दुनिया गोल
ईरान में विद्रोह का 13वां दिन: अब तक 62 मौतें, पूरे देश में इंटरनेट बंद … आखिर क्यों बिगड़े हालात?
- ईरान के 31 राज्यों के सौ से ज्यादा शहरों में सरकार विरोधी प्रदर्शन फैल चुका है।
नई दिल्ली|
ईरान में 13 दिन से लगातार जारी प्रदर्शनों ने खामनेई सरकार को बीते कुछ वर्षों में सबसे बड़ी चुनौती दे दी है। ये प्रदर्शन ऐसे समय में हो रहे हैं जब वेनेजुएला में ट्रंप ने राष्ट्रपति को अगवा कर लिया और अब वह ईरानी सरकार को धमकी दे रहा है कि अगर प्रदर्शनों को कुचला गया तो वह स्ट्राइक कर सकते हैं। प्रदर्शनों को भड़काने से रोकने के लिए सरकार ने सात साल बाद पूरे देेश में इंटरनेट बंद कर दिया है।
ईरान पहले ही संयुक्त राष्ट्र के प्रतिबंधों के चलते भारी आर्थिक दवाब में है, जिसके चलते महंगाई बढ़ जाने से जनता नाराज है। ईरान में जारी प्रदर्शनों में अब तक 62 लोगों की मौत हो चुकी है और 2,300 प्रदर्शनकारियों को गिरफ्तार कर लिया गया है। प्रदर्शन भड़कने से रोकने के लिए ईरान में कई इलाकों में इंटरनेट बंद कर दिया गया है फिर भी प्रदर्शन थमने का नाम नहीं ले रहे हैं।
कहां से हुई शुरूआत : अचानक महंगाई बढ़ने से दुकानदारों ने हड़ताल की
ये विरोध प्रदर्शन राजधानी तेहरान के बाज़ारों में बढ़ती महंगाई के खिलाफ़ हड़ताल के रूप में शुरू हुआ जो पूरे देश में आंदोलन बन गया। महंगाई को लेकर आम लोगों की चिंता 13 दिन पहले चरम पर पहुंच गई क्योंकि खाना पकाने के तेल और चिकन जैसी बुनियादी वस्तुओं की कीमतें रातोंरात नाटकीय रूप से बढ़ गईं, और कुछ उत्पाद तो दुकानों से पूरी तरह गायब ही हो गए, जिससे दुकानदारों को झटका लगा।
केंद्रीय बैंक के आदेश ने गुस्सा बढ़ाया :
सीएनएन के मुताबिक, इस स्थिति को केंद्रीय बैंक के उस आदेश ने और बदतर बना दिया जिसमें कुछ आयातकों को बाज़ार के बाकी हिस्सों की तुलना में सस्ते अमेरिकी डॉलर प्राप्त करने की अनुमति देने वाले कार्यक्रम को समाप्त कर दिया गया था। जिसके कारण दुकानदारों ने कीमतें बढ़ा दीं और कुछ ने अपनी दुकानें बंद कर दीं, जिससे प्रदर्शनों की शुरुआत हुई।
सरकार समर्थक ही प्रदर्शन करने लगे :
ऐसी स्थितियों से परेशान होकर बाज़ारी समूह ने प्रदर्शन और हड़ताल शुरू कर दी, ये वही बाजारी समूह हैं जिन्हें पारंपरिक रूप से इस्लामी गणराज्य का समर्थक माना जाता है। ऐसे में अपनी सरकार के खिलाफ सड़कों पर उतरे इन दुकानदारों का गुस्सा बाकी लोगों के बीच भी फैलता चला गया।
सरकारी राशि से भी गुस्सा शांत नहीं हुआ
