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कैसे समृद्ध बनेगा बिहार? हर 100 में से 72 रुपये के लिए हम केंद्र के भरोसे, CAG Report में खुलासा

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नीतीश कुमार 9 बार सीएम बन चुके हैं और इस बार भी उनके ही चेहरे पर चुनाव लड़ा गया और अप्रत्याशित जीत मिली।
  • बिहार में साल 2022-23 के लेखे-जोखे से जुड़ी कैग रिपोर्ट विधानसभा में पेश हुई।
  • नीतीश सरकार ने ₹70,877 करोड़ के खर्च का कोई हिसाब नहीं सौंपा।
पटना |
नीतीश कुमार की सरकार लगातार कहती आ रही है कि वे विकसित बिहार बनाएंगे, पर सच्चाई यह है कि अब भी बिहार सबसे गरीब राज्य है और आत्मनिर्भरता से कोसों दूर है। इसी बात की तस्दीक CAG (कैग) की रिपोर्ट में हुई है जो 26 फरवरी को विधानसभा में पेश की गई। रिपोर्ट बताती है कि बिहार सरकार के पास आने वाले कुल रुपये (₹1,72,688 करोड़) में से 72.12% हिस्सा केंद्र सरकार से मिला है। आसान भाषा में कहें तो बिहार को चलाने के लिए लगने वाले हर 100 रुपये में से ₹72 केंद्र से आते हैं। इतने पर भी सरकार में भ्रष्टाचार इतना है कि 70.8 हजार करोड़ रुपये के खर्च का लेखा-जोखा गायब है।

1- 72.12% बजट के लिए केंद्र पर निर्भर 

बिहार की समृद्धि के रास्ते में सबसे बड़ा रोड़ा इसकी अत्यधिक निर्भरता है। 2022-2023 में सरकार के पास आए कुल रुपये (₹1,72,688 करोड़) में से 72.12% हिस्सा केंद्र सरकार से मिला है। राज्य का अपना राजस्व (Internal Revenue) मात्र ₹48,152 करोड़ है। यानी ₹1,24,536 रुपये केंद्र ने दिए। समझा जा सकता है कि बड़े विकास कार्यों के लिए बिहार को केंद्र की मदद पर निर्भर रहना पड़ा। 

2. भारी-भरकम खर्च का हिसाब नहीं

CAG ने रिपोर्ट में सरकारी पारदर्शिता पर गंभीर सवाल उठाए हैं। राज्य सरकार ने 2022-23 में ₹70,877 करोड़ खर्च तो कर दिए, लेकिन अभी तक इनका ‘उपयोगिता प्रमाण पत्र’ (UC) जमा नहीं किया गया है। यानी इस खर्च की रसीद व वाउजर कैग को नहीं सौंपे गए। जब इतने भारी बजट के खर्च का पारदर्शी हिसाब नहीं होगा, तो भ्रष्टाचार की आशंका बनी रहती है और केंद्र से मिलने वाली अगली किस्तों में भी देरी होती है।

3. राजस्व वसूली में सुस्ती से कमाई घटी 

भ्रष्ट नेता व अफसरों के चलते सरकार के खाते में राजस्व कमाई नहीं पहुंच रही। 2022-23 में राज्य के सभी विभागों को राजस्व के रूप में जनता और संस्थाओं से लगभग ₹4,884 करोड़ वसूलने थे, जो पेडिंग हैं। इसमें से ₹1,430 करोड़ तो ऐसे हैं जो पिछले 5 साल से भी ज्यादा समय से अटके हुए हैं। परिवहन और खनन जैसे प्रमुख विभागों में करोड़ों की टैक्स वसूली पेंडिंग है।

4. आधी सरकारी कंपनियां ‘सफेद हाथी’

बिहार की कई सरकारी कंपनियां सफेद हाथी साबित हो रही हैं। 37 सरकारी कंपनियों (SPSEs) में से सिर्फ 18 ही मुनाफे में हैं। बाकी कंपनियां भारी घाटे में चल रही हैं, जिसका कुल बोझ ₹27,307 करोड़ तक पहुंच गया है। 

5. बिहार पर GSDP के 39% हिस्से का कर्ज 

कैग रिपोर्ट से पता लगा है कि साल 2022-23 में बिहार की कुल देनदारियां (कर्ज) ₹2.88 लाख करोड़ तक पहुंचने का अनुमान था। यह बिहार की कुल सकल राज्य घरेलू उत्पाद (GSDP) का लगभग 38.66% था। 

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धीमी गति से सुधार : मात्र ₹5 रुपये की निर्भरता घटी

साल 2021-22 के CAG और बजट विश्लेषण के मुताबिक, तब बिहार अपने हर सौ रुपये में से 78 रुपये के लिए केंद्र सरकार पर निर्भर था। एक साल बाद यानी 2022-23 में यह निर्भरता मात्र पांच रुपये कम हुई है, यह बेहद धीमी गति है। उस पर भी 70.8 हजार करोड़ रुपये के खर्च का कोई हिसाब नहीं दिया गया है।
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कैसे बदलेगी तस्वीर?

  • बुनियादी ढांचे पर जोर : सड़क, बिजली, शिक्षा, स्वास्थ्य पर खर्च बढ़ाने से उद्योग को बढ़ावा मिलेगा।
  • उद्योगों को बढ़ावा: जब तक राज्य में निजी निवेश नहीं आएगा, राज्य का अपना टैक्स (SGST) नहीं बढ़ेगा।
  • टैक्स चोरी पर लगाम: परिवहन और खनन जैसे क्षेत्रों में लीकेज रोककर राजस्व बढ़ाया जा सकता है।
  • सरकारी कंपनियों का कायाकल्प: घाटे में चल रही कंपनियों को बंद करना या उनमें सुधार करना अनिवार्य। 
  • नॉन-टैक्स राजस्व बढ़ाना: बालू खनन और पर्यटन की आय को व्यवस्थित व पारदर्शी बनाना होगा।
  • वित्तीय पारदर्शिता : सरकारी विभाग अपने हर खर्च के हिसाब को पारदर्शी बनाएं, वरना केंद्र से मदद में देरी होगी।

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दुनिया गोल

Critical Minerals Deal: भारत-ब्राजील के बीच हुआ समझौता, कितनी घटाएगा चीन पर निर्भरता?

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भारत दौरे पर आए ब्राजीली राष्ट्रपति लुला के साथ भारतीय पीएम मोदी। (Photo Credit - X/@narendramodi)
भारत दौरे पर आए ब्राजीली राष्ट्रपति लुला के साथ भारतीय पीएम मोदी। (Photo Credit - X/@narendramodi)
  • ब्राजील के राष्ट्रपति ने भारत दौरे पर महत्वपूर्ण समझौता किया।
  • महत्वपूर्ण खनिज और दुर्लभ मृदा को लेकर हुआ एमओयू।
  • अभी इस क्षेत्र में भारत 95% खनिजों का आयात करता है।

नई दिल्ली |

भारत और ब्राजील ने महत्वपूर्ण खनिज (critical minerals) और दुर्लभ मृदा (rare earths) को लेकर एक महत्वपूर्ण समझौता (MoU) किया है। इन प्राकृतिक संसाधनों की खरीद के लिए भारत की निर्भरता चीन पर बहुत ज्यादा है, ऐसे में इस समझौते (Memorandum of Understanding) के जरिए भारत को ब्राजील के रूप में नया आयातक मिलेगी जो उसकी चीन पर निर्भरता घटाने की रणनीति का हिस्सा है। यह समझौता ब्राजीली राष्ट्रपति लूला दा सिल्वा के भारत दौरे के दौरान 21 फरवरी को हुआ।

