रिपोर्टर की डायरी
CM आवास में इफ्तार पार्टी : बेटे को आगे करके सबसे पीछे बैठे CM नीतीश कुमार, टोपी लगाने से किया परहेज
- रोजेदारों के साथ पहली पंक्ति में टोपी पहने नजर आए बेटे निशांत कुमार।
पटना| हमारे संवाददाता
बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने पटना स्थित CM आवास पर इफ्तार पार्टी दी। इस दौरान सीएम नीतीश कुमार रोजेदारों के पीछे कुर्सी पर बैठे नजर आए और उन्होंने टोपी लगाने से परहेज किया।
सीएम कार्यालय की ओर से जारी तस्वीरों में देखा जा सकता है कि रोजेदारों के साथ CM के बेटे निशांत कुमार बैठे नजर आए, उन्होंने सफेद टोपी पहनी थी और दुआ में हाथ उठाया। निशांत कुमार हाल में जदयू में शामिल हुए हैं। बेटे को आगे करके CM नीतीश कुमार के इफ्तार पार्टी में पीछे बैठे नजर आने के राजनीतिक मायने निकाले जा रहे हैं।

रोजेदार को टोपी पहनाकर स्वागत करते सीएम नीतीश कुमार।
गौरतलब है सीएम नीतीश कुमार रमजान के पवित्र माह में हर साल इफ्तार पार्टी का आयोजन अपने सरकारी आवास पर करते आए हैं। इफ्तार पार्टी में उनके सफेद टोपी लगाई तस्वीरों की चर्चा रहा करती थी, लेकिन इस बार वे बिना टोपी के नजर आए हैं। हालांकि तस्वीरों में देखा जा सकता है कि वे रोजेदारों का स्वागत करते हुए उन्हें टोपी पहनाते नजर आए और दुआ में हाथ उठाया।

सामूहिक दुआ के दौरान सीएम नीतीश कुमार।
नीतीश कुमार के इस बदले अंदाज को लेकर चर्चा इसलिए हो रही है क्योंकि हाल में वे राज्यसभा सदस्य चुने गए हैं और जल्द ही सीएम पद से इस्तीफा दे सकते हैं।
जदयू की ओर से सीएम नीतीश कुमार पर दवाब बनाया जा रहा है कि बेटे निशांत कुमार को वे सरकार में बड़ा पद दिलवाएं। दूसरी ओर, भाजपा के प्रमुख नेता और सरकार में उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी को सीएम पद का प्रमुख दावेदार माना जा रहा है।

रोजेदारों के साथ सीएम नीतीश कुमार।
17 मार्च को हुई दावत-ए-इफ्तार में रोजेदार व गणमान्य लोगों ने शिरकत की। मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से जारी प्रेस रिलीज में बताया गया कि मित्तन घाट के सज्जादानशीं हजरत सैयद शाह शमीमउद्दीन अहमद मुनअमी ने सामूहिक दुआ पढ़ी। मुख्यमंत्री ने बारी-बारी से तमाम अतिथियों का स्वागत किया।
इस अवसर पर उप मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी, उप मुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा, बिहार विधान परिषद के सभापति अवधेश नारायण सिंह व अन्य प्रमुख नेता मौजूद रहे।
चुनावी डायरी
बिहार : नीतीश कुमार के साथ उनकी कोर टीम भी बदलेगी, 4 बड़े अफसर हटाए जा रहे.. डिटेल जानिए
पटना | हमारे संवाददाता
ये अफसर बदले जा रहे
सूत्रों के मुताबिक, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के सचिव आईएएस अनुपम कुमार, शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव बी. राजेंद्र, मुख्यमंत्री के ओएसडी आईएफएस अधिकारी गोपाल सिंह और सीनियर आईएएस प्रतिमा एस. वर्मा के नाम प्रमुख रूप से सामने आ रहे हैं। हालांकि, सरकार की ओर से अभी तक इस पर कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है, लेकिन आईएएस लॉबी में इसको लेकर चर्चा आम है।
