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दुनिया गोल

ईरान के साथ युद्ध पर ट्रंप बोले- ‘राष्ट्रपति पुतिन मददगार बनना चाहते हैं’

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By Kremlin.ru, CC BY 4.0, Link
अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप की रूसी राष्ट्रपति के साथ संबंध की रणनीति लगातार बदलती रही है। (तस्वीर - विकिमीडिया)
  • इस साल में पहली बार अमेरिकी व रूसी राष्ट्रपति के बीच फोन वार्ता हुई।

नई दिल्ली |  रूसी राष्ट्रपति पुतिन, अमेरिका-इजरायल-ईरान युद्ध को खत्म करने में भूमिका निभाना चाहते हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार (9 march) को ऐसा दावा किया है।

ट्रंप ने कहा कि उनकी रूसी राष्ट्रपति पुतिन के साथ एक घंटे लंबी फोन वार्ता हुई। इसमें पुतिन ने उन्हें ऐसा ऑफर दिया।से कहा कि वे ईरान युद्ध को खत्म करने में मदद करना चाहते हैं।

ट्रंप ने बताया कि इस फोन वार्ता में यूक्रेन में चल रहे युद्ध पर भी चर्चा हुई।

ट्रंप ने पुतिन को क्या जवाब दिया?

समाचार एजेंसी रॉयर्टर्स के मुताबिक, ट्रंप ने पत्रकारों को बताया कि उन्होेंने पुतिन के ‘मदद’ के ऑफर के जवाब में उनसे कहा कि “अगर आप यूक्रेन का युद्ध ख़त्म कराने में मदद करें तो वह ज़्यादा मददगार होगा।”

बोले- ‘युद्ध खत्म होता नहीं दिख रहा’

साथ ही ट्रंप ने पत्रकारों से यह भी कहा कि “यूक्रेन यूक्रेन का युद्ध ऐसा संघर्ष है जो ख़त्म होता नहीं दिख रहा है। रूसी राष्ट्रपति पुतिन और यूक्रेनी राष्ट्रपति ज़ेलेंस्की के बीच गहरी दुश्मनी है और वे किसी समझौते पर नहीं पहुंच पा रहे हैं।”

हालांकि उन्होंने इस मुद्दे पर भी पुतिन के साथ हुई फोन वार्ता को सकारात्मक माना।

पुतिन से वार्ता के मायने समझिए

  • गौरतलब है कि इस साल पुतिन व ट्रंप के बीच यह पहली फोन वार्ता है और यह ऐसे समय में हुई है जब रूसी तेल की खरीद को लेकर अमेरिका ने रूख नरम किया है।
  • दूसरी ओर, हाल में अमेरिकी मीडिया ने रिपोर्ट किया था कि ईरान को रूस खुफिया जानकारी मुहैया करा रहा है जिसके जरिए वह पश्चिम एशिया में अमेरिकी ठिकानों पर हमले कर पा रहा है। इन दावों को लेकर ट्रंप की ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है।
  • यह भी ध्यान देने योग्य है कि जिस दिन ट्रंप ने पुतिन से फोन पर बात की, उसी दिन राष्ट्रपति पुतिन ने ईरान के नए सुप्रीम लीडर बनाए गए मोजतबा ख़ामेनेई को बधाई दी।

रूसी राष्ट्रपति ने कहा था, “तेहरान के लिए रूस अपना अटूट समर्थन और ईरानी दोस्तों के साथ एकजुटता को दोहराता है। वादा करते हैं कि हम एक भरोसेमंद साथी बने रहेंगे।”

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अमेरिका-इजरायल के हमले में मारे गए ईरानी सुप्रीम लीडर के बेटे बने नए सर्वोच्च नेता

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  • दिवंगत सुप्रीम लीडर आयतुल्लाह अली ख़ामेनेई के दूसरे बेटे मोजतबा ख़ामेनेई को मिली जिम्मेदारी।

नई दिल्ली | अमेरिका-इजरायल के हमले में ईरानी सुप्रीम लीडर आयतुल्लाह अली ख़ामेनेई की हत्या हो जाने के एक सप्ताह बाद नए सुप्रीम लीडर चुन लिए गए हैं।

दिवंगत ईरानी सुप्रीम लीडर आयतुल्लाह अली ख़ामेनेई के दूसरे बेटे मोजतबा ख़ामेनेई को यह जिम्मेदारी दी गई है।

