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रिपोर्टर की डायरी

मुंगेर में उत्पाद पुलिस की करतूत: शराब नहीं मिली तो दो लड़कों का अपहरण करके फिरौती मांगी

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दो युवकों को उत्पाद पुलिस ने अगवा करके फिरौती ली (इनसेट); पुलिस ने प्रेस कॉन्फ्रेंस करके गिरफ्तार आरोपी कॉस्टेंबल को मीडिया के सामने पेश किया।
दो युवकों को उत्पाद पुलिस ने अगवा करके फिरौती ली (इनसेट); पुलिस ने प्रेस कॉन्फ्रेंस करके गिरफ्तार आरोपी कॉस्टेंबल को मीडिया के सामने पेश किया।
  • मुंगेर में दो दोस्त इंटर की परीक्षा देने के बाद लापता हो गए थे।
  • उत्पाद पुलिस के तीन सिपाहियों ने दोनों का अपहरण कर लिया।
  • परिवार से ₹50 हजार की फिरौती मांगी, ₹16 हजार लेकर छोड़ा।
मुंगेर | प्रशांत कुमार सिंह
बिहार में शराबबंदी लागू कराने का जिम्मा जिस उत्पाद पुलिस के पास है, वह अपने अधिकार का गलत इस्तेमाल करके मासूम लोगों से रुपये ऐंठ रही है।मुंगेर जिले की उत्पाद पुलिस के ऊपर दो लड़कों का अपहरण करके उनके परिवार से फिरौती वसूलने का गंभीर मामला सामने आया है। मुंगेर पुलिस ने इस मामले में उत्पाद पुलिस के एक सिपाही को गिरफ्तार किया है जबकि बाकी तीन फरार हैं। 
यह पूरा मामला मुंगेर जिले के मालपुर ब्लॉक के केशोपुर नया टोला का है। यहां के निवासी रंजीत पासवान के 22 वर्षीय बेेटे अभिषेक कुमार और शंभु पासवान के 15 वर्षीय बेटे सत्यमेव कुमार को उत्पाद पुलिस ने अगवा कर लिया। ये दोनों आपस में चाचा-भतीजे हैं। बीती तीन फरवरी की शाम खाना खाने के बाद वे दोनों टहलने के लिए ईस्ट कॉलोनी थाना क्षेत्र के आरपीएफ मैदान के पास गए थे। इसी दौरान दो बाइक पर सवार चार पुलिसकर्मियों ने पूछताछ के बहाने दोनों लड़कों को रोका और हथियार के बल पर उनका अपहरण कर लिया। उन्होंने दोनों के मोबाइल फोन बंद करवा दिए और उन्हें कोलकाली होते हुए धरहरा-बिलोखर की ओर ले गए। जहां एक सुनसान जगह पर मारपीट करने के बाद हथियार दिखाकर घर पर फोन करवाया। 
अपहरण करने वाले पुलिस कर्मियों ने दोनों युवकों को शराब के साथ पकड़े जाने का झूठा आरोप लगाते हुए उनके परिजनों से 50 हजार रुपये की फिरौती मांगी। डरे-सहमे परिजनों को अपहरणकर्ताओं ने कई जगहों पर बुलाकर कई घंटों तक परेशान किया, फिर आखिरकार 16 हजार रुपये नकद वसूल करके माताडीह-भुरका रोड के एक सरकारी स्कूल के पास छोड़ दिया। यहां से परिजनों ने चार फरवरी की रात एक बजे अपने दोनों बेटों को बरामद किया। इस घटना के बाद अगले दिन पांच फरवरी को दोनों पीड़ित अपने पिता के साथ ईस्ट कॉलनी थाना पहुंचे और अज्ञात लोगों के खिलाफ अपहरण का मामला दर्ज कराया। 
इस मामले में एसपी सैयद इमरान मसूद के निर्देश पर बनी एसआईटी ने सीसीटीवी फुटेज के जरिए इस पूरी साजिश का खुलासा किया है। एसपी ने बताया कि  सीसीटीवी फुटेज खंगाले पर चौंकाने वाला खुलासा हुआ कि अपहरणकर्ता कोई पेशेवर अपराधी नहीं, बल्कि उत्पाद विभाग में तैनात सिपाही विकास कुमार, एमटीएस नीरज कुमार व उनके दो अन्य सहयोगी थे। एसपी के मुताबिक, उनकी टीम ने तुरंत आरोपी सिपाही विकास कुमार को गिरफ्तार कर लिया, जिसने पूछताछ में अपना अपराध स्वीकार किया है। 
सदर एसडीपीओ अभिषेक आनंद ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि तीन फरवरी की रात उत्पाद थाना के दारोगा पिंटू कुमार, सहायक अवर निरीक्षक रमाकांत कुमार, सिपाही विकास कुमार और एमटीएस नीरज कुमार शराब की तलाश में निकले थे। शराब बरामद नहीं होने पर दारोगा और एएसआई सरकारी वाहन से लौट गए, जबकि सिपाही विकास कुमार और एमटीएस नीरज कुमार वहीं रुक गए।  इसी दौरान दोनों युवकों को पूछताछ के बहाने उन्हें अगवा कर लिया।  एसडीपीओ ने बताया कि जांच में यह भी स्पष्ट हुआ है कि दोनों युवकों के पास न तो शराब थी और न ही शराब सेवन का कोई प्रमाण।
इसके बावजूद उन्हें झूठे केस में फंसाने की धमकी देकर पैसे की उगाही की गई।
पूछताछ में गिरफ्तार सिपाही ने यह भी स्वीकार किया कि वह पहले भी इस तरह युवकों को पकड़कर अवैध वसूली कर चुका है। फिलहाल इस मामले में एमटीएस नीरज कुमार व दो अन्य आरोपी फरार हैं, जिनकी गिरफ्तारी के लिए लगातार छापामारी की जा रही है। यह घटना उत्पाद पुलिस की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर रही है। आम लोगों के बीच भय और आक्रोश का माहौल है।
“जांच में साफ हुआ है कि शराब नहीं मिलने पर अपहरण कर फिरौती ली गई। दोषियों पर सख्त कार्रवाई होगी।” – अभिषेक आनंद, सदर एसडीपीओ

