रिपोर्टर की डायरी
पटना में दिनदहाड़े बुजुर्ग की गर्दन पर चाकू से कई वार करके हत्या, लोग बस देखते रहे
- पटना में दिनदहाड़े सड़क पर चलते बुजुर्ग की चाकु से हमला करके हत्या।
- हत्यारा चाकु से वार करता रहा, राहगीरों ने रोकने की हिम्मत नहीं दिखाई।
- बुजुर्ग की मौके पर ही मौत, करीब दस वार गर्दन पर चाकू चलाया।
पटना | प्रीति कुमारी
बिहार की राजधानी पटना में सड़क पर चलते एक बुजुर्ग की चाकू से कई वार करके दिनदहाड़े हत्या कर दी गई और लोग आते-जाते बस देखते रहे। इस घटना का सीसीटीवी फुटेज सामने आया है, जिसमें देखा जा सकता है कि हत्यारा युवक, मृतक के गले पर करीब दस वार चाकू चलाता है और फिर बड़े आराम से पैदल ही वहां से चला जाता है।
यह दर्दनाक घटना 12 फरवरी की सुबह करीब 11 बजे चौक थाना क्षेत्र में हुई। यहां के पटना साहिब रेलवे स्टेशन के पास की बंगाली कॉलोनी में 62 साल के मोहम्मद रहीस सड़क पर पैदल चल रहे थे। वे पेशे से दर्जी थे और कई साल से उसी इलाके में सिलाई का काम कर रहे थे। स्थानीय लोगों का कहना है कि रहीस शांत स्वभाव के व्यक्ति थे और उनकी किसी से कोई दुश्मनी की जानकारी नहीं है।
घटना के सीसीटीवी फुटेज में देखा जा सकता है कि मो. रहीस सड़क किनारे पैदल चल रहे थे, उनके पीछे सामान्य चाल से चलता एक युवक अचानक अपनी बगल से लंबा धारदार चाकू निकालकर पीछे से रहीस की गर्दन पर हमला करता है। हमला इतना तेज और अचानक था कि रहीस को संभलने का मौका तक नहीं मिला। हत्यारोपी युवक ने उनके ऊपर करीब दस बार चाकू चलाया, इस बीच तीन बाइक सवार व कई लोग पैदल उस रोड से गुजरते दिख रहे हैं पर चाकू लेकर वार करते युवक को कोई नहीं रोकता। सीसीटीवी में देखा जा सकता है कि वारदात को अंजाम देने के बाद आरोपी वहां से पैदल चलता हुआ फरार भी हो गया।
इस घटना की सूचना मिलते ही चौक थाना पुलिस मौके पर पहुंची और पूरा इलाका घेरकर आवाजाही को अस्थायी तौर पर रोक दिया। फिर घटना के सबूत जुटाने के लिए फॉरेंसिक साइंस लैब की टीम को बुलाया गया। आरोपी युवक की पहचान 26 साल के मोहम्मद अयाज के रूप में हुई है जो मृतक मो. रहीस का भांजा बताया जा रहा है। पुलिस ने हत्यारोपी मो. अयाज को गिरफ्तार कर लिया है और उससे पूछताछ की जा रही है। यह मामला पारिवारिक झगड़े या जमीनी विवाद से जुड़ा लग रहा है पर खुलेआम सड़क पर चाकू से मार डालने की यह घटना राजधानी पटना की सुरक्षा पर बड़े सवाल खड़े कर रही है।
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बांका : नवजात की मौत के दो दिन बाद नर्सिंग होम सील हुआ, मेडिकल टीम में क्रेडिट लेने की होड़!
- बांका में 9 फरवरी को निजी नर्सिंग होम में सुविधाओं के अभाव में नवजात की मौत हुई।
- 11 फरवरी को चलाया गया जांच अभियान, नर्सिंग होम को सील किया, कई अन्य भी जांचे।
- जिला प्रशासन बोला- हम जांच करने पहुंचे तो नर्सिंग होम के बाहर पीड़ित परिवार परेशान मिला।
बांका | दीपक कुमार
बिहार में धड़ल्ले से अवैध निजी नर्सिंग होम चलाए जा रहे हैं और इनके ऊपर तब जाकर कार्रवाई होती है जब किसी मासूम की जान चली जाती है। बांका जिले में कुछ ऐसा ही मामला सामने आया है, जब एक नवजात की मौत के बाद जाकर प्रशासन जागा। इसके दो दिन बाद सिविल सर्जन की बनाई एक मेडिकल टीम वहां पहुंची और नर्सिंग होम को सील किया गया। इस पूरे मामले में कार्रवाई का क्रेडिट लेने की होड़ भी देखने को मिली, मेडिकल टीम का कहना है कि वह नर्सिंग होम में जांच करने गई थी, तब उन्हें अचानक इस घटना का पता लगा और उन्होंने कार्रवाई करते हुए इसे सील किया है। दूसरी ओर, तथ्य कुछ और कहानी बता रहे हैं।
नवजात का जन्म और मौत 9 फरवरी को हुई है और स्वास्थ्य टीम ने 11 फरवरी को अस्पताल सील करने की कार्रवाई की है। इस घटना से जुड़ा पीड़ित परिवार बांका के चकसिया गांव का रहने वाला है। यहां के रुपेश यादव की पत्नी प्रीति देवी की बीते नौ फरवरी को तबीयत बिगड़ गई थी। तब गांव की आशा, बेला देवी के कहने पर उन्हें अमरपुर ब्लॉक के डॉ. आभा कुमारी के नर्सिंग होम ले जाया गया। यह नर्सिंग होम निरंजन मेडिकल हॉल परिसर में चलता है, इसके मालिक का नाम निरंजन शाह है जिनकी हाल में मौत हो चुकी है। अब अस्पताल कौन चला रहा है, इसकी जानकारी स्पष्ट नहीं है। स्वास्थ्य विभाग की टीम का कहना है कि उन्हें प्रसूता की ननद रानी देवी ने बताया कि उनकी भाभी की डिलीवरी करने के लिए अस्पताल ने 30 हजार रुपये जमा करवा लिए। उसी रात बेटा पैदा हुआ लेकिन उसकी हालत नाजुक होने पर डॉक्टर ने हायर सेंटर रेफर कर दिया, जहां पहुंचते ही उसे मृत घोषित कर दिया गया।
मेडिकल टीम का कहना है कि जब वे विशेष जांच अभियान के तहत इस अस्पताल में जांच करने पहुंचे तो वहां रानी देवी मिलीं और उन्होंने पूरी घटना बतायी। तब मेडिकल टीम ने अस्पताल संचालक को फोन लगाया जो बंद मिला। फिर मेडिकल टीम ने पुलिस की मदद लेकर पीछे के दरवाजे से नर्सिंग होम में प्रवेश किया। जहां उन्हें दो कमरों में बड़ी मात्रा में एक्सपायरी दवाएं मिलीं और तीन अन्य गर्भवती एडमिट पाई गईं जिन्हें एंबुलेंस से सरकारी अस्पताल भिजवाया गया। इसके बाद मजिस्ट्रेट सह प्रखंड कल्याण पदाधिकारी गौतम कुमार की मौजूदगी में नर्सिंग होम के अंदर बने चार कमरों को 11 फरवरी को सील कर दिया गया।
इस तरह मेडिकल टीम का कहना है कि 11 फरवरी को हम अमरपुर ब्लॉक में विशेष अभियान के तहत जांच करने गए तो ये केस जानकारी में आया। जबकि तथ्य बता रहे हैं कि नौ फरवरी को नवजात की मौत हो जाने के बाद जिला प्रशासन ने संज्ञान लेते हुए इस नर्सिंग होम को सील किया व अमरपुर ब्लॉक में संचालित कई अन्य नर्सिंग होम व अल्ट्रासाउंड सेंटरों की जांच की गई।
जांच टीम के सदस्य व सदर अस्पताल के चिकित्सा प्रभारी डॉ. शैलेन्द्र कुमार ने बताया कि इस नर्सिंग होम का लाइसेंस, नर्सिंग होम में तैनात डॉक्टरों के सर्टिफिकेट की जांच के बाद रिपोर्ट जिला में भेजी जाएगी, फिर इस मामले में ऐक्शन होगा। उस आशा वर्कर के ऊपर भी ऐक्शन लेने की बात कही गई है, जिसके जरिए प्रसूता को इस अवैध नर्सिंग होम में एडमिट कराया गया था।
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गायक उदित नारायण पर पहली पत्नी का बड़ा आरोप: ‘बिना इजाजत गर्भाशय निकलवा दिया, अब सच सामने आया!’
