आज के अखबार
हिंडनबर्ग रिपोर्ट : सेबी-अदाणी ‘गठजोड़’ को अखबारी कवरेज से समझें
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— Hindenburg Research (@HindenburgRes) August 10, 2024
Whistleblower Documents Reveal SEBI’s Chairperson Had Stake In Obscure Offshore Entities Used In Adani Money Siphoning Scandalhttps://t.co/3ULOLxxhkU
नई दिल्ली |
अदाणी समूह पर सनसनीखेज खुलासे करने वाली अमेरिकी शॉर्टसेलर फर्म हिंडनबर्ग रिसर्च ने एक बार फिर अपनी खोजी रिपोर्ट के जरिए बड़े आरोप लगाए हैं। अपनी ताजा रिपोर्ट में हिंडनबर्ग ने गोपनीय दस्तावेजों के आधार पर दावा किया है कि सेबी (सिक्योरिटी एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया) की चेयरपर्सन माधवी पुरी बुच भी अदाणी समूह के साथ मिली हुई थीं। आरोप है कि इस कंपनी में बुच की 8.7 लाख डॉलर की हिस्सेदारी थी। इस तथाकथित गठजोड़ के आधार पर हिंडनबर्ग रिसर्च ने आरोप लगाया कि अदाणी पर सेबी ने कार्रवाई में रुचि नहीं दिखाई जबकि इस मामले पर सभी प्रमुख जानकारियां उपलब्ध करवा दी गई थीं।
आज के अखबार में इस बड़ी खबर की कवरेज की समीक्षा करेंगे क्योंकि हिंडनबर्ग के दावे ने एक बार फिर नरेंद्र मोदी नेतृत्व वाली केंद्र सरकार पर भ्रष्टाचार के आरोप लगा दिए हैं। हिन्दी के अखबारों के पहले पन्ने पर इस खबर को इतना छोटा छापा गया है कि पाठकों की नजर में ये खबर ही न आ सके। 11 अगस्त के संस्करणों की कवरेज के जरिए इस मामले को विस्तार से समझिए।
कांग्रेस ने जेसीपी की मांग उठाई, टीएमसी ने मांगा इस्तीफा
पहले बता दें कि इस खबर को 11 अगस्त के इंडियन एक्सप्रेस ने पहले पन्ने की प्रमुख खबर बनाया है। ऐसा करने वाला यह देश का एकमात्र अखबार है। हेडिंग है – Sebi chief had stake in Adani offshore entities, hence didn’t act : Hindenburg. (अनुवाद – अदाणी की ऑफशोर कंपनियों में सेबी चीफ की हिस्सेदारी थी जिसके चलते उन्होंने कार्रवाई नहीं की : हिन्डनबर्ग)। एक्सप्रेस ने लिखा है कि हिंडनबर्ग रिपोर्ट के प्रतिक्रिया में कांग्रेस ने ‘अदाणी मेगा स्कैम’ की जांच संयुक्त संसदीय समिति (जेसीपी) से कराने की मांग की है जबकि तृणमूल कांग्रेस ने सेबी प्रमुख का इस्तीफा मांगा है। इस खबर में बताया गया है कि 18 महीने पहले हिंडनबर्ग ने जिस अदाणी मनी साइफिंग घोटाले का दावा किया था, उसी से जुड़े अस्पष्ट ऑफशोर संस्थाओं में सेबी प्रमुख व पति की हिस्सेदारी थी।
सेबी प्रमुख बनने से पहले अदाणी समूह में हिस्सेदारी पति को सौंपी
अंग्रेजी के एक अन्य प्रमुख अखबार द टाइम्स ऑफ इंडिया (TOI) ने इसे पहले पन्ने पर दूसरी बड़ी स्टोरी बनाया है, जिसमें हिंडनबर्ग रिपोर्ट के हवाले से बताया गया है कि सेबी प्रमुख बनने से पहले बच व उनके पति के अदाणी कंपनी में स्टेक थे। सेबी चेयरपर्सन बनने के दो सप्ताह पहले माधवी पुरी बुच ने ये हिस्सेदारी अपने पति धवल बुच को स्थानांतरित कर दी थी। हालांकि सेबी में बुच होलटाइम मेंबर के तौर पर 2017 से ही जुड़ी हुई थीं। TOI ने लिखा कि शनिवार देर शाम जारी की गई इस रिपोर्टर पर बुच दंपति ने रात डेढ़ बजे एक्स पर बयान जारी करके आरोपों को निराधार बताया और कहा कि उनका वित्तीय लेनदेन एक खुली किताब है। द हिन्दू ने भी टाइम्स ऑफ इंडिया की तरह इस खबर को पहले पन्ने की दूसरी मेन स्टोरी बनाया है।
