Connect with us

रिसर्च इंजन

बिहार में धान की अच्छी पैदावार के बाद भी खरीद के सीजन में क्यों परेशान हैं किसान 

Published

on

बिहार में धान की खरीद कम और धीमी होने से किसान अपनी फसल कम दाम पर खुले बाजार में बेचने को मजबूर हैं।
बिहार में धान की खरीद कम और धीमी होने से किसान अपनी फसल कम दाम पर खुले बाजार में बेचने को मजबूर हैं।
  • 28 फरवरी तक राज्य में होनी है धान की खरीद या अधिप्राप्ति।
  • केंद्र की ओर से राज्य में खरीद का कोटा घटाने से खेतों में पड़ी फसल।
नई दिल्ली|
बिहार में धान की इस साल अच्छी पैदावार हुई है, लेकिन इसके बावजूद किसान अपने धान को खेतों में छोड़ने और खुले बाजार में औने-पौने दाम पर बेचने के लिए बेबस हैं। केंद्र सरकार ने इस बार बिहार में धान की खरीद का लक्ष्य 20% घटा दिया है, जिसका असर यह है कि हर जिले में धान खरीद लक्ष्य घटा दिया गया है।
इस पर भी जिलों में धान खरीद की गति बेहद धीमी है, जिससे किसान अपनी फसल की बिक्री को लेकर आश्वस्त नहीं हैं। कई जिलों में किसानों ने लक्ष्य बढ़ाने और तेजी से खरीद करने की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन किए हैं। फसल का पूरा दाम न मिलते दिखने से कई धान किसानों ने इसे खुले बाजार में बेचना शुरू कर दिया है ताकि यह समय से बिक जाए और वे खेत में नई फसल लगा सके। 

धान खरीद के आंकड़े

  • 36.85 लाख मीट्रिक टन धान की होनी है खरीद।
  • 45 लाख मीट्रिक टन था पिछले साल का लक्ष्य।
  •  8.52 लाख मीट्रिक टन कम धान खरीद होगी।

अब तक सिर्फ 5100 किसानों से हुई खरीद

सहकारिता विभाग की वेबसाइट के मुताबिक, 11 जनवरी तक सिर्फ 5176 किसानों से धान की खरीद हुई है। हालांकि यह स्पष्ट नहीं है कि बिहार में धान खरीद के लिए कितने किसानों ने रजिस्ट्रेशन कराया है। पर पिछले साल धान खरीद का लाभ करीब पांच लाख किसानों को हुआ था। इस हिसाब से देखे तो किसान जिस धीमी खरीद की शिकायत कर रहे हैं, सरकारी आंकड़ों से उसकी तस्दीक हो रही है।

खुले बाजार में धान बेचने को मजबूर

धान की MSP (न्यूनतम समर्थन मूल्य) ₹2,183 प्रति क्विंटल है, अगर सरकार धान खरीदती है तो किसान को इसी भाव पर फसल का दाम मिलेगा। पर चूंकि लक्ष्य घटा दिया गया है और अब तक धीमी गति से खरीद हो रही है तो परेशान किसान खुले बाजार में धान बेचने को मजबूर है, जहां धान ₹1,800-₹2,000/क्विंटल पर बिक रहा है। यानी प्रति क्विंटल ₹200-₹300 का नुकसान किसान को उठाना पड़ेगा। ऐसी स्थिति में 5-10 क्विंटल उपज वाले छोटे किसानों को सबसे ज्यादा मार सहनी पड़ेगी क्योंकि वे फसल करने के लिए कर्ज पर निर्भर होते हैं। 

धान जलाकर गुस्सा दिखा रहे किसान

रोहतास जिला मुख्यालय में किसानों ने इकट्ठा होकर प्रदर्शन किया, उन्होंने मांग की कि धान खरीद का लक्ष्य बढ़ाया जाए और पैक्स के जरिए हो रही खरीद को पारदर्शी बनाया जाए। किसानों का यह तक कहना था कि जिला पंचायत अध्यक्ष यह देखकर खरीद कर रहे हैं कि किस किसान ने उन्हें चुनाव में वोट दिया।

बेगूसराय में कई जिला पंचायतों और व्यापार मंडलों ने धरना दिया, इनका कहना है कि जिला प्रशासन खरीद करने को कह रहा है पर लक्ष्य स्पष्ट नहीं किया गया है।

किसानों की मांगें

  • धान खरीद लक्ष्य बढ़ाया जाए।
  • पैक्स में भेदभाव और गड़बड़ियां बंद हों।
  • खरीद केंद्रों पर गति बढ़ाई जाए।
  • MSP पर पूरी फसल खरीदी जाए, ताकि खुले बाजार में कम दाम न बेचना पड़े।

 जिलों में धान खरीद का लक्ष्य इतना घटा

  • रोहतास: उपज 13 लाख एमटी, लक्ष्य 3.14 लाख एमटी (पिछले साल से 90 हजार एमटी कम)। 
  • भागलपुर: लक्ष्य 37,285 एमटी (पिछले साल 40,000 एमटी था)।
  • नालंदा: लक्ष्य 1.22 लाख एमटी (पिछले साल 1.92 लाख एमटी)।
  • बेगूसराय: उपज 54,548 एमटी, लक्ष्य स्पष्ट नहीं। पैक्स और व्यापार मंडल धरना दे रहे हैं।
  • बांका: उपज 5.4 लाख एमटी, लक्ष्य 1.31 लाख एमटी (पिछले साल 1.39 लाख एमटी)।

राज्य सरकार की मांग- केंद्र कोटा बढ़ाए 

खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग मंत्री लेशी सिंह ने केंद्र से कोटा बढ़ाने की मांग की है। केंद्रीय खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण राज्यमंत्री निमुबाई जयंतीभाई बांभणिया के पटना दौरे पर शुक्रवार को मंत्री लेशी सिंह ने इस मामले से जुड़ा ज्ञापन सौंपा। केंद्रीय मंत्री ने इस पर कहा कि केन्द्र सरकार किसानों के हित को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए राज्यों के साथ समन्वय के आधार पर निर्णय लेगी। लेशी सिंह ने कहा है कि उन्होंने खाद्य अनुदान मद में लंबित 6,370 करोड़ की राशि भी जल्द जारी करने की मांग की।

Continue Reading
Click to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *