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प्रदेश रिपोर्ट

पटना नगर निगम की नेक पहल: सफाई कर्मियों के बच्चे को मुफ्त में करायी जाएगी कॉम्पिटीशन की तैयारी

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बिहार में सफाई कर्मियों के बच्चों को पढ़ाई के समान अवसर दिलाने के लिए नगर निगम ने नेक पहल शुरू की है। (प्रतीकात्मक तस्वीर)
बिहार में सफाई कर्मियों के बच्चों को पढ़ाई के समान अवसर दिलाने के लिए नगर निगम ने नेक पहल शुरू की है। (प्रतीकात्मक तस्वीर)

पटना | सफाई कर्मियों के बच्चों को प्रतियोगी परीक्षाओं (Competitive Exams) की फ्री कोचिंग उपलब्ध कराने की नेक पहल शुरू हुई है। पटना नगर निगम (PMC) ने इन परिवारों के बच्चों के सुनहरे भविष्य के लिए ‘प्रोजेक्ट उड़ान’ की शुरुआत की है।

इसके तहत निगम के स्थायी, दैनिक वेतनभोगी और आउटसोर्सिंग व्यवस्था से जुड़े सभी सफाई कर्मियों, सफाई निरीक्षकों और मुख्य सफाई निरीक्षकों के बच्चों को लाभ मिलेगा।

नगर आयुक्त यशपाल मीणा ने कहा,

“निगम के सफाई कर्मियों और उनके परिवारों को सम्मानपूर्ण जीवन देना हमारी जिम्मेदारी है।” ‘प्रोजेक्ट उड़ान’ का उद्देश्य केवल बच्चों को कोचिंग उपलब्ध कराना नहीं, बल्कि उनके सपनों को साकार करने का अवसर देना है। उनके बच्चों को बेहतर अवसर मिल सकें और समाज में समानता स्थापित हो सके।”

 निगम प्रशासन ने उड़ान प्रोजेक्ट के तहत प्रतिभाशाली बच्चों को अवसर उपलब्ध कराने के लिए पटना के प्रतिष्ठित कोचिंग संस्थानों के साथ हाथ मिलाया है।

इसके पहले चरण में सफाईकर्मियों के बच्चों का चयन एक स्क्रीनिंग टेस्ट के आधार पर किया जाएगा। जिसके बाद उन्हें एसएससी (SSC), बैंकिंग, रेलवे और अन्य सरकारी नौकरियों की तैयारी कराई जाएगी।

असिस्टेंट पब्लिक सैनिटरी एंड वेस्ट मैनेजमेंट ऑफिसर की ओर से पटना नगर निगम के सभी अंचलों में सफाई कर्मियों के परिवारों से संपर्क कर योग्य अभ्यर्थियों की सूची तैयार की जा रही है। सोमवार तक 35 अभ्यर्थियों ने इस पहल का लाभ लेने में रूचि दिखाई है। इच्छुक विद्यार्थियों का चयन उनके शैक्षणिक प्रदर्शन के आधार पर किया जाएगा।

जानकारी के मुताबिक, इसके बाद प्रारंभिक परीक्षा आयोजित कर अंतिम चयन सूची तैयार की जाएगी। फिलहाल अभ्यर्थियों की संख्या पर कोई सीमा निर्धारित नहीं की गई है। विद्यार्थियों की पढ़ाई और अन्य आवश्यक खर्चों के लिए CSR साझेदारी (कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व) के माध्यम से पूरी वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई जाएगी।

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रोहतास (बिहार) : बुकिंग के बाद भी नहीं मिल रही रसोई गैस, खाली सिलेंडर रखकर किया प्रदर्शन

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  • ऑनलाइन बुकिंग के बावजूद कई दिनों तक डिलीवर नहीं हो रहा सिलेंडर।
  • रोहतास जिले में परेशान लोगों ने खाली सिलेंडर के साथ किया प्रदर्शन।
  • नवादा में किल्लत को लेकर प्रदर्शन, मुजफ्फरपुर में डीएम आवास पहुंचे लोग।

सासाराम | अविनाश कुमार श्रीवास्तव

बिहार में रसोई गैस की किल्लत के आम लोग बेहद परेशान हैं, दूसरी ओर सभी जिलों के प्रशासन लगातार कह रहे हैं कि जिले में गैस की कोई कमी नहीं है।

रोहतास जिले में 7 अप्रैल को रसोई गैस न मिलने से गुस्साए आम लोगों ने सड़क जाम कर दी। लोगों ने अपने खाली सिलेंडर सड़क पर रखकर जोरदार प्रदर्शन किया।

साथ ही प्रशासन से सवाल किया कि अगर रसोई गैस की कमी नहीं है तो उन्हें बुकिंग करने के कई दिनों बाद भी सिलेंडर क्यों डिलीवर नहीं हो हुआ?

