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रिपोर्टर की डायरी

बिहार : CM नीतीश के जिले में नाली नहीं बनी, फसलें सड़ रहीं.. वोट बहिष्कार का ऐलान

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  • नालंदा विधानसभा क्षेत्र की निरपुर पंचायत के पचवारा गांव में वोट नहीं देंगे ग्रामीण।
  • नल-जल योजना मिली पर पानी निकासी का इंतजाम नहीं, फसलें खराब हो रहीं।
  • सर्किल ऑफिसर ने गांव पहुंचकर गुस्साए ग्रामीणों को समझाया पर मांगों पर कायम।

(नोट – इसे वीडियो पर देखने के लिए लिंक पर जाएं।)

 

नालंदा | संजीव राज

बिहार में बीस साल से CM नीतीश कुमार का जो गृह जिला है, बिहार के ही ग्रामीण विकास मंत्री श्रवण कुमार जिस विधानसभा क्षेत्र से 8 बार के विधायक हैं, उस क्षेत्र के एक गांव ने नाली निकासी न होने के चलते वोट बहिष्कार कर दिया है।

ग्रामीणों की इतनी आधारभूत जरूरत भी लंबे समय तक अपने ही लोगों के सरकार में बैठे होने पर पूरी नहीं हुई तो अब उन्होंने वोट न देने की घोषणा की है। यहां 6 नवंबर को वोटिंग होनी है और ग्रामीणों के वोट बहिष्कार के ऐलान के बाद प्रशासन के अफसर उन्हें मनाने पहुंचे।

यह मामला नालंदा विधानसभा क्षेत्र के नीरपुर पंचायत के पचवारा गांव का है। यहां के लोगों ने कहा है कि वे वोट देने बूथ पर नहीं जाएंगे। गांव के लोगों ने मीडिया से कहा कि उनके गांव में नल-जल योजना पहुंची पर पानी निकासी के लिए आजतक कोई हल नहीं निकाला गया, घरों से निकलता गंदा पानी खेतों में भरने से फसलें खराब होती हैं पर कोई सुनवाई नहीं है।

ग्रामीणों ने सीधे कहा कि सरकार की योजनाएं सिर्फ कागजी हैं, बोले कि जलजमाव के कारण कई बीघा धान की तैयार फसलें बर्बाद हो रही हैं। बारिश के दिनों में पानी घरों में भी घुस जाता है, जिससे बच्चों और बुजुर्गों में बीमारियां बढ़ रही हैं। वोट बहिष्कार की सूचना मिलने पर सर्किल ऑफिसर (अंचलाधिकारी) आकाशदीप सिन्हा गांव पहुंचे और ग्रामीणों को समझाने का प्रयास किया। लेकिन ग्रामीणों ने स्पष्ट कर दिया कि जब तक समस्या का समाधान नहीं होगा, वे अपने निर्णय पर कायम रहेंगे।

पचवारा गांव की निवासी चिंता देवी, कृष्णा सिंह, अनिल कुमार और निर्मला देवी सहित अन्य ने कहा कि जब तक उनकी समस्याओं का हल नहीं मिलेगा, वे वोट नहीं डालेंगे।

बोलते पन्ने.. एक कोशिश है क्लिष्ट सूचनाओं से जनहित की जानकारियां निकालकर हिन्दी के दर्शकों की आवाज बनने का। सरकारी कागजों के गुलाबी मौसम से लेकर जमीन की काली हकीकत की बात भी होगी ग्राउंड रिपोर्टिंग के जरिए। साथ ही, बोलते पन्ने जरिए बनेगा .. आपकी उन भावनाओं को आवाज देने का, जो अक्सर डायरी के पन्नों में दबी रह जाती हैं।

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