आवश्यक खनिज से जुड़े MoU हस्ताक्षर से पहले हुई बैठक। (X/@narendramodi)

आवश्यक खनिज से जुड़े MoU हस्ताक्षर से पहले हुई बैठक। (X/@narendramodi)

इस समझौते से वैश्विक सप्लाई चेन (Global Supply Chain) को भी मजबूती मिलेगी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस समझौते को विश्वास का प्रतिबिंब बताया है। जबकि राष्ट्रपति लुला (Lula da Silva) ने कहा कि इस समझौते से ब्राजील के खनिज भंडार के उपयोग में वृद्धि हो सकती है, जो अभी सिर्फ 30% ही उपयोग हो रहा है। इसके अलावा, दोनों देशों का लक्ष्य अगले 5 साल में द्विपक्षीय व्यापार को 20 अरब डॉलर तक पहुंचाने का है।

गौरतलब है कि क्रिटिकल मिनरल्स (जैसे लिथियम, कोबाल्ट, नियोबियम, ग्रेफाइट और रेयर अर्थ्स) का इस्तेमाल हरित ऊर्जा, EVs, इलेक्ट्रॉनिक्स और रक्षा के लिए जरूरी है। भारत अपनी खनिज जरूरत का 95% हिस्सा आयात करता है। दूसरी ओर, खनिज क्षेत्र में पूरी दुनिया के उत्पादन का 90 फीसदी से अधिक हिस्से का नियंत्रण चीन के पास है। ऐसे में इस MoU से भारत को वैकल्पिक स्रोत मिलेगा, जो भू-राजनीतिक जोखिम कम करेगा। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि भारत की खनिज खरीद में तत्काल बड़ी कमी नहीं आएगी लेकिन आने वाले 3 से 5 साल में चीन पर निर्भरता 20 से 30% तक घट सकती है।

भारत व ब्राजील के बीच हुआ समझौता।

MoU साइन होने के दौरान ब्राजीली राष्ट्रपति व भारतीय पीएम।

समझौते की डिटेल जानिए 

विदेश मंत्रालय की ओर से जारी दस्तावेजों के अनुसार, ब्राजील के साथ हस्ताक्षर किया गया MoU, रेयर अर्थ मिनरल्स और क्रिटिकल मिनरल्स के क्षेत्र में सहयोग पर केंद्रित है। इसकी मुख्य बातें इस प्रकार हैं-

1- अनछुए खनिज खोजने में भारतीय कंपनियां मदद कर सकेंगी –   अनछुए खनिज भंडार का पता लगाने में (Exploration) भारतीय कंपनियां हिस्सा ले सकती हैं। लुला ने कहा कि भारत की तकनीकी विशेषज्ञता से ब्राजील के 70% अनछुए भंडारों का फायदा उठाया जा सकता है। ब्राजील के अभी तक उपयोग में नहीं लाए जा सके (Unused) खनिज भंडार – नीओबियम, लिथियम व आयरन (Iron Ore) से जुड़े हैं।

2- लौह अयस्क के लिए बनेगा स्पेशल इकोनॉमिक जोन – भारत-ब्राजील के संयुक्त उद्यम के जरिए लौह अयस्क का खनन बढ़ाया जाएगा। इसके लिए भारत में लौह अयस्क के सबसे बड़े उत्पादक NMDC (राष्ट्रीय खनिज विकास निगम), ब्राजील की Vale और अडानी गंगावरम पोर्ट के बीच एक त्रिपक्षीय MoU पर हस्ताक्षर हुए हैं, जो $500 मिलियन का है। इसके जरिए लौह अयस्क या आयरन ओर की ब्लेंडिंग फैसिलिटी के लिए स्पेशल इकोनॉमिक जोन बनाया जाएगा।

3- भारतीय कंपनियों को ब्राजील में खनन प्रोजेक्ट मिलेंगे – भारतीय निवेशकों को ब्राजील में खनन प्रोजेक्ट्स में हिस्सेदारी मिलेगी। और ब्राजील को भारत में तकनीकी निवेश मिलेगा।


