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रिपोर्टर की डायरी

बिहार में ‘भूतों का मेला’! रोहतास में नवरात्र के दौरान चलता है भूत भगाने का धंधा

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कई दशकों से खुलेआम लग रहा तथाकथित भूतोंं का मेला।

सासाराम | अविनाश श्रीवास्तव

चैत्र नवरात्र में जहां एक तरफ लोग देवी दुर्गा की उपासना करते हैं, वहीं दूसरी ओर बिहार में इसी मौके पर भूतों का मेला लगता है।

रोहतास जिले में कई दशकों से जीवित यह परंपरा आधुनिक सोच को चुनौती देती है। यहां आज भी बड़ी तादाद में बिहार ही नहीं पड़ोसी उत्तर प्रदेश व झारखंड से ऐसे लोग पहुंचते हैं जो भूत-प्रेत और आत्माओं में गहरा विश्वास रखते हैं।

यह मेला जिले के संझौली ब्लॉक के घिन्हू ब्रह्म स्थान पर लगता है। हर साल चैत्र नवरात्र और शारदीय नवरात्र के दौरान यहां लोग जुटते हैं और स्थानीय लोग इसे “भूतों का मेला” कहते हैं।

स्थानीय लोगों के अनुसार, यह मेला करीब 100 वर्षों से लगातार आयोजित हो रहा है।

शराबबंदी के बावजूद चढ़ती है शराब

चौंकाने वाली बात है कि अंधविश्वास फैलाने वाले लोगों पर कानूनी कार्रवाई करना पुलिस की जिम्मेदारी है पर मेला आयोजकों पर आज तक कोई ऐक्शन नहीं हुआ।

बिहार में पूर्ण शराबबंदी लागू होने के बावजूद मेले में शराब की बोतलें देखी जाती हैं। स्थानीय लोग बताते हैं कि कुछ लोग इसे “चढ़ावा” के रूप में भी इस्तेमाल करते हैं।

भूत-प्रेत को शांत करने के लिए यहां जानवरों की बलि देने की भी परंपरा है।

मेले में गरीब तबके की महिलाएं अधिक

चैत्र नवरात्र शुरु होने के साथ जुड़ा यह मेला अगले नौ दिनों तक जारी रहेगा। यह मेला गांव के करीब 2 किलोमीटर क्षेत्र में फैला है।

मेले में आने वाले ज्यादातर लोग आर्थिक रूप से कमजोर तबके से होते हैं, जो अपनी समस्याओं का समाधान यहां तलाशते हैं।

इस मेले में सबसे ज्यादा संख्या महिलाओं की होती है। कई महिलाएं खुले बालों के साथ चीखती-चिल्लाती नजर आती हैं। कोई दौड़ रही होती है, तो कोई जमीन पर लोटती हुई दिखाई देती है।

स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, इन महिलाओं पर “भूत सवार” होता है और वे उसी के प्रभाव में ये हरकतें करती हैं। इस दौरान तांत्रिक उन्हें नियंत्रित करने और “भूत उतारने” की कोशिश करते हैं।

मेले का माहौल रहस्यमयी

चारों ओर चीख-पुकार, अजीब हरकतें और तांत्रिकों द्वारा किए जा रहे तंत्र-मंत्र के बीच लोग भूत-प्रेत को शांत कराने आते हैं। मान्यता है कि यहां आने से भूत-प्रेत और नकारात्मक शक्तियों का असर खत्म हो जाता है।

बड़ी संख्या में तांत्रिकों की मौजूदगी

मेले में तांत्रिकों की भूमिका बेहद अहम होती है। वे मंत्रोच्चार, झाड़-फूंक और तंत्र क्रियाओं के जरिए पीड़ितों को तथाकथित तौर पर “ठीक” करने का दावा करते हैं।

कई बार वे पीड़ित व्यक्ति को जोर-जोर से झकझोरते हैं, यहां तक कि पिटाई भी करते हैं।

तांत्रिकों का कहना है कि वे व्यक्ति को नहीं, बल्कि उसके अंदर मौजूद “आत्मा” को मारते हैं, ताकि वह शरीर छोड़कर भाग जाए।

सत्येंद्र पासवान (तांत्रिक) का कहना है कि वे पिछले 35 वर्षों से इस मेले में आ रहे हैं और सैकड़ों लोगों को भूत-प्रेत से मुक्ति दिला चुके हैं।

मेले के पीछे की कथा भी रोचक

ग्रामीणों के अनुसार, घिन्हू ब्रह्म मूल रूप से बिक्रमगंज प्रखंड के माधवपुर गांव के निवासी थे। एक बार ससुराल से लौटते समय उन्होंने अपनी ताकत दिखाने के लिए जमीन में गड़े एक कील को उखाड़ दिया।

इसके बाद उनकी तबीयत बिगड़ गई और उन्होंने पानी मांगा। रौनी गांव के लोगों ने उन्हें पानी पिलाया, लेकिन पौनी गांव के लोगों ने उनका मजाक उड़ाया। इससे आहत होकर उन्होंने रौनी के समृद्ध होने और पौनी के विनाश का श्राप दे दिया।

श्राप देने के बाद उन्होंने वहीं प्राण त्याग दिए। उनकी मृत्यु के बाद उस स्थान पर ब्रह्म स्थान का निर्माण किया गया, जो आज घिन्हू ब्रह्म के नाम से प्रसिद्ध है।

 

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Bihar Board 12th Result: पिता हरियाणा में मजदूरी करके पढ़ा रहे, बेटा आर्ट्स में बिहार का तीसरा टॉपर बना

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अपनी मां व बधाई देने आए स्थानीय लोगों के साथ आदर्श
सहरसा | मुकेश कुमार सिंह
बिहार बोर्ड इंटरमीडिएट परीक्षा 2026 में सहरसा जिले के सिहोल गांव के मजदूर परिवार का बेटा आदर्श कुमार ने आर्ट्स स्ट्रीम में राज्य स्तर पर तीसरा स्थान हासिल किया है।
यह उपलब्धि इसलिए खास है क्योंकि आदर्श ने पूरी पढ़ाई अभाव भरे जीवन में सरकारी स्कूल से की है। उसने बिना ट्यूशन के गांव में रहकर ही इतना बड़ा मुकाम हासिल किया।
आदर्श के पिता रंजीत कुमार झा हरियाणा के सोनीपत में मजदूरी करते हैं। वे परिवार का भरण-पोषण इसी कमाई से करते हैं।
आदर्श की प्रारंभिक शिक्षा (कक्षा 1 से 5 तक) दिल्ली में हुई, लेकिन बाद में पूरा परिवार गांव लौट आया।
यहां से आदर्श ने दुर्गा उच्च विद्यालय में मैट्रिक और इंटरमीडिएट (आर्ट्स) की पढ़ाई पूरी की। आदर्श बचपन से ही पढ़ाई में तेज और मेहनती रहा है।
उसकी मां बंटी देवी बताती हैं कि वह अक्सर कहता था, “पढ़कर हम शिक्षक बनेंगे।” परिवार में दो भाई हैं और आदर्श सबसे छोटा है।
बड़े भाई शिवम झा ने कहा, “हमारे लिए यह गर्व की बात है कि छोटा भाई इतना आगे बढ़ा। उसकी सफलता से पूरा गांव खुश है।”आदर्श ने कभी कोचिंग या ट्यूशन नहीं लिया।
न तो कोई प्राइवेट स्कूल की सुविधा थी और न ही आर्थिक रूप से मजबूत स्थिति।
फिर भी उसने सिर्फ स्कूल की किताबों और अपनी लगन से यह मुकाम हासिल किया।
पूरे गांव में आज खुशी का माहौल है। लोग इसे “गांव की शान” कह रहे हैं।
यह सफलता उन लाखों ग्रामीण बच्चों के लिए प्रेरणा है जो संसाधनों की कमी में भी बड़े सपने देखते हैं।
आदर्श की कहानी यह साबित करती है कि मेहनत और इच्छाशक्ति से कोई भी लक्ष्य हासिल किया जा सकता है।
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Bihar Board 12th Result : फुटपाथ पर घड़ी संभालते हैं पिता, बेटा बना सेकंड टॉपर

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बेटे लकी को मिठाई खिलाते माता-पिता।

पूर्णिया | पंकज कुमार नायक

बिहार बोर्ड ने 12वीं बोर्ड परीक्षा के रिजल्ट जारी किए हैं । पूर्णिया का लक्की अंसारी बोर्ड का सेकंड टॉपर बना है । लक्की को 500 अंकों में कुल 478 अंक आए हैं, जो टॉपर से महज़ 1 अंक कम है । नतीजे आने के बाद लक्की के घर में जश्न का माहौल है । आंख में आंसू और बुलंद हौंसले के साथ परिवार वाले भी बेटे के सफलता की कहानी बता रहे हैं ।

