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नेपाल आम चुनाव : Gen Z आंदोलन के नेता बालेन शाह के नए पीएम बनने का रास्ता साफ

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नई दिल्ली | नेपाल की राजनीति में एक पीढ़ीगत बदलाव साफ नजर आ रहा है। मतदाताओं ने लंबे समय से हावी रहे पुराने नेतृत्व को खारिज कर दिया और तीन साल पुरानी पार्टी राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (RSP) को भारी समर्थन दिया। इस फैसले ने RSP के नेता बालेन शाह को प्रधानमंत्री बनने का रास्ता साफ कर दिया है जो पिछले साल हुए Gen-Z आंदोलन के प्रमुख नेतृत्वकर्ता थे। 
35 वर्षीय बालेन्द्र ‘बालेन’ शाह एक रैपर रह चुके हैं और काठमांडू के पूर्व मेयर हैं। उन्होंने झापा-5 सीट पर अपनी UML प्रतिद्वंद्वी और पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली पर अच्छी बढ़त बना ली है। जबकि इस सीट से ओली छह बार के सांसद रह चुके हैं। 
नेपाल चुनाव आयोग ने अभी तक 31 सीटों के परिणाम घोषित किए हैं। इनमें से 23 सीट पर राष्‍ट्रीय स्‍वतंत्र पार्टी, 5 पर नेपाली कांग्रेस, 2 पर नेपाली कम्‍युनिस्‍ट पार्टी और 1 पर सीपीएन-यूएमएल ने जीत दर्ज की है। बालेन शाह की राष्‍ट्रीय स्‍वतंत्र पार्टी इन चुनाव में बड़ी जीत दर्ज करती हुई नजर आ रही हैं जो 93 सीटों पर बढ़त बनाए हुए हैं।
यह नतीजा भारत में भी बारीकी से देखा जा रहा है, जहां नेपाल की राजनीतिक दिशा, क्षेत्रीय विवाद और क्षेत्र में चीन के बढ़ते प्रभाव को लेकर चिंताएं हैं।
5 मार्च को हुए आम चुनाव में कुल 122 राजनीतिक दल और स्वतंत्र उम्मीदवारों ने हिस्सा लिया। जे़न जी आंदोलन के बाद हो रहे आम चुनाव में आठ लाख नए वोटर शामिल हुए हैं।
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आज के अखबार

अमेरिकी मीडिया का दावा- ‘ईरान को खुफिया मदद दे रहा रूस’

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US-Isreal-Iran War (Representational Image)
  • दावा है कि रूसी खुफिया मदद से ईरान अमेरिकी ठिकानों को निशाना बना पा रहा है।

नई दिल्ली| अमेरिकी मीडिया ने 7 मार्च को दावा किया है कि रूस ईरान को ऐसी खुफिया जानकारी उपलब्ध करवा रहा है, जिसके जरिए वह पश्चिम एशिया में अमेरिकी सैन्य ठिकानों, अमेरिकी लड़ाकू विमानों व अन्य अमेरिकी संपत्तियों पर हमला कर पा रहा है। रूसी मीडिया ने लिखा है कि अमेरिकी मीडिया के इस दावे पर रूस सरकार ने सीधे कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है।

लेकिन रूसी राष्ट्रपति पुतिन के प्रवक्ता दिमित्री पेसकोव ने 5 मार्च को बयान दिया था कि ईरान ने उससे कोई सैन्य मदद नहीं मांगी है।

दावा- ‘हमले से ईरानी क्षमता घटी इसलिए मदद मांगी’

अमेरिकी अखबार वॉशिंगटन पोस्ट व अमेरिकी समाचार एजेंसी एसोसिएट प्रेस (AP) ने अपनी रिपोर्ट में ऐसा दावा किया है।  दोनों मीडिया संस्थानों की रिपोर्ट में कहा गया है कि पिछले हफ्ते अमेरिका और इजराइल के ईरान पर हुए  हमलों के बाद ईरानी सेना की अमेरिकी ठिकानों का पता लगाने की क्षमता कमजोर हो गई है। इसके बाद ईरान इसका पता लगाने के लिए रूस की मदद ले रहा है।

‘रूस की खुफिया जानकारी से हमले कर पा रहा’

वॉशिंगटन पोस्ट ने तीन अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से कहा है कि रूस ईरान को ऐसी टारगेटिंग इंटेलिजेंस दे रहा है, जिससे वह अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बना सके।

एसोसिएट प्रेस की रिपोर्ट में अमेरिकी खुफिया विभाग के दो अधिकारियों के हवाले से यही दावा किया गया है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि पश्चिम एशिया क्षेत्र में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों के अलावा, अमेरिकी हवाई जहाज व अन्य संपत्तियों पर भी ईरान इसलिए हमला कर पा रहा है क्योंकि उनकी लोकेशन पता करने में रूस मदद कर रहा है। 

व्हाइट हाउस की प्रतिक्रिया जानिए

एपी ने अपनी रिपोर्ट में लिखा है कि अमेरिकी राष्ट्रपति आवास ने इन दावों को कमतर आंका है। व्हाइट हाउस की प्रेस सेक्रेटरी कैरोलाइन लेविट ने शुक्रवार (6 march) को इन रिपोर्टों पर कहा, “इससे साफ तौर पर ईरान में चल रहे हमारे सैन्य अभियानों पर कोई असर नहीं पड़ेगा क्योंकि हम उन्हें पूरी तरह तबाह कर रहे हैं।”

साथ ही, व्हाइट हाउस प्रेस सेक्रेटरी लेविट ने पत्रकारों को यह बताने से इनकार कर दिया कि क्या राष्ट्रपति ट्रंप ने रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से कथित खुफिया जानकारी साझा करने के बारे में बात की या नहीं? उन्होंने कहा कि वे चाहती हैं कि राष्ट्रपति ट्रंप खुद ही इस पर बोलें। 

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अमेरिका-इजरायल-ईरान युद्ध पर श्रीलंका के राष्ट्रपति का बयान क्यों चर्चा में है?