समझौते पर आगे की राह

भारत-ब्राजील के बीच का यह एक गैर-बाध्यकारी MoU है, जो व्यावहारिक सहयोग के लिए रोडमैप देता है। इससे आगे जॉइंट वर्किंग ग्रुप्स बनेंगे, जो मिनिस्ट्री ऑफ माइन्स और विदेश मंत्रालय के तहत काम करेंगे।

गौरतलब है कि 2023 में भारत ने ‘क्रिटिकल मिनरल्स मिशन’ के तहत लक्ष्य रखा था कि वह साल 2030 तक इन आवश्यक खनिजों का 50% उत्पादन घरेलू स्तर पर करेगा।


By <a href="//commons.wikimedia.org/wiki/User:RCraig09" title="User:RCraig09">RCraig09</a> - <span class="int-own-work" lang="en">Own work</span>, <a href="https://creativecommons.org/licenses/by-sa/4.0" title="Creative Commons Attribution-Share Alike 4.0">CC BY-SA 4.0</a>, <a href="https://commons.wikimedia.org/w/index.php?curid=148115012">Link</a>

आवश्यक खनिज की जितनी ज्यादा आवश्यकता बढ़ती जा रही है, जलवायु परिवर्तन के चलते उतनी ही तेजी से इनके अस्तित्व पर भी संकट पैदा हो गया है। (साभार – विकिमीडिया)

भारत की चीन पर निर्भरता कितनी ?

  • भारत अपनी रेयर अर्थ्स की जरूरत का 95 से 100% हिस्सा चीन से खरीदता है, यानी पूरी तरह चीन पर निर्भर है।
  •  ग्रेफाइट का 80%, लिथियम का 60-70% हिस्सा चीन से खरीदा जाता है।
  • 2025 में भारत ने चीन से 1.5 अरब डॉलर के मिनरल्स आयात किए।

चीन के अलावा किससे होता है आयात

  • लिथियम का आयात ऑस्ट्रेलिया व चिली से।
  • कोबाल्ट का आयात कांगो व इंडोनेशिया से।
  • निकेल के लिए भारत चीन के अलावा इंडोनेशिया पर निर्भर।

भारत को इतने खनिज की आखिर क्या जरूरत?

क्रिटिकल मिनिरल या आवश्यक खनिज का इस्तेमाल इलेक्ट्रिक वाहन, बैटरी निर्माण, सोलर विंड एनर्जी, इलेक्ट्रॉनिक्स, रक्षा (मिसाइल्स) व फार्मा के क्षेत्र में होता है। बैटरी बनाने में 70% आवश्यक खनिज इस्तेमाल होता है।

1- इलेक्ट्रिक वाहन और बैटरी निर्माण : 

भारत में बढ़ती बाइक-कारों की मांग, मंहगे होते पेट्रोल-डीजल व बढ़ते प्रदूषण के चलते सरकार ने 2030 तक कुल वाहनों का 30% इलेक्ट्रिक वाहन (EVs) करने का लक्ष्य रखा है। इसके लिए ज्यादा आवश्यक खनिज चाहिए। 

2- सोलर और विंड एनर्जी :

कोयले पर भारत की निर्भरता घटाने के लिए सौर ऊर्जा व पवन ऊर्जा का उत्पादन बढ़ाना होगा। 2030 तक 500 गीगावाट (GW) नवीकरणीय ऊर्जा की क्षमता बनाने का लक्ष्य है। अभी इसकी दक्षता लगभग 200 GW है। 

3- इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र :

स्मार्टफोन, कंप्यूटर, LED लाइट, सेमीकंडक्टर चिप्स में रेयर अर्थ लगते हैं। भारत इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात को $300 बिलियन तक ले जाना चाहता है। डिजिटल इंडिया, AI व 5G जैसे क्षेत्र बिना क्रिटिकल मिनरल्स के नहीं चल सकते। 