सरकार ने सुधारवादी कदम उठाते हुए प्रभावित लोगों को लगभग 7 डॉलर प्रति माह की नकद सहायता देना शुरू किया ताकि दबाव कम हो सके पर यह कदम भी अशांति को कम नहीं कर सका।
पूरे देश में फैला आंदोलन : सभी 31 राज्यों में प्रदर्शन, पूरे देश में इंटरनेट बंद
- अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों के अनुसार, 9 जनवरी तक करीब 62 आम ईरानी मारे जा चुके हैं जिसमें बच्चे और महिलाएं भी शामिल हैं।
- पूरे देश में इंटरनेट बंद लागू हुए 24 घंटे से ज्यादा वक्त हो चुका है, ऐसा इससे पहले 2019 में ईरान में हुआ था। लेकिन प्रदर्शनकारी VPN और सैटेलाइट फोन से वीडियो भेज रहे हैं।
- नॉर्वे स्थित ईरान ह्यूमन राइट्स ने 11 राज्यों के 51 लोगों की मौत की पुष्टि की है, जिसमें नौ लोगों की उम्र 18 साल के कम बताई गई है।
- सभी 31 राज्यों के सौ से ज्यादा शहरों में कई संगठन, यूनिवर्सिटी, बाजारों में प्रदर्शन और हड़तालें जारी हैं।
- जिन्हें कुचलने के लिए ईरानी सुरक्षा बलों के आंसू गैस, लाठीचार्ज और लाइव फायरिंग करने की खबरें रिपोर्ट हो रही हैं।
- पश्चिमी मीडिया के मुताबिक, तेहरान, इस्फहान, मशहद और तबरीज में सबसे ज्यादा हिंसा हुई। प्रदर्शनकारी “मौत मशहद” और “खामेनेई हत्यारा” जैसे नारे लगा रहे हैं।
ट्रंप बोले: ‘प्रदर्शनकारियों को मारा तो हम हमला करेंगे’
AFP के मुताबिक, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 9 जनवरी को एक बार फिर चेतावनी दी कि वे सैन्य हमले का आदेश दे सकते हैं और प्रतिबंध भी लगा सकते हैं।
“ईरान गंभीर संकट में है, कुछ सप्ताह पहले सोचा नहीं जा सकता था कि आम लोग इस तरह सड़कों पर कब्जा कर लेंगे। ईरान के नेताओं को संदेश है कि बेहतर होगा कि वे इनपर गोलीबारी शुरू न करें क्योंकि तब हम भी गोलीबारी शुरू कर देंगे। इसका मतलब यह नहीं कि हम ज़मीन पर सेना भेजेेंगे, बल्कि हम बहुत ज़ोरदार चोट वहां पहुंचाएंगे, जहां उन्हें सबसे ज़्यादा दर्द हो।”
ईरान बोला- शांतिपूर्ण प्रदर्शन को अमेरिका ने भड़काया
रायटर्स के मुताबिक, संयुक्त राष्ट्र के ईरानी राजदूत ने इस वैश्विक संस्था को लिखा है कि उनके देश में हो रहे ‘शांतिपूर्ण प्रदर्शनों’ को हिंसा में बदलने के लिए अमेरिका दोषी है। उन्होंने आरोप लगाया है कि अमेरिका ने हस्तक्षेप किया और देश में अस्थिरता फैलाने वाली कार्रवाइयां करने की कोशिश की।
भारत ने क्या प्रतिक्रिया दी ?
भारत ने कहा है कि वह स्थिति पर नजदीकी से नजर रख रहा है और शांति और संवाद की अपील की है।
सरकार विरोधी प्रदर्शनों का क्या होगा असर?
