टरों को छूट रहेगी।
  • आर्थिक रूप से स्टील-एल्युमिनियम भारत का चौथा सबसे बड़ा निर्यात समूह है, और ये टैरिफ छोटे निर्यातकों को भी नुकसान पहुंचा रहे हैं।
  • हालांकि 10% टैरिफ वियतनाम, बांग्लादेश, चीन जैसे प्रतिस्पर्धियों की तुलना में भारत को अपेक्षाकृत फायदा दे सकता है, क्योंकि पहले भारत पर 50% टैरिफ थे।

FTA या इंटरिम ट्रेड डील पर असर ?

ट्रंप ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में भारत को लेकर पूछे गए एक सवाल के जवाब में कहा कि व्यापार समझौते मेें कोई बदलाव नहीं होगा। उन्होंने कहा, “भारत के साथ डील में कुछ नहीं बदलता। वे टैरिफ देंगे, हम नहीं।”

गौरतलब है कि हाल में जारी हुए भारत-अमेरिका के संयुक्त बयान में भारत-US इंटरिम एग्रीमेंट का जिक्र किया गया, जिसमें मेंशन था कि अमेरिका भारत से 18% टैरिफ लेगा, जबकि भारत US से 0%। बयान में यह भी बताया गया था कि यह डील MSMEs, किसानों और मछुआरों को फायदा पहुंचाएगी। और भारतीय निर्यातकों को $30 ट्रिलियन अमेरिकी बाजार तक पहुंच मिलेगी।

अगले सप्ताह डील फाइनल होने का संभावना

इस डील को फाइनल करने के लिए एक भारतीय डेलिगेशन अगले हफ्ते अमेरिका जाएगा। सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने के बाद विशेषज्ञ मान रहे हैं कि अब भारत को इस डील की समीक्षा करनी चाहिए ताकि निर्यात बढ़े और अर्थव्यवस्था मजबूत हो।

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शांति वार्ता के लिए इस्लामाबाद जाएंगे अमेरिकी उपराष्ट्रपति वेंस, सीज़फायर उल्लंघन के बीच क्या हैं इसके मायने?

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नई दिल्ली | अमेरिका व ईरान के बीच आठ अप्रैल को हुए सीज़फायर का उल्लंघन हो रहा है लेकिन दोनों देश शांतिवार्ता के लिए इस्लामाबाद जाएंगे।
10 अप्रैल को इस्लामाबाद में होने वाली शांति वार्ता में अमेरिका की ओर से उपराष्ट्रपति जेडी वेंस को भेजा जाएगा। वेंस को भेजे जाने की व्हाइट हाउस की घोषणा को वार्ता के लिए सकारात्मक कदम माना जा रहा है।
दरअसल ईरान अन्य अमेरिकी नेताओं की तुलना में वेंस के प्रति लचीला रुख रखता है।  वेंस अनिश्चितकालीन युद्धों में अमेरिका के फंसे रहने के विरोधी रहे हैं। वे पूर्व में अमेरिका के लिए इराक युद्ध में सेवा भी दे चुके हैं।
उधर, व्हाइट हाउस की ओर से प्रतिनिधिमंडल में जेडी वेंस के अलावा राष्ट्रपति ट्रंप के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और ट्रंप के दामाद जेरेड कुशनर को भी किए जाने की जानकारी दी गई है।
यह ध्यान रखने योग्य है कि विटकॉफ और कुशनर ने ही बीती फरवरी में जेनेवा में चली ईरान वार्ता में अमेरिका की ओर से हिस्सा लिया था।
ऐसे में ईरान पहले ही स्पष्ट कर चुका है कि उसे इन दोनों नेताओं पर भरोसा नहीं है क्योंकि वार्ता के बीच ही उस पर बमबारी शुरू हुई थी।

ईरानी नेता वार्ता के लिए इस्लामाबाद पहुंचेंगे 

उधर, इस्लामाबाद जाने के लिए ईरानी प्रतिनिधि मंडल को लेकर एक्स पर एक जानकारी सामने आई लेकिन इसे कुछ देर में ही डिलीट कर दिया गया।
पाकिस्तान में ईरान के राजदूत रेजा अमिरी मुघदम ने एक्स पर घोषणा की कि ईरानी प्रतिनिधिमंडल गुरुवार रात को इस्लामाबाद पहुंच जाएगा। लेकिन कुछ ही देर बाद उन्होंने इसे डिलीट कर दिया।
दूतावास के अधिकारियों का कहना है कि यह जानकारी ‘समय से पहले’ साझा कर दी गई थी। इस घटनाक्रम से वार्ता को लेकर आशंका पैदा हो गई क्योंकि लेबनान पर हुए हमलों के बाद ईरान ने कहा कि संघर्ष विराम का उल्लंघन हुआ।

वार्ता में अहम पेंच- “परमाणु संवर्धन का अधिकार”