पूर्णिया शहर के खंजांची का रहने वाला लक्की अंसारी बिहार बोर्ड का सेकंड टॉपर बना है । टॉपर्स में नाम आते ही बधाई देने के लिए लोगों की भीड़ भी लक्की के घर पहुंचनी शुरू हो गई है । तंग सी गली में टूटे फूटे मकान और रसोई में लगा बेड लक्की के संघर्ष की कहानी बयां कर रहा है । लक्की के पिता इम्तियाज़ अंसारी पेशे से एक पूर्णिया के भट्टा बाज़ार के फुटपाथ में घड़ी की दुकान चलाते हैं । और यहीं आमदनी का एकमात्र जरिया है । यहीं से लक्की की संघर्ष मेहनत और सफलता की कहानी शुरू होती है ।

लक्की के पिता इम्तियाज़ अंसारी बताते हैं कि वो लंबे समय से भट्ठाबाजार के फुटपाथ में एक टेबल पर घड़ी की दुकान चलाते हैं । वहीं से चंद पैसे आते हैं और घर का खर्च चलता है । लेकिन अपने बच्चों की पढ़ाई के लिए उन्होंने कोई कमी नहीं छोड़ी । अच्छे से पढ़ाने के लिए कर्ज़ भी लिया और बेटे के भविष्य के लिए जीतोड़ मेहनत की । बेटे ने भी घर के हालात, पिता के संघर्ष और परिवार के परवरिश को देखते हुए एक सपना संजोया । पढ़ाई में खुद को डूबा दिया और नतीजा आज मेहनत रंग लाई, सेकंड टॉपर बना ।

लक्की की मां बताती हैं कि बेटा शुरू से पढ़ने में तेज़ था । हम सब उसकी पढ़ाई में कोई कमी न रहे, इसका ख्याल रखते थे । वो मेहनत करता था और हम उनके लिए बस दुआ और अपनी तरफ से मेहनत करते थे। बेटे ने सपने को पूरा करके दिखाया है ।

लक्की की बहन घर को दिखाते हुए बताती है कि एक छोटे से घर में एक ही कमरा है । जिसकी चौंकी पर लक्की पढ़ता था, और उसी कमरे में नीचे बिस्तर बिछा कर सोता था । एक रसोई घर है, जहां दिन में खाना पकता था और उसी रसोई में पलंग लगाकर परिवार के लोग सोते थे । संघर्ष और मेहनत में किसी ने कोई कमी नहीं छोड़ी है ।

लक्की ने बताया कि वो बड़ा होकर सरकारी शिक्षक बनना चाहता है । अगर उन्हें बेहतर श्रोत मिला तो वो बड़े परीक्षा की तैयारी भी करना चाहता है और आगे बढ़ना चाहता है।

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बिहार बोर्ड : नवादा के नक्सली गांव की सपना, सरकारी स्कूल से पढ़कर बनीं साइंस स्ट्रीम में सेकंड टॉपर  

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नवादा में अपने परिवार के साथ मौजूद सपना।

नवादा | अमन कुमार सिन्हा

नवादा जिले के नक्सल प्रभावित कौवाकोल प्रखंड के नावाडीह गांव की सपना कुमारी ने बिहार इंटरमीडिएट साइंस परीक्षा में दूसरा स्थान हासिल किया है।

सुधीर चौरसिया की छोटी बेटी सपना ने पूरे बिहार में 479 अंक प्राप्त कर यह मुकाम हासिल किया।

सपना ने बताया कि उनकी बुआ कैंसर से पीड़ित थीं और उनके निधन के बाद ही उन्होंने डॉक्टर बनने का सपना देखा था। उन्होंने संकल्प लिया था कि वे एक दिन डॉक्टर बनकर अपने परिवार और समाज की सेवा करेंगी।

सपना के पिता एक छोटी सी राशन की दुकान चलाते हैं और उसी से अपने बच्चों की पढ़ाई का खर्च उठाते हैं।

नक्सल प्रभावित क्षेत्र होने के बावजूद, उनके पिता ने बच्चों को अच्छी शिक्षा देने का प्रयास किया। उनकी मां ने भी कठिनाइयों के बावजूद उन्हें पढ़ाया और कभी मुश्किलों का एहसास नहीं होने दिया।

सपना के दो भाई और दो बहनें हैं। उनके बड़े भाई नौसेना में कार्यरत हैं, जबकि छोटा भाई बीटेक की तैयारी कर रहा है। उनकी बड़ी बहन बीए पार्ट वन में पढ़ रही है। सपना का अंतिम लक्ष्य एक अच्छा डॉक्टर बनकर लोगों की सेवा करना है।

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