4- रक्षा (मिसाइल्स, एयरोस्पेस):

टाइटेनियम, टंगस्टन व रेयर अर्थ्स के जरिए मिसाइल, फाइटर जेट, रडार व सैटेलाइट बनते हैं। आत्मनिर्भर भारत और रक्षा उत्पादन बढ़ाने के लिए इन मिनरल्स की आवश्यकता है वरना विदेशी निर्भरता कम नहीं होगी।  

5- फार्मास्यूटिकल्स (दवाइयां):

भारत दुनिया का बड़ा जेनेरिक दवा उत्पादक है। कुछ रेयर अर्थ और मिनरल कैटेलिस्ट के रूप में दवा बनाने में मदद करते हैं। इससे प्रोसेसिंग स्पीड बढ़ती है और शुद्धिकरण में इस्तेमाल होते हैं। ये मिनरल सप्लाई चेन में महत्वपूर्ण हैं।

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AI Impact Summit-2026 : 88 देश जिस घोषणा पत्र पर सहमत हुए, उसे जानिए

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India AI Impact Summit 2026 (Representational Photo)
India AI Impact Summit 2026 (Representational Photo)
  • एआई तकनीक को लेकर अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन 16 से 21 फरवरी के बीच हुआ।

नई दिल्ली|

भारत में आयोजित हुए पहले एआई इम्पैक्ट समिट- 2026 (India AI Impact Summit 2026) का समापन शनिवार (21 feb) को हो गया। दिल्ली के भारत मंडपम में चली इस सम्मेलन में 88 देशों और अंतरराष्ट्रीय संगठनों ने घोषणा पत्र (डिक्लेरेशन) पर हस्ताक्षर किए हैं।

इस बात की जानकारी केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने एक्स पर दी।

मानव केंद्रित AI का दिया संदेश

इस घोषणा पत्र की प्रस्तावना (Preamble) में स्पष्ट किया गया है कि एआई के वादे को तभी साकार किया जा सकता है जब उसके लाभ मानवतावादी हों।  इसी घोषणापत्र को लेकर IT मंत्री अश्विनी वैष्णव ने एक्स पर लिखा – “पूरी दुनिया ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ह्यूमन सेंट्रिक एआई सोच को समर्थन दिया है। यह डिक्लेरेशन ‘सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय’ के सिद्धांत से प्रेरित है, ताकि एआई संसाधन पूरी दुनिया के लोगों के लिए उपलब्ध हो सकें।”

इन घोषणाओं पर बनी सहमति

  • एआई संसाधनों का लोकतंत्रीकरण किया जाए, जिसमें मजबूत डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और सस्ती कनेक्टिविटी हो।
  • “वसुधैव कुटुम्बकम” से प्रेरित होकर सभी देशों तक एआई संसाधनों की पहुंच बढ़ानी चाहिए।
  • डेमोक्रेटिक डिफ्यूजन ऑफ एआई चार्टर को एक स्वैच्छिक फ्रेमवर्क के रूप में नोट किया गया, जो फाउंडेशनल एआई संसाधनों तक पहुंच बढ़ाएगा।
  • आर्थिक विकास और सामाजिक भलाई के लिए एआई की व्यापक स्वीकृति हो।
  • सुरक्षित और मजबूत एआई विश्वास बनाने और सामाजिकआर्थिक लाभों को अधिकतम करने के लिए बुनियादी है।
  • एआई सिस्टम में सुरक्षा महत्वपूर्ण है, उद्योगप्रेरित स्वैच्छिक उपायों, तकनीकी समाधानों और नीतिगत फ्रेमवर्क को अपनाने पर जोर।

गौरतलब है कि यह घोषणापत्र बाध्यकारी नहीं है, यह देशों व संगठनों के लिए स्वैच्छिक है।

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CM नीतीश कुमार की समृद्धि यात्रा : जीत के महज दो माह में बिहार दौरे पर निकले, जानिए क्या है असली मकसद, कितना होगा सफल?

