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असम SR : जहां नागरिकता का प्रमाण नहीं मांगा, वहां भी बड़ी तादाद में वोट काट दिए, जानिए क्या है पूरा मामला

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असम में जारी SR प्रक्रिया को लेकर गंभीर सवाल उठने लगे हैं।
असम में जारी SR प्रक्रिया को लेकर गंभीर सवाल उठने लगे हैं।
  • असम में स्पेशल रिवीजन प्रक्रिया में 4.78 लाख वोटर मृत मिले, 5.23 लाख को ट्रांसफर बताया।
  • छह विपक्षी दलों ने मुख्य निर्वाचन अधिकारी से कहा- वोटरों की जानकारी चुराकर उनके नाम कटवाए।
नई दिल्ली|
यूपी समेत 12 राज्यों में हुई SIR के दौरान कई करोड़ वोटरों के नाम वोटर लिस्ट से काट दिए गए, पर माना जा रहा था कि असम में हो रही SR में वोटरों के नाम नहीं कटेंगे क्योंकि वहां वोटरों से नागरिकता का प्रमाण नहीं मांगा जा रहा है। मगर उम्मीद के उलट असम में भी दस लाख से अधिक वोटरों के नाम मतदाता की ड्राफ्ट लिस्ट में काट दिए गए हैं। इसको लेकर असम में कांग्रेस समेत छह विपक्षी दलों ने राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी को ज्ञापन सौंपकर भाजपा सरकार पर फर्जी आपत्तियों के जरिए वोटरों ने नाम कटवाने का आरोप लगाया है।

नागरिकता का प्रमाण नहीं देना था, फिर भी 10 लाख नाम कटे

गौरतलब है कि चुनाव आयोग ने असम को SIR एक्सरसाइज से अलग रखा था और बीते साल 17 नवंबर को एक आदेश जारी करके असम में मतदाता सूची में SR यानी ‘स्पेशल रिवीज़न’ का काम शुरू कराया था। इस एसआर प्रक्रिया के तहत बूथ लेवल ऑफ़िसरों (बीएलओ) ने राज्य के 61 लाख परिवारों (100%) में जाकर मतदाता सूची का फिजिकल वेरिफिकेशन किया। इस प्रक्रिया में असम के लोगों को नागरिकता का प्रमाण नहीं देना था, बीएलओ के पास मौजूदा वोटरों की जानकारी से भरा हुआ फॉर्म मौजूद था, उन्हें घर-घर जाकर उसका वेरिफिकेशन करना था। गौरतलब है कि असम में पहले ही NRC के जरिए भारतीय नागरिक पता लगा लिए गए हैं।

दावा- वोटर नंबर का गलत इस्तेमाल करके नाम कटवाए

द हिन्दू के मुताबिक, 25 जनवरी को कांग्रेस, रायजोर दल, असम जतिया परिषद, कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (सीपीआई), सीपीआई (मार्क्सवादी) और सीपीआई (मार्क्सवादी-लेनिनवादी) के नेताओं ने असम के मुख्य निर्वाचन अधिकारी को एक ज्ञापन सौंपा। इसमें आरोप लगाया गया कि 27 दिसंबर को ड्राफ्ट रोल जारी होने के बाद कटे हुए नामों को दोबारा जुड़वाने की समयावधि 22 जनवरी तक कई फर्जी व अवैध आपत्तियां दर्ज की गईं। इन आपत्तियों में मतदाता की मौत हो जाने या उससे स्थायी तौर पर दूसरी जगह बस जाने के आधार पर नाम हटाने की मांग की गई। जबकि जिनके नाम से आपत्तियां दर्ज हुईं, उनमें से कई आपत्तिकर्ताओं ने मीडिया से कहा कि उन्हें ऐसी आपत्ति दर्ज करने की कोई जानकारी नहीं थी। उनकी ईपीआईसी संख्या और मोबाइल नंबर का दुरुपयोग करके ये आपत्तियां लगाकर नाम काटे गए।  विपक्ष ने इसे मनमाना, गैरकानूनी और असंवैधानिक करार दिया।
द हिन्दू ने इस खबर को 26 जनवरी के एडिशन में पहली खबर बनाया है।

द हिन्दू ने इस खबर को 26 जनवरी के एडिशन में पहली खबर बनाया है।

विपक्ष ने सीएम हिमंता के बयान का बनाया आधार

ज्ञापन में असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा के एक बयान का हवाला दिया गया, जिसमें उन्होंने कहा था कि सरकार “कानून के दायरे में रहकर कुछ तो करेगी” ताकि ‘मियां’ समुदाय पर दबाव बनाया जा सके और उन्हें नोटिस जारी कर परेशान किया जा सके। विपक्ष ने इसे एक विशेष समुदाय को निशाना बनाने की मंशा बताते हुए चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल उठाया।

असम मतदाता ड्राफ्ट लिस्ट – एक नजर में

  • 2.51 करोड़ मतदाता है।
  • 61 लाख से अधिक घरों की 100% जांच की गई।
  • 4.78 लाख मतदाताओं को मृत घोषित किया गया।
  • 5.23 लाख को स्थानांतरित पाया गया।
  • 53,619 दोहरी प्रविष्टियों को हटाया गया।
  • 10 फरवरी, 2026 को अंतिम मतदाता सूची जारी होगी।

क्या है मांग ?

विपक्ष ने मुख्य निर्वाचन अधिकारी से मांग की है कि ड्राफ्ट सूची पर दायर की गईं अवैध आपत्तियों को खारिज किया जाए। साथ ही, फर्जी आपत्ति दर्ज करने वालो के खिलाफ कार्रवाई हो। बेदखली पीड़ित मतदाताओं को फॉर्म 8 दाखिल करने की अनुमति दी जाए।

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