रिपोर्टर की डायरी
गोपालगंज का ‘मॉडल अस्पताल’ : टॉयलेट का पानी भरने से X-ray सुविधा तक बंद पड़ी, लीकेज से मरीज परेशान
- बिहार के गोपालगंज का मॉडल सदर अस्पताल बेहाल।
- शौचालय का गंदा पानी फैलने से एक्स-रे नहीं हो रहे।
- 38 करोड़ की लागत से बना, सीलिंग में लीकेज, मरीज परेशान।
(नोट – इस खबर को वीडियो में देखने के लिए इस लिंक पर जाएं।)
गोपालगंज। आलोक कुमार
बिहार के गोपालगंज जिले में 38 करोड़ की लागत से बनकर शुरू हुआ मॉडल अस्पताल खस्ता हाल है। मरीजों को मेडिकल की आधुनिक सुविधाएं देने के लिए बनाए गए अस्पताल में शौचालय का गंदा पानी सीधे एक्स-रे सेंटर के अंदर भर गया है। हाल इतना खराब है कि दो दिन से अस्पताल में एक्सरे सुविधा बंद है और सैंकड़ों मरीजों को निजी सेंटर में जाकर एक्सरे कराना पड़ रहा है।

गोपालगंज के मॉडल अस्पताल के एक्स-रे वार्ड में फैला शौचालय का गंदा पानी। (टीम : बोलते पन्ने)
इस अस्पताल में हर रोज करीब दो हजार मरीज जिले के अलग-अलग इलाकों से इलाज करने आते हैं, जिसमें एक्स-रे करने वाले करीब आठ सौ तक होते हैं। 100 बेड के इस अस्पताल में आईसीयू, इमरजेंसी और इंडोर की तमाम आधुनिक सुविधाएं होने का दावा किया गया था, पर शुरू होने के कुछ महीने बाद ही इसके निर्माण की खामियां सामने आने लगी हैं।
अस्पताल की स्थिति इतनी जर्जर हो चुकी है कि इसके महत्वपूर्ण वार्डों में बुनियादी स्वच्छता का भी अभाव है। जहां मरीजों को संक्रमण से बचाने के लिए अस्पतालों में स्वच्छता के कड़े मानक होने चाहिए, वहां मरीज और कर्मचारी बदबूदार और दूषित पानी के बीच रहने को मजबूर हैं। अभी हाल ही में यहां ऑक्सीजन पाइप लाइन में भी समस्या आ गई थी। अब एक्सरे सेंटर में गंदा पानी भरने से काम बंद हो गया है।

गोपालगंज के मॉडल सदर अस्पताल में एक्स रे वार्ड के बाहर लगी लोगों की भीड.। (टीम : बोलते पन्ने )
गौरतलब है कि इस भवन का निर्माण बीएमआईसीएल ने कराया है जो बिहार सरकार के स्वास्थ्य विभाग का एक निगम है।
इस पूरे मामले पर अस्पताल के सिविल सर्जन वीरेंद्र प्रसाद का कहना है कि अभी तक अस्पताल का हैंड-ओवर नहीं लिया गया है, सिर्फ जांच के लिए अस्पताल में व्यवस्था चालू की है ताकि समय रहते जो खामियां हैं, वह सामने आ सके।
हालांकि उन्होंने इस बात को माना है कि इस भवन के निर्माण में अनियमितता हुई है। उनका कहना है कि इसके पूर्व में कई जगह छत की सीलिंग से पानी टपकने और ऑक्सीजन पाइप लाइन समेत कई खामियां सामने आने के बाद संबंधित विभाग को पत्र भेजकर सूचित किया जा चुका है।
ऐसे में सवाल उठता है कि सरकारी निगम की ओर से करोड़ों खर्च करके बनाए गए मॉडल अस्पताल के निर्माण में किसने भ्रष्टाचार किया है और आखिर क्यों खामियां सामने आने के बाद भी इस मामले में कोई कार्रवाई क्यों नहीं की जा रही है।
चुनावी डायरी
बिहार कांग्रेस में 11 साल बाद बड़ा बदलाव, लेकिन ‘सोशल इंजीनियरिंग’ पर क्यों नहीं बन रही सहमति?