बिहार से दिल्ली का रुख
1- अनुपम कुमार (IAS)
अनुपम कुमार बिहार कैडर के एक बेहद प्रभावशाली और वरिष्ठ आईएएस अधिकारी हैं। वे लंबे समय से मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के सबसे भरोसेमंद और करीबी अधिकारियों की ‘कोर टीम’ का शामिल रहे हैं। मुख्यमंत्री सचिवालय में सचिव के पद पर रहते हुए उन्होंने सूचना एवं जनसंपर्क विभाग (IPRD) और संसदीय कार्य विभाग जैसी कई अहम जिम्मेदारियाँ उनके पास हैं। एक समय में राज्य के प्रशासनिक फैसलों में उनकी गहरी पकड़ मानी जाती थी, लेकिन हाल ही में राज्य में एनडीए (NDA) की सरकार बनने के बाद से प्रशासनिक समीकरणों में बदलाव आया है। माना जा रहा है कि इसी राजनीतिक बदलाव के चलते उन्हें साइडलाइन कर दिया गया, जिसके बाद अब वे केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर दिल्ली जा रहे हैं।
2- प्रतिमा एस. वर्मा (IAS)
प्रतिमा एस. वर्मा बिहार कैडर की आईएएस अधिकारी हैं और अनुपम कुमार की पत्नी भी हैं। बिहार के प्रशासनिक गलियारों में उनका नाम सबसे अधिक तबादले पाने वाले अधिकारियों की सूची में सबसे ऊपर आता है। अपने करियर के दौरान उन्होंने कई अलग-अलग जिलों और विभागों में काम किया है, लेकिन अक्सर किसी एक पद पर उनका कार्यकाल बहुत लंबा नहीं रहा है। लगातार होने वाले स्थानांतरणों के कारण वे कई बार चर्चा का विषय रही हैं। अब वे भी अपने पति के साथ बिहार छोड़कर केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर अपनी नई सेवा देने जाने को लेकर चर्चा में हैं।
3- डॉ. बी. राजेंद्र (IAS)
डॉ. बी. राजेंद्र 1995 बैच के बिहार कैडर के एक बेहद कड़क, अनुभवी और वरिष्ठ आईएएस अधिकारी हैं। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के भरोसेमंद अधिकारियों में गिने जाने वाले डॉ. राजेंद्र को राज्य में अहम जिम्मेदारियाँ दी जाती रही हैं। जब शिक्षा विभाग में के.के. पाठक और फिर डॉ. एस. सिद्धार्थ के बाद प्रशासनिक बदलाव की जरूरत पड़ी, तो शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव की कमान डॉ. बी. राजेंद्र को ही सौंपी गई। शिक्षा विभाग के अलावा वे सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) और खेल विभाग जैसे महत्वपूर्ण विभागों के शीर्ष पदों पर भी अपनी सेवाएँ दे चुके हैं। राज्य के प्रशासनिक सुधारों में उनकी अहम भूमिका रही है।
4- डॉ. गोपाल सिंह (IFS)
डॉ. गोपाल सिंह मूल रूप से भारतीय वन सेवा (IFS) के एक तेज तर्रार अधिकारी हैं। हालाँकि वे वन सेवा से आते हैं, लेकिन अपनी उत्कृष्ट कार्यकुशलता और प्रशासनिक समझ के कारण वे विशेष सेवा (Special Duty) के आधार पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के साथ जुड़े रहे हैं। वे मुख्यमंत्री सचिवालय में विशेष कार्य पदाधिकारी (OSD) के महत्वपूर्ण पद पर कार्यरत हैं। मुख्यमंत्री के दैनिक प्रशासनिक कार्यों के प्रबंधन, विशेष योजनाओं की मॉनिटरिंग और विभागों के बीच समन्वय स्थापित करने में उनकी बड़ी और सक्रिय भूमिका रही है। अब वे भी केंद्रीय प्रतिनियुक्ति का रुख कर रहे हैं।