ईरान के परमाणु एजेंसी के प्रमुख मोहम्मद इस्लामी ने एसोसिएटेड प्रेस से कहा है कि परमाणु संवर्धन के हमारे अधिकार से कोई समझौता नहीं किया जा सकता है।
दरअसल ईरान ने दस बिंदु वाली जो शांति योजना अमेरिका के सामने रखी है, उसमें यह प्रमुख शर्त है।
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ट्रंप सीज़फायर की शर्त से पलटे : ‘लेबनान पर हमले’ को समझौते से बाहर बताया, लेबनान में 254 मौतों के बाद राष्ट्रीय शोक

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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (X/cginisty)
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (X/cginisty)

नई दिल्ली | 7 अप्रैल की सुबह अमेरिका-ईरान के बीच हुआ सीज़फायर शाम होते-होते कमजोर पड़ गया है।

इज़रायल ने ईरान के ऊपर हमले न करने से जुड़ी सीज़फायर की शर्त तो मानी, लेकिन साफ कह दिया कि वह लेबनान पर हमले जारी रखेगा।

फिर इज़रायल ने लेबनान पर अब तक के सबसे भीषण हवाई हमले किए। लेबनान की सिविल डिफेंस एजेंसी के मुताबिक, अब तक 254 लोगों की मौत हो चुकी है और कम से कम 1,165 लोग घायल हैं।

लेबनान में राष्ट्रीय शोक घोषित किया गया है।

उधर, इज़रायल के रुख के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप फिर पलट गए। उन्होंने अमेरिका की PBS न्यूज़ को दिए इंटरव्यू  में कहा कि “सीज़फायर की शर्तों में लेबनान शामिल नहीं था।”

जबकि मध्यस्थ पाकिस्तान के पीएम ने अपने ट्वीट में साफ लिखा था कि “ईरान, लेबनान व उसके अन्य सहयोगियों के खिलाफ अमेरिका दो सप्ताह तक हमले रोकने के लिए राज़ी हो गया है।”

ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने एक्स पर अमेरिका को चेताया कि “संघर्ष विराम और हमले साथ-साथ नहीं चल सकते।” ईरानी फार्स न्यूज ने खबर दी कि सीज़फायर के बाद खोला गया होर्मुज़ स्ट्रेट का सुरक्षित रास्ता बंद कर दिया गया है।

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टूटने की कगार पर सीज़फायर : लेबनान पर इजरायली बमबारी के बाद ईरान ने ‘होर्मुज़’ को फिर किया बंद

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लेबनान की राजधानी बेरूत में इज़रायल की भीषण बमबारी ने शांति की पहल को झटका दिया है।
लेबनान की राजधानी बेरूत में इज़रायल की भीषण बमबारी ने शांति की पहल को झटका दिया है।

नई दिल्ली | अमेरिका-ईरान की बीच बुधवार की सुबह हुआ संघर्ष विराम रात होते-होते खत्म होता नज़र आ रहा है। बुधवार की देर शाम को इज़रायल ने लेबनान की राजधानी बेरूत पर भीषण हवाई बमबारी की है, जिसके बाद ईरान ने सीज़फायर न मानने की धमकी दी है। ईरानी मीडिया ने कहा है कि ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट के सुरक्षित रास्ते को बंद कर दिया है जिसे सुबह सीज़फायर समझौते के तहत खोला गया था।

खबरों के मुताबिक, इजरायली वायुसेना ने बेरूत में महज 10 मिनट के भीतर 100 से अधिक हवाई हमले किए हैं। इस सैन्य कार्रवाई पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए ईरानी विदेश मंत्री ने ‘एक्स’ (X) पर स्पष्ट किया कि सीज़फायर की शर्तों के तहत इजरायल को लेबनान पर हमले रोकने होंगे। उन्होंने चेतावनी दी कि

“अगर राष्ट्रपति ट्रंप इजरायल के जरिए लेबनान पर हमले जारी रखते हैं, तो यह संघर्ष विराम प्रभावी नहीं रहेगा।”

होर्मुज़ स्ट्रेट फिर से बंद

इस बीच ईरान की ‘फार्स न्यूज़’ ने रिपोर्ट किया है कि शांति वार्ता के बाद होर्मुज़ स्ट्रेट (Strait of Hormuz) से जिस सुरक्षित समुद्री रास्ते को व्यापार के लिए खोला गया था, उसे ईरानी सेना ने दोबारा बंद कर दिया है। यह वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है।

‘हिजबुल्ला के खिलाफ ऑपरेशन जारी रहेगा’ – IDF 

इजरायली रक्षा बल (IDF) के प्रवक्ता ने एक वीडियो बयान जारी कर अपनी स्थिति साफ की है। प्रवक्ता ने कहा कि हिजबुल्ला के खिलाफ इजरायल का सैन्य ऑपरेशन जारी रहेगा क्योंकि यह “इजरायली सभ्यता के अस्तित्व को बचाने” के लिए अनिवार्य है।

पाकिस्तान ने की शांति की अपील

क्षेत्र में बढ़ते तनाव को देखते हुए पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने ट्वीट कर चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि संघर्ष क्षेत्र से सीज़फायर के उल्लंघन की खबरें चिंताजनक हैं। उन्होंने सभी पक्षों से अत्यधिक संयम बरतने और समझौते का सम्मान करने की अपील की है।

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