बोलते पन्ने.. एक कोशिश है क्लिष्ट सूचनाओं से जनहित की जानकारियां निकालकर हिन्दी के दर्शकों की आवाज बनने का। सरकारी कागजों के गुलाबी मौसम से लेकर जमीन की काली हकीकत की बात भी होगी ग्राउंड रिपोर्टिंग के जरिए। साथ ही, बोलते पन्ने जरिए बनेगा .. आपकी उन भावनाओं को आवाज देने का, जो अक्सर डायरी के पन्नों में दबी रह जाती हैं।

प्रदेश रिपोर्ट

रोहतास (बिहार) : बुकिंग के बाद भी नहीं मिल रही रसोई गैस, खाली सिलेंडर रखकर किया प्रदर्शन

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  • ऑनलाइन बुकिंग के बावजूद कई दिनों तक डिलीवर नहीं हो रहा सिलेंडर।
  • रोहतास जिले में परेशान लोगों ने खाली सिलेंडर के साथ किया प्रदर्शन।
  • नवादा में किल्लत को लेकर प्रदर्शन, मुजफ्फरपुर में डीएम आवास पहुंचे लोग।

सासाराम | अविनाश कुमार श्रीवास्तव

बिहार में रसोई गैस की किल्लत के आम लोग बेहद परेशान हैं, दूसरी ओर सभी जिलों के प्रशासन लगातार कह रहे हैं कि जिले में गैस की कोई कमी नहीं है।

रोहतास जिले में 7 अप्रैल को रसोई गैस न मिलने से गुस्साए आम लोगों ने सड़क जाम कर दी। लोगों ने अपने खाली सिलेंडर सड़क पर रखकर जोरदार प्रदर्शन किया।

साथ ही प्रशासन से सवाल किया कि अगर रसोई गैस की कमी नहीं है तो उन्हें बुकिंग करने के कई दिनों बाद भी सिलेंडर क्यों डिलीवर नहीं हो हुआ?

कई लोगों ने शिकायत की कि वे 15 दिन से एक महीने पहले गैस बुक कर चुके हैं लेकिन उनके घर पर सिलेंडर डिलीवर नहीं हुआ।

प्रदर्शन कर रहे लोगों ने गैस एजेंसी के मालिक और मैनेजर पर मिलीभगत का आरोप लगाया। उनका कहना है कि आम उपभोक्ताओं को गैस नहीं मिल रही, जबकि ब्लैक में आसानी से सिलेंडर उपलब्ध हो जा रहा है।

गुस्साए लोगों को शांत कराने के लिए SDM नेहा कुमारी, एसडीपीओ दिलीप कुमार और नगर थाना अध्यक्ष राजीव रंजन पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे।