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समृद्धि यात्रा के पहले दिन जीविका समूह से मिलते मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ( साभार - facebook/Nitishkumar)
समृद्धि यात्रा के पहले दिन जीविका समूह से मिलते मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ( साभार - facebook/Nitishkumar)

पटना | हमारे संवाददाता

बिहार में दसवीं बार सीएम पद की शपथ लेने के दो महीने से कम समय बाद मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने राज्यव्यापी यात्रा शुरू कर दी है, जिसे समृद्धि यात्रा नाम दिया गया है। यह यात्रा ऐसे समय में हो रही है जबकि विपक्षी नेता तेजस्वी यादव राजनीतिक रूप से सक्रिय नजर नहीं आ रहे और वे खुद कह चुके हैं कि वे नई सरकार के सौ दिन पूरे होने तक कुछ नहीं बोलेंगे। वहीं, NDA के सहयोगी दल BJP के दो बड़े नेता व डिप्टी सीएम की राज्य में अति सक्रियता देखने को मिल रही है।

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की इस यात्रा का उद्देश्य जमीनी स्तर पर योजनाओं की समीक्षा करना बताया गया है। पर हाल में घटी बड़ी आपराधिक घटनाओं को लेकर सीएम की चुप्पी और उनके अनिश्चित स्वास्थ्य के चलते मीडिया से बनाई गई दूरी के चलते सवाल उठ रहे हैं कि क्या इस यात्रा से सीएम बिहार की जनता की नब्ज टटोल पाएंगे? हालांकि यह भी नहीं भूलना चाहिए कि बतौर सीएम यह नीतीश कुमार की 16वीं राज्यव्यापी यात्रा है। यह भी गौरतलब है कि बेतिया से शुरू हुई उनकी समृद्धि यात्रा से ठीक पहले विरोध प्रदर्शन में शामिल कुछ नेताओं को गिरफ्तार कर लिया गया। यह दर्शाता है कि राज्य की मिशीनरी उनकी छवि को लेकर कितनी सजग है।

16 जनवरी के शुरू हुई यात्रा में अब तक क्या-क्या हुआ?

16 जनवरी को पश्चिमी चंपारण के बेतिया से मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की समृद्धि यात्रा की शुरुआत हुई। जिसमें मुख्यमंत्री ने 153 करोड़ रुपये की लागत से 125 नई योजनाओं का शुभारंभ किया। इन योजनाओं में महिला सशक्तिकरण, युवा विकास, कौशल प्रशिक्षण और जन-जन को समृद्ध बनाने से जुड़ी परियोजनाएं शामिल हैं।

ऐलान – सरकारी डॉक्टर नहीं कर पाएंगे निजी प्रैक्टिस:  वहीं, मुख्यमंत्री ने पहले दिन बड़ा ऐलान किया कि बिहार के सरकारी डॉक्टर्स अब प्राइवेट प्रैक्टिस नहीं कर पाएंगे। सरकार इसके लिए नई नीति लाने जा रही है।

किसानों पर भी खास फोकस :  इस यात्रा में किसानों पर भी खास फोकस है। किसानों को मजबूत बनाने के लिए विशेष कृषि मेले और कृषि यंत्रीकरण की प्रदर्शनी लगाई जा रही है। मुख्यमंत्री चंपारण में बन रहे कुमारबाग औद्योगिक क्षेत्र का भी भ्रमण किया। इससे क्षेत्र में रोजगार और निवेश की संभावनाएं बढ़ने की उम्मीद है।

यात्रा से ठीक पहले माले नेता को उठाया

पश्चिम चंपारण में भाकपा (माले) के युवा नेता और रिवोल्यूशनरी यूथ एसोसिएशन के राज्य नेता फरहान राजा की गिरफ्तारी ने राजनीतिक हलचल बढ़ा दी है। यह गिरफ्तारी मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की 16 जनवरी को शुरू हुई समृद्धि यात्रा से ठीक पहले हुई।