यह फैसला ऐसे समय में आया है जब युद्ध अपने 10वें दिन में प्रवेश कर चुका है और मध्य पूर्व में नए मिसाइल व ड्रोन हमलों की गूंज सुनाई दे रही है।

बीते रविवार (8 march) को ईरान के एक विशेष धार्मिक निकाय के 88 सदस्यों ने सर्वोच्च नेता का चयन किया, फिर सरकारी मीडिया की ओर से इसकी घोषणा की गई। 

इस घोषणा के बाद सांसदों से लेकर विदेश मंत्रालय तक ईरान के विभिन्न संस्थानों और राजनेताओं ने बयान जारी करके नए सुप्रीम लीडर के प्रति निष्ठा जताई, जिसे वहां रहवर नाम से पुकारा जाता है।

रक्षा परिषद के बयान में कहा गया- “हम अंतिम खून की बूंद तक कमांडर-इन-चीफ के आज्ञाकारी रहेंगे।”

ट्रंप बोले- हमारी राय बिना सुप्रीम नेता चुना तो जिंदा नहीं रहेगा

रविवार को ईरान की ओर से नए सुप्रीम लीडर की घोषणा से कुछ घंटे पहले अमेरिकी समाचार मीडिया ABC News को दिए इंटरव्यू में डोनाल्‍ड ट्रंप ने कहा था- “अगर ईरान उनकी मंजूरी नहीं लेता है तो ईरान का अगला सुप्रीम लीडर लंबे समय तक नहीं टिकेगा।”

फिर ईरान की ओर से घोषणा होने के बाद इजरायली मीडिया “टाइम्स ऑफ इजरायल” को दिए फोन इंटरव्यू में ट्रंप ने स्पष्ट शब्दों में कुछ नहीं कहा, वे बस इतना बोले कि “हम देखेंगे कि क्या होता है।”

जंग रोकने का फैसला इजरायल की सहमति से लेंगे

टाइम्स ऑफ इजरायल के इसी इंटरव्यू में ट्रंप ने कहा कि युद्ध समाप्त करने का फैसला लेने में वे इजरायल के इनपुट को शामिल करेंगे। उन्होंने कहा कि यह फैसला सिर्फ उनका नहीं होगा बल्कि परस्पर होगा। 

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Crude Oil Price: चार साल में सबसे महंगा हुआ कच्चा तेल, ट्रंप बोले- ‘सुरक्षा के लिए यह छोटी सी कीमत’

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नई दिल्ली|  ईरान पर अमेरिका और इसराइल के हमले और ईरान के पश्चिम एशिया में किए जा रहे जवाबी हमले के चलते कच्चे तेल की कीमतों मेें भारी उछाल दर्ज किया गया है।

अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में क्रूड की क़ीमत 110 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गई हैं। इससे पहले साल 2022 में रूस के यूक्रेन पर हमला करने के बाद कच्चे तेल का दाम सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंचकर 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर चला गया था। इसको लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि “यह ग्लोबल सिक्योरिटी के लिए चुकाने लायक एक ‘छोटी क़ीमत’ है।”

हालिया उछाल की मुख्य वजह वैश्विक तेल आवाजाही के प्रमुख रास्ते स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ का प्रभावित होना है। रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, खाड़ी में शिपिंग संकट और गहरा गया है क्योंकि टैंकर फंसे हुए हैं और समुद्री यातायात बुरी तरह प्रभावित हुआ है।

ब्रेंट क्रूड (Brent Crude) की क़ीमतों में 18 फ़ीसदी की बढ़ोतरी हुई और यह 108.68 डॉलर प्रति बैरल हो गया है। वहीं, अमेरिकी तेल WTI क़रीब 20 फ़ीसदी बढ़कर 110 डॉलर प्रति बैरल पहुंच गया।

उत्तरी सागर से निकलने वाले तेल को ब्रेंट क्रूड कहा जाता है।  अमेरिकी क्षेत्र से निकलने वाले प्रमुख कच्चे तेल को WTI कहा जाता है।

ट्रंप ने कच्चे तेल की कीमतों में आए ताजा उछाल को ट्रुथ सोशल पर लिखा,

“कम समय के लिए तेल की क़ीमतें बढ़ी हैं, जो ईरान के परमाणु ख़तरे के ख़त्म होते ही तेज़ी से नीचे आ जाएंगी। अमेरिका और दुनिया की सुरक्षा और शांति के लिए यह बहुत छोटी क़ीमत है। सिर्फ़ मूर्ख ही इससे अलग सोचेंगे।”

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नेपाल आम चुनाव : Gen Z आंदोलन के नेता बालेन शाह के नए पीएम बनने का रास्ता साफ

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बालेन शाह के रैप ने युवाओं को सरकार से सवाल पूछने को प्रेरित किया और वे जेन जी आंदोलन के दौरान प्रमुख नेतृत्वकर्ता बन गए थे।बालेन शाह के रैप ने युवाओं को सरकार से सवाल पूछने को प्रेरित किया और वे जेन जी आंदोलन के दौरान प्रमुख नेतृत्वकर्ता बन गए थे।
  • बालेन शाह ने पूर्व पीएम केपी शर्मा ओली को 49,614 वोटों से मात दी है।

नई दिल्ली | नेपाल के वोटरों ने लंबे समय तक हावी रही पुरानी राजनीतिक पार्टियों को खारिज कर दिया है। नेपाल में हुए आम चुनाव में सिर्फ तीन साल पुरानी पार्टी राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (RSP) भारी बहुमत के साथ सरकार बनाने जा रही है। इस जनादेश ने RSP के नेता बालेन शाह को प्रधानमंत्री बनने का रास्ता साफ कर दिया है जो पिछले साल हुए Gen-Z आंदोलन के प्रमुख नेतृत्वकर्ता थे।  

नेपाल चुनाव आयोग की वेबसाइट पर जारी ताजा आंकड़ों के मुताबिक, RSP ने अब तक 98 सीटें जीत ली हैं, जबकि 27 सीटों पर आगे चल रही है। यह पार्टी सिर्फ 4 साल पहले एक पत्रकार रहे रबि लामिछाने ने बनाई थी।

5 मार्च को हुए आम चुनाव में कुल 122 राजनीतिक दल और स्वतंत्र उम्मीदवारों ने हिस्सा लिया। जे़न जी आंदोलन के बाद हो रहे आम चुनाव में आठ लाख नए वोटर शामिल हुए हैं।

भारतीय पीएम नरेंद्र मोदी ने नेपाल की जनता को शांतिपूर्ण आम चुनावों के लिए बधाई दी है और कहा है कि भारत अपने पड़ोसी देश में बनने जा रही नई सरकार के साथ करीबी से मिलकर काम करेगा।

बालेन शाह (फोटो – एक्स)

बालेन ने पूर्व पीएम ओली को बड़े अंतर से हराया

नेपाल में पीएम बनने जा रहे 35 वर्षीय बालेन्द्र उर्फ ‘बालेन’ शाह की बात करें तो वे एक रैपर रह चुके हैं और काठमांडू के पूर्व मेयर हैं। ज़ेन जी आंदोलन के समय उनके रैप के जरिए युवाओं ने सरकार से खूब सवाल पूछे थे।
इस चुनाव में बालेन शाह की सीधी लड़ाई पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली से है। झापा-5 सीट पर बालेन शाह को 68,348 वोट मिले जबकि ओली को केवल 18,734 वोट प्राप्त हुए। इस तरह बालेन शाह ने पूर्व पीएम ओली को 49,614 वोटों से मात दी है। जबकि इस सीट से ओली छह बार के सांसद रह चुके हैं। 

नेपाली कांग्रेस कम सीटों पर सिमटी

नेपाली चुनाव आयोग के मुताबिक, नेपाल की सबसे पुरानी पार्टियों में से एक नेपाली कांग्रेस को सिर्फ 14 सीटों पर जीत मिली है और वह तीन सीटों पर आगे चल रही है। वर्तमान मतगणना में यह दूसरे नंबर की पार्टी बनने की ओर है, हालांकि दोनों दलों की सीटों में बहुत अंतर है।
यह नतीजा भारत में भी बारीकी से देखा जा रहा है, जहां नेपाल की राजनीतिक दिशा, क्षेत्रीय विवाद और क्षेत्र में चीन के बढ़ते प्रभाव को लेकर चिंताएं हैं।
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