उधर,  नवादा में 6 अप्रैल को घरेलू एलपीजी गैस की किल्लत, कालाबाजारी और बढ़ती कीमतों के विरोध में कांग्रेस ने जोरदार प्रदर्शन किया। जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष प्रभाकर झा के नेतृत्व में कार्यकर्ताओं ने रैली निकाली और मोदी सरकार के खिलाफ नारेबाज़ी की।

मुजफ्फरपुर के सिकंदरपुर इलाके के लोग गैस नहीं मिलने के बाद खाली सिलेंडर लेकर कंपनी बाग रोड स्थित डीएम आवास पहुंचे गए। लोगों ने मांग की कि जिला प्रशासन अपने दावे के मुताबिक ही गैस आपूर्ति कराए। आम लोगों को डीएम आवास के पुलिसकर्मियों व नगर थाना पुलिस ने वहां से समझाकर हटा दिया।

बिहार के लगभग हर जिले में हालात लगभग एक से हैं। आम लोग एजेंसी से लेकर गोदाम तक खाली सिलेंडर लेकर चक्कर लगा रहे हैं। जबकि प्रशासन का कहना है कि कहीं पर भी रसोई गैस की किल्लत नहीं है।

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प्रदेश रिपोर्ट

बिहार : शहर ही नहीं, गांवों में भी बदल रहे हैं प्रेम के मायने; बक्सर में दो महिलाओं ने साथ जीने का किया फैसला

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बक्सर में दो समलैंगिक जोड़े मंदिर पहुंचे और उन्होंने अपने रिश्ते से जुड़े धार्मिक रीति-रिवाज़ किए। (तस्वीर - बक्सर संवाददाता)
बक्सर में दो समलैंगिक जोड़े मंदिर पहुंचे और उन्होंने अपने रिश्ते से जुड़े धार्मिक रीति-रिवाज़ किए। (तस्वीर - बक्सर संवाददाता)
  •  18 व 32 साल की दो वयस्क महिलाओं ने साथ रहने की घोषणा की।
  • बिहार के बक्सर के एक गांव की रहने वाली हैं दोनों महिलाएं।
  • दोनों के परिवारों ने जान से मारने की धमकी दी, पुलिस सुरक्षा की मांग।

बक्सर | उमेश कुमार

भारत में समलैंगिक प्रेम संबंधों के बारे में अक्सर कहा जाता है कि ये शहरी माहौल से पैदा हुए प्रेम संबंध हैं। पर सच्चाई यह है कि जिस तरह विषम-लैंगिक प्रेम संबंधों के लिए शहर या गांव की सीमा का कोई खास मतलब नहीं, ठीक उसी तरह समलैंगिक प्रेम के मामले भी किसी एक क्षेत्र सीमा से बंधे नहीं हैं।

इसी कड़ी में बिहार के बक्सर के एक गांव की दो वयस्क महिलाओं के सहमति से साथ रहने की घोषणा करने का मामला सामने आया है। दोनों सोशल मीडिया के जरिए एक-दूसरे के संपर्क में आईं और आपस में प्रेम हो गया। दोनों महिलाओं ने बक्सर के प्रसिद्ध रामेश्वर नाथ मंदिर में माला बदलकर रस्म पूरी की, जिसमें कुछ स्थानीय लोग भी मौजूद थे।

दोनों महिलाओं ने स्थानीय मीडिया के सामने खुलकर अपने प्रेम व चुनौतियों के बारे में बताया। इनमें एक महिला की उम्र 18 वर्ष है जो खुद को पति की भूमिका में महसूस करती हैं। जबकि दूसरी महिला 32 साल की हैं जो खुद को इस समलैंगिक रिश्ते में पत्नी देखती हैं।

18 वर्षीय महिला का कहना है कि उनके पिता ने उन्हें सख्त चेतावनी दी है कि वे अब घर न आएं। उधर, 32 वर्षीय महिला का कहना है कि उनके पति नौकरी के लिए बाहर रहते हैं। उन्हें जब से इस रिश्ते का पता लगा, वे उन्हें जान से मार डालने की धमकी दे रहे हैं। इस समलैंगिक जोड़े ने मीडिया के सामने पुलिस सुरक्षा की मांग उठाई है। हालांकि यह स्पष्ट नहीं हो सका है कि उन्होंने स्थानीय पुलिस थाने को इस बारे में जानकारी दी है या नहीं।