- गायक उदित नारायण की पहली पत्नी रंजना नारायण ने लगाया बड़ा आरोप।
- बिहार के सुपौल की रहने वाली रंजना नारायण की 1984 में हुई थी शादी।
- 1996 में दिल्ली बुलाकर बिना बताए गर्भाशय निकलवाने का आरोप।
सुपौल | मोहम्मद अख्तरुल
बॉलीवुड के दिग्गज गायक उदित नारायण के ऊपर उनकी पहली पत्नी रंजना नारायण ने गंभीर आरोप लगाकर केस दर्ज कराने की मांग की है। उनका आरोप लगाया है कि पति उदित नारायण ने बिना उन्हें बताए या सहमति लिए उनके शरीर से बच्चेदानी निकलवा दी थी। इस बात की जानकारी उन्हें कुछ महीने पहले कराए इलाज के दौरान पता लगी। इस धोखे के खिलाफ रंजना नारायण बिहार के सुपौल जिले के महिला थाने में पहुंचीं और शिकायत दर्ज करायी है।
11 फरवरी को दिए आवेदन में रंजना नारायण ने अपने पति उदित नारायण के अलावा उनकी दूसरी पत्नी, पिता व देवर पर कई गंभीर आरोप लगाए हैं। जिसमें मुख्य आरोप शादी के बाद धोखा देने, चिकित्सकीय प्रक्रिया के नाम पर कई साल तक मानसिक और सामाजिक प्रताड़ना देना है।
शिकायतकर्ता रंजना नारायण झा, सुपौल जिले के वीरपुर ब्लॉक की रहने वाली हैं। उन्होंने बताया कि उनकी शादी 7 दिसंबर 1984 को हिंदू रीति-रिवाज से गायक उदित नारायण से हुई थी। शादी के एक साल बाद 1985 में उनके पति प्लेबैक सिंगिंग में करियर बनाने के लिए मुंबई चले गए, जहां उन्होंने दीपा नाम की महिला से शादी कर ली। इस बात की जानकारी रंजना नारायण को खबरों के जरिए पता लगी थी।
उनका आरोप है कि जब उन्होंने इस बारे में पति उदित नारायण से सवाल किया तो उन्हें लगातार गुमराह किया गया। उनका आरोप है कि साल 1996 में इलाज के नाम पर उन्हें दिल्ली ले जाया गया, जहां बिना उनकी जानकारी और सहमति के उनका गर्भाशय निकलवा दिया गया। इस मामले में उन्होंने पति उदित नारायण झा, उनके भाई संजय कुमार झा व ललित नारायण झा पर साजिश करने का आरोप लगाया है। उनका दावा है कि इस ऑपरेशन की सच्चाई उन्हें पिछले साल कराए इलाज के दौरान पता लगी।
शिकायतकर्ता रंजना नारायण का यह भी कहना है कि 2006 में वे पति से मिलने मुंबई गईं तो पति उदित नारायण और दूसरी पत्नी दीपा नारायण ने उन्हें घर के अंदर नहीं आने दिया।
महिला थानाध्यक्ष अंजू तिवारी ने बताया कि आवेदन प्राप्त कर लिया गया है और मामले की जांच शुरू कर दी गई है। बता दें कि फिलहाल इस पूरे हाईप्रोफाइल विवाद पर उदित नारायण या उनके परिवार की ओर से कोई आधिकारिक बयान या प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
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पटना NEET छात्रा हत्याकांड: न्याय की पुकार में निकली यात्रा ने 6 जिलों को जोड़ा, सड़कों पर गूंजा- ‘इंसाफ चाहिए’
- नीट आकांक्षी छात्रा हत्याकांड को लेकर निकली न्याय यात्रा।
- जहानाबाद, नालंदा, नवादा, गया और अरवल से होते हुए पटना पहुंची।
- छात्रा की मौत के मामले में जल्द से जल्द न्याय दिलाने की मांग।
पटना | प्रीति कुमारी
पटना के हॉस्टल में नीट छात्रा की रेप व हत्याकांड के मामले में मृतिका को न्याय दिलाने की मांग लेकर निकाली गई ‘बेटी बचाओ न्याय यात्रा’ का पांच जिलों की यात्रा के बाद पटना में समापन हो गया।