पटना | बिहार में कांग्रेस का आधार तेज़ी से घटा है, हाल में हुए विधानसभा चुनाव में इसने मात्र छह सीटें जीतीं। ऐसे में 11 साल के बाद बिहार के ब्लॉक व जिला स्तर के नेतृत्व में 11 साल के बाद बड़े बदलाव किए जा रहे हैं। पर कांग्रेस के केंद्रीय नेतृत्व ने नए जिलाध्यक्षों की जो सूची जारी की है, इसको लेकर बिहार कांग्रेस में गहरी असहमति है।
बिहार कांग्रेस ने मांग की है कि नए जिलाध्यक्ष का चुनाव करते समय सामाजिक संतुलन को ध्यान रखा जाना चाहिए। बिहार के नेताओं ने ऐसा इसलिए कहा है क्योंकि केंद्रीय कांग्रेस की ओर से बिहार के नए नेतृत्व की जो सूची जारी की गई है उसमें 45 फीसदी नेता ऊंची जाति से हैं। ऐसे में बिहार कांग्रेस के नेताओं की मांग है कि उनकी ओर से जो लिस्ट प्रस्तावित थी, उस पर पुनर्विचार किया जाए।
53 में से 24 जिलाध्यक्ष अगड़ी जाति के
बता दें कि बिहार में 38 प्रशासनिक जिले हैं लेकिन कांग्रेस ने इसे 53 संगठनात्मक जिलों में बांटा है। बीती 30 मार्च को अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के महासचिव केसी वेणु गोपाल ने बिहार के नए जिलाध्यक्षों की एक सूची जारी की थी। इस सूची में 24 जिलाध्यक्ष उच्च जाति से संबंध हैं। 12 जिलाध्यक्ष ओबीसी से हैं जिसमें आठ यादव हैं। पांच जिलाध्यक्ष पिछड़ी जाति से, तीन अति पिछड़ी जाति से संबंधित हैं। इसके अलावा, आठ मुस्लिम व एक सिख धर्म से हैं।
‘नई सूची राहुल गांधी के संदेश के विपरीत’
बिहार कांग्रेस के अध्यक्ष राजेश राम के हवाले से इंडियन एक्सप्रेस ने लिखा है कि सही सामाजिक संतुलन बनाए रखने के लिए हम केंद्रीय नेतृत्व से सूची में संशोधन की मांग कर रहे हैं। साथ ही हम ब्लॉक जिलाध्यक्षों की भी एक अनुमानित लिस्ट बना रहे हैं।
गौरतलब है कि राहुल गांधी ने 2025 में बिहार में संविधान बचाओ यात्रा निकाली थी, इस दौरान स्थानीय नेताओं ने उनसे पार्टी में बड़े बदलावों की मांग की थी जो सोशल जस्टिस को दर्शाते हों।
प्रदेश रिपोर्ट
वैशाली: प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर गिरा हाईटेंशन तार, ऑफिस में लगी आग, बड़ा हादसा बचा
वैशाली | मुन्ना खान
बिहार के वैशाली जिले के गोरौल स्थित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (PHC) में शनिवार को उस वक्त अफरा-तफरी मच गई, जब बिजली का हाईटेंशन तार टूटकर सीधे अस्पताल की छत पर जा गिरा।
इस घटना के बाद एसी के आउटडोर में शॉर्ट सर्किट से अस्पताल के कार्यालय में आग लग गई, जिससे कई महत्वपूर्ण सरकारी कागजात और फाइलें जलकर राख हो गईं।
गनीमत यह रही कि स्वास्थ्य कर्मियों ने हिम्मत दिखाते हुए स्थिति संभाली। राहत की बात यह भी रही कि तार छत पर गिरा, अगर यह तार अस्पताल परिसर या ओपीडी के पास गिरता तो बड़ा हादसा हो सकता था।
