Connect with us

प्रदेश रिपोर्ट

बिहार: नर्सिंग छात्राओं की ‘शादी’ पर पाबंदी! हथुआ GNM स्कूल के आदेश से छिड़ी बहस

Published

on

एआई निर्मित प्रतीकात्मक तस्वीर (क्रेडिट - जेमिनी)
एआई निर्मित प्रतीकात्मक तस्वीर (क्रेडिट - जेमिनी)

गोपालगंज| बिहार के गोपालगंज जिले के सरकारी नर्सिंग कॉलेज की छात्राओं को कोर्स के दौरान शादी करने पर बैन लगा दिया गया है। एएनएम व जीएनएम कोर्स की छात्राओं को कॉलेज ने आदेश दिया गया है कि “अगर वे कोर्स पूरा होने से पहले शादी करती हैं तो उनका एडमिशन रद्द कर दिया जाएगा।”

गोपालगंज के सरकारी नर्सिंग कॉलेज की ओर से जारी आदेश की कॉपी

गोपालगंज के सरकारी नर्सिंग कॉलेज की ओर से जारी आदेश की कॉपी

हथुआ के अनुमंडलीय अस्पताल परिसर में जीएनएम (GNM) स्कूल संचालित होता है, जहां इस मामले का आदेश 16 अप्रैल को जारी किया गया। स्कूल की दीवारों पर चस्पा हुए इस आदेश की फोटो अब सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है और लोग इसकी आलोचना कर रहे हैं।

पूरे बिहार में लागू है ये विवादित नियम

इस आदेश ने नर्सिंग छात्राओं के साथ लैंगिंक भेदभाव की बहस को फिर से छेड़ दिया है। बता दें कि यह नियम केवल हथुआ ही नहीं, बल्कि बिहार के कई सरकारी एएनएम (ANM) और जीएनएम संस्थानों में दशकों से विभागीय नियमावली का हिस्सा रहा है।

नर्सिंग स्कूल का क्या है पक्ष?

प्रभात खबर ने प्रचार्या मानसी सिंह के हवाले से बताया है कि “यह नियम व्यक्तिगत नहीं बल्कि विभागीय है। वे नामांकन के समय ही छात्राओं से इसका शपथ-पत्र लेते हैं कि कोर्स के दौरान वे शादी नहीं करेंगी।”

प्रशासन का तर्क है कि नर्सिंग एक गंभीर प्रशिक्षण है जो हॉस्टल में रहकर पूरा होता है। शादी के बाद पारिवारिक जिम्मेदारियों के कारण प्रशिक्षण की गुणवत्ता और अनुशासन प्रभावित हो सकता है, इसलिए यह कड़ा रुख अपनाया गया है।

क्या कहती हैं छात्राएं?

दूसरी ओर, छात्राओं का कहना है कि “आखिर कॉलेज प्रशासन यह कैसे मान कर चल रहा है कि एक शादीशुदा महिला अपनी पढ़ाई पर फोकस नहीं कर सकती? यह लैंगिक भेदभाव है।”

छात्राओं के एक वर्ग का मानना है कि केवल महिलाओं के लिए संचालित होने वाले इन नर्सिंग कोर्स के दौरान शादी करने से रोक का नियम उनके  संवैधानिक अधिकार व स्वतंत्रता से हस्तक्षेप हैं।

कुछ छात्राओं का यह भी कहना है कि “अगर ऐसा नियम अनिवार्य कर दिया गया तो कई अभिभावक अपनी बेटियों का एडमिशन इन कोर्सों में नहीं कराएंगे क्योंकि समाज में अच्छा वर मिलने पर शादी कराने का प्रचलन है।”

गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने हाल के कुछ फैसलों में कार्यस्थल या शिक्षा में वैवाहिक स्थिति के आधार पर भेदभाव को गलत बताया है। अब देखना होगा कि बिहार में नर्सिंग छात्राओं से ‘लैंगिक भेदभाव वाले’ ये नियम कब बदलते हैं।

Continue Reading
Click to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *