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रिपोर्टर की डायरी

रोहतास(बिहार): डीएम ने लापरवाही पर हटाने का आदेश दिया, सिविल सर्जन ने उसी डॉक्टर को प्रमोट कर ACMO बना दिया

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सिविल सर्जन व अन्य चिकित्सकों के साथ डॉ. बी के पुष्कर
सिविल सर्जन व अन्य चिकित्सकों के साथ डॉ. बी के पुष्कर (बाए)
  • सासाराम के सदर अस्पताल में तैनात रहे डिप्टी मेडिकल सुप्रीटेंडेंट को ACMO बनाया गया है।
  • जिला अस्पताल की हालत देखकर डीएम ने डिप्टी मेडिकल सुप्रीटेंडेंट को पद से हटाया था।
  • सिविल सर्जन ने सप्ताहभर मेें उनका प्रमोशन कर दिया, जबकि निचला पद दिया जाना चाहिए था।

रोहतास | अविनाश श्रीवास्तव

बिहार में डीएम के आदेश के खिलाफ जाकर मनमाने ढंग से एक हेल्थ ऑफिसर को प्रमोशन देने का मामला सामने आया है। रोहतास जिले के सदर अस्पताल प्रशासन ने डीएम के आदेश को ठेंगा दिखाते हुए ऐसे स्वास्थ्य पदाधिकारी को ACMO बना दिया, जिसे आठ दिन पहले डीएम ने डिप्टी मेडिकल सुप्रीटेंडेंट पद से हटाया था। 
दरअसल सासाराम जिला अस्पताल में लापरवाही की एक के बाद एक शिकायतें आ रही थीं, इसके बाद 26 दिसंबर को डीएम उदिता सिंह ने औचक निरीक्षण में गंभीर लापरवाही पाई तो कार्यकारी उपाधीक्षक या डिप्टी सुप्रीटेंडेंट डॉ. बीके पुष्कर को तत्काल हटाने का सख्त निर्देश दिया। पर इसके आठ दिन बाद ही तीन जनवरी को डॉ. पुष्कर को प्रमोशन दे दिया।
सिविल सर्जन डॉ. मणिराज रंजन ने डीएम के आदेश के बावजूद उन्हें अपर मुख्य चिकित्सा अधिकारी या ACMO का अतिरिक्त प्रभार सौंप दिया गया है। स्वास्थ्य विभाग की इस कार्रवाई को डीएम के निर्देश की खुली अवहेलना माना जा रहा है। ACMO बनाए जाने से जुड़े इस लेटर की जानकारी मीडिया में गुरुवार (8 jan) को सामने आई है।

क्या थी लापरवाही

हाल के दिनों में सदर अस्पताल की फजीहत तब हुई जब एक किशोरी का पैर टूटा था और उसके पिता उसे कंधे पर उठाकर पूरे अस्पताल में भटकते रहे क्योंकि व्हीलचेयर उपलब्ध नहीं थी। यह वीडियो वायरल होने के बाद कई शिकायतें डीएम तक पहुंचीं। डीएम ने निरीक्षण में कई खामियां पाईं और डॉ. बीके पुष्कर को कार्यकारी उपाधीक्षक पद से तत्काल हटाने का आदेश दिया।

डीएम के आदेश पर पद से हटाया, पर फिर प्रमोशन दे दिया

तीन जनवरी को जारी हुआ आदेश।

तीन जनवरी को जारी हुआ आदेश।

सिविल सर्जन ने डॉ. पुष्कर को कार्यकारी उपाधीक्षक पद से तो हटा दिया, लेकिन उन्हें निचले पद पर भेजने की बजाय ACMO का अतिरिक्त प्रभार दे दिया। जारी पत्र में लिखा है कि कार्यभार की अधिकता और मौजूदा ACMO डॉ. अशोक सिंह के ट्रांसफर के कारण वैकल्पिक व्यवस्था जरूरी है। पत्र में लिखा है कि नियमित पदस्थापना तक डॉ. पुष्कर विभिन्न कार्यक्रमों को निर्बाध चलाएंगे।