32 वर्षीय महिला ने अपने पूर्व रिश्ते के बारे में बताया कि उनकी 2010 में शादी हुई थी और उनके दो बच्चे हैं। उनके मुताबिक, दोनों बच्चे पहले से ही एक करीबी रिश्तेदारी में रहते हैं। उन्होंने कहा कि वे अब अपने समलैंगिक रिश्ते में आगे बढ़ना चाहती हैं।

समलैंगिक जोड़े ने बताया कि बक्सर के मंदिर में आने से पहले वे  यूपी के मिर्जापुर गई थीं। वहां के अष्टभुजी मंदिर में जाकर उन्होंने अपने रिश्ते का धार्मिक विधि-विधान किया था। दोनों महिलाओं का कहना है कि वे आगे एक साथ ही रहेंगी, जो भी चुनौतियां आएंगी, उसका डटकर सामना करेंगी।

गौरतलब है कि साल 2018 में सुप्रीम कोर्ट ने ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए दो वयस्कों के बीच सहमति से बने समलैंगिक संबंधों को अपराध की श्रेणी से बाहर कर दिया था। हालांकि, भारत में अभी समलैंगिक विवाह को कानूनी मान्यता नहीं मिली है, लेकिन दो वयस्कों को अपनी मर्जी से साथ रहने (Live-in Relationship) का संवैधानिक अधिकार प्राप्त है।
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चुनावी डायरी

बिहार कांग्रेस में 11 साल बाद बड़ा बदलाव, लेकिन ‘सोशल इंजीनियरिंग’ पर क्यों नहीं बन रही सहमति?

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पटना स्थित कार्यालय में बिहार कांग्रेस के अध्यक्ष राजेश राम (फाइल फोटो - X/@INCBihar)
पटना स्थित कार्यालय में बिहार कांग्रेस के अध्यक्ष राजेश राम (फाइल फोटो - X/@INCBihar)

पटना | बिहार में कांग्रेस का आधार तेज़ी से घटा है, हाल में हुए विधानसभा चुनाव में इसने मात्र छह सीटें जीतीं।  ऐसे में 11 साल के बाद बिहार के ब्लॉक व जिला स्तर के नेतृत्व में 11 साल के बाद बड़े बदलाव किए जा रहे हैं। पर कांग्रेस के केंद्रीय नेतृत्व ने नए जिलाध्यक्षों की जो सूची जारी की है, इसको लेकर बिहार कांग्रेस में गहरी असहमति है।

बिहार कांग्रेस ने मांग की है कि नए जिलाध्यक्ष का चुनाव करते समय सामाजिक संतुलन को ध्यान रखा जाना चाहिए। बिहार के नेताओं ने ऐसा इसलिए कहा है क्योंकि केंद्रीय कांग्रेस की ओर से बिहार के नए नेतृत्व की जो सूची जारी की गई है उसमें 45 फीसदी नेता ऊंची जाति से हैं। ऐसे में बिहार कांग्रेस के नेताओं की मांग है कि उनकी ओर से जो लिस्ट प्रस्तावित थी, उस पर पुनर्विचार किया जाए।

53 में से 24 जिलाध्यक्ष अगड़ी जाति के

बता दें कि बिहार में 38 प्रशासनिक जिले हैं लेकिन कांग्रेस ने इसे 53 संगठनात्मक जिलों में बांटा है। बीती 30 मार्च को अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के महासचिव केसी वेणु गोपाल ने बिहार के नए जिलाध्यक्षों की एक सूची जारी की थी। इस सूची में 24 जिलाध्यक्ष उच्च जाति से संबंध हैं। 12 जिलाध्यक्ष ओबीसी से हैं जिसमें आठ यादव हैं। पांच जिलाध्यक्ष पिछड़ी जाति से, तीन अति पिछड़ी जाति से संबंधित हैं। इसके अलावा, आठ मुस्लिम व एक सिख धर्म से हैं।

‘नई सूची राहुल गांधी के संदेश के विपरीत’

बिहार कांग्रेस के अध्यक्ष राजेश राम के हवाले से इंडियन एक्सप्रेस ने लिखा है कि सही सामाजिक संतुलन बनाए रखने के लिए हम केंद्रीय नेतृत्व से सूची में संशोधन की मांग कर रहे हैं। साथ ही हम ब्लॉक जिलाध्यक्षों की भी एक अनुमानित लिस्ट बना रहे हैं।

गौरतलब है कि राहुल गांधी ने 2025 में बिहार में संविधान बचाओ यात्रा निकाली थी, इस दौरान स्थानीय नेताओं ने उनसे पार्टी में बड़े बदलावों की मांग की थी जो सोशल जस्टिस को दर्शाते हों।

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