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रिपोर्टर की डायरी

बिहार में किसान-मजदूर संगठनों ने सड़क पर उतरकर केंद्र सरकार की नीतियों का किया जमकर विरोध

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देशव्यापी आम हड़ताल का आयोजन बिहार समेत पूरे देश में किया गया।
देशव्यापी आम हड़ताल का आयोजन बिहार समेत पूरे देश में किया गया।
  • मजदूर व किसान विरोधी नीतियों के खिलाफ भारत बंद।
  • अखिल भारतीय आम हड़ताल में मजदूर व किसान जुटे।
  • बिहार में भाकपा(माले) के नेतृत्व में किया जोरदार प्रदर्शन।

पटना |

हाल में अमेरिका के साथ व्यापार समझौते के बाद कृषि क्षेत्र को लेकर उठ रही आशंकाओं को लेकर, नए श्रम कानूनों के विरोध में और मनरेगा कानून खत्म किए जाने के खिलाफ 12 फरवरी को भारत बंद रहा। किसान संगठनों और 10 केंद्रीय ट्रेड यूनियनों की ओर से राष्ट्रव्यापी आम हड़ताल और ‘भारत बंद’ का आह्वान किया गया, जिसने सरकार की इन नीतियों पर अपना एकजुट विरोध जाहिर किया।

इस बंद को आम आदमी पार्टी (AAP) समेत कई विपक्षी दलों ने भी अपना समर्थन दिया। बिहार में भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी-लेनिनवादी) यानी भाकपा माले ने इस प्रदर्शन का नेतृत्व किया।

बिहार के सभी जिलों में हुए विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे मजदूर नेताओं ने केंद्र सरकार पर जमकर हमला बोला। उन्होंने कहा कि नया लेबर कानून देश के श्रमिकों को गुलाम बनाने वाला है। रोहतास में प्रदर्शनकारियों का नेतृत्व कर रहे भाकपा माले के जिला सचिव नवीन कुमार ने कहा कि सरकार द्वारा लाए गए लेबर कोड मजदूरों के अधिकारों पर सीधा हमला है।

बक्सर में प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे भाकपा माले के जिला सचिव नवीन कुमार ने कहा कि सरकार की नीतियां मजदूरों और किसानों के हित में नहीं बल्कि पूंजीपतियों के पक्ष में हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर सरकार ने प्रदर्शनकारियों की मांगों पर विचार नहीं किया तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।

बांका में भाकपा (माले) के जिला संयोजक रामचंद्र दास ने बताया कि उनके जिले में इस हड़ताल में संगठित और असंगठित क्षेत्र के मजदूरों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। खासकर निर्माण क्षेत्र के मजदूरों की भागीदारी रही।

मुंगेर में ट्रेड यूनियन से जुड़े पंजाब नेशनल बैंक, बैंक ऑफ बड़ौदा और यूनियन बैंक के कर्मचारी हड़ताल में शामिल रहे। प्रदर्शन को संबोधित करते हुए ऑल इंडिया किसान खेत मजदूर संगठन के बिहार राज्य सचिव कृष्णदेव शाह ने कहा कि हाल ही में भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को अंतिम रूप दिया गया है, जो किसान एवं आम जनता के हितों के प्रतिकूल है।

पश्चिमी चंपारण जिले में आंदोलनकारी अपनी मांगों की तख्तियां हाथों में लेकर नेशनल हाईवे पर मानव श्रृंखला बनाकर हड़ताल के समर्थन में नारे लगाते दिखे।

बोलते पन्ने के लिए हमारी संवाददाता बक्सर से अमीषा कुमारी, रोहतास से अविनाश श्रीवास्तव, बांका से दीपक कुमार, मुंगेर से प्रशांत सिंह, पश्चिमी चंपारण से मनोज कुमार के इनपुट पर आधारित रिपोर्ट। 

 

बोलते पन्ने.. एक कोशिश है क्लिष्ट सूचनाओं से जनहित की जानकारियां निकालकर हिन्दी के दर्शकों की आवाज बनने का। सरकारी कागजों के गुलाबी मौसम से लेकर जमीन की काली हकीकत की बात भी होगी ग्राउंड रिपोर्टिंग के जरिए। साथ ही, बोलते पन्ने जरिए बनेगा .. आपकी उन भावनाओं को आवाज देने का, जो अक्सर डायरी के पन्नों में दबी रह जाती हैं।

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