डीएम ने औचक निरीक्षण में क्या पाया

बीते 26 दिसंबर को सदर अस्पताल में औचक निरीक्षण के दौरान डीएम को स्टॉक रजिस्टर में विसंगति मिली। अस्पताल परिसर में अव्यवस्था, कार्यशैली में लापरवाही के अलावा कुछ डॉक्टरों और स्वास्थ्य कर्मियों की अनुपस्थिति भी पाई गई। इसके बाद नाराज डीएम ने कार्यकारी उपाधीक्षक डॉ. बीके पुष्कर को तत्काल हटाने का सख्त निर्देश दिया था।  

बोलते पन्ने.. एक कोशिश है क्लिष्ट सूचनाओं से जनहित की जानकारियां निकालकर हिन्दी के दर्शकों की आवाज बनने का। सरकारी कागजों के गुलाबी मौसम से लेकर जमीन की काली हकीकत की बात भी होगी ग्राउंड रिपोर्टिंग के जरिए। साथ ही, बोलते पन्ने जरिए बनेगा .. आपकी उन भावनाओं को आवाज देने का, जो अक्सर डायरी के पन्नों में दबी रह जाती हैं।

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गोपालगंज : फाइलेरिया रोकने की दवा खाने के बाद स्कूली बच्चे बीमार

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  • गोपालगंज के हरखुआ माध्यमिक विद्यालय में 15 बच्चे बीमार पड़े।
  • 58 बच्चों को फाइलेरिया रोधी दवा खिलाई, फिर तबीयत बिगड़ी।
  • सभी बच्चों को सदर अस्पताल ले जाकर भर्ती कराया, सभी सुरक्षित।

गोपालगंज | आलोक कुमार 

बिहार के गोपालगंज में फाइलेरिया रोधी दवा खिलाए जाने के बाद स्कूली बच्चों की तबीयत अचानक बिगड़ने से हड़कंप मच गया। स्कूल में अभिभावकों ने पहुंचकर हंगामा किया, हालांकि टीचरों ने उन्हें समझाने की कोशिश की। इस बीच हेडमास्टर ने एंबुलेंस बुलाकर 15 बीमार बच्चों को सदर अस्पताल में एडमिट कराया है। बता दें कि हाथी पांव या फाइलेरिया की रोकथाम के लिए दो साल से बड़े बच्चों को यह दवा खिलाई जाती है, जो एकदम सुरक्षित है।

गोपालगंज में बच्चों की तबीयत खराब होने की घटना शहर के हरखुआ गांव के एक माध्यमिक विद्यालय में घटी। हेडमास्टर कृष्ण मुरारी पांडे ने बताया कि स्कूल में 27 फरवरी को 58 बच्चे मौजूद थे। सभी बच्चों ने मिड डे मील खाया। फिर दोपहर करीब 3:00 बजे आशा वर्करो  ने स्कूल आकर सभी 58 बच्चों को फाइलेरिया और एल्बेंडाजोल की गोलियां दीं।

प्रिंसिपल ने बताया कि दवा खाते ही कुछ बच्चों को अचानक नींद आने लगी और वे सोने लगे, जबकि कुछ को उल्टी हुई।

इस बारे में सिविल सर्जन वीरेंद्र प्रसाद ने बताया कि फाइलेरिया से बचाव की दवा खाने के बाद कुछ बच्चों में गैस बनने की शिकायत हो सकती है, जिससे उल्टी या पेट दर्द महसूस होता है। साथ ही उन्होंने कहा कि कई बार डर के कारण भी बच्चों को ऐसी समस्या होती है, इसमें किसी तरह की चिंता की बात नहीं है।

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शराब तस्करी में जेल गए आरोपी की मौत, परिवार बोला- हत्या हुई, जेल प्रशासन ने हार्टअटैक बताया

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परिजनों को बंदी की तबीयत खराब बताई गई, जब वे अस्पताल पहुंचे तो शव देखकर हंगामा किया। (तस्वीर - बक्सर संवाददाता)
परिजनों को बंदी की तबीयत खराब बताई गई, जब वे अस्पताल पहुंचे तो शव देखकर हंगामा किया। (तस्वीर - बक्सर संवाददाता)
  • बक्सर सेंट्रल जेल में बंदी की मौत होने से उठे सवाल।
  • शराब तस्करी के आरोप में जेल में 14 दिन से था बंदी।
  • जेल में अचानक हुई मौत को परिजनों ने बताया हत्या।

