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Rupee vs Dollar : महंगाई की मार के बीच रुपया हुआ ‘धड़ाम’! एशिया में सबसे बुरा हाल, जानें 4 बड़े कारण

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डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया लगातार कमजोर हो रहा है। (तस्वीर - प्रतीकात्मक)
डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया लगातार कमजोर हो रहा है। (तस्वीर - प्रतीकात्मक)
  • 2025 में 4.3% टूटा रुपया, बना एशिया की ‘सबसे खराब’ प्रदर्शन करने वाली करेंसी
  • US टेरिफ और गोल्ड इंपोर्ट ने बिगाड़ा खेल, डॉलर के मुकाबले 90 के स्तर तक गिरने का खतरा

  • RBI ने बचाने के लिए झोंके $38 बिलियन, अब ‘ट्रेड डील’ पर टिकी हैं उम्मीदें

 

नई दिल्ली |

भारतीय अर्थव्यवस्था (Indian Economy) के लिए एक चिंताजनक खबर सामने आई है। कैलेंडर वर्ष 2025 (जनवरी-दिसंबर) में अमेरिकी डॉलर (USD) के मुकाबले भारतीय रुपया (INR) (Rupee) 4.3% की भारी गिरावट के साथ एशिया (Asia) की सबसे खराब प्रदर्शन करने वाली मुद्रा बन गया है।

विदेशी मुद्रा विश्लेषकों (Forex Analysts) ने चेतावनी दी है कि अगर निकट भविष्य में अमेरिका के साथ व्यापार समझौता नहीं होता है, तो रुपया और गिरकर 90 प्रति डॉलर के स्तर तक पहुंच सकता है। इस गिरावट के पीछे मुख्य कारण अमेरिकी टेरिफ, विदेशी निवेश की निकासी और सोने के आयात में भारी उछाल बताया जा रहा है।

21 नवंबर को छुआ था अब तक का निचला स्तर

रुपये की हालत खस्ता बनी हुई है। 21 नवंबर 2025 को यह 89.66 के अब तक के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया था। हालांकि, इसके बाद थोड़ी रिकवरी हुई और मंगलवार को यह 89.22 के आसपास कारोबार कर रहा था। विश्लेषकों का कहना है कि रुपये की चाल अब घरेलू बुनियादी ढांचे से ज्यादा डॉलर की वैश्विक मजबूती (Global Dollar Strength) पर निर्भर कर रही है। जहां इंडोनेशियन रुपिया (Indonesian Rupiah) में 2.9% और फिलीपीन पेसो (Philippine Peso) में 1.3% की गिरावट आई है, वहीं भारतीय रुपये ने 4% से ज्यादा की गिरावट दर्ज की है।

क्यों रसातल में जा रहा है रुपया? (4 बड़े कारण)

विशेषज्ञों ने रुपये की इस दुर्दशा के लिए कई कारणों को जिम्मेदार ठहराया है:

  1. अमेरिकी टेरिफ की मार: ट्रम्प प्रशासन (Trump Administration) द्वारा भारत पर लगाए गए 50% टेरिफ ने निर्यात को बुरी तरह प्रभावित किया है। इसके चलते अक्टूबर में व्यापार घाटा (Trade Deficit) रिकॉर्ड 41.7 बिलियन डॉलर तक पहुंच गया, जिससे रुपये पर दबाव बढ़ गया।

  2. सोने की चमक ने बढ़ाई मुश्किल: इस साल सोने की कीमतों में उछाल ने लोगों को निवेश के लिए प्रेरित किया। अक्टूबर में सोने की मांग 200% बढ़ गई, जिससे गोल्ड इंपोर्ट बिल (Gold Import Bill) 14.72 बिलियन डॉलर तक पहुंच गया।

  3. विदेशी निवेशकों का मोहभंग: शेयर बाजार (Stock Market) में विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) द्वारा लगातार की जा रही बिकवाली ने भी पूंजी के बहिर्वाह (Capital Outflows) के जरिए रुपये को कमजोर किया है।

  4. ट्रेड डील में देरी: भारत और अमेरिका के बीच बहुप्रतीक्षित व्यापार समझौते में हो रही देरी ने बाजार की भावनाओं को आहत किया है।