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श्रीलंका के राष्ट्रपति अनुरा कुमारा दिसानायके (Photo Credit - X/@anuradisanayake)

नई दिल्ली| श्रीलंका के राष्ट्रपति अनुरा कुमारा दिसानायके ने कहा है कि मध्य पूर्व में जारी संघर्ष के बीच उनका देश गुटनिरपेक्ष नीति पर कायम रहेगा और सभी पक्षों से शांति की दिशा में ठोस क़दम उठाने की अपील की है।

जिस समय भारत समेत दुनिया के कई बड़े देश खाड़ी में चल रहे अमेरिका-इजरायल-ईरान युद्ध को लेकर कोई स्पष्ट रुख पेश नहीं कर रहे हैं, श्रीलंका ने वैश्विक शांति की स्पष्ट शब्दों में पैरौकारी की है। श्रीलंकाई राष्ट्रपति के इस रूख की तारीफ सोशल मीडिया पर हो रही है।

एक्स पर लिखे एक संदेश में राष्ट्रपति दिसानायके ने कहा,

“युद्धों में किसी भी नागरिक की मौत नहीं होनी चाहिए। हर इंसान का जीवन हमारे अपने जीवन जितना ही क़ीमती है। दुनिया को इस समय सबसे ज़्यादा शांति की ज़रूरत है, क्योंकि वैश्विक आर्थिक संकट का ख़तरा बढ़ रहा है और कई देश गंभीर चुनौतियों का सामना कर रहे हैं।”

गौरतलब है कि श्रीलंकाई राष्ट्रपति का बयान इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि 4 मार्च को अमेरिका ने श्रीलंका के समुद्री तट के पास एक ईरानी युद्धपोत पर हमला करके उसे डुबा दिया था। श्रीलंका ने बिना हिचक इस ईरानी युद्धपोत की मदद की गुहार पर बचाव अभियान चलाकर लोगों को बचाया।

भारत से लौट रहे ईरानी युद्धपोत में 180 लोग सवार थे, जिसमें से 140 लोग लापता हैं। श्रीलंकाई रक्षा मंत्रालय के मुताबिक, अब तक 80 लोगों के शव मिल पाए हैं।

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रूसी तेल खरीदने के लिए भारत को मिली 30 दिन की ‘छूट’, जानिए छूट के पीछे ट्रंप का मकसद

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दक्षिण अफ्रीका में हो रहे संयुक्त नौसेना अभ्यास के दौरान रूस का जहाज ( credit - X/Russian Embassy in South Africa)
रूसी जहाज का सांकेतिक फोटो।
  • अमेरिकी वित्त विभाग ने कहा है- 1 महीने की छूट से रूस को लाभ नहीं होगा पर ईरान पर दवाब बढ़ेगा।

नई दिल्ली | अमेरिका ने 6 मार्च को भारत को रूस से तेल खरीदने के लिए 30 दिन की अस्थायी छूट दी है। यह उन रूसी तेल जहाजों पर लागू है जो पहले से समुद्र में फंसे हैं।

अमेरिका का कहना है कि भारत को दी गई इस अस्थायी छूट के जरिए रुस को बहुत फायदा नहीं होगा लेकिन ईरान पर दवाब बढ़ेगा जो वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को बंधक बनाने की कोशिश कर रहा है।

अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने ट्वीट किया है कि

”यह छूट जानबूझकर बहुत कम अवधि के लिए दी गई है, इसलिए इससे रूसी सरकार को कोई बड़ा वित्तीय फायदा नहीं होगा, क्योंकि यह केवल उन तेल सौदों की अनुमति देता है जो पहले से समुद्र में फंसे हुए तेल से जुड़े हैं।”

गौरतलब है कि रूसी तेल की खरीद को लेकर ट्रंप भारत से नाराज थे और पिछले साल भारत पर 25% पैनल्टी लगायी थी।

इस साल की शुरूआत में अमेरिका ने यह कहते हुए पैनाल्टी खत्म कर दी थी कि भारत ने रूस तेल खरीद बंद कर दी है। अब अमेरिका ने रूसी तेल खरीद में भारत को ‘छूट’ का ऐलान करके चौंका दिया है।

अमेरिकी वित्त मंत्री ने ट्वीट करके यह भी   कहा है कि ”भारत अमेरिका का एक महत्वपूर्ण साझेदार है और हमें पूरी उम्मीद है कि भारत अमेरिकी तेल की खरीद बढ़ाएगा।”

गौरतलब है कि अमेरिका-इजरायल-ईरान युद्ध के चलते वैश्विक व्यापार का महत्वपूर्ण रास्ता ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ प्रभावित है, जहां से 20% वैश्विक तेल गुजरता है।

 

 

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