हाल में ईरानी प्रदर्शनों के बीच सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हुआ, जिसमें ईरान की एक सड़क को एक प्रदर्शनकारी ने ‘ट्रंप स्ट्रीट’ नाम दे दिया। इस पर व्हाइट हाउस ने तक प्रतिक्रिया दी कि वे ईरानी लोगों की भावनाओं का आदर करते हैं। यह एक उदाहरण भर है, ये प्रदर्शन ऐसे समय में हो रहे हैं जब ट्रंप ने कई देशों पर अपना दावा ठोका है। विशेषज्ञों का कहना है कि ट्रंप की धमकी से ईरान पर आर्थिक दबाव बढ़ेगा। ईरान पहले से ही अमेरिकी प्रतिबंधों से जूझ रहा है। प्रदर्शन अगर और फैले तो खामनेई सरकार को बड़ा झटका लग सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह 2019 ईंधन प्रदर्शनों से भी बड़ा आंदोलन बन सकता है। अभी तक कोई बड़ा नेतृत्व प्रदर्शन में नहीं दिखा, लेकिन युवा और महिलाएं सबसे आगे हैं। ईरान में अगले कुछ दिन निर्णायक होंगे।
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Saudi Aramco : सऊदी स्थित मध्यपूर्व की सबसे बड़ी तेल रिफाइनरी पर हमला
नई दिल्ली | मध्यपूर्व में बढ़ते तनाव के बीच सऊदी अरब की सरकारी तेल कंपनी Saudi Aramco की प्रमुख ऊर्जा साइट रास तनुरा रिफाइनरी (Ras Tanura refinery) पर ईरान ने ड्रोन हमला किया है।
रॉयटर्स ने सोर्स के हवाले से खबर दी है कि इस हमले के बाद इस रिफाइनरी को अस्थायी रूप से बंद कर दिया गया। इस घटना के बाद वैश्विक तेल बाजार में तेज हलचल देखी गई और ब्रेंट क्रूड की कीमतों में करीब 9.32% की बढ़ोतरी दर्ज की गई।
बता दें कि सऊदी अरामको, सऊदी सरकार के स्वामित्व वाली पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस कंपनी है जो सऊदी अरब की राष्ट्रीय तेल कंपनी है। इसकी रस तनूरा कॉम्प्लेक्स नामक रिफाइनरी मध्य पूर्व में सबसे बड़ी है। यह सऊदी अरब के खाड़ी तट पर स्थित है।
इसकी क्षमता 5.5 लाख बैरल प्रतिदिन (bpd) है और यह सऊदी क्रूड ऑयल के निर्यात के लिए एक महत्वपूर्ण टर्मिनल के रूप में कार्य करती है।
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Middle East Tensions : पीएम मोदी ने इजरायल और यूएई के नेताओं से क्या बात की?
- पीएम मोदी ने दोनों राष्ट्राध्यक्षों से फोन वार्ता में तनाव कम करने पर जोर दिया है।
नई दिल्ली |
इजरायल व अमेरिकी की ओर से ईरान पर किए गए हमले के बाद मध्य पूर्व में बनी तनाव की स्थिति के बीच भारतीय पीएम ने रविवार रात (1 march) दो देशों के राष्ट्राध्यक्षों से वार्ता की है। इससे पहले भारत की ओर से इस तनाव को लेकर सभी पक्षों से संयम बरतने की अपील की गई है।
गौरतलब है कि इस हमले में ईरानी सुप्रीम लीडर (रहवर) खामेनेई की हत्या को लेकर भारत की ओर से ईरानी प्रतिनिधि से कोई वार्ता नहीं की गई है। साथ ही, ये हमले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इसराइल की दो दिन की यात्रा से लौटने के तुरंत बाद हुए हैं।
पीएम मोदी ने ट्वीट करके बताया कि उन्होंने इजरायली पीएम नेतन्याहू से बात करके क्षेत्रीय तनाव को लेकर अपनी चिंता जाहिर की। साथ ही कहा कि नागरिकों की सुरक्षा सबसे बड़ी प्राथमिकता होनी चाहिए। पीएम मोदी ने भी दोहराया कि जल्द से जल्द संघर्ष रोकना ज़रूरी है।
यूएई पर हुए हमलोें की निंदा की
इजरायल से फोन वार्ता से पहले पीएम मोदी ने यूएई के राष्ट्रपति मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान से फोन पर बात की। उन्होंने ट्वीट करके लिखा कि मैंने यूएई पर हुए हमलों की कड़ी निंदा की और इन हमलों में हुई जानों के नुकसान पर शोक व्यक्त किया।
