आज के अखबार
असम SR : जहां नागरिकता का प्रमाण नहीं मांगा, वहां भी बड़ी तादाद में वोट काट दिए, जानिए क्या है पूरा मामला
- असम में स्पेशल रिवीजन प्रक्रिया में 4.78 लाख वोटर मृत मिले, 5.23 लाख को ट्रांसफर बताया।
- छह विपक्षी दलों ने मुख्य निर्वाचन अधिकारी से कहा- वोटरों की जानकारी चुराकर उनके नाम कटवाए।
नागरिकता का प्रमाण नहीं देना था, फिर भी 10 लाख नाम कटे
गौरतलब है कि चुनाव आयोग ने असम को SIR एक्सरसाइज से अलग रखा था और बीते साल 17 नवंबर को एक आदेश जारी करके असम में मतदाता सूची में SR यानी ‘स्पेशल रिवीज़न’ का काम शुरू कराया था। इस एसआर प्रक्रिया के तहत बूथ लेवल ऑफ़िसरों (बीएलओ) ने राज्य के 61 लाख परिवारों (100%) में जाकर मतदाता सूची का फिजिकल वेरिफिकेशन किया। इस प्रक्रिया में असम के लोगों को नागरिकता का प्रमाण नहीं देना था, बीएलओ के पास मौजूदा वोटरों की जानकारी से भरा हुआ फॉर्म मौजूद था, उन्हें घर-घर जाकर उसका वेरिफिकेशन करना था। गौरतलब है कि असम में पहले ही NRC के जरिए भारतीय नागरिक पता लगा लिए गए हैं।
दावा- वोटर नंबर का गलत इस्तेमाल करके नाम कटवाए
विपक्ष ने सीएम हिमंता के बयान का बनाया आधार
ज्ञापन में असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा के एक बयान का हवाला दिया गया, जिसमें उन्होंने कहा था कि सरकार “कानून के दायरे में रहकर कुछ तो करेगी” ताकि ‘मियां’ समुदाय पर दबाव बनाया जा सके और उन्हें नोटिस जारी कर परेशान किया जा सके। विपक्ष ने इसे एक विशेष समुदाय को निशाना बनाने की मंशा बताते हुए चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल उठाया।
असम मतदाता ड्राफ्ट लिस्ट – एक नजर में
- 2.51 करोड़ मतदाता है।
- 61 लाख से अधिक घरों की 100% जांच की गई।
- 4.78 लाख मतदाताओं को मृत घोषित किया गया।
- 5.23 लाख को स्थानांतरित पाया गया।
- 53,619 दोहरी प्रविष्टियों को हटाया गया।
- 10 फरवरी, 2026 को अंतिम मतदाता सूची जारी होगी।
क्या है मांग ?
आज के अखबार
भारत-EU संयुक्त बयान में ऐसा क्या, जिसे यूक्रेन पर भारत के बदले रुख की तरह देखा जा रहा?
- भारत-यूरोपीय संघ शिखर सम्मेलन में रूस-यूक्रेन युद्ध पर संयुक्त बयान जारी हुआ जो नई दिल्ली के पुराने रूख से अलग।
नई दिल्ली|
भारत और यूरोपीय संघ के बीच 27 जनवरी को हुई शिखर वार्ता के दौरान FTA समझौते पर वार्ता पूरी होने के साथ एक और अहम घटना हुई। भारत-यूरोपीय संघ ने रूस-यूक्रेन युद्ध को लेकर एक संयुक्त बयान जारी किया, जिसमें इस युद्ध को लेकर भारत का बयान अपने पूर्व के बयानों से अलग है। संयुक्त बयान में भारत-यूरोपीय संघ ने कहा है कि “वे ऐसे प्रयासों का समर्थन करेंगे जो स्वतंत्रता, संप्रभु, क्षेत्रीय अखंडता पर आधारित हो।”
द इंडियन एक्सप्रेस ने इस बयान को लेकर लिखा है कि भारत का यह बयान यूक्रेन पर उसके पुराने रूख से बिल्कुल अलग है क्योंकि चार साल से जारी युद्ध को लेकर कभी भारत ने यूक्रेन पर रूसी आक्रामकता का खंडन नहीं किया था। भारत का यह रूख ही पिछले चार साल से यूरोपीय संघ और भारत के बीच बड़ा रोड़ा बना हुआ था। अखबार ने लिखा है कि भारत की नई पोजिशन रूस हित के विपरीत है क्योंकि 2022 में रूस ने यूक्रेन पर आक्रमण करके उसकी स्वतंत्रता, संप्रभुता व क्षेत्रीय अखंडता को प्रभावित किया है।
EU ने भारत से रूस पर दवाब डालने को कहा
द हिन्दू ने यूरोपीय संघ की विदेश नीति प्रमुख काज़ा कल्लास के हवाले से लिखा है कि शिखर सम्मेलन के दौरान यूरोपीय संघ ने भारत से कहा कि वह रूस पर यूक्रेन युद्ध को लेकर दवाब बनाए। कल्लास ने शिखर सम्मेलन के तुरंत बाद हुए थिंक टैंक इवेंट में कहा कि रूस ने यूक्रेन के साथ संघर्ष विराम पर हस्ताक्षर करने से मना कर दिया है और आम नागरिकों पर बमबारी कर रहा है। इस मामले में हमने अपने भारतीय सहयोगी से कहा है कि वे रूस पर शांति के रास्ते पर आगे बढ़ने के लिए दवाब बनाएं।
बोर्ड ऑफ पीस पर क्या रूख ?