अस्पताल के एक कर्मी ने बताया कि स्वास्थ्य केंद्र के ऊपर से गुजरने वाले हाईटेंशन तार पेड़ों की टहनियों के बीच से होकर आए हैं। तेज हवा या मामूली घर्षण से अक्सर स्पार्किंग होती रहती है।
कर्मचारियों ने कई बार इसकी शिकायत की थी कि पेड़ों के बीच से तार गुजरने के कारण हमेशा हादसे का डर बना रहता है, लेकिन बिजली विभाग की लापरवाही आज भारी पड़ गई।
इस अग्निकांड में कार्यालय के कई महत्वपूर्ण रिकॉर्ड जल गए हैं, जिनका आकलन किया जा रहा है। स्थानीय प्रशासन और बिजली विभाग को घटना की सूचना दे दी गई है।
प्रदेश रिपोर्ट
सासाराम में मदद के लिए Crowd Funding शुरू, करंट लगने से वार्ड मेंबर की हो गई थी मौत
रोहतास | अविनाश कुमार श्रीवास्तव
रोहतास जिले के चेनारी प्रखंड में बिजली विभाग की लापरवाही से जन प्रतिनिधि की जान चली गई। परिवार के प्रदर्शन के बाद प्रशासन ने मुआवज़े का ऐलान किया। अब और आर्थिक मदद जुटाने के लिए प्रशासन ने क्राउड फंडिंग की पहल शुरू की है।
एसडीएम की ओर से सासाराम अनुमंडल कार्यालय और चेनारी प्रखंड कार्यालय के परिसर में एक दान पात्र स्थापित किया गया है।
चेनारी प्रखंड की डिहरियां पंचायत के खैरा गांव के वार्ड मेंबर सदानंद तिवारी की बिजली का करंट लगने से बीते रविवार को मौत हो गई थी।
वे गांव की बिजली ठीक करने के लिए खंभे पर चढ़े थे, तभी बिजली सप्लाई चालू कर दी गई। उनका शव काफी देर तक खंभे पर ही लटका रहा, जिसे बाद में प्रशासन ने कड़ी मशक्कत से नीचे उतारा।
तब ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि ट्रांसफार्मर और जर्जर तारों की शिकायत पर सुनवाई न होने पर थक-हारकर सदानंद खुद तार ठीक करने को चढ़े थे। इस घटना के बाद परिजनों व ग्रामीणों ने बड़ा प्रदर्शन किया।
इस पर जिला प्रशासन ने मृतक के परिवार के लिए चार लाख रुपये के मुआवज़े की घोषणा की। सासाराम एसडीएम डॉ. नेहा कुमारी के मुताबिक, तय स्थानीय लोगों की मांग पर यह भी तय हुआ कि और आर्थिक राशि जुटाने के लिए क्राउड फंडिंग करायी जाएगी।
इसी के तहत चार अप्रैल को सासाराम एसडीएम ने यह मानवीय पहल शुरू की है।
इसका मकसद आम जनता और सरकारी कर्मचारियों के सहयोग से अतिरिक्त धन जुटाकर मृतक वार्ड मेंबर सदानंद तिवारी के परिवार को आर्थिक सहयोग देना है।
“वार्ड मेंबर सदानंद तिवारी की मौत एक दुखद घटना थी। हमने चार लाख का मुआवजा तो दे दिया लेकिन उनके परिवार की भविष्य की जरूरतों को देखते हुए ‘फंड रेजर’ शुरू किया गया है। हम सबको अपनी क्षमता के अनुसार इस नेक काम में योगदान देना चाहिए।”- सासाराम एसडीएम डॉ. नेहा कुमारी
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