गौरतलब है कि ईरान ने यूएई स्थित दुनिया के सबसे व्यस्त एयरपोर्ट में से एक दुबई एयरपोर्ट पर हमला किया है, जिसे लड़ाई शुरू होने के बाद ऑपरेशन के लिए बंद कर दिया गया है। इससे पहले दुबई के मशहूर लैंड आइलैंड पाम और एक लग्जरी होटल बुर्ज अल अरब पर हमला किया था।
पीएम मोदी ने यूएई राष्ट्रपति से कहा है कि भारत इस मुश्किल समय में यूएई के साथ एकजुट खड़ा है। उन्होंने यूएई में रहने वाले भारतीय समुदाय की देखभाल करने के लिए उनका धन्यवाद किया। साथ ही कहा कि भारत तनाव कम करने (De-escalation) , क्षेत्रीय शांति, सुरक्षा और स्थिरता का समर्थन करता है।
भारत ने हमलों पर संयम बरतने की अपील की
“भारत ईरान और खाड़ी क्षेत्र में हाल के घटनाक्रमों को लेकर गहरी चिंता व्यक्त करता है। हम सभी पक्षों से संयम बरतने, तनाव बढ़ाने से बचने और नागरिकों की सुरक्षा को प्राथमिकता देने का आग्रह करते हैं।”
दुनिया गोल
Breaking News : अमेरिका-इजरायल हमले में ईरानी सुप्रीम लीडर खामेनेई की मौत, सरकारी मीडिया ने पुष्टि की
नई दिल्ली |
अमेरिका-इजराइल के संयुक्त हमले में ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत हो गई है। ईरान की मीडिया तसनीम और फार्स समाचार एजेंसियों ने रविवार सुबह (1 march) इसकी पुष्टि की है।
इस हमले में खामेनेई की बेटी, दामाद, पोती और बहू के मारे जाने की भी खबर है।
इससे पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया पोस्ट में ईरानी सुप्रीम लीडर खामेनेई की मौत का दावा किया था।
बता दें कि इजरायल-अमेरिका की ओर से शनिवार को शुरू किए गए हवाई हमलों में ईरान के 31 में से 24 प्रांतों को निशाना बनाया गया, जिसमें राजधानी तेहरान भी शामिल है।
ईरानी सेना ने खामेनेई की शहादत के बाद “खतरनाक अभियान” की शुरुआत की घोषणा की है। सेना ने कहा कि यह हमला कुछ ही देर में शुरू होगा और क्षेत्र में कब्जे वाले क्षेत्रों और अमेरिकी आतंकवादी ठिकानों को निशाना बनाएगा।
ईरान में 40 दिन का राष्ट्रीय शोक
उधर, इस्लामिक रिवॉल्यूशन गार्ड्स कोर (IRGC) ने इस्लामिक क्रांति के नेता खामनेई की शहादत पर श्रद्धांजलि देते हुए कहा – इससे ईरानी राष्ट्र उनकी राह पर चलने के लिए और अधिक दृढ़ होगा।
ईरान में 40 दिन का राजकीय शोक और सात दिनों की सार्वजनिक छुट्टियों की घोषणा की गई है।
ईरान में अब तक 200 से ज्यादा मौतें
ईरान के एक गैर-सरकारी मानवतावादी संगठन ‘ईरानी रेड क्रिसेंट सोसाइटी’ का कहना है कि इन हमलों में अब तक 200 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 740 से ज्यादा लोग घायल हैं। ईरान के एक स्कूल पर मिसाइल गिरने से 85 छात्राओं की मौत हो गई और 45 छात्राएं घायल हैं।
ईरान का पलटवार- 9 देशों पर हमले
अमेरिका और इजराइल के हमले के जवाब में ईरान ने इजराइल समेत मिडिल-ईस्ट के 9 देशों को निशाना बनाया। ईरान ने इजराइल पर करीब 400 मिसाइलें दागीं। कतर, कुवैत, जॉर्डन, बहरीन, सऊदी अरब व UAE में मौजूद अमेरिकी ठिकानों को भी निशाना बनाया। इतना ही नहीं, ईरान ने UAE के सबसे ज्यादा आबादी वाले शहर दुबई पर भी हमला किया। ईरान ने दुबई के पाम होटल एंड रिसोर्ट और बुर्ज खलीफा के पास ड्रोन हमला किया। इसके अलावा बहरीन में कई रिहायशी इमारतों को निशाना बनाया।
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