इस यात्रा की शुरूआत 4 फरवरी को जहानाबाद से हुई थी, जहां की रहने वाली नाबालिग छात्रा ने डॉक्टर बनने का सपना देखा था। मेडिकल की पढ़ाई की प्रवेश परीक्षा NEET में अच्छी रैंकिंग पाने के लक्ष्य से वे पटना के निजी हॉस्टल मेें रहकर तैयारी कर रही थी। यह उसका नीट परीक्षा का दूसरा अटेम्प्ट होता, पिछले साल भी उस प्रतिभाशाली छात्रा ने नीट क्लियर कर लिया था लेकिन और बेहतर रैकिंग के लिए उसने एक और साल तैयारी करने का सोचा था। पर वो लक्ष्य हासिल करने से पहले ही वह बीती 11 जनवरी को ऐसी परिस्थितियों में दुनिया छोड़ गई, जो अभी तक गुत्थी बनी हुई है। मौत से पहले छह दिन वह कोमा में थी।

पटना में कांग्रेस ने भी इस मुद्दे पर प्रदर्शन किया था, धीरे-धीरे यह राजनीतिक मुद्दा भी बनता चला गया। (फाइल फोटो)
छात्रा की मौत के कारणों को लेकर परिवार को संदेह हुआ क्योंकि पुलिस इसे सुसाइड बता रही थी जबकि लड़की की शरीर की चोटें और एक डॉक्टर के दिए संकेत ने उन्हें आगाह किया कि उनकी बेटी के साथ कुछ गलत हुआ था।
इस पूरे मामले पर लड़की का परिवार साहस के साथ न्याय दिलाने के लिए जुटा रहा और धीरे-धीरे सामाजिक सहयोग बढ़ने से पुलिस पर दवाब बना। पोस्टमार्टम व फॉरेंसिक रिपोर्ट ने स्पष्ट कर दिया कि पुलिस की थ्योरी गलत है, लड़की के साथ रेप के बाद उसका मर्डर हुआ है।
रिपोर्ट आने के बाद फजीहत होने पर पटना पुलिस ने SIT बनाकर जांच शुरू कराई, कुछ पुलिसकर्मियों को सस्पेंड किया। फिर 31 जनवरी को राज्य सरकार ने घोषणा की कि इस मामले को सीबीआई को सौंपा जाएगा पर अभी तक इस केंद्रीय जांच एजेंसी ने केस को अपने हाथोें में नहीं लिया है।

तीन फरवरी को मीडिया के सामने पप्पू यादव ने नीट मामले में कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी के सक्रिय होने की बात कही थी, जो उनकी गिरफ्तारी का मुख्य कारण माना जा रहा है। (फाइल फोटो)
नीट आकांक्षी छात्रा की लड़ाई से पूर्णिया सांसद पप्पू यादव भी जुड़ गए और उन्होंने संसद में तक यह केस उठाया। पर इस बीच 6 फरवरी को सांसद की 31 साल पुराने एक केस में नाटकीय ढंग से गिरफ्तारी कर ली गई।

जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन में इस हत्याकांड को ‘बिहार की निर्भया’ कहा गया। (फोटो – X/@pappuyadavjapl)
फिर भी नीट छात्रा के न्याय की लड़ाई नहीं रुकी और 8 फरवरी को दिल्ली के जंतर-मंतर में एक बड़ा प्रदर्शन किया गया, जिसमें नीट छात्रा के माता-पिता व आम बिहारी बड़ी संख्या में मौजूद थे। और फिर अब 10 फरवरी को इसी मामले में आइसा व ऐपवा संगठनों की महिला कार्यकर्ताओं ने विधानसभा घेरने का प्रयास किया।
मौके पर मौजूद पुलिस ने उन्हें डाकबंगला चौराहे पर रोक दिया। यहां प्रदर्शन कर रही महिलाओं ने सरकार के खिलाफ खूब नारेबाजी की। यह यात्रा जहानाबाद से शुरू होकर नालंदा, नवादा, गया और अरवल से होते हुए पटना पहुंची थी। यहां प्रदर्शनकारियों ने कहा कि नीट एस्पायरेंट स्टूडेंट को न्याय जल्द से जल्द मिलना चाहिए वरना वे प्रदर्शन और तेज कर देंगे।
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