रिपोर्टर की डायरी
बिहार में सड़कों को लावारिस कुत्तों से मुक्त करने का प्लान तैयार, नवादा से शुरुआत.. जानिए क्या हैं तैयारियां
- बिहार के नवादा में नगर परिषद ने लावारिस कुत्तों की गिनती शुरू कराई।
- सड़क पर घूमने वाले कुत्तों को पकड़कर टीका लगेगा, फिर वहीं छोड़े जाएंगे।
नवादा | अमन कुमार
बिहार में सड़कों पर घूमने वाले लावारिस कुत्तों से आम लोगों को सुरक्षित बनाने के लिए कदम उठाना शुरू कर दिया है। बिहार के नवादा जिले से इसकी शुरुआत हुई है, जहां लावारिस कुत्तों को खाना खिलाने के लिए फीडिंग प्वाइंट बनाए गए हैं ताकि वे सड़कों पर भोजन की तलाश में न घूमे। साथ ही, लावारिस कुत्तों को लेकर एक टोल फ्री नंबर -18003451636 जारी किया गया है।
जहां लोग अपने इलाके के लावारिस कुत्तों को लेकर नगर परिषद को सूचना दे सकते हैं। डॉग वैन आकर ऐसे कुत्तों को डॉग सेंटर में ले जाएगी, जहां उनके व्यवहार को जांचा जाएगा और टीकाकरण होगा। खास बात यह भी है कि टीकाकरण के बाद इन कुत्तों को उन्हीं जगहों पर दोबारा छोड़ा जाएगा, जहां से उन्हें उठाया गया था।
जिले के लावारिस कुत्तों की गिनती होगी
नवादा नगर परिषद के कार्यपालक पदाधिकारी सत्येंद्र प्रसाद वर्मा ने जानकारी दी है कि ऐसा पूरे बिहार में किया जाना है, जिसकी शुरुआत नवादा जिले से हो रही है। उन्होंने पत्रकारों को बताया कि शहर में घूमने वाले लावारिस कुत्तों को चिन्हित करने के लिए एक एजेंसी को जिम्मेदारी दी गई है जो दो-तीन दिन में काम शुरू कर देगी। इससे पता लगेगा कि शहर में लावारिस कुत्तों की संख्या कितनी है और कितनों को एंटी-रैबीज़ टीका लगाया जाना है। इसके बाद कुत्तों को पकड़कर उनका टीकाकरण कराना शुरू होगा।
डॉग सेंटर बनाया जा रहा, व्यवहार परखा जाएगा
नगर परिषद ने लावारिस कुत्तों को पकड़ने के लिए एक डॉग कैचिंग व्हीकल तैयार कराया है। साथ ही, जिले के बुधौल बस स्टैंड के पास एक अस्थायी सेंटर तैयार हो रहा है। कार्यपालक पदाधिकारी का कहना है कि यह एक सप्ताह के भीतर बनकर तैयार हो जाएगा। इस सेंटर में लावारिस कुत्तों को रखकर दो-तीन दिन उनका व्यवहार परखा जाएगा। पदाधिकारी का कहना है कि अगर ऐसे कुत्तों का व्यवहार हमारे मानक के मुताबिक होगा तो उन्हें वापस उनके नियत स्थान पर छोड़ देंगे। साथ ही, उनके प्रजनन को नियंत्रित करने के तरीकों पर भी विचार किया जा रहा है ताकि उनकी संख्या तेजी से न बढ़े।
फीडिंग सेंटर चुने गए, वहीं कुत्तों को खिलाना होगा भोजन
साथ ही जिले में छह जगहों को फीडिंग सेंटर के तौर पर चुना गया है जहां आम लोग लावारिस कुत्तों को भोजन करा सकते हैं। ऐसा इसलिए किया जा रहा है कि लावारिस कुत्तों को जहां-तहां लोग भोजन न कराकर नियत जगहों पर ही भोेजन दें, ताकि उनकी गतिविधियां मुख्य रास्तों और बाजारों में कम हो जाए और वे भी किसी दुर्घटना से सुरक्षित रहें। पूरे जिले में अभी तक लावारिस कुत्तों की संख्या के बारे में स्पष्ट जानकारी नहीं है पर इन कुत्तों के चलते आम लोगों को काटने के मामले काफी ज्यादा हैं।
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गोपालगंज : फाइलेरिया रोकने की दवा खाने के बाद स्कूली बच्चे बीमार