कई लोगों ने शिकायत की कि वे 15 दिन से एक महीने पहले गैस बुक कर चुके हैं लेकिन उनके घर पर सिलेंडर डिलीवर नहीं हुआ।

प्रदर्शन कर रहे लोगों ने गैस एजेंसी के मालिक और मैनेजर पर मिलीभगत का आरोप लगाया। उनका कहना है कि आम उपभोक्ताओं को गैस नहीं मिल रही, जबकि ब्लैक में आसानी से सिलेंडर उपलब्ध हो जा रहा है।

गुस्साए लोगों को शांत कराने के लिए SDM नेहा कुमारी, एसडीपीओ दिलीप कुमार और नगर थाना अध्यक्ष राजीव रंजन पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे।

उधर,  नवादा में 6 अप्रैल को घरेलू एलपीजी गैस की किल्लत, कालाबाजारी और बढ़ती कीमतों के विरोध में कांग्रेस ने जोरदार प्रदर्शन किया। जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष प्रभाकर झा के नेतृत्व में कार्यकर्ताओं ने रैली निकाली और मोदी सरकार के खिलाफ नारेबाज़ी की।

मुजफ्फरपुर के सिकंदरपुर इलाके के लोग गैस नहीं मिलने के बाद खाली सिलेंडर लेकर कंपनी बाग रोड स्थित डीएम आवास पहुंचे गए। लोगों ने मांग की कि जिला प्रशासन अपने दावे के मुताबिक ही गैस आपूर्ति कराए। आम लोगों को डीएम आवास के पुलिसकर्मियों व नगर थाना पुलिस ने वहां से समझाकर हटा दिया।

बिहार के लगभग हर जिले में हालात लगभग एक से हैं। आम लोग एजेंसी से लेकर गोदाम तक खाली सिलेंडर लेकर चक्कर लगा रहे हैं। जबकि प्रशासन का कहना है कि कहीं पर भी रसोई गैस की किल्लत नहीं है।

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बिहार : जहानाबाद में आवासीय स्कूल में 5 साल के बच्चे की मौत, पिता बोले- ‘बेटे की हत्या हुई’

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स्कूल के ऑफिस में जांच करती जहानाबाद पुलिस।
स्कूल के ऑफिस में जांच करती जहानाबाद पुलिस। (तस्वीर - X/spjehanabad)

जहानाबाद |

बिहार के जहानाबाद में एक निजी आवासीय स्कूल में 5 साल के बच्चे की मौत हो गई है। परिजनों का कहना है कि उनके बच्चे को चाकू मारा गया है। जबकि पुलिस ने हॉस्टल इंचार्ज के हवाले से कहा है कि बच्चे की बिल्डिंग से गिरकर मौत हुई। फिलहाल पुलिस ने हॉस्टल को बंद कर दिया है।

स्कूल में बेटे की मौत के बाद हाईवे पर प्रदर्शन करते परिजन।

स्कूल में बेटे की मौत के बाद हाईवे पर प्रदर्शन करते परिजन।

6 मार्च को हुई इस घटना से गुस्साए परिजनों ने गया-पटना नेशनल हाई-वे 22 को जाम कर दिया। पुलिस के समझाने के बाद वे लोग सड़क से हटे। पुलिस ने हॉस्टल इंचार्ज को हिरासत में ले लिया है, जबकि इस स्कूल का बाकी स्टाफ फरार हो गया है। घटना के बाद अन्य विद्यार्थियों के परिजन भी पहुंचे और अपने-अपने बच्चों को लेकर चले गए हैं।

घटना के बाद रात तक पुलिसकर्मी तैनात रहे।

इस घटना में जान गंवाने वाले पांच साल के बच्चे का नाम आशु कुमार है।  बुलाकी बीघा गांव के धनंजय कुमार ने बताया कि उनका बेटा आशु लोदीपुर स्थित गुरुकुल हॉस्टल में UKG कक्षा में पढ़ता था।

बता दें कि गुरुकुल हॉस्टल गयाजी-पटना नेशनल हाईवे पर है। तीन मंजिल के इस भवन में नीचे स्कूल चलता है और ऊपर की दो मंजिलों में बच्चों के लिए हॉस्टल है। इस हॉस्टल में 100 से ज्यादा बच्चे रहते थे।

मृतक बच्चे के पिता धनंजय कुमार ने बताया कि

“सोमवार की सुबह 6 बजे हॉस्टल से फोन आया कि आपके बेटे की तबीयत खराब है। जब हम लोग हॉस्टल पहुंचे तो देखा कि आशु के गर्दन और आंख पर चाकू से वार के निशान हैं।”

धनंजय कुमार का कहना है कि हम बेटे को तुरंत सदर अस्पताल ले गए, जहां से PMCH के लिए रेफर कर दिया गया। आशु ने रास्ते में ही दम तोड़ दिया।

छात्र के पिता धनंजय कुमार ने आरोप लगाया कि शिक्षकों की लापरवाही के कारण उनके बच्चे की मौत हुई है।