बक्सर | अमीषा कुमारी

बिहार में शराब तस्करी के आरोप में हिरासत में लिए गए एक व्यक्ति की मौत बक्सर सेंट्रल जेल में हो गई है। बीती 12 फरवरी को उसे न्यायिक हिरासत में भेजा गया था। परिजनों का आरोप है कि जेल में उसके साथ मारपीट हुई, उसके शरीर पर लाल निशान हैं। परिजनों ने न्याय की मांग करते हुए सदर अस्पताल में हंगामा किया, तब मौके पर पुलिस पहुंची।अब मेडिकल बोर्ड की निगरानी में मृतक के शव का पोस्टमार्टम कराया जा रहा है। इस मामले में जेल प्रशासन ने उत्पीड़न के आरोपों से इनकार किया है।

दरअसल 40 साल के राजेंद्र सिंह को बक्सर पुलिस पकड़कर ले गई थी और 12 फरवरी को उसे जेल भेजा गया था। राजेंद्र नगर थाना क्षेत्र के विराट नगर के रहने वाले थे।  मृतक के बड़े भाई राजू कुमार ने आरोप लगाया कि गिरफ्तार करने के दौरान ही पुलिस ने राजेंद्र के साथ मारपीट की थी, जबकि वह बीमार चल रहा था। राजू का आरोप है कि “जेल भेजने के बाद भी भाई को पीटा गया। शरीर पर मौजूद लाल निशान साफ बता रहे हैं कि उसकी हत्या हुई है।

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बिहार में अब दारोगा-कोतवाल के खिलाफ केस चलाने से पहले सरकार की अनुमति जरूरी

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बिहार पुलिस
बिहार पुलिस (प्रतीकात्मक फोटो)
  • बिहार सरकार के गृह विभाग (आरक्षी शाखा) ने जारी की अधिसूचना।
  • पुलिस कर्मियों पर मुकदमा चलाने के लिए लेनी होगी सरकार की अनुमति।
  • बिहार पुलिस के सभी पदाधिकारी व कर्मियों पर लागू होगा नियम।

पटना |

बिहार में अब दारोगा से लेकर इंस्पेक्टर तक के खिलाफ किसी मामले में तब ही केस दर्ज हो सकेगा जब उसकी इजाजत राज्य सरकार देगी।

बिहार सरकार के गृह विभाग (आरक्षी शाखा) ने गुरुवार (26 feb) को इसको लेकर अधिसूचना जारी की है। यह नियम पहले DSP/ACP और ऊपर के अधिकारियों के लिए लागू था, लेकिन अब राज्य सरकार ने यह सुरक्षा कांस्टेबल से लेकर इंस्पेक्टर स्तर तक बढ़ा दी है।  सरकार का तर्क है कि इस तरह बदले की भावना के चलते पुलिस पर कार्रवाई व उत्पीड़न को रोका जा सकेगा।

सरकार के इस महत्वपूर्ण सर्कुलर में कहा गया है कि पुलिस अधिकारियों और पुलिस कर्मियों पर आपराधिक मुकदमा चलाने से पहले राज्य सरकार की पूर्व अनुमति (sanction) अनिवार्य होगी। यह शर्त उन कार्यों पर लागू होगी जो आधिकारिक ड्यूटी (official duty) के दौरान या उसके संबंध में किए गए हों।

 यह आदेश भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) 2023 की धारा 218(2) के तहत लागू किया गया है। जिसमें पहले “केंद्रीय सरकार” के स्थान पर अब स्पष्ट रूप से “राज्य सरकार” को यह अधिकार दिया गया है।

बिहार जैसे राज्य जहां पुलिस के ऊपर भ्रष्टाचार व गलत मुकदमें में फंसाने के मामले सामने आते रहे हैं, राज्य सरकार की ओर से दी जा रही इम्यूनिटी उनकी ताकत को और बढ़ा देगी या नहीं, यह तो आने वाला वक्त ही बताएगा।

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