RBI ने बचाने के लिए खर्च किए $38 बिलियन

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) रुपये को बचाने के लिए लगातार कोशिश कर रहा है। आंकड़ों के मुताबिक, केंद्रीय बैंक ने जनवरी से सितंबर 2025 के बीच स्पॉट मार्केट में रिकॉर्ड 38 बिलियन डॉलर की बिक्री की है ताकि मुद्रा को संभाला जा सके। यह पिछले तीन सालों में सबसे बड़ा हस्तक्षेप है।

क्या सुधरेंगे हालात?

जियोजित इन्वेस्टमेंट्स (Geojit Investments) के मुख्य निवेश रणनीतिकार वी.के. विजयकुमार का कहना है कि अगर भारत पर उचित टेरिफ के साथ व्यापार समझौता जल्द हो जाता है, तो रुपये में वापसी हो सकती है। अनुमान है कि रुपया पहले 90 तक गिर सकता है और फिर 2026 की पहली तिमाही में सुधरकर 88.50 के आसपास आ सकता है। हालांकि, इसके लिए अमेरिका के साथ संबंधों और वैश्विक बाजार की स्थिरता अहम होगी।

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ईरान के नतांज परमाणु केंद्र पर भीषण हमला, जवाबी ऐक्शन में इजरायल के ईंधन विमान गिराए

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नतांज परमाणु केंद्र (तस्वीर - X)
नई दिल्ली | ईरान के सबसे महत्वपूर्ण परमाणु संवर्धन केंद्र – नतांज (Natanz) पर एक बार फिर भीषण हमला किया है। ईरान ने दावा किया है कि अमेरिका-इज़रायल ने संयुक्त रूप से ये हमला किया है।
इसके जवाब में ईरान ने इज़रायल पर मिसाइल हमला करके उसके ईंधन विमानों को निशाना बनाया है। साथ ही, सऊदी अरब, यूएई में भी जोरदार ड्रोन हमले किए हैं। यूएई में हमलों के बाद दो सैनिक व छह विदेशी नागरिकों की मौत हो गई है। इस पूरे घटनाक्रम ने 22वें दिन युद्ध को और भीषण बना दिया है। 
 

बंकर ध्वस्त करने वाले बम से परमाणु केंद्र पर हमला

इससे पहले, ईरानी परमाणु ऊर्जा संगठन (AEOI) ने बयान जारी कर कहा कि नतांज में स्थित शहीद अहमदी रोशन संवर्धन सुविधा पर शनिवार सुबह हमला किया गया। तेहरान से 220 किमी दक्षिण-पूर्व में स्थित यह सुविधा ईरान के यूरेनियम संवर्धन कार्यक्रम का केंद्र है। ईरान ने कहा कि इस हमले में आधुनिक ‘बंकर बस्टर’ बमों का इस्तेमाल हुआ, जो भूमिगत संरचनाओं को निशाना बनाने के लिए डिजाइन किए जाते हैं।

12 दिनों के युद्ध में भी बना था निशाना 

एक सप्ताह पहले भी नतांज पर हमला हुआ था। साथ ही, पिछले साल जून में इजरायल-ईरान के 12 दिनों के युद्ध में भी इस परमाणु केंद्र को निशाना बनाया गया था।  बाद में अमेरिका ने भी हमला किया। 

रेडियोधर्मी रिसाव का खतरा टला

राहत की बात यह है कि ईरानी तकनीकी टीम और अंतरराष्ट्रीय पर्यवेक्षकों ने पुष्टि की है कि हमले के बाद क्षेत्र में कोई रेडियोधर्मी रिसाव (radioactive leakage) नहीं हुआ है। आसपास की नागरिक आबादी सुरक्षित बताई जा रही है।

IAEA की चेतावनी

अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) के महानिदेशक राफेल ग्रॉसी ने तत्काल बयान जारी कर कहा कि “परमाणु सुविधाओं को युद्ध का हिस्सा नहीं बनाया जाना चाहिए। ऐसे हमले किसी बड़ी परमाणु आपदा का कारण बन सकते हैं, जिसका असर पूरे क्षेत्र और वैश्विक स्तर पर हो सकता है।”