हिन्दी अखबारों के पहले पन्ने पर खबर को प्रमुखता नहीं मिली
दैनिक हिन्दुस्तान अखबार ने इस बड़ी खबर को पहले पन्ने पर सिर्फ सिंगल कॉलम मेें लगाया है। अंदर के पेज 17 पर इस खबर की विस्तृत रिपोर्ट छापी है (जिसका स्क्रीन शॉट ऊपर संलग्न है)। दैनिक जागरण के पहले पन्ने के निचले हिस्से में इस खबर को मात्र आधा कॉलम लगाया गया है, अर्थ संबंधी खबरों के पन्ने पर नीचे की ओर दो कॉलम में बाकी की खबर दी है। दोनों ही अखबारों ने इस मामले में विपक्ष की प्रतिक्रिया को नहीं छापा है। इन दोनों अखबारों के मुकाबले अमर उजाला ने पहले पन्ने पर ज्यादा स्थान दिया है, करीब डेढ़ कॉलम में खबर लिखी है हालांकि इस पर अंदर कोई विस्तृत रिपोर्ट नहीं है।
सेबी ने सुप्रीम कोर्ट को नहीं दी थी शेयरधारकों की जानकारी
जागरण ने अंदर के पेज पर लगाई अपनी खबर में लिखा है कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश का हवाला देते हुए हिंडनबर्ग ने कहा कि सेबी ने अपनी जांच में अदाणी के ऑफशोर शेयरधारकों के वित्तपोषण की कोई जानकारी नहीं दी है। अगर सेबी वास्तव में ऑफशोर फंडधारकों को ढूंढना चाहता था तो शायद अपने चेयरपर्सन से जांच शुरू कर सकता था। हिंडनबर्ग ने लिखा है कि हमें इसमें कोई आश्चर्य नहीं है कि सेबी ऐसी जांच करने में अनिच्छुक था जो उसे अपने चेयरपर्सन तक ले जा सकता था। इस खबर की शुरुआत में जागरण ने लिखा है कि हिंडनबर्ग की पहली रिपोर्ट को जांच के आधार पर सुप्रीम कोर्ट खारिज कर चुका है।
18 महीने पहले अदाणी पर आई थी हिंडनबर्ग की पहली रिपोर्ट
जनवरी-2023 में बजट सत्र शुरू होने से ठीक पहले हिंडनबर्ग रिसर्च की पहली रिपोर्ट प्रकाशित हुई थी, जिससे पूरे संसद सत्र में हंगामा मचा था। उस रिपोर्ट में आरोप लगाए गए थे कि अदाणी समूह के चेयरमैन गौतम अदाणी के बड़े भाई विनोद अदाणी अस्पष्ट ऑफशोर बरमूडा और मॉरीशस फंड को नियंत्रित करते हैं और इनका इस्तेमाल पैसों की हेराफेरी व शेयरों की कीमत बढ़ाने के लिए किया गया था। इस रिपोर्ट के बाद सुप्रीम कोर्ट ने छह सदस्यीय कमेेटी बनाई थी और सेबी से भी जांच पूरी करने का अतिरिक्त समय देते हुए जांच करने को कहा था। इस रिपोर्ट को इस साल मई में सार्वजनिक कर दिया गया, जिसमें कहा गया कि अडाणी के शेयरों की कीमत में कथित हेरफेर के पीछे सेबी के नाकाम होने से जुड़े किसी नतीजे पर नहीं पहुंचा जा सकता। कमेटी ने ये भी कहा था कि ग्रुप की कंपनियों में विदेशी फंडिंग पर सेबी की जांच बेनतीजा रही है। इस रिपोर्ट में कहा गया कि अडाणी ग्रुप के शेयरों में वॉश ट्रेड (खुद ही शेयर खरीदने व बेचने) का कोई भी पैटर्न नहीं मिला है।
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जेरुशलम पोस्ट : इजरायली दौरे पर पीएम मोदी को लेकर ऐसा क्या लिखा जो चर्चा बन गया?