ट्रंप के बनाए Board of Peace को लेकर भी संयुक्त बयान में जिक्र है, अखबार के मुताबिक दोनों ने इसके गज़ा में शांति व पुर्ननिर्माण के उद्देश्य से समर्थन जताया है, हालांकि दोनों ही इसके उद्देश्य को गज़ा तक ही सीमित रखने का संकेत दे रहे हैं। दोनों ने ही अब तक ट्रंप के बनाए इस बोर्ड को ज्वाइन नहीं किया है।
ईरान पर क्या रुख ?
ईरान में हुए प्रदर्शन को लेकर संयुक्त बयान में कहा गया है कि वे चाहते हैं कि इस स्थिति को डिप्लोमेसी व वार्ता के जरिए सुलझाया जाए। अखबार का कहना है कि इस तरह भारत व ईयू ब्लॉक संदेश दे रहा है कि ईरान के खिलाफ अमेरिका व यूरोपीय संघ की आक्रामकता के वे पक्षधर नहीं हैं।
आज के अखबार
भारत के ये राज्य 10 साल बाद हो जाएंगे बूढ़े, Aging आबादी पर सरकारी रुख से क्यों चिंतित The Hindu?
- RBI के मुताबिक, भारत के राज्यों में असमान रूप से सांख्यिकी बदलेगी।
क्या है द हिन्दू की चिंता
आज के अखबार
पद्म पुरस्कार : कई अवॉर्डी चुनावी राज्यों से, विपरीत विचारधारा के लोगों को मिला सम्मान
- राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मू ने 2026 के लिए कुल 131 पद्म पुरस्कारों की घोषणा की है।
नई दिल्ली |
77वें गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर 25 जनवरी को पद्म पुरस्कारों की घोषणा हुई, जिसमें यह पुरस्कार पाने वाले कई व्यक्ति भाजपा की विरोधी विचारधारा के हैं। जैसे CPI(M) के वीएस अच्युतानंदन और JMM के शिबू सोरेन। इन दोनों राजनेताओं को मरणोपरांत पद्द विभूषण पुरस्कार दिया जा रहा है। दूसरी ओर, भाजपा के वरिष्ठ नेता वीके मल्होत्रा और भगत सिंह कोटियारी को भी पद्म पुरस्कार से नवाजा गया है, इन दोनों ने ही अपना करियर जनसंघ से शुरू किया था। इंडियन एक्सप्रेस का मानना है कि ऐसा करके भाजपा की अगुवाई वाली केंद्र की NDA सरकार क्रॉस आइडियॉलिजी का संदेश देना चाहती है।
पद्द पुरस्कारों की घोषणा में सबसे ज्यादा उन राज्यों के व्यक्तियों को सम्मान मिला है, जो ऐसे राज्यों से आते हैं जहां आने वाले महीनों में विधानसभा चुनाव होने हैं। उदाहरण के लिए, इस साल जिन पाँच व्यक्तियों को पद्म विभूषण पुरस्कार दिए गए हैं, उनमें से तीन अकेले केरल से हैं। सभी पद्म पुरस्कारों की बात करें तो पुरस्कार पाने वाले 8 लोग केरल, 13 तमिलनाडु, 11 पश्चिम बंगाल से हैं, इन तीनों राज्यों में चुनाव होने हैं।
केंद्रीय गृहमंत्रालय के मुताबिक़, राष्ट्रपति ने 2026 के लिए कुल 131 पद्म पुरस्कारों की घोषणा की है। 5 पद्म विभूषण पुरस्कार के अलावा, 13 लोगों को पद्म भूषण और 113 लोगों को पद्म श्री पुरस्कार दिए जाएंगे।
पद्म विभूषण पुरस्कार विजेता
- धर्मेंद्र सिंह देओल (मरणोपरांत)– कला
- के. टी. थॉमस– पब्लिक लाइफ
- एन. राजम– कला
- पी. नारायणन– साहित्य एवं शिक्षा
- वी. एस. अच्युतानंदन (मरणोपरांत)– पब्लिक लाइफ
एक नजर में
- भारतीय अंतरिक्ष यात्री व फाइटर पायलट ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला को मिला अशोक चक्र।
- 131 लोगों को पद्म पुरस्कारों से लिए चुना गया, इनमें 16 को मरणोपरांत मिलेगा पुरस्कार।
- 5 पद्म विभूषण पुरस्कार, 13 पद्म भूषण और 113 पद्म श्री पुरस्कारों की हुई घोषणा।
- 121 पुलिस कर्मी और पांच फायरकर्मियों को शौर्य पुरस्कार दिया जाएगा।
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