ईरान ने इजराइल के सैन्य हवाई अड्‍डे को निशाना बनाया

ईरान ने दावा किया है कि उसने ड्रोन हमलों के जरिए इजरायल की सैन्य उड़ानों को प्रभावित किया है। तेहरान के अनुसार, तेल अवीव के पास बेन गुरियन एयरपोर्ट पर ईंधन टैंक और रिफ्यूलिंग विमानों को निशाना बनाया गया।

ईरानी सेना और रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने कहा कि उनके हमलों के कारण इजरायल को कुछ सैन्य कर्मियों को हटाना पड़ा। ईरान ने साफ कहा है कि जब तक खतरा खत्म नहीं होगा, हमले जारी रहेंगे।

बता दें कि बेन गुरियन एयरपोर्ट, इजरायल के लिए बेहद अहम है, जहां सेना की विशेष यूनिट्स और लड़ाकू विमानों की मरम्मत सुविधाएं मौजूद हैं।

यूएई में दो सैनिक और 6 नागरिक मरे

संयुक्त अरब अमीरात ने शनिवार को ईरान की ओर से छोड़ी गई 3 बैलिस्टिक मिसाइलों और 8 ड्रोन को हवा में ही मार गिराने का दावा किया है। रक्षा मंत्रालय के अनुसार अब तक सैकड़ों मिसाइल और ड्रोन हमलों को रोका जा चुका है।

इन हमलों में 2 सैनिकों की मौत हुई है। साथ ही, पाकिस्तान, नेपाल, बांग्लादेश और फिलिस्तीन के कुल 6 नागरिकों की भी जान गई है। करीब 160 लोग घायल बताए गए हैं।

सऊदी अरब पर 20 ड्रोन हमले

ईरान ने सऊदी अरब पर ड्रोन बरसाए हैं। सऊदी ने कहा है कि ईरान की ओर से उसके तेल क्षेत्र पर कुछ घंटों में 20 ड्रोन का हमला हुआ जो उसने मार गिराए हैं। 
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ईरान का सबसे लंबा मिसाइल हमला: 3500 किमी दूर हिंद महासागर में US बेस डिएगो गार्सिया को बनाया निशाना

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अमेरिकी सैन्य अड्‍डे डिएगो गार्सिया में खड़े एयरक्राफ्ट
नई दिल्ली | ईरान ने अमेरिका-इजरायल के हमलों के जवाब में अब तक का सबसे बड़ा मिसाइल हमला करके दुनिया को चौंका दिया है। 
ईरान ने 3500 किलोमीटर दूर हिंद महासागर में अमेरिका के सबसे बड़े सैन्य हवाई अड्‍डे डिएगो गार्सिया (US Base Diego Garcia) पर बैलिस्टिक मिसाइल दागी है।
By <a rel="nofollow" class="external text" href="https://www.flickr.com/photos/68686051@N00">Steve Swayne</a> from Maleny, Australia - <a rel="nofollow" class="external text" href="https://www.flickr.com/photos/maleny_steve/2844420985/">Diego Garcia Satellite Photo</a>, <a href="https://creativecommons.org/licenses/by-sa/2.0" title="Creative Commons Attribution-Share Alike 2.0">CC BY-SA 2.0</a>, <a href="https://commons.wikimedia.org/w/index.php?curid=14374053">Link</a>

अंतरिक्ष से लिया गया डिएगो गार्सिया का दृश्य (साभार विकीमीडिया)