भाकपा (माले) राज्य कमिटी के सचिव कुणाल ने कहा कि फरहान राजा को बेतिया क्षेत्र में गरीब जनता के अधिकारों के लिए आवाज़ उठाने और सरकारी अस्पतालों की खराब स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल उठाने के कारण गिरफ्तार किया गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार जनता के बुनियादी सवालों से बचने और आवाज़ उठाने वालों को दबाने के लिए दमनकारी कदम उठा रही है।


यात्रा के पहले चरण में 9 जिलों का दौरा

  • सीएम की पश्चिम चंपारण जिले में 16 जनवरी से समृद्धि यात्रा पूर्वी चंपारण से शुरू हुई।
  • 17 जनवरी को पूर्वी चंपारण में विश्व के सबसे बड़े शिवलिंग की स्थापना कार्यक्रम में भी शामिल हुए।
  • 19 जनवरी को सीतामढ़ी और शिवहर का दौरा होगा।
  • 20 जनवरी को गोपालगंज, 21 जनवरी को सीवान जाएंगे।
  • 22 जनवरी को सारण, 23 जनवरी को मुजफ्फरपुर और 24 जनवरी को वैशाली में रहेंगे।

 

20 साल में 14 यात्राएं, राज्य की नब्ज लेना मकसद

नीतीश कुमार ने सीएम रहते हुए अब तक बिहार की 14 यात्राएं की हैं, उनकी अपनी गलती के मुताबिक, समृद्धि यात्रा उनकी 15वीं राज्यव्यापी यात्रा है। एक यात्रा वे विपक्ष में रहते हुए कर चुके हैं। आमतौर पर विपक्षी राजनीति का हथियार माने जाने वाली यात्रा को सीएम नीतीश कुमार ने अपने शासन की खासियत बनाया है। इन यात्राओं के जरिए मुख्यमंत्री सीधे जनता से संवाद करते हैं और जमीनी हकीकत समझते हैं।

  • पहली यात्रा – 2005 में न्याय यात्रा से इसकी शुरुआत की थी, यह बतौर मुख्यमंत्री उनका पहला साल था।
  • तीन यात्राएं – लंबे अंतराल के बाद नीतीश कुमार ने तीन यात्राएं- विकास यात्रा, धन्यवाद यात्रा और प्रवास यात्रा कीं। ये लोकसभा चुनाव का वर्ष था।
  • पांचवीं यात्रा – 2010 में विश्वास यात्रा के बाद एनडीए सरकार को पूर्ण बहुमत मिला।
  • छठी यात्रा – 2011 में जनता के प्रति आभार जताने के लिए सेवा यात्रा शुरू हुई।
  • सातवीं यात्रा – साल 2012 में अधिकार यात्रा निकाली।
  • आठवीं यात्रा – साल 2013 में दोबारा सेवा यात्रा नाम से देशव्यापी यात्रा शुरू की।
  • नौवीं यात्रा – 2014 में संकल्प यात्रा के जरिए जनता तक संवाद बढ़ाया।
  • दसवीं यात्रा – 2015 में संपर्क यात्रा का आयोजन हुआ।
  • ग्यारहवीं यात्रा- 2019 की जल-जीवन-हरियाली यात्रा ने पर्यावरण संरक्षण को लेकर जागरुकता लाई गई।
  • बारहवीं यात्रा- 2020 में समाज सुधार अभियान यात्रा शुरू हुई।
  • तेरहबीं- 2023 में समाधान यात्रा निकाली गई।
  • चौहदवी यात्रा – 2024 दिसंबर से लेकर 2025 तक मुख्यमंत्री ने प्रगति यात्रा निकाली।

इन यात्राओं में सरकार की योजनाओं की समीक्षा हुई और जनता की शिकायतों का समाधान निकाला गया।