- गोपालगंज के हरखुआ माध्यमिक विद्यालय में 15 बच्चे बीमार पड़े।
- 58 बच्चों को फाइलेरिया रोधी दवा खिलाई, फिर तबीयत बिगड़ी।
- सभी बच्चों को सदर अस्पताल ले जाकर भर्ती कराया, सभी सुरक्षित।
गोपालगंज | आलोक कुमार
बिहार के गोपालगंज में फाइलेरिया रोधी दवा खिलाए जाने के बाद स्कूली बच्चों की तबीयत अचानक बिगड़ने से हड़कंप मच गया। स्कूल में अभिभावकों ने पहुंचकर हंगामा किया, हालांकि टीचरों ने उन्हें समझाने की कोशिश की। इस बीच हेडमास्टर ने एंबुलेंस बुलाकर 15 बीमार बच्चों को सदर अस्पताल में एडमिट कराया है। बता दें कि हाथी पांव या फाइलेरिया की रोकथाम के लिए दो साल से बड़े बच्चों को यह दवा खिलाई जाती है, जो एकदम सुरक्षित है।
गोपालगंज में बच्चों की तबीयत खराब होने की घटना शहर के हरखुआ गांव के एक माध्यमिक विद्यालय में घटी। हेडमास्टर कृष्ण मुरारी पांडे ने बताया कि स्कूल में 27 फरवरी को 58 बच्चे मौजूद थे। सभी बच्चों ने मिड डे मील खाया। फिर दोपहर करीब 3:00 बजे आशा वर्करो ने स्कूल आकर सभी 58 बच्चों को फाइलेरिया और एल्बेंडाजोल की गोलियां दीं।
प्रिंसिपल ने बताया कि दवा खाते ही कुछ बच्चों को अचानक नींद आने लगी और वे सोने लगे, जबकि कुछ को उल्टी हुई।
इस बारे में सिविल सर्जन वीरेंद्र प्रसाद ने बताया कि फाइलेरिया से बचाव की दवा खाने के बाद कुछ बच्चों में गैस बनने की शिकायत हो सकती है, जिससे उल्टी या पेट दर्द महसूस होता है। साथ ही उन्होंने कहा कि कई बार डर के कारण भी बच्चों को ऐसी समस्या होती है, इसमें किसी तरह की चिंता की बात नहीं है।
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शराब तस्करी में जेल गए आरोपी की मौत, परिवार बोला- हत्या हुई, जेल प्रशासन ने हार्टअटैक बताया
- बक्सर सेंट्रल जेल में बंदी की मौत होने से उठे सवाल।
- शराब तस्करी के आरोप में जेल में 14 दिन से था बंदी।
- जेल में अचानक हुई मौत को परिजनों ने बताया हत्या।
बक्सर | अमीषा कुमारी
बिहार में शराब तस्करी के आरोप में हिरासत में लिए गए एक व्यक्ति की मौत बक्सर सेंट्रल जेल में हो गई है। बीती 12 फरवरी को उसे न्यायिक हिरासत में भेजा गया था। परिजनों का आरोप है कि जेल में उसके साथ मारपीट हुई, उसके शरीर पर लाल निशान हैं। परिजनों ने न्याय की मांग करते हुए सदर अस्पताल में हंगामा किया, तब मौके पर पुलिस पहुंची।अब मेडिकल बोर्ड की निगरानी में मृतक के शव का पोस्टमार्टम कराया जा रहा है। इस मामले में जेल प्रशासन ने उत्पीड़न के आरोपों से इनकार किया है।
दरअसल 40 साल के राजेंद्र सिंह को बक्सर पुलिस पकड़कर ले गई थी और 12 फरवरी को उसे जेल भेजा गया था। राजेंद्र नगर थाना क्षेत्र के विराट नगर के रहने वाले थे। मृतक के बड़े भाई राजू कुमार ने आरोप लगाया कि गिरफ्तार करने के दौरान ही पुलिस ने राजेंद्र के साथ मारपीट की थी, जबकि वह बीमार चल रहा था। राजू का आरोप है कि “जेल भेजने के बाद भी भाई को पीटा गया। शरीर पर मौजूद लाल निशान साफ बता रहे हैं कि उसकी हत्या हुई है।