आज के अखबार
भारत-EU संयुक्त बयान में ऐसा क्या, जिसे यूक्रेन पर भारत के बदले रुख की तरह देखा जा रहा?
- भारत-यूरोपीय संघ शिखर सम्मेलन में रूस-यूक्रेन युद्ध पर संयुक्त बयान जारी हुआ जो नई दिल्ली के पुराने रूख से अलग।
नई दिल्ली|
भारत और यूरोपीय संघ के बीच 27 जनवरी को हुई शिखर वार्ता के दौरान FTA समझौते पर वार्ता पूरी होने के साथ एक और अहम घटना हुई। भारत-यूरोपीय संघ ने रूस-यूक्रेन युद्ध को लेकर एक संयुक्त बयान जारी किया, जिसमें इस युद्ध को लेकर भारत का बयान अपने पूर्व के बयानों से अलग है। संयुक्त बयान में भारत-यूरोपीय संघ ने कहा है कि “वे ऐसे प्रयासों का समर्थन करेंगे जो स्वतंत्रता, संप्रभु, क्षेत्रीय अखंडता पर आधारित हो।”
द इंडियन एक्सप्रेस ने इस बयान को लेकर लिखा है कि भारत का यह बयान यूक्रेन पर उसके पुराने रूख से बिल्कुल अलग है क्योंकि चार साल से जारी युद्ध को लेकर कभी भारत ने यूक्रेन पर रूसी आक्रामकता का खंडन नहीं किया था। भारत का यह रूख ही पिछले चार साल से यूरोपीय संघ और भारत के बीच बड़ा रोड़ा बना हुआ था। अखबार ने लिखा है कि भारत की नई पोजिशन रूस हित के विपरीत है क्योंकि 2022 में रूस ने यूक्रेन पर आक्रमण करके उसकी स्वतंत्रता, संप्रभुता व क्षेत्रीय अखंडता को प्रभावित किया है।
EU ने भारत से रूस पर दवाब डालने को कहा
द हिन्दू ने यूरोपीय संघ की विदेश नीति प्रमुख काज़ा कल्लास के हवाले से लिखा है कि शिखर सम्मेलन के दौरान यूरोपीय संघ ने भारत से कहा कि वह रूस पर यूक्रेन युद्ध को लेकर दवाब बनाए। कल्लास ने शिखर सम्मेलन के तुरंत बाद हुए थिंक टैंक इवेंट में कहा कि रूस ने यूक्रेन के साथ संघर्ष विराम पर हस्ताक्षर करने से मना कर दिया है और आम नागरिकों पर बमबारी कर रहा है। इस मामले में हमने अपने भारतीय सहयोगी से कहा है कि वे रूस पर शांति के रास्ते पर आगे बढ़ने के लिए दवाब बनाएं।
बोर्ड ऑफ पीस पर क्या रूख ?
ट्रंप के बनाए Board of Peace को लेकर भी संयुक्त बयान में जिक्र है, अखबार के मुताबिक दोनों ने इसके गज़ा में शांति व पुर्ननिर्माण के उद्देश्य से समर्थन जताया है, हालांकि दोनों ही इसके उद्देश्य को गज़ा तक ही सीमित रखने का संकेत दे रहे हैं। दोनों ने ही अब तक ट्रंप के बनाए इस बोर्ड को ज्वाइन नहीं किया है।
ईरान पर क्या रुख ?
ईरान में हुए प्रदर्शन को लेकर संयुक्त बयान में कहा गया है कि वे चाहते हैं कि इस स्थिति को डिप्लोमेसी व वार्ता के जरिए सुलझाया जाए। अखबार का कहना है कि इस तरह भारत व ईयू ब्लॉक संदेश दे रहा है कि ईरान के खिलाफ अमेरिका व यूरोपीय संघ की आक्रामकता के वे पक्षधर नहीं हैं।
आज के अखबार
भारत के ये राज्य 10 साल बाद हो जाएंगे बूढ़े, Aging आबादी पर सरकारी रुख से क्यों चिंतित The Hindu?
- RBI के मुताबिक, भारत के राज्यों में असमान रूप से सांख्यिकी बदलेगी।
क्या है द हिन्दू की चिंता
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