क्या कहते हैं विशेषज्ञ : यात्राओं से बिहार की तस्वीर नहीं बदल रही

वरिष्ठ पत्रकार सुमन भारद्वाज के अनुसार-

  • मुख्यमंत्री की यात्राओं का मुख्य उद्देश्य योजनाओं के क्रियान्वयन की सच्चाई जानना है। यात्रा के दौरान मुख्यमंत्री गांव और शहरों में जाकर लोगों से सीधा संवाद करते हैं। जिससे मुख्यमंत्री से योजना व क्षेत्र के विकास के लिए महत्वपूर्ण निर्णय लेने में आसानी होती है। लेकिन इन यात्राओं से बिहार की तस्वीर नहीं बदल रही है।
  • गृह विभाग ने बीजेपी को सौंप कर राज्य की कानून व्यवस्था से अपना पल्ला झाड़ लिया है, नहीं तो बिहार कई जिलों में महिलाओं और लड़कियों के खिलाफ गंभीर घटनाएं हुईं, सासाराम, खगड़िया और पटना में दिल्ली की निर्भया कांड जैसी घटनाएं हुई लेकिन इन सब मुद्दों पर मुख्यमंत्री का कोई बयान नहीं आया। इसलिए इन यात्राओं से बिहार की तस्वीर बदलेगी कहना मुश्किल है।

जीत के तुरंत बाद यात्रा के राजनीतिक मायने

वोटर को धन्यवाद – राजनीतिक विशेषज्ञ मानते हैं कि इस बार की बिहार यात्रा के जरिए नीतीश कुमार खुद को मिले अभूतपूर्व समर्थन के लिए महिला वोटर का धन्यवाद ज्ञापित करना चाहते हैं।

सक्रियता का संदेश – साथ ही वे वोटरों को यह संदेश देना चाहते हैं कि वे फिट हैं और पांच साल का कार्यकाल पूरा करेंगे। यह बीजेपी के डिप्टी सीएम के लिए भी एक संदेश होगा।

राजद को झटका-  चुनाव में करारी हार के बाद राज्य के मुख्य विपक्षी दल राजद के जनता के बीच पहुंचने से पहले ही नीतीश कुमार ने यात्रा के जरिए जनता तक संवाद स्थापित करना शुरू कर दिया, इस तरह उन्होंने विपक्ष की रणनीति को भी झटका दिया है।


समृद्धि यात्रा की राह में चुनौती

  • सीएम के लिए सबसे बड़ी चुनौती अपने स्वास्थ्य को लेकर पॉजिटिव संदेश देना होगा, हाल की दो यात्राओं में उन्होंने जनता से कोई संवाद नहीं किया है। सभा में लिखा हुआ भाषण पढ़ने, विकास योजनाओं का शिलान्यास करने और अफसरों संग योजनाओं की समीक्षा से जुड़ी जानकारियां ही सामने आई हैं।
  • सीएम नीतीश कुमार के साथ पूरे समय डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी और विजय कुमार सिन्हा नजर आते हैं, मीडिया से उनको दूर रखा जाता है। क्या वे यह संदेश दे पाएंगे कि वे अपना काम स्वतंत्र रूप से कर पा रहे हैं?
  • हाल में मोतिहारी में शिलान्यास के बाद नीतीश कुमार बोर्ड गिनने लगे थे, जो वहां मौजूद लोगों को अखरा। पहले भी सार्वजनिक कार्यक्रमों में उनके असहज करने वाले व्यवहार से जुड़ी घटनाएं सामने आई हैं।
  • राजद ने नीतीश कुमार की समृद्धि यात्रा के नाम को लेकर ही सवाल उठाया और पूछा कि जिस राज्य में 34% जनता गरीबी रेखा के नीचे रह रही है, वहां सीएम नीतीश कुमार कौन सी समृद्धि देखने जाना चाहते हैं?

 

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