राजू ने बताया कि 27 फरवरी की सुबह करीब 11 बजे जेल प्रशासन की ओर से कॉल आया कि राजेंद्र की तबीयत बिगड़ गई है और वे अस्पताल पहुंच जाएं। लेकिन जब वे लोग सदर अस्पताल पहुंचे तो एक्स-रे रूम के बाहर स्ट्रेचर पर मृत अवस्था में राजेंद्र मिले। वहां कोई मौजूद नहीं था। इसके बाद परिजनों ने हंगामा किया और मौके पर पुलिस पहुंची।
मृतक राजेंद्र पेशे से पेंटर थे और उनके दो छोटे बच्चे हैं। अचानक हुई इस मौत ने पूरे परिवार को सदमे में डाल दिया है। वहीं, यह घटना बिहार में शराबबंदी लागू कराने के दौरान पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाती है। साथ ही, जेल में बंदी की सुरक्षा को लेकर जेल प्रशासन पर भी सवाल खड़ा होता है। मृतक के भाई ने बताया कि 25 फरवरी को वह अपने भाई से मिलने जेल गए थे, तब उसे ऐसी कोई दिक्कत नहीं थी जिसके चलते उसकी अचानक मौत हो सकती है।
बक्सर सेंट्रल जेल के अधीक्षक ज्ञानित गौरव ने परिजनों के आरोपों को खारिज किया। उन्होंने कहा कि प्रथम दृष्टया यह मौत हार्ट अटैक से प्रतीत होती है। हालांकि पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट आने के बाद ही इसका सही कारण पता लग सकेगा।
बक्सर सदर अस्पताल के इमरजेंसी विभाग में तैनात डॉक्टर अमित कुमार ने पुष्टि की कि कैदी को अस्पताल लाने से पहले ही उसकी मौत हो चुकी थी। वहीं, नगर थानाध्यक्ष मनोज कुमार ने सदर अस्पताल में मीडिया से कहा कि अगर कहीं कोई लापरवाही पाई जाती है तो उस पर सख्त कदम उठाए जाएंगे।”
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बिहार में अब दारोगा-कोतवाल के खिलाफ केस चलाने से पहले सरकार की अनुमति जरूरी
- बिहार सरकार के गृह विभाग (आरक्षी शाखा) ने जारी की अधिसूचना।
- पुलिस कर्मियों पर मुकदमा चलाने के लिए लेनी होगी सरकार की अनुमति।
- बिहार पुलिस के सभी पदाधिकारी व कर्मियों पर लागू होगा नियम।
पटना |
बिहार में अब दारोगा से लेकर इंस्पेक्टर तक के खिलाफ किसी मामले में तब ही केस दर्ज हो सकेगा जब उसकी इजाजत राज्य सरकार देगी।
बिहार सरकार के गृह विभाग (आरक्षी शाखा) ने गुरुवार (26 feb) को इसको लेकर अधिसूचना जारी की है। यह नियम पहले DSP/ACP और ऊपर के अधिकारियों के लिए लागू था, लेकिन अब राज्य सरकार ने यह सुरक्षा कांस्टेबल से लेकर इंस्पेक्टर स्तर तक बढ़ा दी है। सरकार का तर्क है कि इस तरह बदले की भावना के चलते पुलिस पर कार्रवाई व उत्पीड़न को रोका जा सकेगा।
सरकार के इस महत्वपूर्ण सर्कुलर में कहा गया है कि पुलिस अधिकारियों और पुलिस कर्मियों पर आपराधिक मुकदमा चलाने से पहले राज्य सरकार की पूर्व अनुमति (sanction) अनिवार्य होगी। यह शर्त उन कार्यों पर लागू होगी जो आधिकारिक ड्यूटी (official duty) के दौरान या उसके संबंध में किए गए हों।
यह आदेश भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) 2023 की धारा 218(2) के तहत लागू किया गया है। जिसमें पहले “केंद्रीय सरकार” के स्थान पर अब स्पष्ट रूप से “राज्य सरकार” को यह अधिकार दिया गया है।
बिहार जैसे राज्य जहां पुलिस के ऊपर भ्रष्टाचार व गलत मुकदमें में फंसाने के मामले सामने आते रहे हैं, राज्य सरकार की ओर से दी जा रही इम्यूनिटी उनकी ताकत को और बढ़ा देगी या नहीं, यह तो आने वाला वक्त ही बताएगा।
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