जहानाबाद SDPO मनीष चंद्र चौधरी ने बताया कि

“एक बच्चे की मौत हुई है। परिजन ने चाकू मारकर हत्या का आरोप लगाया है। लेकिन हॉस्टल इंचार्ज गिरने से मौत की बात कर रहे हैं। फिलहाल पुलिस हॉस्टल इंचार्ज को हिरासत में लिया है।”

बच्चे के शव को कब्जे में लेकर पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया गया है। रिपोर्ट आने के बाद ही मौत के कारण का खुलासा हो सकेगा। पुलिस हर एंगल से जांच कर रही है।

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बिहार : शहर ही नहीं, गांवों में भी बदल रहे हैं प्रेम के मायने; बक्सर में दो महिलाओं ने साथ जीने का किया फैसला

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बक्सर में दो समलैंगिक जोड़े मंदिर पहुंचे और उन्होंने अपने रिश्ते से जुड़े धार्मिक रीति-रिवाज़ किए। (तस्वीर - बक्सर संवाददाता)
बक्सर में दो समलैंगिक जोड़े मंदिर पहुंचे और उन्होंने अपने रिश्ते से जुड़े धार्मिक रीति-रिवाज़ किए। (तस्वीर - बक्सर संवाददाता)
  •  18 व 32 साल की दो वयस्क महिलाओं ने साथ रहने की घोषणा की।
  • बिहार के बक्सर के एक गांव की रहने वाली हैं दोनों महिलाएं।
  • दोनों के परिवारों ने जान से मारने की धमकी दी, पुलिस सुरक्षा की मांग।

बक्सर | उमेश कुमार

भारत में समलैंगिक प्रेम संबंधों के बारे में अक्सर कहा जाता है कि ये शहरी माहौल से पैदा हुए प्रेम संबंध हैं। पर सच्चाई यह है कि जिस तरह विषम-लैंगिक प्रेम संबंधों के लिए शहर या गांव की सीमा का कोई खास मतलब नहीं, ठीक उसी तरह समलैंगिक प्रेम के मामले भी किसी एक क्षेत्र सीमा से बंधे नहीं हैं।

इसी कड़ी में बिहार के बक्सर के एक गांव की दो वयस्क महिलाओं के सहमति से साथ रहने की घोषणा करने का मामला सामने आया है। दोनों सोशल मीडिया के जरिए एक-दूसरे के संपर्क में आईं और आपस में प्रेम हो गया। दोनों महिलाओं ने बक्सर के प्रसिद्ध रामेश्वर नाथ मंदिर में माला बदलकर रस्म पूरी की, जिसमें कुछ स्थानीय लोग भी मौजूद थे।

दोनों महिलाओं ने स्थानीय मीडिया के सामने खुलकर अपने प्रेम व चुनौतियों के बारे में बताया। इनमें एक महिला की उम्र 18 वर्ष है जो खुद को पति की भूमिका में महसूस करती हैं। जबकि दूसरी महिला 32 साल की हैं जो खुद को इस समलैंगिक रिश्ते में पत्नी देखती हैं।

18 वर्षीय महिला का कहना है कि उनके पिता ने उन्हें सख्त चेतावनी दी है कि वे अब घर न आएं। उधर, 32 वर्षीय महिला का कहना है कि उनके पति नौकरी के लिए बाहर रहते हैं। उन्हें जब से इस रिश्ते का पता लगा, वे उन्हें जान से मार डालने की धमकी दे रहे हैं। इस समलैंगिक जोड़े ने मीडिया के सामने पुलिस सुरक्षा की मांग उठाई है। हालांकि यह स्पष्ट नहीं हो सका है कि उन्होंने स्थानीय पुलिस थाने को इस बारे में जानकारी दी है या नहीं।

32 वर्षीय महिला ने अपने पूर्व रिश्ते के बारे में बताया कि उनकी 2010 में शादी हुई थी और उनके दो बच्चे हैं। उनके मुताबिक, दोनों बच्चे पहले से ही एक करीबी रिश्तेदारी में रहते हैं। उन्होंने कहा कि वे अब अपने समलैंगिक रिश्ते में आगे बढ़ना चाहती हैं।

समलैंगिक जोड़े ने बताया कि बक्सर के मंदिर में आने से पहले वे  यूपी के मिर्जापुर गई थीं। वहां के अष्टभुजी मंदिर में जाकर उन्होंने अपने रिश्ते का धार्मिक विधि-विधान किया था। दोनों महिलाओं का कहना है कि वे आगे एक साथ ही रहेंगी, जो भी चुनौतियां आएंगी, उसका डटकर सामना करेंगी।

गौरतलब है कि साल 2018 में सुप्रीम कोर्ट ने ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए दो वयस्कों के बीच सहमति से बने समलैंगिक संबंधों को अपराध की श्रेणी से बाहर कर दिया था। हालांकि, भारत में अभी समलैंगिक विवाह को कानूनी मान्यता नहीं मिली है, लेकिन दो वयस्कों को अपनी मर्जी से साथ रहने (Live-in Relationship) का संवैधानिक अधिकार प्राप्त है।
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