रिपोर्टर की डायरी
रोहतास(बिहार) : गैस एजेंसी के आगे रातभर लाइन में खाली सिलेंडर लिए लगे रहे लोग, आधे से ज्यादा निराश लौटे
- रोहतास की एचपी गैस एजेंसी के आगे रात से लगने लगी लंबी लाइन
- 2 हजार लोग खाली सिलेंडर लेकर लाइन में लगे, 500 को ही मिले।
- सिलेंडर खत्म हो जाने से लोग परेशान, प्रशासन कह रहा गैस की कमी नहीं।
(नोट – इस खबर को वीडियो में देखने के लिए इस लिंक पर जाएं।)
सासाराम | अविनाश कुमार श्रीवास्तव
बिहार में सरकार लगातार कह रही है कि एलपीजी सिलेंडर की कोई कमी नहीं है लेकिन जमीन पर हालात गंभीर हैं। रोहतास जिले के शहरी इलाके में एचपी की इकलौती गैस एजेंसी पर दो हजार लोग खाली सिलेंडर लिए रातभर लंबी लाइनों में खड़े रहे और करीब 1500 लोगों को खाली हाथ लौटना पड़ा।
सासाराम नगर थाना क्षेत्र के अटखम्भावा मोहल्ले में स्थित शारदा देवी एचपी डिस्ट्रीब्यूटर के कार्यालय के सामने लोगों की कतारें 17 मार्च की शात सात बजे से लगना शुरू हुईं। करीब आधा किलोमीटर लंबी लाइन में खड़े लोग मीडिया को लगातार बता रहे थे कि गैस खत्म हो जाने से वे परेशान हैं। कई लोगों ने बताया कि उनके घर में दो टाइम का खाना नहीं बन पा रहा है। लोगों की शिकायत थी कि कई दिन पहले बुकिंग कर देने के बाद भी सिंलेडर नहीं मिला।
बड़ी संख्या में लोगों की लाइन लगने की सूचना पर हंगामे की संभावना को देखते हुए एडीएम डॉ. नेहा कुमारी मौके पर पहुंचीं। उन्होंने लोगों से कहा कि वे अब से लाइन में न लगें, सिलेंडर सीधे उनके घर में डिलीवर होगा। 18 मार्च को कई घंटों के इंतजार के बाद लाइन में लगे मात्र 504 लोगों को ही सिलेंडर मिल सका। सासाराम की एचपी गैस एजेंसी से 23 हजार उपभोक्ता जुड़े हैं।
लोगों का कहना था कि बीते 14 मार्च को जब सिलेंडरों का ट्रक आया था तो उसके वितरण में काफी धांधली हुई। कुछ सिलेंडर ई-रिक्शा में लादकर मनचाहे लोगों को पहुंचा दिए गए। लोगों का कहना था कि इस बार फिर से मनमानी न हो, इसलिए हर कोई सबसे पहले पहुंचकर सिलेंडर लेने की कोशिश में लाइन में जाकर लगा। सिलेंडर लेने की लाइन में लगे लोगों में से ज्यादातर ने इसकी बुकिंग 9 से 11 मार्च के बीच की थी और उन्हें नियमानुसार तीन दिन के भीतर सिलेंडर नहीं मिला था।
शारदा देवी एचपी डिस्ट्रीब्यूटर की संचालक शारदा देवी से जब इस बारे में पूछा गया तो उनका कहना था कि जिन लोगों ने आज ही बुकिंग की है, वे भी लाइन में लगे हैं इसलिए लंबी लाइन लगी है। साथ ही उन्होंने कहा कि एजेंसी पर भीड़ लगाने के बजाय लोग घर जाएं, हम होम डिलीवरी कराएंगे।
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भागलपुर : अदाणी पावर प्रोजेक्ट में जमीन चली गई, बेघर होने की कगार पर खड़े आदिवासी