यह अमेरिकी बेस ईरान पर हमलों में इस्तेमाल होने वाले विमानों का मुख्य ठिकाना रहा है।
इस हमले के बाद यह युद्ध खाड़ी से निकलकर हिन्द महासागर में फैल सकता है जो भारत के लिए बड़ी चिंता बन सकता है। भारत का 80% ऊर्जा आयात हिंद महासागर से ही होता है। 
अभी तक अंतरराष्ट्रीय खुफिया एजेंसियां मानती थीं कि ईरान की सबसे एडवांस बैलिस्टिक मिसाइलों (जैसे खैबर-शिकन, सज्जील-2) की अधिकतम रेंज 2000 से 2500 किलोमीटर के बीच है।
लेकिन डिएगो गार्सिया पर हमला बताता है कि ईरान ने अपनी मिसाइल क्षमता को कितना विकसित कर लिया है।
 इससे अमेरिका और उसके सहयोगी देशों (खासकर ब्रिटेन) के लिए खतरा बढ़ गया है।
ईरान से डिएगो गार्सिया तक हवाई दूरी लगभग 3400-3500 किमी है। ईरानी मीडिया ने इसे “हाइपरसोनिक” या “नई पीढ़ी की बैलिस्टिक मिसाइल” बताया है, लेकिन कोई स्पष्ट नाम नहीं दिया गया।

अमेरिकी अधिकारियों ने कहा कि मिसाइलों को इंटरसेप्ट कर लिया गया, लेकिन हमले से ईरान की तकनीकी प्रगति का संकेत मिलता है।

डिएगो गार्सिया नामक अमेरिकी बेस, ब्रिटेन सरकार द्वारा संचालित ब्रिटिश हिंद महासागर क्षेत्र में स्थित सैन्य अड्डा है। यहां B-2 स्टील्थ बॉम्बर, P-8 पोसाइडन निगरानी विमान और कई नौसैनिक जहाज तैनात हैं।
ईरान का यह हमला ब्रिटेन के क्षेत्र में हुआ है, अब देखना होगा कि ब्रिटेन इसको लेकर क्या प्रतिक्रिया देता है। बता दें कि ईरानी विदेश मंत्री ने हाल में ब्रिटेन को चेताया था कि अगर वह अपने क्षेत्र से अमेरिकी विमानों को उड़ने देगा तो उसे युद्ध में शामिल माना जाएगा।
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तेल छूट पर ईरान का तीखा जवाब – ‘बैन हटाकर अमेरिका बाजार को भरमा रहा’

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अमेरिका और ईरान के बीच एक बार फिर तनाव चरम पर पहुंच गया है। (प्रतीकात्मक तस्वीर)
नई दिल्ली | ईरान के तेल पर अमेरिकी प्रतिबंध को अस्थायी तौर पर हटाए जाने की घोषणा के बाद ईरान ने इसे बाजार को भरमाने वाला कदम बताया है। 
ईरानी प्रवक्ता ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि “वर्तमान में ईरान के पास कोई अतिरिक्त कच्चा तेल नहीं है जो समुद्र में लदा हो और उसे अंतरराष्ट्रीय बाजारों में बेचा जा सके।”

ईरान के तेल मंत्रालय के प्रवक्ता का ट्वीट

जबकि अमेरिका ने दावा किया था कि समुद्र में मौजूद ईरानी तेल से अस्थायी तौर पर बैन हटाने से 14 करोड़ बैरल तेल बाजारों को मिल सकता है। 
ईरान की ओर से इस पर स्पष्ट जवाब दिया गया है जिसमें उसने अमेरिकी छूट को कोरा आश्वासन करार दिया है।
गौरतलब है कि ईरान लंबे समय से अमेरिका की ओर से लगे प्रतिबंधों को हटाने का प्रयास कर रहा था, लेकिन अब इसके हटाए जाने पर उसने ऐसी कूटनीतिक प्रतिक्रिया दी है, जिसने ट्रंप प्रशासन को फिर सवालों के घेरे में ला दिया है।
 
ईरानी तेल मंत्रालय के प्रवक्ता समान घोदौसी ने एक्स पर लिखा है कि
“वर्तमान में ईरान के पास अंतरराष्ट्रीय बाजार में बेचने के लिए अतिरिक्त कच्चा तेल नहीं है इसलिए अमेरिकी वित्त मंत्री का बयान सिर्फ खरीदारों को आश्वासन देने और बाजार में घबराहट कम करने का तरीका है।”
ईरान के तेल मंत्रालय ने अमेरिका की हालिया छूट (waiver) को “बाजार को मनोवैज्ञानिक रूप से नियंत्रित करने का प्रयास” बताया है।
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