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अमेरिकी खुफिया रिपोर्ट: युद्ध के दो सप्ताह बाद भी ईरानी शासन अडिग, खामेनेई की मौत से कोई असर नहीं

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मोजतबा खामेनेई को रविवार को सुप्रीम लीडर चुना गया है।
मुजतबा खामेनेई को नया सुप्रीम लीडर बनाया गया है और अमेरिकी खुफिया रिपोर्ट बता रही है कि जनता को उनके ऊपर पूर्ण विश्वास है।

नई दिल्ली | अमेरिका व इजरायल के लगातार दो सप्ताह से ईरान के ऊपर जारी हमलों के बावजूद ईरानी सरकार पर कोई बड़ा खतरा नहीं है और नेतृत्व पूरी तरह से अडिग बना हुआ है। यह विश्लेषण अमेरिकी खुफिया एजेंसियों की ताजा रिपोर्ट के जरिए सामने आया है। 

इस रिपोर्ट में कहा गया है कि ईरान के सुप्रीम लीडर आयतुल्लाह अली खामेनेई की ‘मौत’ के बाद भी ईरान का शासन ढहने की कगार पर नहीं पहुंचा है।
तीन अमेरिकी खुफिया सूत्रों के हवाले से अंतरराष्ट्रीय समाचार एजेंसी रॉयटर्स ने यह रिपोर्ट किया है। 
रॉयटर्स ने लिखा है कि सूत्रों ने बताया कि कई खुफिया रिपोर्टों में एक ही निष्कर्ष निकला है कि “ईरानी शासन गिरने के खतरे में नहीं है और वह जनता पर नियंत्रण बनाए हुए है।”
इनमें से एक सूत्र ने रॉयटर्स को बताया कि यह विश्लेषण हाल के दिनों में तैयार की गई रिपोर्ट पर आधारित है। 
इस खुफिया रिपोर्ट की जानकारी ऐसे समय में निकलकर सामने आई है, जब ट्रंप दावा कर रहे हैं कि उन्होंने इस युद्ध को लगभग जीत लिया है। दूसरी ओर, इजरायली पीएम नेतन्याहू लगातार ईरान की जनता को उकसा रहे हैं कि वे नए सुप्रीम लीडर मुजतबा खामेनेई के खिलाफ आवाज उठाएं।
रिपोर्ट में कहा गया है कि 28 फरवरी को अमेरिका-इजरायल हमलों के पहले दिन ईरान के सुप्रीम लीडर खामेनेई की मौत हो जाने के बावजूद ईरान का धार्मिक नेतृत्व एकजुट है और जनता पर उसका नियंत्रण कायम है।
इतना ही नहीं, रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि इजरायली अधिकारियों ने भी निजी चर्चाओं में स्वीकार किया है कि युद्ध से धार्मिक शासन के ढहने की कोई गारंटी नहीं है।
यह रिपोर्ट अमेरिका-इजरायल की रणनीति पर सवाल खड़े करती है कि क्या केवल सैन्य हमलों से ईरानी शासन को कमजोर किया जा सकता है?
विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान का धार्मिक नेतृत्व अभी भी मजबूत है और युद्ध लंबा खिंच सकता है।

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