- भागलपुर में अदाणी पावर प्लांट परियोजना का जमीनी हाल।
- बेघर होने की कगार पर पहुंचे पहाड़िया जनजाति के आदिवासी।
- जमीन खाली करने का नोटिस पर पुनर्वास का इंतजाम नहीं।
भागलपुर | अतीश दीपंकर
बिहार में अदाणी पावर प्लांट परियोजना में जमीन जाने के बाद पहाड़िया जनजाति के आदिवासी समुदाय के सामने अस्तित्व का संकट खड़ा हो गया है।
भागलपुर जिले के पीरपैंती प्रखंड में 2400 मेगावाट का थर्मल पावर प्लांट बनाने के लिए करीब 1050 एकड़ जमीन पिछले साल राज्य सरकार ने अदाणी समूह को लीज़ पर दी है।
यह जमीन मात्र 1 रूपये सालाना की लीज़ पर दी गई है।
इस प्रखंड के हरिनकोल पहाड़िया टोला और संथाली टोला की जमीन भी इस परियोजना में अधिग्रहित है। इन दोनों टोलों के ग्रामीणों का आरोप है कि उनके रहने की वैकल्पिक व्यवस्था किए बिना ही उन्हें जमीन खाली करने के लिए नोटिस दिया जा रहा है, जिससे वे बेघर होने के कगार पर पहुंच गए हैं।
बता दें कि पहाड़िया जनजाति बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल और ओडिशा के पहाड़ी क्षेत्रों में निवास करने वाला एक प्राचीन, आदिम जनजाति (PVTG) समूह है। ये जनजाति आदिम तरीके से खेती, वनोपज संग्रह और प्रकृति पूजा पर निर्भर है।
इस परियोजना में जमीन जाने से सबसे अधिक पहाड़िया टोलों के लोग पीड़ित हैं। लेकिन अब तक पुनर्वास, रहने की व्यवस्था और बुनियादी सुविधाओं को लेकर कोई ठोस पहल नहीं की गई है।
ग्रामीणों का सवाल है कि घर और जमीन जाने के बाद वे कैसे रहेंगे, क्या खाएंगे, उनके पास पीने के साफ पानी तक का इंतजाम नहीं है और वे अपने बच्चों को कैसे पढ़ाएंगे?
ग्रामीणों का कहना है कि अगर उनकी समस्याओं का तुरंत समाधान नहीं हुआ तो वे अदानी पावर प्लांट के मुख्य द्वार पर अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू करेंगे। साथ ही, उनका कहना है कि जब तक पुनर्वास की व्यवस्था नहीं होती तब तक वे अपनी अधिग्रहित जमीन खाली नहीं करेंगे।
ग्रामीण रामदेव पहाड़िया, संतोषी हेमरबन, डब्लू मुर्मू और बज्जी मुर्मू ने बताया कि उन्हें बार-बार घर खाली करने को कहा जा रहा है।
वे इस परियोजना से जुड़ी जनसुनवाई में जाकर कई बार अपनी बात रख चुके हैं कि हम बेघर हो जाएंगे, हमारे रहने का इंतजाम किया जाए।
ग्रामीणों का कहना है कि अफसर उन्हें हर बार आश्वासन देते हैं कि घर बनाने के लिए जमीन दी जाएगी। साथ ही ग्रामीणों ने कब्रिस्तान के लिए भी जगह मांगी है, जिस पर आश्वासन मिला है। लेकिन ग्रामीणों का कहना है कि अब तक कोई उनके घरों की गिनती तक करने नहीं आया है, वे कैसे मान लें कि वादा पूरा होगा?
फिलहाल ग्रामीणों ने साफ कहा है कि जब तक पुनर्वास, घर बनाने के लिए जमीन, पीने का पानी और बच्चों की शिक्षा की व्यवस्था नहीं की जाती, तब तक वे अपनी जमीन खाली नहीं करेंगे और जरूरत पड़ने पर अदानी पावर प्लांट के मुख्य द्वार पर अनिश्चितकालीन हड़ताल करेंगे।
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